India 6th Gen Fighter Programme में भारत की भागीदारी को लेकर एक रणनीतिक बदलाव सामने आया है। नई दिल्ली अब शुरुआती डिजाइन ओनरशिप की लड़ाई की जगह लंबी अवधि के औद्योगिक फायदों को प्राथमिकता दे रही है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग के प्रति India की परिपक्व सोच को दर्शाता है।
देखा जाए तो यह युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टील्थ डोमिनेंस और ऑटोनॉमस ड्रोन स्वार्म्स से परिभाषित हो रहा है। ऐसे में भारत की यह रणनीति काफी समझदारी भरी लगती है।
दो प्रमुख विकल्पों पर विचार
सूत्रों के अनुसार India यूरोप के प्रमुख अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एविएशन प्रोग्राम में शामिल होने के लिए बड़ा वित्तीय निवेश करने पर विचार कर रहा है। फिलहाल दो प्रमुख विकल्प वैश्विक ध्यान में हैं।
पहला है Global Combat Air Programme (GCAP), जिसका नेतृत्व United Kingdom, Italy और Japan कर रहे हैं। दूसरा है Future Combat Air System (FCAS), जिसे France, Germany और Spain चला रहे हैं।
अगर गौर करें तो भारत पारंपरिक joint-development रास्ते से दूर जा रहा है। ऐसे प्रोजेक्ट्स में अक्सर डिजाइन लीडरशिप और स्ट्रिक्ट वर्कशेयर कोटा को लेकर भारी विवाद होते रहे हैं।
60-70% ToT पर है मुख्य फोकस
समझने वाली बात यह है कि नई दिल्ली नौकरशाही देरी और कठोर बातचीत से बचना चाहती है। ये चीजें ऐतिहासिक रूप से बहुराष्ट्रीय रक्षा परियोजनाओं को रोकती रही हैं।
फ्रैक्शनल डिजाइन राइट्स के लिए लड़ने की बजाय, प्राथमिक उद्देश्य 60 से 70 प्रतिशत Transfer of Technology (ToT) हासिल करना है। यह व्यापक तकनीकी अधिग्रहण छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों को लक्षित करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि इसमें नेक्स्ट-जेनरेशन प्रोपल्शन इंटीग्रेशन, एडवांस्ड एवियोनिक्स सूट्स, कटिंग-एज सेंसर फ्यूजन, स्टील्थ मटेरियल्स और कॉम्प्रिहेंसिव मिशन कंप्यूटिंग सिस्टम शामिल होंगे।
AMCA प्रोजेक्ट को मिलेगा बूस्ट
यह महत्वपूर्ण ज्ञान हासिल करके, व्यापक रणनीतिक लक्ष्य भारत को चुने गए एयरक्राफ्ट प्रोग्राम की वैश्विक सप्लाई चेन में स्थायी रूप से एंकर करना है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भले ही प्राथमिक आर्किटेक्चरल डिजाइन में देश की भूमिका न्यूनतम हो, यह रणनीति गारंटी देती है कि फाइटर जेट के इंटरनल सबसिस्टम और एडवांस्ड कंपोनेंट्स की बड़ी मात्रा भारतीय भूमि पर निर्मित होगी।
यह दृष्टिकोण सीधे तौर पर भारत के चल रहे घरेलू प्रयासों को पूरा करता है, जैसे कि 5.5-generation Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के संपर्क में आने से स्थानीय विनिर्माण मानकों को तेजी से अपग्रेड किया जा सकेगा।
लंबी अवधि का औद्योगिक फायदा
अंततः यह ब्लूप्रिंट देश को पूरे प्लेटफॉर्म के लिए एक आवश्यक विनिर्माण और लाइफटाइम मेंटेनेंस हब में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है।
केवल Indian Air Force के लिए ही नहीं, बल्कि संस्थापक साझेदार देशों और भविष्य के वैश्विक निर्यात बाजारों के लिए भी हाई-टेक सिस्टम की विश्वसनीय डिलीवरी से भारत स्थायी औद्योगिक लाभ सुरक्षित करता है।
यह सप्लाई-चेन प्रभुत्व लाभदायक वित्तीय और तकनीकी रिटर्न की गारंटी देता है जो कई दशकों तक फैलेगा। यह प्रारंभिक प्रवेश लागत के मूल्य को आसानी से पार कर जाएगा।
PSU और प्राइवेट सेक्टर का तालमेल जरूरी
इस महत्वाकांक्षी सप्लाई-चेन विजन को साकार करने के लिए भारत के औद्योगिक आधार में निर्बाध तालमेल की आवश्यकता होगी।
यह स्थापित Public Sector Undertakings (PSUs) और देश के फुर्तीले, तेजी से विस्तार करते निजी रक्षा क्षेत्र के बीच भारी समन्वित साझेदारी को अनिवार्य बनाता है।
यह सहयोगात्मक ढांचा एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, प्रिसिजन इलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस्ड कंपोजिट्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में भारत के विशाल टैलेंट पूल पर आधारित होगा। उन्हें एक एकल रणनीतिक उद्देश्य के तहत एकजुट करेगा।
भविष्य की संभावनाएं
अगर सफलतापूर्वक निष्पादित किया गया, तो यह समावेशी औद्योगिक मॉडल सुनिश्चित करेगा कि वैश्विक असेंबली लाइनों से रोल ऑफ होने वाला हर छठी पीढ़ी का फाइटर भारतीय-निर्मित तकनीक से भारी रूप से संचालित है।
समय के साथ यह निरंतर उच्च-मूल्य विनिर्माण भारत की घरेलू एयरोस्पेस क्षमताओं को तेजी से बढ़ाएगा। हजारों उच्च कुशल नौकरियां पैदा होंगी और राष्ट्रीय तकनीकी परिदृश्य में एक शक्तिशाली मल्टीप्लायर प्रभाव उत्पन्न होगा।
राहत की बात यह है कि यह दृष्टिकोण भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण के शीर्ष खिलाड़ियों में स्थापित कर सकता है।
मुख्य बातें (Key Points):
- भारत GCAP या FCAS में से किसी एक में बड़ा निवेश करने पर विचार कर रहा है
- डिजाइन राइट्स की जगह 60-70% ToT पर मुख्य फोकस है
- यह रणनीति AMCA प्रोजेक्ट को भी बूस्ट देगी
- PSU और प्राइवेट सेक्टर के बीच तालमेल जरूरी है
- भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में स्थायी भूमिका चाहता है













