LPG Cylinder Booking करने वाले लोगों के लिए सरकार की तरफ से एक जरूरी अपडेट आई है। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सरकार ने साफ किया है कि भारत में LPG, PNG और CNG की सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार ने सप्लाई चेन मजबूत करने, जमाखोरी पर सख्ती और छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए हैं।
देखा जाए तो मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर एनर्जी सेक्टर पर देखने को मिला है। भारत में भी गैस और तेल की इंडस्ट्री पर प्रभाव पड़ा है। लेकिन सरकार ने लोगों को आश्वस्त किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
सरकार ने गलत रिपोर्ट्स को किया खारिज
पेट्रोलियम एंड प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कुछ रिपोर्ट्स को भी गलत बताया है। सरकार का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट्स जिनमें एलपीजी गैस सप्लाई को सामान्य होने में 4-5 साल की बात कही गई है, वह पूरी तरह से गलत है। ये दावे भ्रामक और घबराहट फैलाने वाले हैं।
सरकार के अनुसार, करीब 800 हजार मीट्रिक टन एलपीजी का आयात पहले से तय किया जा चुका है, जोकि भारत की ओर आ रहा है।
समझने वाली बात यह है कि सरकार ने पहले से ही इंतजाम कर लिए हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने के कदम
सरकार ने घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। 9 मार्च को जारी एलपीजी नियंत्रण आदेश के तहत रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, सप्लाई में कमी का असर गैस सिलेंडर की कीमतों पर नजर आया है। देशभर में घरेलू LPG सिलेंडर और कमर्शियल सिलेंडर महंगे हो गए हैं। इस बढ़ोतरी का असर आम घरों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर भी पड़ा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कीमतों में बढ़ोतरी अस्थायी है और जल्द ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या दोगुनी
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर परेशान न हों। डिस्ट्रीब्यूटर की संख्या 13,896 से बढ़कर 25,607 हो गई है। इससे देश की सप्लाई चेन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।
सरकार ने नागरिकों को सिर्फ आधिकारिक सोर्स और सरकारी जानकारी पर ही भरोसा करने के लिए कहा है। फेक न्यूज और अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है।
राज्यों को ज्यादा अधिकार
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एलपीजी सप्लाई की निगरानी करने और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के लिए ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। एलपीजी सप्लाई को लेकर सरकार ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग अब करीब 98% तक पहुंच गई है और DSC-आधारित डिलीवरी भी 93% हो गई है, जिससे ट्रांसपरेंसी बढ़ी है।
साथ ही घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है।
दिलचस्प बात यह है कि डिजिटलीकरण से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है।
कमर्शियल LPG में प्राथमिकता
सरकार के अनुसार, मौजूदा ग्लोबल हालातों के बावजूद घरेलू LPG, PNG और ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाली CNG की सप्लाई पूरी तरह जारी है। कमर्शियल LPG में अस्पताल, स्कूल और जरूरी इंडस्ट्रीज को पहले प्राथमिकता दी जा रही है।
साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो के छोटे सिलेंडर ज्यादा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार ने रिफाइनरी प्रोडक्शन बढ़ाने, बुकिंग के बीच अंतर बढ़ाने और केरोसिन व कोयले जैसे ऑप्शनल ईंधन की सप्लाई बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए हैं।
PNG को बढ़ावा
सरकार ने घरों को Piped Natural Gas (PNG) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि आयातित LPG पर निर्भरता कम की जा सके। ये उन इलाकों के लिए है, जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है।
PNG लगातार सप्लाई देता है और लंबे समय में सस्ता भी पड़ सकता है, लेकिन इसका विस्तार अभी धीमा है। 2026 की शुरुआत तक देश में करीब 1.6 करोड़ यानी सिर्फ 12-13% घरों में ही PNG कनेक्शन है, जो तय लक्ष्यों से काफी कम है।
अगर गौर करें तो PNG का विस्तार भारत के लिए एक बड़ा कदम होगा जो आयात पर निर्भरता कम करेगा।
5000-6000 करोड़ का निवेश
अब सरकार नेटवर्क विस्तार को तेज करने के लिए 5,000-6,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है, जिसमें पाइपलाइन लागत का करीब 50% तक कवर किया जा सकता है।
आपको बता दें कि फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले इस सप्लाई का करीब 90% हिस्सा Strait of Hormuz के जरिए आता था। लेकिन 24 मार्च तक खाड़ी देशों से आयात घटकर 55% रह गया, जो सप्लाई में रुकावट के साथ-साथ स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन की ओर इशारा करता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 800 हजार मीट्रिक टन LPG आयात राह में
- डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या दोगुनी हुई
- ऑनलाइन बुकिंग 98% तक पहुंची
- PNG विस्तार के लिए 5000-6000 करोड़ निवेश
- अस्पताल, स्कूल को प्राथमिकता













