Land For Job Scam में आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से कोई बड़ी राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रविवार 13 अप्रैल 2026 को सीबीआई की FIR और चार्जशीट रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई अब निचली अदालत में मेरिट के आधार पर होगी।
क्या है Land For Job Scam का पूरा मामला
यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव साल 2004 से 2009 तक केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी की नियुक्तियां बदले में जमीन लेकर की गईं। यानी जिन लोगों को नौकरी दी गई, उन्होंने या उनके परिवार वालों ने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों या करीबियों के नाम ट्रांसफर कर दी। सीबीआई ने इस पूरे मामले की जांच की और लालू यादव सहित कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ने दी सीमित राहत
हालांकि कोर्ट ने Land For Job Scam में FIR रद्द करने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन 77 साल के लालू प्रसाद यादव को एक प्रक्रियागत राहत जरूर दी। कोर्ट ने उन्हें ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को यह भी इजाजत दी कि वे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत पूर्व अनुमति से संबंधित अपने कानूनी तर्क ट्रायल के दौरान उचित स्तर पर उठा सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पहले किया था खारिज
गौरतलब है कि इससे पहले 24 मार्च 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लालू यादव की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट से भी राहत न मिलने के बाद लालू यादव के लिए कानूनी रास्ते और सीमित हो गए हैं और उन्हें ट्रायल कोर्ट में ही अपनी लड़ाई लड़नी होगी।
RJD के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा झटका
Land For Job Scam में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए राजनीतिक रूप से भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। लालू यादव पहले से ही चारा घोटाले में सजा काट चुके हैं और अब इस नए मामले में भी कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायपालिका की सख्ती बताया, जबकि RJD ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सुप्रीम कोर्ट ने Land For Job Scam में CBI FIR रद्द करने से किया इनकार
- लालू यादव को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट
- धारा 17A का तर्क ट्रायल के दौरान उठाने की दी अनुमित
- दिल्ली हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत













