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The News Air - Breaking News - JD Vance Islamabad Visit: F-16 की सुरक्षा में पहुंचे अमेरिकी उपराष्ट्रपति, क्या था डर?

JD Vance Islamabad Visit: F-16 की सुरक्षा में पहुंचे अमेरिकी उपराष्ट्रपति, क्या था डर?

1979 के बाद अमेरिका-ईरान की सबसे बड़ी आमने-सामने की बातचीत इस्लामाबाद में शुरू, ईरानी पक्ष ने कहा: नियत अच्छी है लेकिन भरोसा नहीं

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 11 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय
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JD Vance Islamabad Visit
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JD Vance Islamabad Visit: मध्य पूर्व में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच ईरान से शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के विमान को पाकिस्तान एयर फोर्स के पांच F-16 लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया। अमेरिकी वायुसेना के बोइंग C-32A विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस में एस्कॉर्ट करते हुए देखा गया, जिसके बाद यह इस्लामाबाद के पास नूर खान एयरबेस पर सफलतापूर्वक उतरा। यह बातचीत 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से वाशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक की सबसे हाईलेवल आमने-सामने की बैठक है।

‘F-16 एस्कॉर्ट क्यों लेनी पड़ी: क्या था खतरा?’

सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि आखिर अमेरिकी उपराष्ट्रपति को पाकिस्तानी F-16 लड़ाकू विमानों की सुरक्षा क्यों लेनी पड़ी। जेडी वेंस उस देश में जा रहे थे जो ईरान का पड़ोसी है और जहां ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ईरान द्वारा हाल ही में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट मार गिराए जाने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।

पाकिस्तानी एयरस्पेस में किसी भी खतरे को देखते हुए F-16 फाइटर जेट्स का एस्कॉर्ट एक सामान्य प्रोटोकॉल माना जा सकता है, लेकिन इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद दुनियाभर में चर्चा का बाजार गर्म हो गया कि क्या अमेरिकी पक्ष को किसी विशेष खतरे की आशंका थी।

‘कौन-कौन है अमेरिकी और ईरानी डेलीगेशन में?’

जेडी वेंस के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरड कुशनर भी शामिल हैं। ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची कर रहे हैं।

यह बेहद अहम है कि इतने उच्च स्तरीय नेता एक ही शहर में एक ही मकसद के लिए मौजूद हैं। इससे पहले 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच इस स्तर की सीधी बातचीत कभी नहीं हुई थी।

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‘ईरान ने कहा: नियत अच्छी है, लेकिन भरोसा नहीं’

शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच अविश्वास साफ दिखाई दे रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया ने गालिबाफ के हवाले से कहा है कि “हमारी नियत अच्छी है, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है।” गालिबाफ ने यह भी कहा कि “अमेरिकियों के साथ बातचीत करने का ईरान का अनुभव असफलता और टूटे हुए वादों वाला रहा है।”

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ईशाक डार ने दोनों पक्षों से रचनात्मक रूप से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने संघर्ष का स्थाई समाधान ढूंढने की दिशा में दोनों पक्षों को सुविधा प्रदान करने की पाकिस्तान की इच्छा को दोहराया।

‘क्या हैं दोनों पक्षों की मांगें?’

बातचीत से पहले दोनों पक्षों की मांगों में भारी मतभेद देखने को मिला। ट्रंप प्रशासन ने एक 15 सूत्रीय रूपरेखा (ड्राफ्ट) तैयार किया जिसमें ईरान से अपने संवर्धित यूरेनियम को सौंपने और अपनी सेना पर सीमाएं स्वीकार करने की मांग की गई।

इसके जवाब में ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय योजना भेजी जिसमें हरजाने की मांग की गई और अमेरिका से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तेहरान की संप्रभुता स्वीकार करने के लिए कहा गया। यानी ईरान ने साफ तौर पर कह दिया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कंट्रोल उसका है और यह बात अमेरिका को स्वीकार करनी होगी। ये मांगें इतनी अलग-अलग हैं कि किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं दिखता।

‘पाकिस्तान में ही शांति वार्ता क्यों?’

पाकिस्तान इस वार्ता का मेजबान इसलिए बना क्योंकि वह ईरान का पड़ोसी देश है और इन दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार का अमेरिका के साथ अच्छा रिश्ता है। शांति दूत बनने के लिए पाकिस्तान ने खुद आगे आकर मध्यस्थता की पेशकश की। बताया जा रहा है कि रविवार को भी यह बातचीत जारी रह सकती है। अगले दो दिनों में यह तय हो जाएगा कि यह युद्ध किस मोड़ की ओर बढ़ने वाला है।

‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तानी F-16 फाइटर जेट्स की सुरक्षा में इस्लामाबाद के नूर खान एयरबेस पर उतरे।
  • यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका-ईरान की सबसे बड़ी आमने-सामने की बातचीत है।
  • ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने कहा: “नियत अच्छी है, लेकिन भरोसा नहीं।”
  • दोनों पक्षों की मांगों में गहरा मतभेद: अमेरिका चाहता है यूरेनियम की सरेंडर, ईरान चाहता है हॉर्मुज पर अपनी संप्रभुता की मान्यता।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. JD Vance इस्लामाबाद में F-16 की सुरक्षा में क्यों पहुंचे?

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ईरान से तनाव को देखते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति के विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस में पांच F-16 फाइटर जेट्स ने एस्कॉर्ट किया। यह एक सुरक्षा प्रोटोकॉल था।

Q2. इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में क्या मांगें रखी गईं?

अमेरिका ने 15 सूत्रीय रूपरेखा रखी जिसमें ईरान से संवर्धित यूरेनियम सौंपने की मांग थी। ईरान ने 10 सूत्रीय योजना भेजी जिसमें हरजाने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर संप्रभुता की मांग शामिल थी।

Q3. पाकिस्तान में ही शांति वार्ता क्यों हो रही है?

पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी देश है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार का अमेरिका के साथ अच्छा रिश्ता है। पाकिस्तान ने खुद मध्यस्थता की पेशकश की और दोनों पक्षों को वार्ता के लिए तैयार किया।

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