NASA Artemis II Mission का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और 53 साल बाद एक बार फिर इंसान चांद की ओर लौटने जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टिमिस II मिशन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस मिशन को मानव अंतरिक्ष उड़ान के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। 32 मंजिला विशाल स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ उड़ान भरने को तैयार है और नासा के पास इसे लॉन्च करने के लिए अप्रैल के पहले 6 दिनों का समय है।
क्या है NASA Artemis II Mission: चांद की परिक्रमा करके लौटेंगे अंतरिक्ष यात्री
NASA Artemis II Mission के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर रवाना होंगे, लेकिन इस बार चांद पर कोई लैंडिंग नहीं होगी। लॉन्च के बाद यात्री पहले एक दिन पृथ्वी की कक्षा में बिताएंगे और फिर ओरियन कैप्सूल के जरिए सीधे चांद की ओर रवाना होंगे। चांद के करीब पहुंचकर उसकी परिक्रमा करने के बाद यू-टर्न लेकर वापस आ जाएंगे।
करीब 10 दिन बाद प्रशांत महासागर में लैंडिंग के साथ यह ऐतिहासिक मिशन पूरा हो जाएगा। यह मिशन दरअसल आने वाले आर्टिमिस III मिशन की तैयारी है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री असल में चांद की सतह पर उतरेंगे। आर्टिमिस II एक तरह से इंसानी अंतरिक्ष यात्रा की “ड्रेस रिहर्सल” है, जिसमें ओरियन कैप्सूल और SLS रॉकेट की सभी प्रणालियों को इंसानों के साथ परखा जाएगा।
क्रू में पहली बार महिला, अश्वेत और गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री
NASA Artemis II Mission की सबसे खास बात इसका क्रू है, जो अंतरिक्ष इतिहास में विविधता का एक नया अध्याय लिख रहा है। अपोलो मिशन के उलट इस बार क्रू में एक महिला, एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक गैर-अमेरिकी सदस्य शामिल हैं।
इस ऐतिहासिक क्रू में शामिल हैं:
- रीड वाइसमैन: मिशन कमांडर
- विक्टर ग्लोवर: पायलट, चांद की ओर उड़ान भरने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री
- क्रिस्टीना कोच: मिशन स्पेशलिस्ट, चांद की ओर जाने वाली पहली महिला
- जेरेमी हैनसेन: कनाडा के अंतरिक्ष यात्री, पहले गैर-अमेरिकी सदस्य जो चांद की ओर उड़ान भरेंगे
यह क्रू सिर्फ विज्ञान के लिए नहीं बल्कि इस संदेश के लिए भी अहम है कि अंतरिक्ष अब सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहा। दुनिया की हर पहचान और हर देश का इसमें स्थान है।
फरवरी में टलना पड़ा था लॉन्च: तकनीकी दिक्कतों से जूझा नासा
NASA Artemis II Mission पहले फरवरी 2025 में लॉन्च होना था, लेकिन कई तकनीकी दिक्कतों के चलते इसे टालना पड़ा। रॉकेट में हाइड्रोजन ईंधन लीक की समस्या सामने आई और हीलियम लाइन जाम होने जैसी गड़बड़ियों ने मिशन की टाइमलाइन को पीछे धकेल दिया।
हालांकि अब मरम्मत के बाद रॉकेट फिर से लॉन्च पैड पर तैयार है और यूएस-कनाडाई क्रू भी साइट पर पहुंच चुका है। लॉन्च डायरेक्टर चार्ली ब्लैकवेल-थॉमसन ने कहा कि “हमारी टीम ने हमें इस पल तक पहुंचने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है। निश्चित रूप से अभी सभी संकेत बता रहे हैं कि हम बहुत ही बेहतरीन स्थिति में हैं।”
नासा के पास इस मिशन को लॉन्च करने के लिए अप्रैल के पहले 6 दिनों का समय है। इसके बाद लॉन्च विंडो बंद हो जाएगी, जिसका मतलब होगा कि अगले मौके का इंतजार करना पड़ेगा।
चांद पर क्यों मची है होड़: सिर्फ बंजर जमीन नहीं है चंद्रमा
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब इंसान पहले ही छह बार चांद पर जा चुका है, तो फिर इतने अरबों डॉलर क्यों खर्च किए जा रहे हैं? इसका जवाब चांद की जमीन के नीचे छिपा है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक चांद सिर्फ बंजर जमीन नहीं है। वहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) मौजूद हैं, जो धरती पर बेहद कम मिलते हैं और जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और मिसाइल सिस्टम में होता है। इसके अलावा चांद पर लोहा, टाइटेनियम और हीलियम-3 जैसे महत्वपूर्ण संसाधन भी पाए जाते हैं।
चांद पर पानी: भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी
NASA Artemis II Mission और आने वाले अंतरिक्ष मिशनों के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा चांद पर पानी की मौजूदगी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद के ध्रुवों और स्थाई छाया वाले गड्ढों में बर्फ के रूप में पानी मौजूद हो सकता है।
यह पानी भविष्य की कुंजी इसलिए है क्योंकि इसे तीन अहम कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है: पहला, इसे सीधे पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरा, इसे तोड़कर ऑक्सीजन बनाई जा सकती है जो सांस लेने के लिए जरूरी है। और तीसरा, इससे निकलने वाली हाइड्रोजन से रॉकेट ईंधन तैयार किया जा सकता है। यानी अगर इंसान को चांद पर स्थाई ठिकाना बनाना है तो पानी सबसे जरूरी संसाधन है।
अमेरिका, चीन और रूस के बीच अंतरिक्ष में वर्चस्व की दौड़
चांद अब सिर्फ विज्ञान का नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक महत्व का केंद्र बन चुका है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच अंतरिक्ष में वर्चस्व की दौड़ तेज हो गई है। चीन पहले ही चांद पर कई सफल मिशन भेज चुका है और 2030 तक इंसानों को वहां भेजने का दावा कर रहा है।
ऐसे में हर देश उन जगहों तक सबसे पहले पहुंच बनाना चाहता है जहां सबसे ज्यादा संसाधन मौजूद हैं। हालांकि 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी के मुताबिक कोई भी देश चांद पर अपना मालिकाना हक नहीं जता सकता, लेकिन जो देश पहले वहां पहुंचेगा और तकनीकी बढ़त बनाएगा, उसका प्रभाव सबसे ज्यादा होगा। NASA Artemis II Mission इसी रणनीतिक होड़ का अहम हिस्सा है।
आम आदमी के लिए क्यों मायने रखता है यह मिशन
भले ही NASA Artemis II Mission अरबों डॉलर का अंतरिक्ष अभियान हो, लेकिन इसका असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। अंतरिक्ष मिशनों से विकसित होने वाली तकनीक: चाहे वो बेहतर सोलर पैनल हो, वॉटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम हो या मेडिकल इमेजिंग तकनीक: ये सब धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंचती हैं। अगर चांद पर संसाधनों का दोहन शुरू हुआ तो इसका सीधा असर पृथ्वी की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा संकट और तकनीकी विकास पर पड़ेगा।
आर्टिमिस II सिर्फ मिशन नहीं, चांद पर इंसानी मौजूदगी की नींव है
साफ है कि NASA Artemis II Mission सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं है, बल्कि यह चांद पर इंसानी मौजूदगी की नींव रखने का पहला ठोस कदम है। अपोलो मिशन ने 53 साल पहले साबित किया था कि इंसान चांद पर पहुंच सकता है, लेकिन आर्टिमिस का लक्ष्य यह साबित करना है कि इंसान चांद पर रह भी सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या यह मिशन इंसान को चांद पर स्थाई ठिकाना बनाने के एक कदम और करीब ले जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- NASA Artemis II Mission का काउंटडाउन शुरू, 53 साल बाद 4 अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर उड़ान भरेंगे, अप्रैल के पहले 6 दिनों में लॉन्च होगा।
- इस मिशन में चांद पर लैंडिंग नहीं होगी, ओरियन कैप्सूल से चांद की परिक्रमा कर करीब 10 दिन बाद प्रशांत महासागर में लैंडिंग होगी।
- क्रू में पहली बार महिला (क्रिस्टीना कोच), अश्वेत (विक्टर ग्लोवर) और गैर-अमेरिकी (जेरेमी हैनसेन, कनाडा) अंतरिक्ष यात्री शामिल।
- चांद पर रेयर अर्थ एलिमेंट्स, टाइटेनियम, हीलियम-3 और बर्फ के रूप में पानी की मौजूदगी के कारण अमेरिका, चीन और रूस के बीच अंतरिक्ष में वर्चस्व की होड़ तेज।








