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The News Air - Breaking News - Petrol Diesel Excise Duty Cut: सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर टैक्स अब जीरो!

Petrol Diesel Excise Duty Cut: सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर टैक्स अब जीरो!

ईरान-अमेरिका युद्ध से Crude Oil $110 पहुंचा, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े, सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में की ऐतिहासिक कटौती, सालाना ₹1.5 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 28 मार्च 2026
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Petrol Diesel Excise Duty Cut
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Petrol Diesel Excise Duty Cut को लेकर भारत सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की कीमतें पिछले एक महीने में 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़कर $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी तक नहीं बढ़े हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹32-33 से घटाकर मात्र ₹3 कर दी है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह शून्य (Zero) कर दिया गया है। यह हाल के वर्षों में सबसे बड़ा Fuel Tax Cut है।

$70 से $110 पहुंचा Crude Oil, फिर भी भारत में दाम स्थिर कैसे?

पूरी दुनिया में पश्चिम एशिया (Middle East) में जिस तरह से युद्ध छिड़ा हुआ है, उसने Crude Oil की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। जब यह युद्ध शुरू नहीं हुआ था, उससे ठीक पहले Crude Oil $70 प्रति बैरल से भी नीचे चल रहा था। लेकिन जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, आज के तारीख में यह $110 के करीब पहुंच चुका है। कुछ समय पहले तो यह इससे भी ऊपर चला गया था।

डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान से बातचीत हो रही है, जबकि ईरान इससे साफ इनकार कर रहा है। अभी हालात में थोड़ी स्थिरता आई है क्योंकि बॉम्बिंग कुछ समय के लिए रुकी हुई है, लेकिन स्पष्टता किसी को नहीं है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध दोबारा भड़का तो Crude Oil $150 प्रति बैरल तक जा सकता है, और अगर रुक गया तो वापस $80 के करीब आ सकता है।

सामान्य परिस्थितियों में Crude Oil में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले एक महीने से जो भी पेट्रोल-डीजल के दाम चल रहे थे, वही अभी भी बने हुए हैं।

तीन ‘शॉक अब्सॉर्बर’ से सरकार रोक रही है दाम

भारत में Petrol Diesel Excise Duty Cut के अलावा तीन प्रकार के ऐसे मैकेनिज्म हैं जिनसे सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कंट्रोल करती है।

पहला: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का लॉस अब्सॉर्प्शन। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), BPCL और HPCL जैसी कंपनियां, जहां से आम लोग पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं, वे Crude Oil की बढ़ी हुई लागत को तुरंत उपभोक्ताओं पर नहीं डालतीं। जब तक सरकार इजाजत न दे, ये कंपनियां दाम नहीं बढ़ातीं। इसे ‘अंडर रिकवरीज’ कहा जाता है, जिसमें ये कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन को कम करके या नुकसान सहकर दामों को स्थिर रखती हैं।

हालांकि इसको लेकर भारत में हमेशा से बहस रही है। सरकार कहती है कि ईंधन की कीमतें डीरेगुलेट हैं और बाजार के हिसाब से ऊपर-नीचे होती रहती हैं। लेकिन जब भी ऐसी स्थिति आती है कि ₹100 का पेट्रोल अचानक ₹110 या ₹120 हो जाए, तो सरकार दाम रोक देती है।

दूसरा: कंट्रोल्ड प्राइसिंग। सरकार आंशिक (Partial) या चयनित (Selective) तरीके से कीमतों में बदलाव करती है। उदाहरण के लिए जो इंडस्ट्रियल डीजल है, उसमें पहले ही काफी बढ़ोतरी आ चुकी है। इसी तरह प्रीमियम पेट्रोल, जो बेहतर क्वालिटी का पेट्रोल माना जाता है, उसमें भी ₹2 की बढ़ोतरी हो चुकी है। लेकिन रेगुलर पेट्रोल और डीजल के दाम अभी तक स्थिर बने हुए हैं।

तीसरा और सबसे बड़ा: एक्साइज ड्यूटी में कटौती। यही वह कदम है जिसने सबसे बड़ा फर्क डाला है।

पेट्रोल-डीजल का दाम कैसे बनता है: समझें पूरा ब्रेकअप

यह समझना बहुत जरूरी है कि जब आप ₹100 का पेट्रोल भरवाते हैं तो वह ₹100 कहां-कहां जाता है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में कई कॉम्पोनेंट्स होते हैं।

सबसे पहले बेस प्राइस आता है जिसमें Crude Oil का दाम, रिफाइनिंग की लागत और लॉजिस्टिक कॉस्ट शामिल होती है। अगर ₹100 पेट्रोल का दाम है तो उसमें से लगभग ₹45 बेस प्राइस होता है। इसके बाद फ्रेट और डीलर कमीशन जुड़ता है।

लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा टैक्सेस का होता है। इसमें दो प्रकार के टैक्स लगते हैं। पहला एक्साइज ड्यूटी, जो केंद्र सरकार लगाती है और जो फिक्स्ड होती है। सरकार तय करती है कि प्रति लीटर कितने रुपये का टैक्स लगेगा। दूसरा वैट (VAT), जो राज्य सरकार लगाती है और जो प्रतिशत में होता है। जितना ज्यादा ओवरऑल दाम होगा, उतना ही ज्यादा राज्य सरकार को वैट से पैसा मिलेगा।

एक समय ऐसा था जब एक्साइज ड्यूटी ₹32-33 प्रति लीटर थी और वैट करीब ₹24-25 था। मतलब ₹100 के पेट्रोल में आधे से ज्यादा हिस्सा सिर्फ टैक्स में चला जाता था। इसी को लेकर सरकार की भारी आलोचना भी होती रही है।

ऐतिहासिक Petrol Diesel Excise Duty Cut: पेट्रोल पर ₹3, डीजल पर शून्य

अब सरकार ने वह कदम उठाया है जिसकी लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने Petrol Diesel Excise Duty Cut के तहत पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹32-33 से घटाकर मात्र ₹3 प्रति लीटर कर दी है। और डीजल पर तो एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह शून्य कर दी गई है। मतलब डीजल पर अब केंद्र सरकार कोई भी एक्साइज ड्यूटी नहीं लगा रही है।

यह हाल के वर्षों में सबसे बड़ा ईंधन टैक्स कट है। इसकी वजह से ही Crude Oil की कीमतों में 70-80 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। अगर यह कटौती नहीं होती तो सामान्य स्थिति में 1 लीटर पेट्रोल का दाम करीब ₹150 तक पहुंच चुका होता।

वैट को लेकर फैसला अलग-अलग राज्य सरकारें लेंगी कि वे अपने हिस्से में कितनी कटौती करती हैं या नहीं करतीं। लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से लगभग पूरा टैक्स खत्म कर दिया है।

सरकार ने पहले ही बता दिया था: बढ़ाया इसलिए कि कभी घटा सकें

दिलचस्प बात यह है कि जब पहले सरकार पर टैक्स बढ़ाने को लेकर सवाल उठते थे, तो सरकार का एक ही जवाब होता था: “आगे चलकर जब Crude Oil के दाम बढ़ेंगे तो हम टैक्स कम कर देंगे ताकि आम लोगों पर बोझ न आए।” और अब सरकार ठीक वही कर रही है।

यह एक प्रकार की ‘Fiscal Cushioning’ है, जहां सरकार अच्छे दिनों में ज्यादा टैक्स वसूलकर एक कुशन बना लेती है, ताकि बुरे दिनों में उसे कम करके लोगों को राहत दे सके। लेकिन इसकी भारी कीमत भी है।

₹1.5 लाख करोड़ सालाना का नुकसान: सरकारी खजाने पर भारी बोझ

इस बड़े Petrol Diesel Excise Duty Cut की कीमत सरकारी खजाने को चुकानी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि इस कटौती की वजह से सरकार को सालाना ₹1.5 लाख करोड़ से ज्यादा का राजस्व नुकसान हो सकता है।

यह रकम बेहद बड़ी है। सरकार इस पैसे को इंफ्रास्ट्रक्चर, कल्याणकारी योजनाओं, सब्सिडी और विकास कार्यों पर खर्च करती थी। अब जब यह राजस्व ही नहीं आएगा, तो इन सभी क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।

यहां पर एक कठिन ट्रेड-ऑफ है जिसका सामना सरकार कर रही है। एक तरफ सरकार चाहती है कि महंगाई (Inflation) कम रहे, जो तभी संभव है जब पेट्रोल-डीजल के दाम न बढ़ें, क्योंकि ईंधन की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है, जिससे हर चीज की कीमत बढ़ जाती है। दूसरी तरफ इसकी कीमत राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के रूप में चुकानी पड़ रही है। सरकार का लक्ष्य राजकोषीय घाटे को 4-5 प्रतिशत के अंदर रखने का होता है, और यह कटौती उस लक्ष्य को मुश्किल बना सकती है।

आर्थिक स्थिरता (Economic Stability) तो बनी रहेगी, लेकिन सरकार की ओवरऑल खर्च करने की क्षमता कम हो जाएगी। आम आदमी को ईंधन में राहत तो मिलेगी, लेकिन सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर इसका असर भी दिखेगा।

दुनिया भर में बढ़े दाम, भारत अपवाद कैसे?

पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। अमेरिका में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। चीन, यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान, श्रीलंका समेत लगभग हर देश में ईंधन के दाम बढ़े हुए हैं।

फर्क यह है कि इन देशों में सरकारें पहले से इतना भारी टैक्स नहीं लगाती थीं, इसलिए उनके पास कम करने की गुंजाइश ही नहीं थी। भारत में चूंकि सरकार ने पहले से ही बहुत ज्यादा एक्साइज ड्यूटी बढ़ा रखी थी, इसलिए अब उसे कम करने की जगह मिल गई। यही वजह है कि भारत में दाम बढ़ते हुए नहीं दिख रहे।

90% Crude Oil आयात: भारत की सबसे बड़ी कमजोरी

यह पूरा मामला भारत की एक गहरी संरचनात्मक समस्या (Structural Problem) को भी उजागर करता है। भारत अपनी Crude Oil जरूरत का 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसका मतलब है कि जब भी कोई ग्लोबल शॉक आता है, चाहे वह युद्ध हो या कोई और संकट, उसका सीधा असर भारत पर पड़ता है।

भारत ईंधन की कीमतों को पूरी तरह स्वतंत्र रूप से कंट्रोल नहीं कर सकता क्योंकि कच्चा तेल बाहर से आता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बार-बार कहते हैं कि भारत को रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ना चाहिए, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए, स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को और बढ़ाना चाहिए और आयात के स्रोतों को विविध (Diversify) करना चाहिए ताकि किसी एक क्षेत्र के संकट का असर कम पड़े।

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आगे क्या होगा: $150 बैरल गया तो पेट्रोल ₹150 भी संभव

सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कब तक स्थिर रहेंगे। अगर ईरान-अमेरिका युद्ध रुक गया और Crude Oil वापस $80 के करीब आ गया, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन अगर युद्ध जारी रहा और Crude Oil $110 से बढ़कर $150 प्रति बैरल तक चला गया, तो भारत के लिए बहुत बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

ऐसी स्थिति में भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹100 से बढ़कर ₹150 प्रति लीटर तक भी जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने कहा है कि फिलहाल भारत के पास 60 दिनों का तेल भंडार है जो रिफाइनरीज में प्रोसेसिंग के लिए पर्याप्त है, और एलपीजी (LPG) का 1 महीने का रिजर्व मौजूद है।

लेकिन अगर संकट लंबा खिंचा तो ये रिजर्व भी कम पड़ सकते हैं। आम लोगों के लिए फिलहाल राहत है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता बनी हुई है। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में जाते हैं और Crude Oil की कीमतें कहां तक पहुंचती हैं।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Petrol Diesel Excise Duty Cut के तहत पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹32-33 से घटाकर ₹3 और डीजल पर शून्य कर दी गई, यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा ईंधन टैक्स कट है।
  • Crude Oil की कीमतें ईरान-अमेरिका युद्ध से $70 से बढ़कर $110 प्रति बैरल पहुंचीं, लेकिन एक्साइज कटौती से भारत में दाम स्थिर रहे।
  • सरकार को सालाना ₹1.5 लाख करोड़ से ज्यादा का राजस्व नुकसान होगा, जिसका असर इंफ्रास्ट्रक्चर, कल्याणकारी योजनाओं और राजकोषीय घाटे पर पड़ सकता है।
  • भारत 90% Crude Oil आयात करता है, अगर युद्ध जारी रहा और Crude $150 पहुंचा तो पेट्रोल ₹150 तक जा सकता है, फिलहाल 60 दिनों का तेल भंडार मौजूद है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: भारत में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी अब कितनी है?

केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹32-33 से घटाकर मात्र ₹3 प्रति लीटर कर दी है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह शून्य (Zero) कर दी गई है। यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा ईंधन टैक्स कट है।

Q2: Crude Oil महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल के दाम क्यों नहीं बढ़े?

तीन कारण हैं: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने नुकसान सहा, सरकार ने चुनिंदा तरीके से प्राइसिंग कंट्रोल की, और सबसे बड़ा कारण केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में ऐतिहासिक कटौती कर दी।

Q3: अगर ईरान-अमेरिका युद्ध जारी रहा तो भारत में पेट्रोल कितना महंगा हो सकता है?

अगर Crude Oil $150 प्रति बैरल तक पहुंचा तो भारत में पेट्रोल ₹100 से बढ़कर ₹150 प्रति लीटर तक जा सकता है। फिलहाल भारत के पास 60 दिनों का तेल भंडार और 1 महीने का LPG रिजर्व मौजूद है।

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