Bandi Sikh Prisoners की रिहाई के मुद्दे पर पंजाब की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने गुरुवार 27 मार्च को लोकसभा में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए दावा किया कि पंजाब के दो सांसद रवनीत सिंह बिट्टू और हरसिमरत कौर बादल बंदी सिखों की रिहाई में बाधा डालने के लिए बार-बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर अपना विरोध दर्ज करवा रहे थे। वड़िंग के इस आरोप ने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
Lok Sabha में गूंजी Bandi Sikh Prisoners की रिहाई की मांग
राजा वड़िंग ने Lok Sabha में बोलते हुए सीधे तौर पर मांग रखी कि अपनी सजा पूरी कर चुके सभी Bandi Sikh Prisoners को देश के कानून के अनुसार तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को सिर्फ सिख कैदियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कहा कि देश भर की अलग-अलग जेलों में ऐसे तमाम कैदी बंद हैं जिनकी सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया है। ऐसे सभी कैदियों को भी तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
वड़िंग ने संसद में जोरदार तरीके से अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत का संविधान और कानून जहां किसी भी अपराध के लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान करते हैं, वहीं यह भी बिल्कुल स्पष्ट करते हैं कि जो व्यक्ति अपनी सजा पूरी कर लेता है, उसे जेल से रिहा किया जाना चाहिए। यह उसका कानूनी अधिकार है और कोई भी सरकार इस अधिकार को नहीं छीन सकती।
संसद भवन के बाहर वड़िंग ने किए और बड़े खुलासे
Bandi Sikh Prisoners के मुद्दे पर Lok Sabha में बोलने के बाद राजा वड़िंग ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत में और भी बड़े खुलासे किए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास विश्वसनीय जानकारी है कि रवनीत सिंह बिट्टू और हरसिमरत कौर बादल नियमित रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर Bandi Sikh Prisoners की रिहाई का विरोध करते रहे हैं।
यह आरोप इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि बिट्टू भाजपा से जुड़े हैं और हरसिमरत कौर बादल शिरोमणि अकाली दल की सांसद हैं। दोनों अलग-अलग पार्टियों से हैं, लेकिन वड़िंग के मुताबिक दोनों एक ही मकसद से गृह मंत्री से मिल रहे थे कि Bandi Sikh Prisoners को रिहा न किया जाए।
“सार्वजनिक रुख और निजी मांग में जमीन-आसमान का फर्क”: वड़िंग
राजा वड़िंग ने सबसे तीखा हमला तब किया जब उन्होंने दोनों सांसदों की दोहरी राजनीति को बेनकाब करने का दावा किया। वड़िंग ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू और हरसिमरत कौर बादल सार्वजनिक रूप से Bandi Sikh Prisoners की रिहाई पर जो रुख दिखाते हैं, वह उनकी निजी तौर पर की जा रही मांग से बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि दोनों सांसद चुनावों के दौरान इस मुद्दे को जिंदा रखकर इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि वड़िंग के आरोपों के अनुसार, ये दोनों सांसद जनता के सामने तो बंदी सिखों की रिहाई की वकालत करते दिखते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे गृह मंत्री से मिलकर ठीक इसके उलट काम कर रहे हैं। अगर ये आरोप सच हैं, तो यह पंजाब की सिख राजनीति में एक बहुत बड़ा धोखा है जो सालों से चला आ रहा है।
पंजाब की राजनीति में इस खुलासे के क्या मायने हैं?
Bandi Sikh Prisoners का मुद्दा पंजाब की राजनीति में दशकों से सबसे भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दों में से एक रहा है। हर चुनाव से पहले हर पार्टी इनकी रिहाई के वादे करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद ये वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। वड़िंग का यह खुलासा इसलिए अहम है क्योंकि इसने पहली बार Lok Sabha के मंच से यह आरोप लगाया है कि कुछ सांसद जानबूझकर इस रिहाई को रुकवा रहे हैं ताकि चुनावी मुद्दा बना रहे।
आम पंजाबी और सिख समुदाय के लिए यह खबर बेहद दर्दनाक है क्योंकि बंदी सिखों के परिवार दशकों से अपने बुजुर्गों की रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। कई बंदी सिख अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, बीमार हैं और बूढ़े हो चुके हैं, फिर भी उन्हें जेल में रखा जा रहा है। अगर वड़िंग के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह इन परिवारों के साथ सबसे बड़ा राजनीतिक विश्वासघात होगा।
अब बिट्टू और हरसिमरत को देना होगा जवाब
राजा वड़िंग के इन गंभीर आरोपों के बाद अब सबकी निगाहें रवनीत सिंह बिट्टू और हरसिमरत कौर बादल पर टिकी हैं। दोनों सांसदों को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वे वाकई में गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर Bandi Sikh Prisoners की रिहाई का विरोध कर रहे थे या फिर वड़िंग के ये आरोप राजनीतिक प्रेरित हैं। पंजाब की जनता और खासकर सिख समुदाय जवाब का इंतजार कर रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- राजा वड़िंग ने Lok Sabha में आरोप लगाया कि रवनीत सिंह बिट्टू और हरसिमरत कौर बादल गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर Bandi Sikh Prisoners की रिहाई का विरोध करते रहे हैं।
- वड़िंग ने मांग की कि सजा पूरी कर चुके सभी बंदी सिखों और अन्य कैदियों को देश के कानून के अनुसार तुरंत रिहा किया जाए।
- वड़िंग ने दोनों सांसदों की दोहरी राजनीति को बेनकाब करते हुए कहा कि ये सार्वजनिक रूप से रिहाई की बात करते हैं, लेकिन निजी तौर पर इसका विरोध करते हैं।
- दोनों सांसदों पर चुनावी फायदे के लिए इस संवेदनशील मुद्दे को जानबूझकर जिंदा रखने का आरोप लगाया गया।








