LPG vs PNG का सवाल अब सिर्फ बहस का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह हर भारतीय परिवार की रसोई से जुड़ा अहम फैसला बन गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच देश में एलपीजी सिलेंडर की मांग अचानक से बढ़ गई है। इसी बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शहरी इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को तेजी से बढ़ावा देने का फैसला किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जहां PNG उपलब्ध है, वहां 3 महीने बाद LPG सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी जाएगी।
25 दिनों में 25 लाख नए PNG Connection: सरकार के ताजा आंकड़े
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी देते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने बताया कि बीते सिर्फ 25 दिनों में देश भर में 25 लाख नए PNG Connection दिए गए हैं। इसके साथ ही लगभग 22 लाख उपभोक्ताओं ने अपनी मर्जी से LPG छोड़कर PNG को अपना लिया है।
इतना ही नहीं, 25 लाख नए आवेदन भी दर्ज हुए हैं, जो बताता है कि लोगों में PNG Connection को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है। सुजाता शर्मा ने यह भी बताया कि करीब 60 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके इलाकों में PNG नेटवर्क पहले से मौजूद है, लेकिन उन्होंने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है।
3 महीने बाद बंद हो जाएगी LPG सप्लाई: सरकार का सख्त आदेश
सरकार की ओर से जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर किसी इलाके में PNG पाइपलाइन उपलब्ध है और फिर भी कोई परिवार इसे नहीं अपनाता, तो 3 महीने बाद उसकी एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। यह नियम उन सभी शहरी इलाकों पर लागू होगा जहां पाइपलाइन नेटवर्क बिछ चुका है।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां पाइप कनेक्शन देना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, वहां अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के आधार पर LPG की सप्लाई पहले की तरह जारी रहेगी। इसका मतलब यह है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अभी एलपीजी सिलेंडर ही मुख्य विकल्प बना रहेगा।
LPG vs PNG: कीमत में कौन सस्ता?
LPG vs PNG की बात करें तो कीमत के मामले में PNG का पलड़ा भारी नजर आता है। भारत में घरेलू इस्तेमाल के लिए आमतौर पर 14.2 किलोग्राम का LPG सिलेंडर इस्तेमाल होता है, जिसकी कीमत शहर और राज्य के अनुसार लगभग 800 से 1100 रुपये के बीच होती है। एक मीडियम साइज के परिवार में यह सिलेंडर करीब एक से दो महीने तक चलता है।
वहीं PNG की कीमत कई शहरों में लगभग 40 से 60 रुपये प्रति यूनिट के आसपास है। चूंकि इसका बिल मीटर के हिसाब से आता है, यानी जितना इस्तेमाल करेंगे उतना ही बिल देना होगा, इसलिए कई मामलों में PNG सिलेंडर की तुलना में 10 से 12 प्रतिशत तक सस्ती पड़ सकती है। हालांकि PNG की कीमत अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है, जबकि LPG सिलेंडर का बेस प्राइस सरकार तय करती है।
LPG vs PNG: सुरक्षा के मामले में कौन बेहतर?
सुरक्षा के लिहाज से PNG को LPG से बेहतर माना जाता है और इसके पीछे एक ठोस वैज्ञानिक कारण है। PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस हवा से हल्की होती है, इसलिए अगर कहीं लीकेज होती है तो गैस तुरंत ऊपर उड़ जाती है और खतरा कम हो जाता है।
इसके उलट LPG हवा से भारी होती है। लीकेज होने पर यह नीचे जमीन के पास जमा होती रहती है, जिससे आग लगने या विस्फोट का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही वजह है कि सुरक्षा विशेषज्ञ भी PNG को रसोई गैस के लिए ज्यादा सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
सुविधा के मामले में PNG क्यों है आगे?
LPG सिलेंडर में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हर बार गैस खत्म होने पर नया सिलेंडर बुक करना पड़ता है। बुकिंग के बाद डिलीवरी का इंतजार करना पड़ता है, और कई बार यह इंतजार लंबा भी खिंच जाता है। इसके अलावा सिलेंडर की पूरी कीमत एक साथ चुकानी पड़ती है।
वहीं PNG Connection में ये सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। पाइपलाइन के जरिए गैस सीधे घर तक पहुंचती है, इसमें सिलेंडर बदलने का कोई झंझट नहीं है। गैस 24 घंटे उपलब्ध रहती है, कभी खत्म होने की चिंता नहीं और मीटर के हिसाब से बिलिंग होती है, जो काफी पारदर्शी है।
PNG आती कहां से है: क्या भारत खुद बनाता है?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर PNG आती कहां से है। दरअसल, PNG कोई अलग से बनने वाला प्रोडक्ट नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक गैस ही है जो मुख्य रूप से दो स्रोतों से आती है।
पहला स्रोत है देश का अपना उत्पादन। ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियां देश के अंदर गैस का उत्पादन करती हैं। हालांकि, भारत अपनी पूरी जरूरत की गैस खुद नहीं निकाल पाता। इसलिए दूसरा स्रोत है आयात: बड़ी मात्रा में एलएनजी (LNG) यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस कतर, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों से मंगवाई जाती है। इसे लिक्विड रूप में लाकर भारत में दोबारा गैस में बदला जाता है और फिर पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है।
PNG Connection कैसे लें: पूरी प्रक्रिया स्टेप बाय स्टेप
अगर आपके इलाके में PNG पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है, तो PNG Connection लेना काफी आसान है। उदाहरण के लिए, अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) यह सुविधा उपलब्ध कराती है।
कनेक्शन लेने के लिए सबसे पहले कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन करते समय अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जरूरी जानकारी भरनी होती है। इसके बाद कुछ दस्तावेज अपलोड करने होते हैं, जिनमें आधार कार्ड या वोटर आईडी, एड्रेस प्रूफ, बिजली या पानी का बिल और मोबाइल नंबर शामिल हैं। आवेदन जमा होने के बाद कंपनी उसकी जांच करती है और फिर आगे की प्रक्रिया शुरू करती है।
एक जरूरी बात यह है कि घर में नया PNG Connection लगवाने के लिए शुरुआत में एक फीस देनी होती है, जिसमें इंस्टॉलेशन चार्ज और सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल होता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि यह रकम बाद में रिफंडेबल होती है।
One Nation One Gas Grid: सरकार का बड़ा विजन
भारत सरकार PNG को भविष्य का ईंधन मानकर काम कर रही है। ‘वन नेशन वन गैस ग्रिड’ जैसे बड़े विजन के तहत शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा घरों तक जल्द से जल्द PNG पहुंच सके।
सुजाता शर्मा ने इसकी वजह भी साफ तौर पर बताई। उन्होंने कहा कि LPG के लिए भारत की आयात निर्भरता PNG और LNG की तुलना में काफी ज्यादा है। जबकि PNG के मामले में भारत अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा कर लेता है। इसीलिए देश हित में यह जरूरी है कि LPG से PNG पर शिफ्ट किया जाए।
क्या PNG पूरी तरह LPG की जगह ले सकती है?
यह सवाल बेहद अहम है। हकीकत यह है कि भारत जैसे विशाल देश में कम से कम अभी PNG पूरी तरह LPG की जगह नहीं ले सकती। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां पाइपलाइन बिछाना संभव नहीं है, वहां एलपीजी सिलेंडर अभी भी सबसे व्यावहारिक विकल्प बना रहेगा।
लेकिन शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जहां-जहां पाइपलाइन नेटवर्क पहुंच रहा है, वहां PNG धीरे-धीरे एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रही है। आने वाले समय में जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा, शहरी इलाकों में LPG सिलेंडर का दौर खत्म होता दिखेगा और PNG नई रसोई गैस के रूप में पूरी तरह स्थापित हो जाएगी। आम परिवारों के लिए यह बदलाव न सिर्फ जेब पर हल्का होगा, बल्कि सुरक्षा और सुविधा दोनों लिहाज से फायदेमंद साबित होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत सरकार ने सख्त आदेश दिया है कि जहां PNG उपलब्ध है, वहां 3 महीने बाद LPG सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी जाएगी।
- PNG कीमत में LPG से 10-12% सस्ती पड़ती है और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर मानी जाती है क्योंकि यह हवा से हल्की होती है।
- पिछले 25 दिनों में 25 लाख नए PNG Connection दिए गए हैं और 22 लाख उपभोक्ताओं ने LPG से PNG पर स्विच किया है।
- भारत PNG के लिए जरूरी गैस का करीब 50% घरेलू उत्पादन से पूरा करता है, जबकि LPG में आयात निर्भरता कहीं ज्यादा है।








