Iran Israel War अब अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और थमने की बजाय यह संघर्ष लगातार और भयावह होता जा रहा है। एक तरफ इजराइल और ईरान के बीच सीधी जंग जारी है, तो दूसरी तरफ इजराइली सेना ने लेबनान पर भी बड़े पैमाने पर हमले तेज कर दिए हैं। 16 मार्च को इजराइली सेना ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ खुले तौर पर युद्ध का ऐलान किया और तब से दक्षिणी लेबनान और बेरूत में भारी तबाही मची हुई है। अब तक इन हमलों में करीब 1000 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 10 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान से युद्ध के बीच इजराइल लेबनान पर हमला क्यों कर रहा है? इसका जवाब एक नाम में छिपा है: हिजबुल्लाह। और हिजबुल्लाह को समझने के लिए ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की भूमिका को समझना जरूरी है।
कसमिया पुल को किया ध्वस्त: Iran Israel War का असर लेबनान की जनता पर
Iran Israel War के इस ताजा दौर में इजराइल ने लेबनान के महत्वपूर्ण कसमिया पुल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। यह पुल लेबनान के बुनियादी ढांचे का एक अहम हिस्सा था और इसके तबाह होने से आवागमन और राहत कार्यों पर गंभीर असर पड़ा है। दक्षिणी लेबनान और बेरूत में इजराइली बमबारी से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।
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हजारों परिवार अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सड़कों पर बेसहारा हैं। लेबनान, जो पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, इस युद्ध ने उसकी स्थिति और भी दयनीय बना दी है। आम लेबनानी नागरिक इस जंग की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं, जो न ईरान के हैं न इजराइल के, लेकिन दोनों के संघर्ष की आग में जल रहे हैं।
इजराइल के लेबनान पर हमले की सबसे बड़ी वजह: Hezbollah कनेक्शन
Iran Israel War को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इजराइल लेबनान पर हमला क्यों कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी और सीधी वजह है हिजबुल्लाह। हिजबुल्लाह लेबनान का एक शिया मुस्लिम राजनीतिक-सैन्य संगठन है जिसे इजराइल, अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देश आतंकवादी संगठन मानते हैं।
हिजबुल्लाह सिर्फ एक स्वतंत्र संगठन नहीं है, बल्कि यह ईरान की IRGC फोर्स के सीधे नियंत्रण में काम करता है। यही वह कड़ी है जो लेबनान को Iran Israel War के बीच में खींच लाती है। ईरान हिजबुल्लाह के माध्यम से इजराइल के खिलाफ प्रॉक्सी वार (अप्रत्यक्ष युद्ध) लड़ता रहा है। प्रॉक्सी वार का मतलब है जब दो देश सीधे युद्ध न लड़कर किसी तीसरे संगठन या देश के माध्यम से लड़ाई लड़ते हैं।
अक्टूबर 2023 से शुरू हुई थी हिजबुल्लाह और इजराइल की टक्कर
Iran Israel War की इस मौजूदा कड़ी को समझने के लिए 2023 में पीछे जाना होगा। अक्टूबर 2023 में जब इजराइल ने गाजा पर बड़े पैमाने पर बमबारी शुरू की, तब हिजबुल्लाह ने गाजा और हमास के समर्थन में इजराइल पर हमला किया। हिजबुल्लाह हमेशा से हमास का समर्थक रहा है और उसने शेबा फार्म्स इलाके में इजराइल पर रॉकेट दागे। शेबा फार्म्स लेबनान का वह विवादित इलाका है जिस पर इजराइल का कब्जा है।
इसके जवाब में इजराइल ने भी लेबनान पर हमले किए और दोनों पक्षों के बीच लंबा संघर्ष चला। लगभग नवंबर 2024 में दोनों के बीच युद्धविराम हुआ। लेकिन यह शांति ज्यादा दिन टिक नहीं पाई।
Khamenei की मौत के बाद भड़की नई आग: हिजबुल्लाह ने फिर दागे रॉकेट
Iran Israel War का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट फरवरी 2026 में आया, जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजराइली हवाई हमले में मौत हो गई। खामेनेई की मौत ने पूरे मध्य पूर्व में भूचाल ला दिया।
इसके तुरंत बाद हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन में उत्तरी इजराइल पर रॉकेट हमले किए। हिजबुल्लाह के लिए यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि अपने सबसे बड़े संरक्षक की मौत का बदला लेने का सवाल था। इजराइल ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की और यही वह बिंदु है जहां से लेबनान में तबाही का यह नया दौर शुरू हुआ, जो आज तक जारी है।
Hezbollah की स्थापना और IRGC का गहरा कनेक्शन
Iran Israel War में हिजबुल्लाह की भूमिका को समझने के लिए इसके इतिहास में जाना जरूरी है। हिजबुल्लाह की स्थापना 1982 में हुई थी, जब इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर आक्रमण किया था। इस संगठन को बनाने में ईरान की IRGC फोर्स का सबसे बड़ा हाथ था। IRGC ने न सिर्फ हिजबुल्लाह को स्थापित करने में मदद की, बल्कि शुरू से ही इसे हथियार, प्रशिक्षण और धन मुहैया कराया।
1985 में आधिकारिक तौर पर अपने अस्तित्व में आने के बाद हिजबुल्लाह ने दो बड़ी बातें कहीं। पहली: लेबनान में इस्लाम को बढ़ावा देना। और दूसरी: इजराइल के साथ संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक इजराइल का अस्तित्व ही समाप्त नहीं हो जाता। यह घोषणा बताती है कि हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच का टकराव कोई अस्थायी विवाद नहीं, बल्कि एक अस्तित्व का संघर्ष है।
2024 में हिजबुल्लाह को भारी नुकसान: नसरअल्लाह सहित शीर्ष कमांडर मारे गए
Iran Israel War की पृष्ठभूमि में 2024 का साल हिजबुल्लाह के लिए सबसे विनाशकारी रहा। इजराइल से हुए युद्ध में हिजबुल्लाह को भारी नुकसान झेलना पड़ा। इस संघर्ष में हिजबुल्लाह के सबसे शक्तिशाली नेता हसन नसरअल्लाह की मौत हो गई। नसरअल्लाह दशकों से हिजबुल्लाह का चेहरा थे और उनके मारे जाने से संगठन की कमान पूरी तरह लड़खड़ा गई। उनके अलावा कई शीर्ष कमांडर भी इजराइली हमलों में मारे गए।
यह हिजबुल्लाह के लिए एक अभूतपूर्व झटका था। संगठन का पूरा कमांड ढांचा बिखर गया और ऐसा लगा कि शायद हिजबुल्लाह अब दोबारा खड़ा नहीं हो पाएगा। लेकिन यहीं पर ईरान ने सीधे हस्तक्षेप किया।
ईरान ने 100 IRGC सैनिक लेबनान भेजे: हिजबुल्लाह को दोबारा खड़ा किया
2024 में हिजबुल्लाह को भारी नुकसान के बाद ईरान ने सीधे दखल देने का फैसला किया। Iran Israel War में ईरान ने करीब 100 IRGC सैनिकों को लेबनान भेजा। इन सैनिकों ने हिजबुल्लाह के बचे हुए लड़ाकों को दोबारा प्रशिक्षित किया और बड़े पैमाने पर हथियारों की सप्लाई की।
लेकिन IRGC ने सिर्फ हथियार और प्रशिक्षण ही नहीं दिया, बल्कि हिजबुल्लाह के पूरे कमांड स्ट्रक्चर में आमूलचूल बदलाव किए। पुराने ढांचे को पूरी तरह खत्म कर दिया गया और उसकी जगह छोटी-छोटी इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) यूनिट्स बनाई गईं। इसके पीछे रणनीति यह थी कि ऑपरेशन की गोपनीयता बनी रहे और इजराइली खुफिया एजेंसियों के लिए हिजबुल्लाह के लड़ाकों को ट्रैक करना और निशाना बनाना मुश्किल हो जाए।
इन IRGC अधिकारियों ने एक और खतरनाक योजना भी तैयार की: ईरान और लेबनान दोनों तरफ से एक साथ इजराइल पर हमला करने की रणनीति। इस योजना को पहली बार 11 मार्च को अंजाम दिया गया, जिसने इजराइल को दो मोर्चों पर एक साथ लड़ने पर मजबूर कर दिया।
हिजबुल्लाह की सैन्य ताकत: 2 लाख तक मिसाइलें और 1000 से ज्यादा ड्रोन
Iran Israel War में हिजबुल्लाह की भूमिका इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि यह कोई छोटा-मोटा संगठन नहीं है। हिजबुल्लाह का दावा है कि उसके पास 1 लाख से अधिक सैनिक हैं। हालांकि कुछ स्वतंत्र अनुमानों के मुताबिक यह संख्या 20,000 से 60,000 के बीच मानी जाती है। लेकिन असल ताकत सैनिकों की संख्या में नहीं, हथियारों के जखीरे में छिपी है।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) थिंक टैंक के अनुमान के मुताबिक हिजबुल्लाह के पास अनुमानित 1,20,000 से 2,00,000 रॉकेट और मिसाइलें हैं। इनमें से ज्यादातर शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज (80 से 200 किलोमीटर तक) की मिसाइलें हैं।
इसके अलावा हिजबुल्लाह के शस्त्रागार में प्रिसीजन गाइडेड मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम और शोर-टू-सी मिसाइलें भी शामिल हैं। इसके ऊपर 1000 से ज्यादा आत्मघाती (सुसाइड) ड्रोन भी हिजबुल्लाह के पास हैं, जो इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा बने हुए हैं। यह हथियारों का जखीरा बताता है कि IRGC ने दशकों में हिजबुल्लाह को एक पूर्ण सैन्य ताकत में बदल दिया है।
इजराइल के लिए लेबनान पर हमला रणनीतिक मजबूरी क्यों है
Iran Israel War में इजराइल के लिए सिर्फ ईरान से लड़ना काफी नहीं है। ईरान प्रॉक्सी युद्ध के जरिए हिजबुल्लाह को आगे रखकर इजराइल को अस्थिर करने का लगातार प्रयास करता रहा है। ऐसे में इजराइल की सैन्य रणनीति यह है कि जब तक हिजबुल्लाह लेबनान में सक्रिय है, तब तक इजराइल के उत्तरी इलाके सुरक्षित नहीं रह सकते।
11 मार्च को जब ईरान और हिजबुल्लाह ने एक साथ दो मोर्चों से इजराइल पर हमला किया, तो इजराइल के लिए यह साफ हो गया कि वह दो तरफ से घिरा हुआ है। एक तरफ ईरान से सीधा खतरा और दूसरी तरफ लेबनान से हिजबुल्लाह का। इसलिए इजराइल के लिए लेबनान पर हमला करना सिर्फ बदले की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक मजबूरी बन गई है। इजराइल का मानना है कि जब तक हिजबुल्लाह को कमजोर नहीं किया जाता, तब तक ईरान के खिलाफ युद्ध भी पूरी तरह नहीं जीता जा सकता।
आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है
Iran Israel War और लेबनान पर हमलों का सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं। दक्षिणी लेबनान के गांव और बेरूत के कई इलाके खंडहर में बदल चुके हैं। 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से उजड़ गए हैं और शरणार्थी शिविरों में दयनीय हालात में रह रहे हैं। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि लेबनान और खाड़ी क्षेत्र में हजारों भारतीय नागरिक रहते हैं। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित कर रहा है, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Iran Israel War अपने चौथे हफ्ते में है; इजराइल ने 16 मार्च को लेबनान मेंहिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया, जिसमें अब तक करीब 1000 लोग मारे गए और 10 लाख विस्थापित हुए।
- हिजबुल्लाह की स्थापना 1982 में ईरान की IRGC के सहयोग से हुई थी; 2024 में नेता हसन नसरअल्लाह समेत शीर्ष कमांडरों की मौत के बाद ईरान ने 100 IRGC सैनिक भेजकर संगठन को दोबारा खड़ा किया।
- CSIS के अनुसार हिजबुल्लाह के पास 1,20,000 से 2,00,000 रॉकेट-मिसाइलें और 1000 से ज्यादा आत्मघाती ड्रोन हैं।
- फरवरी 2026 में खामेनेई की मौत के बाद हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर रॉकेट दागे, जिससे लेबनान में तबाही का नया दौर शुरू हुआ।
- 11 मार्च को ईरान और हिजबुल्लाह ने मिलकर दो मोर्चों से इजराइल पर हमला किया, जिसके बाद लेबनान पर हमला इजराइल के लिए रणनीतिक मजबूरी बन गई।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: इजराइल लेबनान पर हमला क्यों कर रहा है?
इजराइल लेबनान पर हमला इसलिए कर रहा है क्योंकि वहां सक्रिय हिजबुल्लाह संगठन ईरान की IRGC के नियंत्रण में काम करता है और ईरान के समर्थन में इजराइल पर रॉकेट हमले करता रहा है। इजराइल के लिए हिजबुल्लाह को कमजोर करना ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है।
Q2: हिजबुल्लाह और IRGC का क्या कनेक्शन है?
हिजबुल्लाह की स्थापना 1982 में ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के सहयोग से हुई थी। IRGC आज भी हिजबुल्लाह को हथियार, प्रशिक्षण, धन और रणनीतिक मार्गदर्शन देती है और संगठन पर ईरान का सीधा नियंत्रण बना हुआ है।
Q3: Iran Israel War में अब तक कितना नुकसान हुआ है?
अकेले लेबनान में इजराइली हमलों से करीब 1000 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। इजराइल ने कसमिया पुल सहित कई बुनियादी ढांचे तबाह कर दिए हैं। दक्षिणी लेबनान और बेरूत सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं।













