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The News Air - Breaking News - Today in History March 23: भगत सिंह की शहादत से लेकर Hitler की तानाशाही तक, बड़ी घटनाएं

Today in History March 23: भगत सिंह की शहादत से लेकर Hitler की तानाशाही तक, बड़ी घटनाएं

23 मार्च को इतिहास में दर्ज हुईं दुनिया बदलने वाली घटनाएं: भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फांसी, हिटलर को मिली तानाशाही की ताकत, ISIS खिलाफत का अंत और एलिजाबेथ टेलर का निधन

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
सोमवार, 23 मार्च 2026
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Today in History March 23
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Today in History March 23 का दिन दुनिया के इतिहास में कई ऐसी घटनाओं का गवाह रहा है जिन्होंने पूरी दुनिया की दिशा बदल दी। भारत के लिए यह दिन सबसे पहले शहीद भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर की शहादत के रूप में याद किया जाता है। 23 मार्च 1931 को इन तीनों वीर स्वतंत्रता सेनानियों को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई थी। इसी तारीख को 1933 में जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर को तानाशाही की ताकत मिली, 1775 में पैट्रिक हेनरी ने “Give me liberty or give me death” का ऐतिहासिक नारा दिया, और 2019 में सीरिया में ISIS की पांच साल पुरानी “खिलाफत” का अंत हुआ।

शहीद दिवस: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी (1931)

Today in History March 23 का सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण अध्याय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है। 23 मार्च 1931 को ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी। इन तीनों क्रांतिकारियों पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या और सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने का आरोप था। लाहौर षड्यंत्र केस (Lahore Conspiracy Case) के तहत उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी।

सबसे दर्दनाक बात यह थी कि इन तीनों ने अंग्रेज सरकार से गोली मारकर मौत देने की मांग की थी, लेकिन उनकी यह मांग ठुकरा दी गई। भगत सिंह फांसी के समय मात्र 23 साल के थे, लेकिन उनके विचारों और बलिदान ने पूरे देश में आजादी की लहर को और तेज कर दिया। आज भी 23 मार्च को पूरा भारत ‘शहीद दिवस’ (Martyrs’ Day) के रूप में मनाता है और इन वीरों को श्रद्धांजलि देता है। भगत सिंह का नारा “इंकलाब जिंदाबाद” आज भी लाखों भारतीयों के दिलों में गूंजता है।

पैट्रिक हेनरी का ऐतिहासिक नारा: “Give Me Liberty or Give Me Death” (1775)

Today in History March 23 पर 1775 में अमेरिकी क्रांति का एक निर्णायक क्षण दर्ज हुआ। अमेरिकी स्वतंत्रता सेनानी पैट्रिक हेनरी ने वर्जीनिया की सेना को अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध (American Revolutionary War) में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हुए अपना ऐतिहासिक भाषण दिया। उनके इस भाषण की आखिरी पंक्ति “Give me liberty or give me death” (मुझे आजादी दो या मौत दो) दुनिया के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध नारों में से एक बन गई।

यह भाषण अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी साबित हुआ। पैट्रिक हेनरी ने वर्जीनिया के लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ हथियार उठाने के लिए राजी किया और इसके कुछ ही समय बाद अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध शुरू हो गया, जिसने अंततः अमेरिका को आजादी दिलाई। दिलचस्प बात यह है कि एक ही तारीख पर दो अलग-अलग महाद्वीपों के स्वतंत्रता सेनानियों, पैट्रिक हेनरी और भगत सिंह, ने आजादी के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।

हिटलर को मिली तानाशाही की ताकत: एनेबलिंग एक्ट पारित (1933)

Today in History March 23 पर दुनिया के सबसे काले अध्यायों में से एक की शुरुआत भी हुई। 23 मार्च 1933 को जर्मन संसद (Reichstag) ने जल्दबाजी में ‘एनेबलिंग एक्ट’ (Enabling Act) पारित कर दिया और राष्ट्रपति पॉल वॉन हिंडेनबर्ग ने उसी दिन इस पर हस्ताक्षर कर दिए। इस एक कानून ने एडॉल्फ हिटलर को तानाशाही की असीमित शक्तियां दे दीं।

एनेबलिंग एक्ट ने हिटलर को संसद की सहमति के बिना कानून बनाने का अधिकार दे दिया। यही वह दिन था जब जर्मनी का लोकतंत्र औपचारिक रूप से मर गया और नाजी तानाशाही की शुरुआत हुई। इसके बाद के 12 साल दुनिया ने वो बर्बरता देखी जो मानव इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई थी: द्वितीय विश्व युद्ध (World War II), होलोकॉस्ट (Holocaust) और करोड़ों निर्दोष लोगों की हत्या। यह इतिहास का एक गंभीर सबक है कि कैसे एक कमजोर लोकतंत्र में एक कानून पूरी दुनिया को तबाही की ओर ले जा सकता है।

सोवियत पोलित ब्यूरो की स्थापना (1919) और मुसोलिनी का फासीवादी आंदोलन

23 मार्च 1919 को दुनिया की राजनीति में दो बेहद अहम घटनाएं एक साथ हुईं। रूस में कम्युनिस्ट पार्टी की 8वीं कांग्रेस ने पांच सदस्यीय पोलित ब्यूरो (Politburo) की पुनर्स्थापना की, जो आगे चलकर सोवियत संघ की राजनीतिक सत्ता का केंद्र बन गया। इसके मूल सदस्य थे व्लादिमीर लेनिन, लियोन ट्रॉट्स्की, जोसेफ स्टालिन, लेव कामेनेव और निकोलाई क्रेस्टिंस्की।

ठीक उसी दिन इटली में बेनिटो मुसोलिनी ने मिलान में ‘फासी दी कॉम्बैटिमेंटो’ (Fasci di Combattimento) नामक फासीवादी संगठन की स्थापना की, जो बाद में ‘नेशनल फासिस्ट पार्टी’ बना और इटली पर तानाशाही शासन स्थापित किया। एक ही तारीख पर साम्यवाद और फासीवाद, दोनों ने अपनी जड़ें मजबूत कीं, जिन्होंने आगे चलकर 20वीं सदी की राजनीति और युद्धों को गहरे तक प्रभावित किया।

ओकिनावा का भीषण युद्ध (1945): प्रशांत महासागर की सबसे बड़ी लड़ाई

Today in History March 23 पर 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध का एक और खूनी अध्याय शुरू हुआ। अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने जापान के ओकिनावा द्वीप पर भीषण बमबारी शुरू की, जो मित्र राष्ट्रों के आक्रमण की तैयारी थी। ओकिनावा का युद्ध (Battle of Okinawa) प्रशांत महासागर क्षेत्र (Pacific War) की सबसे बड़ी और सबसे खूनी लड़ाई मानी जाती है।

इस युद्ध में जापानी कामिकेज विमानों (Kamikaze) ने ब्रिटिश नौसेना के जहाज HMS Formidable समेत कई मित्र राष्ट्रों के जहाजों पर हमला किया। ओकिनावा की लड़ाई में दोनों पक्षों के लाखों सैनिक और नागरिक मारे गए। यह लड़ाई इतनी भयावह थी कि इसने अमेरिका को जापान पर परमाणु बम गिराने के फैसले की ओर धकेला, जिसने अंततः द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त किया।

ISIS खिलाफत का अंत (2019): पांच साल के आतंक का खात्मा

23 मार्च 2019 को एक ऐसी खबर आई जिसका पूरी दुनिया को इंतजार था। सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (Syrian Democratic Forces) ने घोषणा की कि इस्लामिक स्टेट (ISIS) का आखिरी इलाका सीरिया के बगूज (Baghuz) में वापस ले लिया गया है। पांच साल तक मध्य पूर्व और दुनिया भर में आतंक मचाने वाली ISIS की स्वघोषित “खिलाफत” (Caliphate) का इसी दिन औपचारिक अंत हुआ।

ISIS ने 2014 में इराक और सीरिया के बड़े हिस्सों पर कब्जा करके अपनी “खिलाफत” की घोषणा की थी। इसके बाद के पांच सालों में दुनिया ने बेहिसाब क्रूरता, नरसंहार और आतंकवादी हमले देखे। बगूज में झंडा फहराना एक प्रतीकात्मक जीत थी, हालांकि ISIS का विचारधारात्मक खतरा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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एवर गिवन जहाज ने रोका स्वेज नहर का रास्ता (2021)

Today in History March 23 पर 2021 में एक अजीबोगरीब लेकिन दुनिया को हिला देने वाली घटना हुई। 400 मीटर लंबा विशालकाय कार्गो जहाज ‘एवर गिवन’ (Ever Given) मिस्र की स्वेज नहर में फंस गया और इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। यह जहाज करीब 6 दिनों तक फंसा रहा, जिससे दुनिया भर के व्यापार में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ।

स्वेज नहर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। एवर गिवन के फंसने से सैकड़ों जहाज दोनों तरफ फंस गए और तेल, गैस, खाद्य पदार्थ और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जरूरी सामान की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई। इस घटना ने दुनिया को यह एहसास कराया कि वैश्विक व्यापार कितना नाजुक और कुछ मुख्य मार्गों पर कितना निर्भर है।

23 मार्च को जन्मे प्रसिद्ध लोग

Today in History March 23 कई महान हस्तियों का जन्मदिन भी है। 1907 में शहीद भगत सिंह का जन्म हुआ, जिन्होंने मात्र 23 साल की उम्र में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। 1910 में जापान के महान फिल्म निर्देशक अकीरा कुरोसावा का जन्म हुआ, जिन्हें मरणोपरांत “एशिया ऑफ द सेंचुरी” का खिताब दिया गया। उनकी फिल्में ‘राशोमोन’ (Rashomon) और ‘सेवन समुराई’ (Seven Samurai) विश्व सिनेमा की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।

1912 में जर्मन-अमेरिकी रॉकेट वैज्ञानिक वर्नर वॉन ब्राउन का जन्म हुआ, जिन्होंने NASA के सैटर्न V रॉकेट का डिज़ाइन तैयार किया जिसने इंसान को चांद पर पहुंचाया। 1905 में हॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री जोन क्रॉफर्ड का जन्म हुआ। इसके अलावा अमेरिकी गायिका चका खान (1953), ब्रिटिश एथलीट रोजर बैनिस्टर (1929, जिन्होंने पहली बार 4 मिनट से कम समय में 1 मील दौड़ लगाई), और NBA के दिग्गज मोसेस मालोन (1955) भी इसी तारीख को पैदा हुए।

23 मार्च को हुए प्रसिद्ध निधन

इस तारीख पर कई महान हस्तियों ने दुनिया को अलविदा कहा। 2011 में हॉलीवुड की महानतम अभिनेत्रियों में से एक एलिजाबेथ टेलर का 79 साल की उम्र में दिल की बीमारी से निधन हो गया। ‘क्लियोपेट्रा’ (Cleopatra) और ‘हूज अफ्रेड ऑफ वर्जीनिया वुल्फ?’ (Who’s Afraid of Virginia Woolf?) जैसी कालजयी फिल्मों में अभिनय करने वाली टेलर ने दो ऑस्कर पुरस्कार जीते और अपने जीवनकाल में मानवतावादी कार्यों के लिए भी जानी गईं।

2015 में आधुनिक सिंगापुर के संस्थापक और पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू का 91 साल की उम्र में निमोनिया से निधन हुआ। उन्होंने 1959 से 1990 तक सिंगापुर पर शासन किया और एक गरीब, छोटे से द्वीप राष्ट्र को दुनिया के सबसे समृद्ध और विकसित देशों में बदल दिया। 2022 में अमेरिका की पहली महिला विदेश मंत्री मेडेलीन ऑलब्राइट का 84 साल की उम्र में कैंसर से निधन हुआ। उन्होंने 1997 से 2001 तक अमेरिका की विदेश नीति का संचालन किया।

23 मार्च की अन्य उल्लेखनीय घटनाएं

Today in History March 23 पर और भी कई दिलचस्प घटनाएं दर्ज हैं। 1743 में जॉर्ज फ्रेडरिक हैंडल की अमर कृति ‘मसीहा’ (Messiah) का लंदन के रॉयल ओपेरा हाउस, कॉवेंट गार्डन में प्रीमियर हुआ, जो पश्चिमी संगीत की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है। 1857 में एलिशा ओटिस ने न्यूयॉर्क शहर में 488 ब्रॉडवे पर अपना पहला एलीवेटर (लिफ्ट) स्थापित किया, जिसने ऊंची इमारतों के निर्माण को संभव बनाया और दुनिया भर के शहरों का चेहरा बदल दिया।

1903 में राइट ब्रदर्स ने पहली बार अपने उड़ने वाली मशीन (Flying Machine) के पेटेंट के लिए आवेदन दिया, जो तीन साल बाद मंजूर हुआ। 1940 में अमेरिका के CBS रेडियो पर “ट्रुथ ऑर कॉन्सीक्वेंसेज” (Truth or Consequences) का पहला प्रसारण हुआ। 1957 में अमेरिकी सेना ने अपने आखिरी होमिंग कबूतरों (Homing Pigeons) को बेच दिया, जो सदियों तक संदेश भेजने का एक विश्वसनीय माध्यम रहे थे। 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ‘अफोर्डेबल केयर एक्ट’ (Affordable Care Act) पर हस्ताक्षर किए, जिसे ‘ओबामाकेयर’ के नाम से जाना गया और जिसने करोड़ों अमेरिकियों के लिए स्वास्थ्य बीमा को सुलभ बनाया।

23 मार्च: एक तारीख जिसने बार-बार इतिहास बदला

Today in History March 23 को समग्र रूप से देखें तो यह तारीख आजादी, तानाशाही, युद्ध, आतंकवाद और मानवीय उपलब्धियों का एक अद्भुत संगम है। एक तरफ भगत सिंह और पैट्रिक हेनरी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी दिन आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, तो दूसरी तरफ हिटलर और मुसोलिनी जैसे तानाशाहों ने इसी तारीख पर अपनी काली ताकत हासिल की। एक ही तारीख पर इतने विरोधाभासी लेकिन दुनिया बदलने वाले घटनाक्रम शायद ही किसी और दिन देखने को मिलें। यह हमें याद दिलाता है कि इतिहास कभी एक सीधी रेखा में नहीं चलता, बल्कि यह उतार-चढ़ाव, संघर्ष और बलिदान से भरा होता है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • शहीद दिवस (1931): भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी दी गई, भारत इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाता है।
  • हिटलर को तानाशाही की ताकत (1933): जर्मन संसद ने एनेबलिंग एक्ट पारित करके हिटलर को असीमित शक्तियां दीं, जिससे नाजी तानाशाही शुरू हुई।
  • ISIS खिलाफत का अंत (2019): सीरिया के बगूज में ISIS का आखिरी इलाका वापस लिया गया, पांच साल की स्वघोषित खिलाफत खत्म हुई।
  • प्रसिद्ध निधन: एलिजाबेथ टेलर (2011), ली कुआन यू (2015), और मेडेलीन ऑलब्राइट (2022) ने इसी तारीख को दुनिया को अलविदा कहा।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: 23 मार्च को शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है?

23 मार्च 1931 को भारत के तीन महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को लाहौर सेंट्रल जेल में अंग्रेजों ने फांसी दी थी। उनके इस सर्वोच्च बलिदान की याद में हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस (Martyrs’ Day) मनाया जाता है।

Q2: 23 मार्च 1933 को जर्मनी में क्या हुआ था?

23 मार्च 1933 को जर्मन संसद (Reichstag) ने एनेबलिंग एक्ट (Enabling Act) पारित किया और राष्ट्रपति हिंडेनबर्ग ने उसी दिन इस पर हस्ताक्षर किए। इस कानून ने एडॉल्फ हिटलर को संसद की सहमति के बिना कानून बनाने की तानाशाही शक्तियां दे दीं, जिससे जर्मनी में लोकतंत्र का अंत हुआ।

Q3: 23 मार्च 2019 को ISIS खिलाफत कैसे खत्म हुई?

23 मार्च 2019 को सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज ने घोषणा की कि ISIS का आखिरी बचा हुआ इलाका सीरिया के बगूज में वापस ले लिया गया है। इसके साथ ही 2014 से चली आ रही ISIS की पांच साल पुरानी स्वघोषित “खिलाफत” का औपचारिक अंत हो गया।

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अभिनव कश्यप

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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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