Frequent Illness After Covid अब एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। कभी पेट खराब, कभी बुखार, कभी खांसी और कभी सिर दर्द से फटने लगता है। अगर हर कुछ दिनों में तबीयत बिगड़ जाती है, दवा लेकर ठीक होते हैं और फिर दोबारा बीमार पड़ जाते हैं, तो समझ लीजिए कि शरीर में कोई ऐसी दिक्कत है जो पूरी तरह ठीक नहीं हुई है। न्यू एरा हॉस्पिटल, नवी मुंबई के सीनियर कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. मनीष पेंडसे ने Frequent Illness After Covid के पीछे की असली वजहें बताई हैं और साथ ही चेतावनी दी है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि साल 2024 में 5 साल से कम उम्र के 49 लाख बच्चों की मौत हो गई, जबकि इनमें से ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती थीं।
Covid के बाद बार-बार बीमार पड़ने की दो सबसे बड़ी वजहें
डॉ. मनीष पेंडसे ने बताया कि Frequent Illness After Covid की सबसे बड़ी वजह यह है कि लोगों ने कोविड के दौरान जो सावधानियां बरती थीं, उन्हें पूरी तरह छोड़ दिया है। कोविड के समय लोग हाथ नहीं धोते थे, बाहर का खाना नहीं खाते थे, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचते थे। लेकिन अब ये सारी सावधानियां खत्म हो गई हैं। यही सबसे बड़ा कारण है कि मरीज बार-बार बीमार पड़कर क्लीनिक में आ रहे हैं।
दूसरा बड़ा कारण है एक्सरसाइज न करना। डॉ. पेंडसे ने कहा कि 90 प्रतिशत लोग 9 से 5 या 9 से 6 काम करते हैं, शनिवार-रविवार को पिक्चर देखते हैं, बाहर खाना खाते हैं, पार्टी करते हैं, लेकिन शरीर के लिए समय ही नहीं निकालते। खासकर महिलाएं वेट ट्रेनिंग से बचती हैं, जबकि इम्यूनिटी बनाने में सबसे ज्यादा कारगर वेट ट्रेनिंग ही है।
Frequent Illness After Covid: इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉ. पेंडसे ने बताया कि गर्म और ह्यूमिड क्लाइमेट में Frequent Illness After Covid की समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे मौसम में शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और सीवियर डिहाइड्रेशन हो जाता है। जिन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए उनमें चक्कर आना, मुंह सूखना, कानों में आवाज आना यानी रिंगिंग ऑफ इयर्स, उल्टी जैसा लगना, पैरों में क्रैंप्स, पेट में दर्द, पेट में गुड़गुड़ होना, लूज मोशंस, और सीवियर हेडेक शामिल हैं।
डॉक्टर ने चेतावनी दी कि इन चिन्हों को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। यही लक्षण आगे चलकर सीवियर हो सकते हैं और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है। इसलिए ऐसा कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर के पास जाएं।
कौन से टेस्ट करवाने पड़ सकते हैं?
डॉ. पेंडसे ने बताया कि Frequent Illness After Covid के लिए कोई एक खास टेस्ट तय नहीं है, लेकिन जब आप डॉक्टर के पास जाएंगे तो सबसे पहले बेसिक पैरामीटर्स चेक होंगे। पल्स और ब्लड प्रेशर चेक करना जरूरी है क्योंकि डिहाइड्रेशन से बीपी कम हो सकता है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट, पेट का सोनोग्राफी, लूज मोशंस होने पर स्टूल टेस्ट यानी संडास की जांच, और खांसी लंबे समय से ठीक न हो रही हो तो छाती का एक्स-रे करवाना पड़ सकता है। बाकी जो भी जरूरी होगा वह डॉक्टर सजेस्ट करेंगे।
बार-बार बीमार पड़ने से कैसे बचें: डॉक्टर की 5 सलाह
डॉ. पेंडसे ने कहा कि “प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर देन क्योर” यानी बीमारी से पहले बचाव करना बेहतर है। Frequent Illness After Covid से बचने के लिए सबसे पहले अपने रहने और काम करने की जगह को साफ रखें। हाथ बार-बार धोएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। बाहर का खाना खाते समय यह सुनिश्चित करें कि जगह हाइजीनिक हो और गंदगी न हो।
बच्चों को धूल-मिट्टी में खेलकर आने के बाद नहलाएं और गर्मी में दिन में कम से कम दो बार नहाएं। एक्सरसाइज हफ्ते में कम से कम चार घंटा जरूर करें। शनिवार-रविवार छुट्टी मिलती है तो दो-दो घंटा दोनों दिन शरीर को दें। जिन्हें रोज समय मिलता है वे 40 से 45 मिनट रोज एक्सरसाइज करें। इसमें दो-तीन दिन कार्डियो और दो-तीन दिन वेट ट्रेनिंग करें। डॉक्टर ने खासतौर पर कहा कि महिलाएं वेट ट्रेनिंग से बचें नहीं, क्योंकि इम्यूनिटी बिल्ड करने में सबसे ज्यादा असरदार वेट ट्रेनिंग ही है।
UN Report Child Mortality 2024: 49 लाख बच्चों की मौत, ज्यादातर बचाई जा सकती थीं
यूएन इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मोर्टेलिटी एस्टिमेशन (UN IGME) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में 5 साल से कम उम्र के 49 लाख बच्चों की मौत हो गई। इसी साल बड़े बच्चों, किशोरों और युवाओं में भी करीब 21 लाख मौतें दर्ज की गईं। सबसे दुखद बात यह है कि इनमें से ज्यादातर मौतें समय पर सही देखभाल से रोकी जा सकती थीं।
नवजात बच्चों की मौत के तीन बड़े कारण सामने आए हैं: समय से पहले पैदा होना, डिलीवरी के समय कॉम्प्लिकेशन और जन्म के बाद इंफेक्शन। एक महीने से पांच साल तक के बच्चों में मौत के सबसे बड़े कारण निमोनिया, डायरिया और मलेरिया हैं। अगर बच्चा कुपोषित है तो ये बीमारियां और भी गंभीर हो जाती हैं। 2024 में सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन यानी गंभीर कुपोषण की वजह से 5 साल तक के 1 लाख से ज्यादा बच्चों की जान चली गई।
हालांकि अच्छी खबर यह है कि 1990 के बाद से 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में करीब 60 प्रतिशत और नवजात बच्चों की मृत्यु दर में 45 प्रतिशत की गिरावट आई है। लेकिन अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है, खासकर अफ्रीका और दक्षिण एशिया में।
भारत में बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा किन बीमारियों से?
पारस हेल्थ, पंचकूला में जनरल पीडिएट्रिक्स की कंसल्टेंट डॉ. अर्पणा बंसल ने बताया कि भारत में बच्चों को निमोनिया, डायरिया और कुपोषण का सबसे ज्यादा खतरा है। निमोनिया से बचाव के लिए बच्चों को समय पर पेंटावेलेंट और PCV वैक्सीन लगवाएं, साफ हवा में रखें, धुएं और प्रदूषण से बचाएं और रोज ब्रेस्ट फीडिंग कराएं।
डायरिया से बचाव के लिए साफ-सफाई, साफ पानी, खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथ धोने की आदत और रोटा वायरस वैक्सीन जरूरी है। कुपोषण से बचने के लिए जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्ट फीडिंग शुरू करें, पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध दें और उसके बाद उम्र के हिसाब से पौष्टिक खाना शुरू करें।
नवजात के पहले 28 दिन: इन लक्षणों पर रखें पैनी नजर
डॉ. अर्पणा बंसल ने चेतावनी दी कि बच्चे के जन्म के बाद के 28 दिन बेहद नाजुक होते हैं। अगर इन दिनों में बच्चा ठीक से दूध न पिए, बहुत सुस्त लगे, बुखार आए, सांस लेने में तकलीफ हो या तेज सांस आए, घरघराहट हो, स्किन-होठ या नाखून पीले पड़ने लगें, बार-बार उल्टी आए, पेट फूले, दस्त लगें, शरीर अकड़ने लगे, दौरे पड़ें, पीलिया हो या नाभि के आसपास लालिमा, सूजन या पस दिखे, तो इन लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। समय पर इलाज से ज्यादातर कॉम्प्लिकेशंस रोके जा सकते हैं।
Protein Water: क्या वाकई जरूरी है या सिर्फ हाइप?
सोशल मीडिया पर इन दिनों Protein Water की खूब चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि इसे पीने से वेट लॉस आसान हो जाता है और मसल्स जल्दी बनते हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है? आर्टिमिस हॉस्पिटल के डाइटेटिक्स डिपार्टमेंट की हेड डॉ. शबाना परवीन ने इस बारे में पूरी जानकारी दी।
डॉ. शबाना ने बताया कि प्रोटीन वाटर दरअसल ऐसा पानी होता है जिसमें वे प्रोटीन आइसोलेट या प्लांट बेस्ड प्रोटीन मिलाया जाता है। यह दिखने में बिल्कुल पानी जैसा होता है लेकिन नॉर्मल पानी सिर्फ प्यास बुझाता है, जबकि प्रोटीन वाटर में प्रोटीन के साथ-साथ विटामिंस भी होते हैं। एक बोतल से लगभग 10 से 20 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है।
प्रोटीन वाटर जिम जाने वालों के लिए ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि वर्कआउट के दौरान मसल्स में छोटे-छोटे टियर्स होते हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए प्रोटीन जरूरी है। इसमें मौजूद प्रोटीन जल्दी पचता है जिससे मसल्स की रिकवरी तेजी से होती है। वेट लॉस में भी थोड़ी मदद मिल सकती है क्योंकि इसे पीने के बाद पेट देर तक भरा रहता है और कैलोरी इंटेक घटता है। लेकिन यह कोई मैजिक ड्रिंक नहीं है।
Protein Water के नुकसान और नैचुरल विकल्प
डॉ. शबाना ने आगाह किया कि प्रोटीन वाटर अक्सर महंगा होता है और कई बार इसमें फ्लेवर्स, प्रिजर्वेटिव्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स मिलाए जाते हैं, जो सेहत के लिए अच्छे नहीं माने जाते। बिना जिम ट्रेनर या डाइटिशियन की सलाह के खुद से प्रोटीन वाटर न लें।
सबसे अच्छा यह है कि डाइट से ही पर्याप्त प्रोटीन लिया जाए। इसके लिए दालें, चने, हरी सब्जियां, अंडे, चिकन, सोया चंक्स, दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही, चीज और पनीर खा सकते हैं। ये नैचुरल प्रोटीन सोर्स न सिर्फ सस्ते हैं बल्कि शरीर को पूरा पोषण भी देते हैं।
Frequent Illness After Covid के पीछे की बड़ी तस्वीर
अगर आप गौर करें तो Frequent Illness After Covid की यह समस्या सिर्फ एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं रह गई है। कोविड ने लोगों को सिखाया था कि हाइजीन कितनी जरूरी है, हाथ धोना, मास्क लगाना, भीड़ से बचना। लेकिन कोविड के बाद लोगों ने ये सारी अच्छी आदतें छोड़ दीं। नतीजा यह है कि हर दो-तीन महीने में क्लीनिक का चक्कर लगाना आम हो गया है। डॉक्टर की बात साफ है: बीमारी का इलाज करने से बेहतर है बीमारी से बचना। हफ्ते में सिर्फ चार घंटे एक्सरसाइज और बुनियादी साफ-सफाई की आदतें अपनाकर लोग अपनी इम्यूनिटी को काफी मजबूत बना सकते हैं। वहीं बच्चों की बात करें तो UN की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अभी भी लाखों बच्चों की जानें बचाने की गुंजाइश है, बस जरूरत है समय पर टीकाकरण, पोषण और सही देखभाल की।
मुख्य बातें (Key Points)
- Frequent Illness After Covid की सबसे बड़ी वजह कोविड के बाद हाइजीन की आदतें छोड़ना और एक्सरसाइज न करना है: हफ्ते में कम से कम 4 घंटे कार्डियो और वेट ट्रेनिंग जरूरी
- UN रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 5 साल से कम उम्र के 49 लाख बच्चों की मौत हुई: निमोनिया, डायरिया और कुपोषण सबसे बड़े कारण, ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती थीं
- नवजात के पहले 28 दिन बेहद नाजुक: बुखार, सुस्ती, सांस में तकलीफ, पीलिया जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं
- Protein Water कोई मैजिक ड्रिंक नहीं, बिना एक्सपर्ट की सलाह के न लें: दालें, अंडे, दूध जैसे नैचुरल सोर्स से पर्याप्त प्रोटीन लें







