Punjab Rajasthan Water Agreement: चंडीगढ़, 19 मार्च। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के एक बड़े खुलासे ने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। 1920 के पुराने जल समझौते के तहत राजस्थान पर पंजाब का 1,44,000 करोड़ रुपये का बकाया है। जब से यह सच्चाई सामने आई, 70 साल तक पंजाब पर राज करने वाली पार्टियाँ एकदम खामोश हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने गुरुवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस, अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधे आड़े हाथों लिया और पूछा कि Punjab Rajasthan Water Agreement का यह सच सामने आने के बाद इन दलों के नेता अचानक चुप क्यों हो गए?
पन्नू का सवाल सीधा और तीखा था। उन्होंने कहा कि जब से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने तथ्यों और सबूतों के साथ यह सिद्ध किया है कि 1920 के समझौते के अंतर्गत राजस्थान को पानी देने के बदले पंजाब का 1,44,000 करोड़ रुपया बकाया है, तब से वे दल जो दशकों तक पंजाब के ‘रखवाले’ बनकर घूमते थे, उनके पास जनता के एक भी सवाल का जवाब नहीं है।
जाखड़ पर सीधा वार: ‘शगूफा’ कहकर जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते
पन्नू का सबसे धारदार हमला सुनील जाखड़ पर था। उन्होंने कहा कि भाजपा के पंजाब अध्यक्ष मुख्यमंत्री मान के Punjab Rajasthan Water Agreement पर किए गए दावे को ‘शगूफा’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते।
पन्नू ने तंज से पूछा कि जाखड़ साहब, जिस कांग्रेस पार्टी में आप पहले थे, आज उसी के वे लोग आपके साथ भाजपा में बैठे हैं जिन्होंने कभी सोने की कुदाली और चाँदी की टोकरी लेकर पंजाब की छाती पर नहरें खुदवाई थीं और पंजाब का पानी दूसरे राज्यों को लुटाया था। उन पुरानी गद्दारियों पर आज आपकी चुप्पी का मतलब पंजाब की जनता बखूबी समझती है।
70 साल की लूट और 4 साल का कमाल: नहरी पानी 22% से 78% तक
पन्नू ने एक के बाद एक ऐसे तथ्य रखे जिन्हें खारिज करना विपक्ष के लिए आसान नहीं। उन्होंने कहा कि जिस पंजाब को इन पारंपरिक पार्टियों ने बंजर होने की कगार पर छोड़ दिया था, मान सरकार ने महज 4 वर्षों में उसे पुनर्जीवित कर दिखाया है।
पहले पंजाब के खेतों तक केवल 22% नहरी पानी पहुँचता था। आज मान सरकार के प्रयासों से यह आँकड़ा 78% तक पहुँच गया है। यह बदलाव सिर्फ एक सरकारी आँकड़ा नहीं है, यह उन हजारों किसान परिवारों की जिंदगी में आई राहत है जो वर्षों से नहर का पानी न मिलने के कारण महँगे ट्यूबवेल पर निर्भर थे और कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे।
दबी नहरें, भू-माफिया और बेनकाब साजिशें: लंबी नहर की वापसी
पन्नू ने बताया कि जो नहरें और सूए पिछली सरकारों ने भू-माफिया के साथ मिलकर दबवा दिए थे, उन्हें मान सरकार एक-एक करके फिर से जीवित कर रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तरनतारन के सरहाली में दबी हुई ‘लंबी नहर’ की बहाली है।
उन्होंने विपक्ष पर तीखा वार करते हुए कहा कि इन दलों को तकलीफ इस बात की नहीं है कि कोई दबी हुई नहर मिल गई। असल तकलीफ यह है कि उस मिट्टी के नीचे दबी उनकी पुरानी साजिशें और गद्दारियाँ भी बाहर निकल आई हैं। जब नहर खुली, तो उसके साथ-साथ दशकों पुराने कारनामे भी बेनकाब हो गए।
Punjab Rajasthan Water Agreement: पंजाब का हक, राजस्थान का बकाया
1920 के जल समझौते के तहत पंजाब का पानी दशकों से राजस्थान को दिया जाता रहा। मुख्यमंत्री मान के अनुसार इस पानी के बदले जो मुआवजा राजस्थान को देना था, वह राशि अब बढ़कर 1,44,000 करोड़ रुपये हो चुकी है जो आज भी बकाया है।
पन्नू ने कहा कि यह राशि पंजाब के किसानों, मजदूरों और आम लोगों पर खर्च हो सकती थी। लेकिन जिन सरकारों के पास इसे वसूलने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने कभी यह मुद्दा नहीं उठाया। Punjab Rajasthan Water Agreement पर अब जब मान सरकार ने यह सवाल खड़ा किया है, तो वही नेता खामोश हैं जो पंजाब का ठेका लेकर चलते थे।
विपक्ष की खामोशी क्या कहती है?
बलतेज पन्नू की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, यह पंजाब की राजनीति की एक नई और गहरी परत उजागर करती है। तीन दशकों से भी अधिक समय तक अलग-अलग रूपों में सत्ता पर काबिज रहे दलों का Punjab Rajasthan Water Agreement जैसे बड़े मुद्दे पर अचानक चुप हो जाना खुद बहुत कुछ बता देता है।
अगर यह दावा महज एक ‘शगूफा’ होता, जैसा जाखड़ ने कहा, तो विपक्ष इसे तुरंत तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर खारिज कर देता। नहरी पानी का 22% से 78% तक पहुँचना एक ऐसा ठोस आँकड़ा है जिसे झुठलाना किसी के लिए भी आसान नहीं है। जब जवाब न हो, तो चुप्पी ही सबसे बड़ी स्वीकृति बन जाती है।
पन्नू ने अंत में पंजाब की जनता को पूरा भरोसा दिलाया कि जब तक मुख्यमंत्री भगवंत मान सत्ता में हैं, पंजाब का एक-एक पैसा और पंजाब के हर हक की पूरी सुरक्षा होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने 19 मार्च को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Punjab Rajasthan Water Agreement पर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार 1920 के जल समझौते के तहत राजस्थान पर पंजाब का 1,44,000 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे 70 साल की पुरानी सरकारों ने कभी नहीं माँगा।
- मान सरकार के 4 साल में पंजाब में नहरी पानी की आपूर्ति 22% से बढ़कर 78% हो गई है और तरनतारन के सरहाली में ‘लंबी नहर’ को भू-माफिया के कब्जे से मुक्त कराकर बहाल किया गया।
- पन्नू ने जाखड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘शगूफा’ कहकर जिम्मेदारी से भागना संभव नहीं, पंजाब के पानी की असली लूट उन्हीं दलों ने की जिनके नेता आज एक साथ बैठे हैं।








