Gold Silver Price Crash ने आज भारतीय बाजार में कोहराम मचा दिया है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण 19 मार्च 2026 को सोना, चांदी और शेयर बाजार — तीनों एक साथ धड़ाम हो गए। सोने में लगभग ₹5,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई और इसका भाव ₹1,49,000 के करीब पहुंच गया, जबकि 10 दिन पहले यह ₹1,60,000 से ऊपर था। चांदी तो और भी बुरी तरह टूटी — ₹15,000 प्रति किलो से ज्यादा की गिरावट के साथ इसकी कीमत ₹2,33,000 प्रति किलो के आसपास आ गई।
सेंसेक्स 2,500 अंक (3.26%) लुढ़ककर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 776 अंक (3.26%) की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,002 पर आ गया। इस गिरावट में निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा डूब गए।
10 दिनों में सोने में ₹11,000 और चांदी में ₹27,000 से ज्यादा की गिरावट
Gold Silver Price Crash की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सोना-चांदी दोनों सुबह से ही गिरावट के साथ खुले थे और जैसे-जैसे दिन बीता, गिरावट का रफ्तार और तेज होता गया। सोने में पिछले 10 दिनों में लगभग ₹11,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट आ चुकी है। 24 कैरेट सोने का भाव ₹15,464 प्रति ग्राम और 22 कैरेट का ₹14,175 प्रति ग्राम पर आ गया।
चांदी का हाल और भी बुरा है। MCX पर चांदी का दाम पिछले 10 दिनों में ₹2,60,000 प्रति किलो से ऊपर चल रहा था, जो अब गिरकर ₹2,33,000 के आसपास आ गया है। MCX सिल्वर फ्यूचर्स (मई 2026) में 1.63% की गिरावट के साथ ₹2,44,150 प्रति किलो पर सेटल हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट सिल्वर 4.3% गिरकर $72.14 प्रति औंस पर आ गया। पिछले महीने भर में सोने में करीब 11% और चांदी में 16% की गिरावट दर्ज हुई है।
युद्ध के बावजूद सोना-चांदी क्यों गिर रहे हैं: तीन बड़े कारण
आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के समय सोना-चांदी को सेफ हेवन माना जाता है और इनकी कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार उलटा हो रहा है। फोर्ब्स और विश्लेषकों के मुताबिक इसके तीन बड़े कारण हैं।
पहला कारण है मजबूत अमेरिकी डॉलर। डॉलर की मजबूती से डॉलर-आधारित एसेट्स जैसे सोना-चांदी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग घटती है। दूसरा कारण है कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें — ब्रेंट क्रूड $110-120 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म हो रही हैं। तीसरा कारण है अमेरिकी फेडरल रिज़र्व का सख्त रुख — फेड ने ब्याज दरें यथावत रखीं और चेतावनी दी कि ऊर्जा कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे माहौल में तेल ही प्राथमिक सेफ हेवन बन जाता है और सोना-चांदी से निवेशक पैसा निकालते हैं।
शेयर बाजार में हाहाकार: ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा डूबे
Gold Silver Price Crash के साथ-साथ शेयर बाजार में भी खूनखराबा मचा। सेंसेक्स 2,500 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी में भी 700 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज हुई। बाजार में 851 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 3,391 शेयरों में गिरावट देखी गई — यानी हर एक बढ़ते शेयर के मुकाबले चार शेयर गिरे।
इंडिया VIX (डर का सूचकांक) में 20% से ज्यादा की बढ़त देखी गई, जो बाजार में भारी अनिश्चितता का संकेत है। सभी सेक्टरों में बिकवाली जारी रही। ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा गिरा। बैंकिंग, IT, मेटल और रियल्टी इंडेक्स में लगभग 3% की गिरावट दर्ज हुई। ऑटो, फाइनेंस और रियल एस्टेट जैसे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर गिरावट में सबसे आगे रहे। HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे ने भी बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया — बैंक का शेयर 8% से ज्यादा गिरा और 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया।
FMCG और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर तुलनात्मक रूप से स्थिर रहे, लेकिन उनमें भी गिरावट देखी गई।
आम निवेशक पर क्या असर पड़ेगा
Gold Silver Price Crash और शेयर बाजार की इस गिरावट का सीधा असर करोड़ों भारतीय निवेशकों पर पड़ रहा है। जिन लोगों ने पिछले कुछ महीनों में ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम या उससे ऊपर सोना खरीदा था, उनका निवेश अभी ₹11,000 प्रति 10 ग्राम तक नुकसान में है। चांदी में निवेश करने वालों को ₹27,000 प्रति किलो से ज्यादा का झटका लगा है।
शेयर बाजार में FPI (विदेशी संस्थागत निवेशक) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और मार्च में उनका रुख पूरी तरह नकारात्मक हो गया है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगर ब्रेंट क्रूड 20% और बढ़ता है, तो एशिया की कंपनियों की कमाई 2% तक घट सकती है और भारतीय कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। एम्के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर ब्रेंट क्रूड $100 से ऊपर कई महीने बना रहा, तो निफ्टी 50 और 10% गिरकर 21,000 के स्तर तक जा सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर किस तरह पड़ रहा है युद्ध का असर
Iran Israel War का भारत पर बहुआयामी असर हो रहा है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85% से ज्यादा आयात करता है। तेल की बढ़ती कीमतों से आयात बिल बढ़ रहा है, चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ रहा है और रुपये पर दबाव है। अगर ब्रेंट क्रूड $130 प्रति बैरल पर 2-3 तिमाही तक बना रहा, तो खुदरा महंगाई (CPI) 5.5% तक पहुंच सकती है, चालू खाता घाटा GDP का 3.2% हो सकता है और GDP ग्रोथ 7% से गिरकर 6.4% पर आ सकती है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव लाती हैं और लंबे समय में बाजार रिकवर करते हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका भी हो सकती है।
जानें पूरा मामला
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हॉर्मूस जलडमरूमध्य बंद कर दिया। इससे वैश्विक तेल सप्लाई 20% प्रभावित हुई और ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल तक पहुंचा। मजबूत डॉलर, बढ़ते तेल दाम और फेड के सख्त रुख ने सोना-चांदी पर दबाव बनाया — सोना 10 दिनों में ₹11,000 और चांदी ₹27,000+ प्रति किलो गिरी। शेयर बाजार में सेंसेक्स 2,500 और निफ्टी 776 अंक टूटा, ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा निवेशकों की संपत्ति का सफाया हुआ। ऑटो, बैंकिंग, IT और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। HDFC बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे ने बैंकिंग सेक्टर पर अलग से दबाव बनाया।
मुख्य बातें (Key Points)
- सोना ₹5,000 गिरकर ₹1,49,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹15,000+ गिरकर ₹2,33,000 प्रति किलो पर आई; 10 दिनों में सोने में ₹11,000 और चांदी में ₹27,000+ की गिरावट।
- सेंसेक्स 2,500 अंक (3.26%) और निफ्टी 776 अंक गिरा, निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा डूबे; ऑटो, बैंकिंग, IT और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित।
- डॉलर की मजबूती, ब्रेंट क्रूड $110-120 और फेड के सख्त रुख ने सोना-चांदी पर दबाव बनाया; तेल इस युद्ध में प्राथमिक सेफ हेवन बना।
- विश्लेषकों की चेतावनी: अगर ब्रेंट $100+ पर कई महीने रहा, तो निफ्टी 21,000 तक गिर सकता है; GDP ग्रोथ 6.4% पर आ सकती है।








