EPFO Minimum Pension Hike को लेकर एक बेहद अहम खबर सामने आई है। संसद की स्थायी समिति ने साफ शब्दों में कह दिया है कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत मिलने वाली मौजूदा ₹1000 प्रतिमाह न्यूनतम पेंशन से सम्मानजनक जीवन गुजारना बिल्कुल संभव नहीं है। समिति ने श्रम और रोजगार मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इस पेंशन की तुरंत और व्यापक समीक्षा की जाए ताकि इसे समय के अनुसार बढ़ाकर एक सम्मानजनक स्तर तक लाया जा सके।
यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब देशभर के लाखों पेंशनधारक अपनी पेंशन को बढ़ाकर ₹7500 प्रतिमाह करने की मांग लगातार उठा रहे हैं। आम पेंशनधारकों के लिए यह खबर उम्मीद की एक बड़ी किरण है, क्योंकि अब सरकार पर संसदीय दबाव बना है कि वह इस मामले में ठोस कदम उठाए।
संसद की स्थायी समिति ने 15वीं रिपोर्ट में क्या कहा
EPFO Minimum Pension Hike की मांग को लेकर श्रम, वस्त्र और कौशल विकास से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 15वीं रिपोर्ट में कई अहम बातें कही हैं। समिति ने स्पष्ट किया है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन पेंशन की राशि लंबे समय से जस की तस बनी हुई है। बढ़ती कीमतों, इलाज के बढ़ते खर्चों और रोजमर्रा की जिंदगी की बढ़ती लागत को देखते हुए ₹1000 प्रतिमाह की रकम पूरी तरह नाकाफी है।
समिति को देशभर के कई पेंशनधारकों, खासकर बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों से शिकायतें मिली हैं। इन लोगों का कहना है कि ₹1000 में बुनियादी जरूरतें तक पूरी नहीं हो पा रहीं। बुढ़ापे में दवाइयों का खर्चा, खाने-पीने की जरूरतें और दैनिक जीवन की अन्य आवश्यकताएं इतनी कम रकम में पूरा कर पाना लगभग नामुमकिन है।
जंतर-मंतर पर तीन दिन का प्रदर्शन: पेंशनधारकों का गुस्सा
EPFO Minimum Pension Hike की मांग को लेकर EPS-95 पेंशनर्स ने 9 मार्च से जंतर-मंतर पर तीन दिवसीय प्रदर्शन भी शुरू किया था। इस प्रदर्शन में देशभर से बड़ी संख्या में पेंशनधारक शामिल हुए और उन्होंने सरकार से अपनी न्यूनतम पेंशन को ₹7500 प्रतिमाह करने की मांग रखी।
यह प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि पेंशनधारकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। सालों से ₹1000 की रकम पर गुजारा करना इन लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब एक कप चाय की कीमत भी ₹10-15 हो चुकी है, तो ₹1000 महीने में एक बुजुर्ग इंसान कैसे अपनी जिंदगी चला सकता है, यह सवाल अब सड़कों से लेकर संसद तक गूंज रहा है।
सरकार पहले से दे रही है आर्थिक सहायता, लेकिन काफी नहीं
संसदीय समिति की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार पहले से ही EPS-95 योजना में आर्थिक सहायता दे रही है। इसके तहत ईपीएफओ के सदस्यों के लिए 1.16% का योगदान और न्यूनतम ₹1000 पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय समर्थन शामिल है।
लेकिन समिति का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह सहायता नाकाफी है। EPFO Minimum Pension Hike के लिए सरकार को बजटीय सहायता बढ़ाने के विकल्प भी तलाशने होंगे ताकि पेंशनधारकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मिल सके। समिति ने श्रम मंत्रालय से कहा है कि वह इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर ले और जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए।
ठेका श्रमिकों का मुद्दा भी उठा: दुर्घटना के बाद मुआवजे में देरी
इस रिपोर्ट में सिर्फ EPFO Minimum Pension Hike का मुद्दा ही नहीं, बल्कि एक और बेहद अहम विषय उठाया गया है और वह है ठेका श्रमिकों यानी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की स्थिति। समिति ने पाया है कि कई कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स नियमित कर्मचारियों जैसा ही काम करते हैं, लेकिन जब कोई दुर्घटना होती है तो उन्हें मुआवजा और राहत मिलने में काफी देरी होती है।
यह स्थिति देश के करोड़ों ठेका श्रमिकों के लिए बेहद चिंताजनक है। ये वो लोग हैं जो कारखानों, निर्माण स्थलों और अन्य जगहों पर जोखिम भरा काम करते हैं, लेकिन मुसीबत आने पर उन्हें सिस्टम के चक्कर काटने पड़ते हैं। समिति ने सरकार से कहा है कि इस मामले में भी कोई बड़ा और ठोस कदम उठाया जाना जरूरी है।
₹1000 से ₹7500: पेंशनधारकों की मांग और जमीनी हकीकत
EPFO Minimum Pension Hike की मांग अचानक नहीं उठी है। EPS-95 के तहत पेंशन पाने वाले ज्यादातर लोग वो हैं जिन्होंने अपनी जवानी के दशकों तक कारखानों, कंपनियों और संस्थानों में मेहनत की। रिटायरमेंट के बाद उन्हें मिलने वाली ₹1000 मासिक पेंशन उनकी उम्मीदों और जरूरतों से कोसों दूर है।
जब देश में एक किलो दाल ₹100-150 और एक किलो सब्जी ₹40-80 तक पहुंच चुकी है, तो ₹1000 में एक पूरे महीने का गुजारा कैसे हो सकता है? यही कारण है कि पेंशनधारक ₹7500 प्रतिमाह की मांग कर रहे हैं। संसदीय समिति की यह सिफारिश इन लोगों की आवाज को और मजबूत बनाती है।
अब सरकार पर है गेंद: क्या होगा आगे का फैसला
संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन ये राजनीतिक और नैतिक दबाव जरूर बनाती हैं। EPFO Minimum Pension Hike को लेकर अब गेंद पूरी तरह श्रम और रोजगार मंत्रालय के पाले में है। मंत्रालय को यह तय करना होगा कि वह इस सिफारिश पर कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से काम करता है।
अगर सरकार इस सिफारिश को मान लेती है तो देशभर के करोड़ों EPS-95 पेंशनधारकों को बड़ी राहत मिलेगी। उनके बुढ़ापे की जिंदगी थोड़ी आसान हो सकती है और उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह फैसला न सिर्फ आर्थिक बल्कि सामाजिक न्याय का भी मामला है।
मुख्य बातें (Key Points)
- संसद की स्थायी समिति ने EPS-95 के तहत ₹1000 न्यूनतम पेंशन को नाकाफी बताते हुए इसे तुरंत बढ़ाने की सिफारिश की है।
- देशभर के पेंशनधारक न्यूनतम पेंशन ₹7500 प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं और जंतर-मंतर पर 3 दिन का प्रदर्शन भी किया।
- समिति ने श्रम मंत्रालय से बजटीय सहायता बढ़ाने और पेंशन की व्यापक समीक्षा करने का सुझाव दिया है।
- ठेका श्रमिकों को दुर्घटना के बाद मुआवजे में देरी का मुद्दा भी उठाया गया और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की गई।








