India Forex Reserves में पिछले एक साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर करीब $716 बिलियन पर आ गया है। एक ही हफ्ते में $11 बिलियन से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है, जो पिछले एक साल में सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि RBI ने लगातार कमजोर हो रहे रुपये को बचाने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर बाजार में बेचे। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी ने इस गिरावट को और गहरा कर दिया है।
India Forex Reserves: आखिर क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) दरअसल वह बाहरी संपत्ति (External Assets) होती है जो किसी भी देश का केंद्रीय बैंक अपने पास रखता है। इसका मकसद होता है कि देश की राष्ट्रीय मुद्रा (National Currency) को स्थिर रखा जा सके और अंतरराष्ट्रीय भुगतान (International Payments) समय पर किए जा सकें।
जैसे अगर भारत को कच्चा तेल (Crude Oil) मंगाना है, सोना खरीदना है या कोई भी आयात (Import) करना है, तो उसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। अगर हमारे पास पर्याप्त India Forex Reserves नहीं होंगे, तो ये सारे काम ठप हो सकते हैं। यही वजह है कि हर देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार एक तरह की वित्तीय सुरक्षा दीवार (Financial Buffer) का काम करता है।
$716 बिलियन का भंडार: कहां-कहां रखा है भारत का पैसा?
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत के कुल India Forex Reserves का ब्योरा कुछ इस तरह है। सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets) का है, जो करीब $563 बिलियन है। इसमें अमेरिकी डॉलर, यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी करेंसी शामिल हैं। दूसरा बड़ा हिस्सा सोने (Gold) का है, जो लगभग $130 बिलियन का है।
एक अहम बात यह समझनी जरूरी है कि RBI यह पैसा नकद (Cash) के रूप में नहीं रखती। यह पैसा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स (US Treasury Bonds), यूरोपियन सरकारी बॉन्ड्स और विभिन्न केंद्रीय बैंकों में जमा के रूप में निवेश किया हुआ होता है, ताकि उस पर थोड़ा-बहुत ब्याज भी मिलता रहे।
इसके अलावा IMF (International Monetary Fund) में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) और रिजर्व पोजीशन भी India Forex Reserves का हिस्सा होती है। SDR एक तरह की अंतरराष्ट्रीय करेंसी जैसी होती है, जो पांच प्रमुख मुद्राओं: डॉलर, यूरो, चीनी युआन, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड पर आधारित है। आपातकालीन स्थिति में भारत SDR का इस्तेमाल करके भुगतान कर सकता है।
सोने की हिस्सेदारी बढ़ी, विदेशी मुद्रा का हिस्सा घटा
India Forex Reserves की संरचना में पिछले कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले कुल भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्ति की हिस्सेदारी 85 से 90% हुआ करती थी, जो अब घटकर 77-78% रह गई है। दूसरी तरफ, सोने की हिस्सेदारी जो पहले महज 6 से 8% थी, वह अब बढ़कर 17-18% हो गई है।
इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक सोच है। दुनिया भर में यह चर्चा तेज हो रही है कि अगर कोई देश ज्यादा मात्रा में डॉलर रखता है, तो अमेरिका कभी भी प्रतिबंध (Sanctions) लगाकर उसे ब्लॉक कर सकता है। रूस के साथ ठीक ऐसा ही हुआ था, जब पश्चिमी देशों ने उसके डॉलर भंडार को फ्रीज कर दिया। लेकिन सोना एक ऐसी संपत्ति है जो हर जगह स्वीकार्य है और किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं है। यही वजह है कि RBI ने सोने का भंडार लगातार बढ़ाया है।
भारत अपना सोना आंशिक रूप से देश के अंदर रखता है, जबकि कुछ हिस्सा बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रखा गया है।
दुनिया में कहां खड़ा है भारत: पांचवें नंबर पर
India Forex Reserves के मामले में भारत इस समय दुनिया में पांचवें नंबर पर है। सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार चीन के पास है, जो करीब $3.6 ट्रिलियन है। इसके बाद जापान के पास $1.3 ट्रिलियन, स्विट्जरलैंड के पास $1 ट्रिलियन से ज्यादा और रूस के पास $800 बिलियन से अधिक है। भारत $716 बिलियन के साथ पांचवें और उसके बाद ताइवान छठे स्थान पर आता है।
एक दिलचस्प सवाल जो अक्सर पूछा जाता है कि अमेरिका इस सूची में क्यों नहीं है? इसका जवाब बहुत सीधा है। फॉरेक्स रिजर्व का मतलब होता है दूसरे देशों की करेंसी को अपने पास रखना। डॉलर अमेरिका की अपनी घरेलू मुद्रा है, इसलिए वह उसे विदेशी मुद्रा भंडार में नहीं गिन सकता। चूंकि डॉलर खुद एक वैश्विक मुद्रा है, इसलिए अमेरिका को बाहर की करेंसी ज्यादा मात्रा में रखने की उतनी जरूरत नहीं पड़ती।
$11 बिलियन से ज्यादा क्यों गिरा India Forex Reserves?
इस बड़ी गिरावट के पीछे चार प्रमुख कारण सामने आए हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।
पहला और सबसे बड़ा कारण: RBI ने रुपये को बचाया। भारतीय रुपया पिछले कुछ समय से भारी दबाव में है। रुपया पहले ही डॉलर के मुकाबले 90 का स्तर पार कर चुका था, लेकिन मध्य पूर्व में जंग शुरू होने के बाद यह गिरकर 92 को भी पार कर गया है। अब चर्चा होने लगी है कि कहीं रुपया 93 या यहां तक कि 100 के स्तर तक तो नहीं चला जाएगा। जब रुपया इतनी तेजी से गिरता है, तो RBI अपने India Forex Reserves में से डॉलर निकालकर बाजार में बेचती है। इससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ती है और रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगता है। अगर RBI ने ऐसा नहीं किया होता, तो रुपया शायद 95 के पार भी जा सकता था।
दूसरा कारण: करेंसी वैल्यूएशन इफेक्ट। India Forex Reserves में सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि यूरो, येन और पाउंड भी शामिल हैं। जब डॉलर मजबूत होता है, तो इन बाकी करेंसियों की कीमत गिर जाती है। डॉलर के मुकाबले इन करेंसियों के कमजोर होने की वजह से भारत के कुल India Forex Reserves की वैल्यू पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, भले ही असल में भंडार उतना न घटा हो।
तीसरा कारण: विदेशी निवेशकों की निकासी (FPI Outflow)। पिछले काफी समय से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में पैसा लगा रहे थे। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। जब वे अपना निवेश वापस लेते हैं, तो रुपये को डॉलर में बदलकर ले जाते हैं, जिससे भारत से डॉलर बाहर जाता है और India Forex Reserves पर सीधा असर पड़ता है।
चौथा कारण: बढ़ा हुआ आयात बिल। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, कमोडिटी महंगी हो रही हैं और सोने के दाम आसमान छू रहे हैं। भारत इन सब चीजों का बड़ा आयातक (Importer) है और आयात का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। जितना ज्यादा आयात बिल बढ़ेगा, उतना ज्यादा India Forex Reserves पर दबाव पड़ेगा।
India Forex Reserves क्यों है देश की जान?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के लिए इसलिए इतना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह कई मोर्चों पर सुरक्षा कवच का काम करता है। सबसे पहले, यह करेंसी स्टेबलाइजेशन (Currency Stabilisation) के लिए जरूरी है, ताकि RBI रुपये को बचा सके। दूसरा, आयात सुरक्षा (Import Security) के लिए अनिवार्य है, क्योंकि बिना फॉरेक्स रिजर्व के भारत कच्चा तेल, उर्वरक (Fertilizer) और दूसरी जरूरी चीजें आयात नहीं कर पाएगा। अभी भारत के पास करीब 10 से 12 महीने के आयात को कवर करने लायक भंडार है।
तीसरा, जब दुनिया में अचानक कोई वित्तीय संकट (Financial Crisis) या तेल का झटका (Oil Shock) आता है, तो यह भंडार सुरक्षा कवच का काम करता है। अभी मध्य पूर्व में जो हालात बने हैं, उनसे भारत इसीलिए निपट पा रहा है क्योंकि उसके पास मजबूत India Forex Reserves है।
चौथा, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां भी किसी देश की साख (Sovereign Credit Worthiness) तय करते समय उसका फॉरेक्स रिजर्व और बाहरी कर्ज (External Debt) देखती हैं। अगर India Forex Reserves बहुत नीचे गिर जाए, तो भारत की क्रेडिट रेटिंग गिर सकती है और सरकार को उधार लेने पर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा।
1991 का संकट: जब भारत के पास सिर्फ $1-2 बिलियन बचे थे
India Forex Reserves की बात हो और 1991 का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। उस दौर में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इतना गिर गया था कि मुश्किल से एक से दो हफ्ते के आयात का पैसा बचा था। भंडार $1-2 बिलियन तक आ गया था। हालात इतने बुरे हो गए कि भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा और IMF से आपातकालीन सहायता लेनी पड़ी।
आज जब हम $716 बिलियन के India Forex Reserves की बात करते हैं, तो 1991 से तुलना करें तो यह एक जमीन-आसमान का फर्क है। उस संकट से भारत ने बहुत कुछ सीखा और उसके बाद से लगातार अपना विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करता गया।
क्या इतनी गिरावट से घबराने की जरूरत है?
एक हफ्ते में $11 बिलियन से ज्यादा की गिरावट सुनने में बड़ी लगती है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक अभी यह उतनी चिंताजनक स्थिति नहीं है। India Forex Reserves पिछले लंबे समय से लगातार बढ़ता रहा है और लगभग अपने ऑल टाइम हाई (All-Time High) के करीब चल रहा था। वहां से थोड़ी गिरावट आना स्वाभाविक है।
भारत का बाहरी कर्ज (External Debt) अभी प्रबंधनीय (Manageable) स्तर पर है। निर्यात आय (Export Earnings) अभी भी बनी हुई है और RBI हालात को अच्छे से संभाल रही है। हालांकि, अगर यह गिरावट लगातार जारी रही और India Forex Reserves अचानक $600 बिलियन या $500 बिलियन तक आ गया, तो यह बड़ी चिंता का विषय बन सकता है। ऐसा होने पर रुपया और तेजी से गिरेगा, आयात की लागत बढ़ जाएगी, महंगाई बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा टूट सकता है।
आगे क्या होगा: ये फैक्टर्स तय करेंगे भविष्य
India Forex Reserves का भविष्य कई अहम कारकों पर निर्भर करेगा। सबसे पहला सवाल यह है कि भारत का निर्यात (Export) बढ़ रहा है या नहीं। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते (Trade Deal) की बातचीत चल रही थी, लेकिन टैरिफ (Tariff) लग गया, जिससे हालात उलझ गए हैं।
दूसरा बड़ा कारक है मध्य पूर्व का तनाव। लाखों भारतीय मध्य पूर्व के देशों में काम करते हैं और वहां से जो पैसा भारत भेजते हैं, उसे प्रेषण (Remittance) कहा जाता है। भारत को हर साल $100 बिलियन से ज्यादा का रेमिटेंस मिलता है, जो India Forex Reserves को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। अगर मध्य पूर्व में जंग और अस्थिरता का असर इन रेमिटेंस पर पड़ा, तो यह भारत के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
आम आदमी पर इसका सीधा असर यह पड़ सकता है कि अगर रुपया और कमजोर होता है, तो पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेश में पढ़ाई सब कुछ और महंगा हो जाएगा। RBI की नजर हर हफ्ते India Forex Reserves के आंकड़ों पर टिकी रहेगी और आने वाले हफ्तों में यह तय होगा कि भारत इस दबाव को कितनी कुशलता से झेल पाता है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- India Forex Reserves एक हफ्ते में $11 बिलियन से ज्यादा गिरकर $716 बिलियन पर आ गया, जो पिछले एक साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
- RBI ने रुपये को बचाने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर बाजार में बेचे, रुपया 92 के पार पहुंच गया है।
- भारत के फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 6-8% से बढ़कर 17-18% हो गई है, जबकि विदेशी मुद्रा का हिस्सा 85-90% से घटकर 77-78% रह गया है।
- 1991 जैसी स्थिति अभी नहीं है, लेकिन अगर गिरावट लगातार जारी रही तो आम आदमी पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।








