Strait of Hormuz को लेकर एक ऐसी बड़ी खबर सामने आई है जो पूरी दुनिया की वित्तीय व्यवस्था को हिलाकर रख सकती है। ईरान ने फैसला किया है कि वह Strait of Hormuz से तेल टैंकरों को गुजरने की इजाजत देगा, लेकिन इसके लिए एक चौंकाने वाली शर्त रखी गई है: जो भी जहाज यहां से गुजरेगा, उसका लेनदेन चीन की करेंसी Chinese Yuan में होना चाहिए। इस एक कदम ने दशकों पुराने Petrodollar System पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है और अमेरिका की चिंता एक झटके में काफी बढ़ गई है।
ईरान ने Strait of Hormuz को बनाया अपना सबसे बड़ा हथियार
ईरान पर जिस तरह से हमला हुआ और उसके बाद ईरान ने जो जवाबी कार्रवाई की, वह शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी। ईरान ने सीधे खाड़ी देशों (Gulf Countries) पर हमला किया, जिससे सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों पर बड़ा संकट आ गया। इन देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह हालात काबू में करे।
लेकिन ईरान का सबसे बड़ा हथियार है Strait of Hormuz। इस जलडमरूमध्य पर ईरान का लगभग पूरा नियंत्रण है। ईरान की सैन्य शाखा IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने इसे इतना असुरक्षित बना दिया है कि बिना ईरान की इजाजत के अब कोई भी जहाज यहां से सुरक्षित नहीं गुजर सकता।
अगर आप ताकत के मामले में ईरान और अमेरिका को आमने-सामने खड़ा करें तो कागज पर ईरान कहीं भी नहीं टिकता। अमेरिका सैन्य ताकत में बहुत आगे है। इसीलिए ईरान ने दबाव बनाने का दूसरा रास्ता खोजा: Strait of Hormuz को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना।
भारत के जहाजों पर भी मंडराया गंभीर खतरा
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने दिया जा रहा है और कई जहाज आए भी हैं, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है। हाल ही में गुजरात की ओर आ रहे एक जहाज पर हमला हो गया, जिसमें कई क्रू मेंबर्स को बचाया गया, लेकिन कुछ लोगों की जान चली गई।
इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि Strait of Hormuz से गुजरना अभी भी कितना जोखिम भरा है। ईरान की रणनीति बिल्कुल साफ है: “अगर हम पर हमला होगा, तो दुनिया की तेल आपूर्ति भी प्रभावित होगी।” यह एक क्लासिकल जियोपॉलिटिकल प्रेशर टैक्टिक्स है, जिसके जरिए ईरान अमेरिका और पश्चिमी देशों पर दबाव बना रहा है।
Chinese Yuan में पेमेंट: क्या है ईरान की नई चाल?
अब ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जो सिर्फ सैन्य दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की वित्तीय ताकत पर सीधा हमला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान Strait of Hormuz से सीमित मात्रा में टैंकर ट्रैफिक को गुजरने की इजाजत देगा, लेकिन सिर्फ उन्हीं जहाजों को जिनका लेनदेन Chinese Yuan में हुआ हो।
अभी तक पूरी दुनिया में तेल का कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता आ रहा है। लेकिन ईरान अब चाहता है कि तेल की कीमत Chinese Yuan में तय हो। पहले से ही रिपोर्ट्स आ रही थीं कि चीनी जहाजों को Strait of Hormuz में प्राथमिकता दी जा रही है, और अब यह Chinese Yuan शर्त उस पूरी तस्वीर को और साफ कर रही है।
ईरान इतना बड़ा कदम क्यों उठा रहा है?
इसके पीछे तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं, जो इस पूरी चाल को समझने के लिए बेहद जरूरी हैं।
पहला कारण: अमेरिकी प्रतिबंधों को बेअसर करना। अमेरिका ने ईरान पर बहुत कड़े प्रतिबंध (Sanctions) लगा रखे हैं। जब भी तेल का भुगतान डॉलर में होता है, तो वह SWIFT सिस्टम और अमेरिकी बैंकों के जरिए जाता है। इसका मतलब है कि अमेरिका कभी भी उस पेमेंट को ब्लॉक कर सकता है, बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर सकता है और किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को ठप कर सकता है। लेकिन अगर तेल का कारोबार Chinese Yuan में हो, तो ईरान अमेरिकी वित्तीय तंत्र को पूरी तरह बायपास कर देगा और प्रतिबंधों का असर काफी हद तक कम हो जाएगा।
दूसरा कारण: चीन को इनाम देना। जब पूरी दुनिया ने ईरान से मुंह मोड़ लिया, तब एक देश जो हमेशा ईरान के साथ खड़ा रहा, वह था चीन। ईरान हर दिन करीब 15 लाख बैरल (1.5 Million Barrels) तेल का निर्यात करता है, जिसका लगभग 80% अकेले चीन खरीदता है। चीन ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का खुलकर विरोध किया, ईरान के साथ व्यापार जारी रखा और संघर्ष के दौरान भी कूटनीतिक संबंध बनाए रखे। अब ईरान Chinese Yuan में व्यापार की शर्त रखकर अपने इस मित्र देश को सीधे तौर पर इनाम दे रहा है।
तीसरा और सबसे बड़ा कारण: Petrodollar System को चुनौती। 1970 के दशक से दुनिया भर में तेल का सारा कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता आ रहा है, जिसे Petrodollar System कहा जाता है। ईरान का यह कदम इस पूरी व्यवस्था की जड़ पर प्रहार करने की कोशिश है। ईरान चाहता है कि Petrodollar System की जगह एक Petro-Yuan System बने, जो अमेरिका की आर्थिक सत्ता को सीधे चुनौती दे सके।
Petrodollar System क्या है और कैसे शुरू हुआ?
Petrodollar System को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। 1973 में दुनिया में एक बड़ा तेल संकट (Oil Crisis) आया, जिसके बाद OPEC देशों ने एकजुट होकर तेल की कीमतें बढ़ा दीं। इस संकट के बाद अमेरिका ने बड़ी चालाकी दिखाई। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एक रणनीतिक समझौता हुआ, जिसके तहत सऊदी अरब ने तय किया कि उसका सारा तेल निर्यात सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी डॉलर में होगा। बदले में अमेरिका ने सऊदी अरब को सैन्य सुरक्षा, अत्याधुनिक हथियार और पूरी सुरक्षा गारंटी देने का वादा किया।
धीरे-धीरे बाकी सभी OPEC देशों ने भी यही व्यवस्था अपना ली। नतीजा यह हुआ कि दुनिया में किसी भी देश को अगर तेल खरीदना है, तो उसके पास डॉलर होना अनिवार्य हो गया। अगर डॉलर नहीं है, तो दुनिया से तेल नहीं खरीद पाओगे। इसी वजह से डॉलर की मांग हमेशा आसमान पर बनी रही और डॉलर दुनिया की सबसे ताकतवर रिजर्व करेंसी बन गया।
Petrodollar System से अमेरिका को कितनी ताकत मिलती है?
Petrodollar System ने अमेरिका को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाने में अहम भूमिका निभाई है। आज भी दुनिया भर के 58 से 60% विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) डॉलर में हैं। यहां तक कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फॉरेक्स रिजर्व में भी डॉलर का सबसे बड़ा हिस्सा है।
इसी वजह से अमेरिका अपनी GDP से भी ज्यादा कर्ज लेकर चलता है, भारी मात्रा में डॉलर छापता रहता है, फिर भी उसे कोई चिंता नहीं होती। कारण सीधा है: डॉलर की डिमांड कभी कम नहीं होती, हर देश चाहता है कि उसके पास डॉलर हो। जिस दिन यह डिमांड खत्म हो जाएगी, उस दिन अमेरिका के लिए बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
इसके अलावा, चूंकि ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय भुगतान अमेरिकी बैंकों और डॉलर क्लियरिंग सिस्टम से होते हैं, इसलिए अमेरिका के पास प्रतिबंध (Sanctions) लगाने की जबरदस्त ताकत है। अमेरिका ने ईरान, रूस और वेनेजुएला जैसे देशों पर प्रतिबंध लगाकर डॉलर सिस्टम को ब्लॉक करके उनकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह तोड़ दिया है।
अमेरिका के लिए क्यों बढ़ गई है चिंता?
ईरान के इस फैसले से अमेरिका को कई मोर्चों पर एक साथ चुनौती मिल सकती है। अगर तेल का कारोबार Chinese Yuan में होने लगा, तो डॉलर का वैश्विक वर्चस्व कमजोर पड़ेगा। अमेरिका की वित्तीय ताकत (Financial Influence) में बड़ी गिरावट आ सकती है। प्रतिबंधों की जो ताकत अमेरिका को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाती है, वह काफी हद तक कम हो जाएगी।
Chinese Yuan का बढ़ता इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पास जो लिवरेज और दबदबा है, उसे सीधे तौर पर कम कर देगा। साथ ही मध्य पूर्व (Middle East) में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ जाएगा, जबकि अमेरिका का प्रभाव उतनी ही तेजी से घटता चला जाएगा। यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक हार साबित हो सकती है।
Chinese Yuan के जरिए चीन को क्या फायदा होगा?
चीन लंबे समय से यह चाहता रहा है कि Chinese Yuan को अमेरिकी डॉलर की तरह दुनिया की रिजर्व करेंसी का दर्जा मिले। अगर तेल का कारोबार Chinese Yuan में शुरू हो गया, तो यह प्रक्रिया बहुत तेजी से आगे बढ़ जाएगी। दुनिया भर के देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में Chinese Yuan रखने लगेंगे, जो चीन की आर्थिक ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।
इसके अलावा, चीन भारी मात्रा में तेल मध्य पूर्व से आयात करता है। अगर Chinese Yuan में ही भुगतान होने लगे, तो चीन को तेल की आपूर्ति की पूरी गारंटी मिल जाएगी और उसे कभी भी तेल लेने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। यह चीन के लिए ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) की दृष्टि से सबसे बड़ा फायदा है।
Petrodollar System पर खतरे के संकेत पहले से दिख रहे थे
यह सच है कि Petrodollar System अभी एकदम से खत्म नहीं होने वाला। लेकिन लंबी अवधि के रुझान (Long-Term Trends) कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। रूस पहले से ही अपना तेल चीन को Chinese Yuan में बेच रहा है। भारत रूस से तेल वैकल्पिक करेंसी (Alternative Currency) में खरीद रहा है। BRICS देश आपस में नॉन-डॉलर ट्रेड सिस्टम पर गंभीरता से बातचीत कर रहे हैं।
अलग-अलग देश अपने-अपने स्तर पर डॉलर से दूरी बना रहे हैं। ईरान का Strait of Hormuz से जुड़ा यह फैसला इस पूरे रुझान को एक बड़ा धक्का दे सकता है और डी-डॉलराइजेशन (De-Dollarization) की प्रक्रिया को और तेज कर सकता है।
यह सिर्फ शिपिंग का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक सत्ता का खेल है
ईरान का यह कदम सिर्फ Strait of Hormuz से जहाजों के गुजरने भर का मामला नहीं है। यह एक बड़ी जियोपॉलिटिकल रणनीति का अहम हिस्सा है, जिसमें तीन मकसद एक साथ साधे जा रहे हैं: Petrodollar System को कमजोर करना, Chinese Yuan को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना, और अमेरिका के प्रतिबंधों की ताकत को खत्म करना।
अगर तेल निर्यातक देश एक-एक करके डॉलर छोड़कर Chinese Yuan की तरफ रुख करने लगे, तो यह Global Financial Order में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत होगी। आम लोगों पर इसका असर यह होगा कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, महंगाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का पूरा ढांचा बदल सकता है। यह एक ऐसा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, जिसके प्रभाव आने वाले कई दशकों तक दुनिया भर में महसूस किए जाएंगे।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए Chinese Yuan में भुगतान की शर्त रखी है।
- ईरान हर दिन 15 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसका 80% अकेले चीन खरीदता है।
- इस कदम से दशकों पुराने Petrodollar System पर बड़ा खतरा मंडराया है और अमेरिका की प्रतिबंध शक्ति कमजोर हो सकती है।
- रूस, भारत और BRICS देश पहले से ही डॉलर से दूरी बना रहे हैं, ईरान का यह फैसला इस रुझान को और तेज कर सकता है।








