Kanshi Ram Bharat Ratna की मांग को लेकर पंजाब विधानसभा ने आज ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रख्यात समाज सुधारक और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक बाबू कांशी राम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग करता प्रस्ताव सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। यह प्रस्ताव पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पेश किया। खास बात यह है कि यह प्रस्ताव बाबू कांशी राम की 92वीं जयंती (15 मार्च) मनाए जाने के ठीक अगले दिन पारित हुआ है। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की गई है कि वह बाबू कांशी राम को मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान करे। पंजाब सरकार इस मजबूत सिफारिश को केंद्र सरकार को भेजेगी। चीमा ने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 2016 में ही औपचारिक रूप से कांशी राम को भारत रत्न देने की मांग की थी।
92वीं जयंती के बाद ऐतिहासिक प्रस्ताव: पूरा सदन एकजुट
Kanshi Ram Bharat Ratna की मांग को लेकर पारित यह प्रस्ताव कई कारणों से ऐतिहासिक है। पहला, यह बाबू कांशी राम की 92वीं जयंती के ठीक अगले दिन पारित हुआ, जो उनकी विरासत को सम्मान देने का सबसे सार्थक तरीका है। दूसरा, इसे पूरे सदन ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया, यानी सत्ता पक्ष AAP और विपक्षी दल दोनों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
बाबू कांशी राम ने भारतीय राजनीति में दलित और पिछड़े समुदायों को एक मजबूत आवाज दी। उनका योगदान किसी एक पार्टी या विचारधारा तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरे समाज में समानता और न्याय का संदेश फैलाया। इसीलिए जब उनके लिए भारत रत्न की मांग की गई तो कोई भी दल विरोध में खड़ा नहीं हुआ।
“असाधारण ईमानदारी के प्रतीक”: चीमा ने कांशी राम को दी श्रद्धांजलि
Kanshi Ram Bharat Ratna प्रस्ताव पेश करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाबू कांशी राम के जीवन और योगदान को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा, “बाबू कांशी राम जी ने बाबा साहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विचारधारा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामाजिक-आर्थिक समानता का संदेश हर घर तक पहुंचाया।”
चीमा ने कांशी राम की ईमानदारी का जिक्र करते हुए कहा, “बाबू कांशी राम जी असाधारण ईमानदारी के प्रतीक थे। उन्होंने अपने नाम पर किसी भी प्रकार की संपत्ति, जमीन या बैंक खाता नहीं रखा और इसी तरह इस दुनिया को अलविदा कहा।” एक राजनीतिक नेता जो जीवनभर सत्ता में रहा और फिर भी अपने नाम पर कोई संपत्ति नहीं रखी, यह अपने आप में एक अद्वितीय उदाहरण है।
गजेटेड ऑफिसर की नौकरी छोड़ी, समाज सेवा को समर्पित किया जीवन
Kanshi Ram Bharat Ratna प्रस्ताव में वित्त मंत्री चीमा ने बाबू कांशी राम के जीवन की सबसे बड़ी कुर्बानी का भी जिक्र किया। चीमा ने बताया कि कांशी राम ने पुणे में एक गजेटेड अधिकारी के रूप में अपना सुरक्षित और प्रतिष्ठित करियर छोड़ दिया ताकि वे जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर सकें।
उन्होंने पहले ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज एम्प्लॉइज फेडरेशन (बामसेफ) की स्थापना की और बाद में सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर बहुजन समाज पार्टी बनाई। BSP के माध्यम से उन्होंने गरीब और मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों युवाओं को राष्ट्रीय राजनीति के मैदान में उतरने के लिए सशक्त किया। कांशी राम का सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि उन्होंने दलित राजनीति को सिर्फ आंदोलन तक सीमित न रखकर सत्ता की राजनीति से जोड़ा।
कांशी राम का जीवन परिचय: रोपड़ से संसद तक का सफर
Kanshi Ram Bharat Ratna प्रस्ताव में चीमा ने कांशी राम के पूरे राजनीतिक सफर पर प्रकाश डाला:
- जन्म: 15 मार्च 1934 को रोपड़ जिले के ख्वासपुरा गांव में
- शिक्षा: सरकारी कॉलेज रोपड़ से स्नातक
- करियर शुरुआत: पुणे में गजेटेड अधिकारी, बाद में नौकरी छोड़ी
- संगठन: बामसेफ की स्थापना, फिर BSP का गठन
- सांसद (1991): उत्तर प्रदेश के इटावा से लोकसभा सांसद
- सांसद (1996): पंजाब के होशियारपुर से लोकसभा सांसद
- राज्यसभा: बाद में राज्यसभा सदस्य
- निधन: 9 अक्टूबर 2006
कांशी राम ने अपने जीवनकाल में भारतीय राजनीति का नक्शा बदल दिया। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में BSP को सत्ता तक पहुंचाना और मायावती को मुख्यमंत्री बनाना उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाती है।
पैतृक गांव में स्कूल, लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम बनाएगी पंजाब सरकार
Kanshi Ram Bharat Ratna प्रस्ताव के साथ पंजाब सरकार ने कांशी राम की विरासत को स्थानीय स्तर पर सम्मान देने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री चीमा ने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ कांशी राम से जुड़े रोपड़ जिले के गांव ख्वासपुरा और आनंदपुर साहिब के पृथीपुर बुंगा का दौरा किया।
पंजाब सरकार ने कांशी राम की विरासत को सहेजने के लिए तीन बड़ी घोषणाएं की हैं:
पहली: एक स्थानीय स्कूल के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए ₹2 करोड़ की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। इस स्कूल का नाम बाबू कांशी राम के नाम पर रखा जाएगा।
दूसरी: कांशी राम के पैतृक गांव ख्वासपुरा में एक उच्च स्तरीय पुस्तकालय (लाइब्रेरी) बनाया जाएगा।
तीसरी: गांव में एक आधुनिक ऑडिटोरियम का भी निर्माण किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए कांशी राम के ऐतिहासिक योगदान को सुरक्षित रखा जा सके।
ये कदम सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं हैं बल्कि कांशी राम की विरासत को जीवित रखने और उनके गांव के युवाओं को शिक्षा और प्रेरणा देने का माध्यम बनेंगे।
केजरीवाल ने 2016 में ही उठाई थी भारत रत्न की मांग
Kanshi Ram Bharat Ratna को लेकर वित्त मंत्री चीमा ने एक अहम बात यह भी बताई कि AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 2016 में ही औपचारिक रूप से बाबू कांशी राम को भारत रत्न देने की मांग की थी। यानी AAP इस मुद्दे पर लंबे समय से आवाज उठा रही है।
चीमा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने बताया कि 9 अक्टूबर 2006 को बाबू कांशी राम के निधन के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार BSP और कांशी राम के समर्थकों की व्यापक मांग के बावजूद दिल्ली में उनके लिए एक स्मारक हेतु उपयुक्त भूमि आवंटित करने में विफल रही थी। यह आरोप महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस खुद को दलित अधिकारों की पैरोकार बताती है, लेकिन जब कांशी राम के स्मारक की बात आई तो उसने कोई कदम नहीं उठाया।
अब केंद्र सरकार पर गेंद: क्या मिलेगा कांशी राम को भारत रत्न
Kanshi Ram Bharat Ratna की मांग अब पंजाब विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव के रूप में केंद्र सरकार के पास जाएगी। सवाल यह है कि BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस सिफारिश पर क्या कदम उठाती है।
भारत रत्न देने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और इसके लिए किसी औपचारिक आवेदन या नामांकन प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति भारत रत्न प्रदान करते हैं।
पंजाब विधानसभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव एक मजबूत संदेश है। लेकिन यह भी सच है कि पहले भी कई राज्य विधानसभाओं ने विभिन्न महापुरुषों के लिए भारत रत्न की मांग की है, जो अभी तक पूरी नहीं हुई। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग को कितनी गंभीरता से लेती है और बाबू कांशी राम को उनका उचित सम्मान मिलता है या नहीं।
कांशी राम का योगदान भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के इतिहास में अतुलनीय है। एक ऐसा व्यक्ति जिसने सरकारी नौकरी छोड़कर दलित आंदोलन को सत्ता की राजनीति से जोड़ा, जिसके नाम पर कोई संपत्ति नहीं थी, जिसने करोड़ों लोगों को राजनीतिक चेतना दी, उसे भारत रत्न मिलना उसके योगदान का सही सम्मान होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब विधानसभा ने बाबू कांशी राम को भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पेश किया, 92वीं जयंती के अगले दिन ऐतिहासिक कदम।
- चीमा ने कहा कांशी राम ने आंबेडकर की विचारधारा घर-घर पहुंचाई, गजेटेड अधिकारी की नौकरी छोड़ी, अपने नाम पर कोई संपत्ति नहीं रखी, बामसेफ और BSP की स्थापना की।
- पैतृक गांव ख्वासपुरा में स्कूल के लिए ₹2 करोड़, पुस्तकालय और ऑडिटोरियम बनाने की मंजूरी, केजरीवाल ने 2016 में ही भारत रत्न की मांग उठाई थी।
- कांग्रेस पर निशाना: 2006 में कांशी राम के निधन के बाद दिल्ली में स्मारक के लिए जमीन नहीं दी, पंजाब सरकार केंद्र सरकार को मजबूत सिफारिश भेजेगी।








