Digital Journalist Rights India को लेकर देशभर के हजारों डिजिटल पत्रकारों के मन में एक बड़ा सवाल हमेशा घूमता रहता है कि क्या कोई DIO (District Information Officer) या कोई भी सरकारी अधिकारी उनके न्यूज पोर्टल या यूट्यूब चैनल की रिपोर्टिंग पर बैन लगा सकता है? क्या कोई अधिकारी यह पूछ सकता है कि आप किस कानून के तहत पत्रकारिता कर रहे हो? और अगर पूछे तो आपके पास इसका क्या जवाब होना चाहिए? आज हम आपको इन सभी सवालों का विस्तृत और कानूनी जवाब देंगे ताकि कोई भी अधिकारी आपको डरा या धमका न सके।
सच्चाई यह है कि भारत में डिजिटल पत्रकारिता करना कोई अपराध नहीं है। बल्कि यह आपका संवैधानिक अधिकार है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि ज्यादातर डिजिटल पत्रकारों को अपने इन अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। जब कोई अधिकारी आक्रामक होकर सवाल करता है तो वे घबरा जाते हैं और कई बार तो रिपोर्टिंग ही बंद कर देते हैं।
संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a): डिजिटल पत्रकारों की सबसे बड़ी ढाल
Digital Journalist Rights India की बात करें तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने का अधिकार आपको किसी सरकारी विभाग ने नहीं बल्कि खुद भारत के संविधान ने दिया है। अनुच्छेद 19(1)(a) यानी “फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन” के तहत भारत के हर नागरिक को अपनी बात कहने, सुनने और सूचना देने तथा पाने का मौलिक अधिकार (Fundamental Right) प्राप्त है।
इसका सीधा मतलब यह है कि आप अपनी अभिव्यक्ति के लिए कोई भी माध्यम अपना सकते हैं। चाहे वह अखबार हो, टीवी चैनल हो, यूट्यूब चैनल हो या फिर कोई न्यूज वेबसाइट। सूचना देने और पाने का अधिकार भी इसी मौलिक अधिकार के दायरे में आता है। तो जब कोई अधिकारी आपसे पूछे कि आप किस हक से पत्रकारिता कर रहे हो, तो आपका पहला और सबसे मजबूत जवाब यही है: “भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a)।”
यह बात हर डिजिटल पत्रकार को अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि Digital Journalist Rights India के तहत आप कोई अपराध नहीं कर रहे। आप उन लोगों की आवाज उठा रहे हैं जिनकी कहीं सुनवाई नहीं होती।
आईटी एक्ट 2000 और आईटी रूल 2021: डिजिटल पत्रकारों का कानूनी ढांचा
संविधान के बाद दूसरा सबसे अहम कानून जो Digital Journalist Rights India को परिभाषित करता है वह है आईटी एक्ट 2000 और उसके तहत बना इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021। इन नियमों को शॉर्ट में आईटी रूल्स 2021 कहा जाता है जो कि 25 फरवरी 2021 को लागू हुए थे।
इन नियमों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्होंने डिजिटल पत्रकारों को एक परिभाषा दी है। इन नियमों के अनुसार जो भी कंटेंट पब्लिशर करंट अफेयर्स यानी समसामयिक घटनाक्रम पर काम करते हैं और न्यूज चैनल की तरह खबरें देने का काम करते हैं, वे “डिजिटल मीडिया” की श्रेणी में आते हैं।
हालांकि एक बात ध्यान रखने वाली है कि ये नियम डिजिटल पत्रकारों को एक कानूनी ढांचा और गाइडलाइंस तो देते हैं, लेकिन कोई रजिस्ट्रेशन नहीं देते। यानी आपको पत्रकारिता करने के लिए किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ नियमों का पालन जरूर करना होता है।
केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट 1995: डिजिटल को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बराबर दर्जा
Digital Journalist Rights India को और मजबूती देने वाला तीसरा कानून है केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट 1995। इस कानून की सबसे अहम बात यह है कि इसमें डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को टीवी मीडिया यानी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के समान काम करने के लिए कहा गया है।
इसका मतलब यह हुआ कि कानून की नजर में एक डिजिटल पत्रकार और एक टीवी पत्रकार में कोई फर्क नहीं है। दोनों को समान अधिकार मिलते हैं। हालांकि इसके लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। जैसे कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इन्फॉर्म करना और थ्री टियर ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम को डेवलप करना।
भारत का राजपत्र (Government Gazette): सबसे मजबूत लिखित सबूत
जब कोई अधिकारी आपसे बहुत आक्रामक होकर पूछे कि “लिखित में कहां लिखा है? कोई डॉक्यूमेंट दिखाओ?” तो आपके पास इसका सबसे पक्का जवाब है: भारत सरकार का राजपत्र (Government Gazette)।
भारत के अंदर कोई भी कानून जब अधिसूचित होता है, जारी होता है या लागू होता है, तो उसकी सूचना सबसे पहले इसी राजपत्र में प्रकाशित होती है। ठीक इसी तरह साल 2021 में डिजिटल मीडिया के लिए भी एक गैजेट पब्लिकेशन हुआ था। इसमें साफ-साफ लिखा गया था कि जो भी कंटेंट पब्लिशर करंट अफेयर्स पर काम करते हैं और न्यूज देने का काम करते हैं, वे डिजिटल मीडिया कहलाएंगे।
इसके अलावा सूचना प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर भी डिजिटल मीडिया आचार संहिता में स्पष्ट रूप से समझाया गया है कि आईटी रूल्स के दायरे में कौन-कौन आते हैं। इस दायरे में समसामयिक घटनाक्रम यानी करंट अफेयर्स पर काम करने वाले पब्लिशर और OTT प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं। तो Digital Journalist Rights India के संदर्भ में यह सबसे मजबूत लिखित प्रमाण है जो कोई भी नकार नहीं सकता।
प्रेस आई कार्ड का सच: डिजिटल पत्रकार इशू कर सकते हैं या नहीं?
अब बात आती है प्रेस आई कार्ड की जो अक्सर डिजिटल पत्रकारों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनती है। इसे समझने के लिए पहले रजिस्टर्ड मीडिया और डिजिटल मीडिया का फर्क जानना जरूरी है।
अगर आप प्रिंट मीडिया चलाते हैं यानी कोई अखबार या पत्रिका निकालते हैं, तो आपको PRGI (Press Registrar General of India) के अंदर रजिस्ट्रेशन मिलता है। इस रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक लीगल राइट मिलता है कि आप देशभर में अपने रिपोर्टर्स को रख सकते हैं और उनको प्रेस आई कार्ड इशू कर सकते हैं। उस प्रेस आई कार्ड के माध्यम से रिपोर्टर्स पूरे देश में सरकारी विभागों, स्कूलों और अन्य स्थानों पर परमिशन प्रोसेस का पालन करते हुए कवरेज कर सकते हैं।
लेकिन यहां एक अहम बात यह है कि जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स हैं, यानी सिर्फ यूट्यूब चैनल या वेबसाइट चलाने वाले, वे सीधे तौर पर प्रेस आई कार्ड जारी नहीं कर सकते क्योंकि उनको ड्यू प्रोसेस के तहत लाइसेंस नहीं मिला है। हालांकि Digital Journalist Rights India के तहत उनकी पत्रकारिता का अधिकार बरकरार रहता है।
इसका एक समाधान यह है कि डिजिटल पत्रकार किसी PRGI रजिस्टर्ड मीडिया संगठन के साथ मीडिया टाई-अप कर सकते हैं। इस टाई-अप के बाद उन्हें उस संगठन के अंतर्गत प्रेस आई कार्ड मिल सकता है और वे पूरे देश में कवरेज कर सकते हैं।
रजिस्टर्ड मीडिया के साथ टाई-अप: डिजिटल पत्रकारों के लिए कैसे फायदेमंद?
Digital Journalist Rights India को व्यावहारिक रूप से मजबूत बनाने का एक बड़ा तरीका यह है कि डिजिटल पत्रकार किसी PRGI रजिस्टर्ड मीडिया हाउस के साथ मीडिया टाई-अप करें। इसके कई फायदे हैं।
पहला और सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको प्रेस आई कार्ड मिलता है जो आपकी पत्रकारिता को एक आधिकारिक पहचान देता है। दूसरा, सामान्य टीवी चैनलों या अखबारों के साथ काम करने में अक्सर एक बड़ी दिक्कत होती है। वे टर्म्स एंड कंडीशंस लगाते हैं कि आप अपना कोई दूसरा प्लेटफॉर्म नहीं चला सकते और जो न्यूज आप उनके लिए कवर कर रहे हैं उसे किसी और को नहीं दे सकते। इसके अलावा एडवर्टाइजमेंट का दबाव भी अलग से होता है।
लेकिन कई प्रगतिशील मीडिया संगठन अब ऐसे टाई-अप ऑफर करते हैं जिनमें डिजिटल पत्रकार स्वतंत्र होकर काम कर सकते हैं, अपनी खुद की टीम बना सकते हैं और अपने लिए रेवेन्यू भी जनरेट कर सकते हैं जो पूरी तरह उनका अपना होता है। यह व्यवस्था ठीक वैसी ही है जैसे किसी रजिस्टर्ड मीडिया का ब्यूरो हेड स्वतंत्र रूप से काम करता है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI): पत्रकारों का आचरण क्या हो?
Digital Journalist Rights India की बात हो और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) का जिक्र न हो, यह संभव नहीं। PCI एक ऐसी संस्था है जो पत्रकारों के आचरण (Code of Conduct) की गाइडलाइंस तय करती है। ये गाइडलाइंस बताती हैं कि एक पत्रकार को किस तरह का व्यवहार करना चाहिए, रिपोर्टिंग में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और पत्रकारिता के मूल सिद्धांत क्या हैं।
हर डिजिटल पत्रकार को PCI की वेबसाइट पर जाकर इन गाइडलाइंस को जरूर पढ़ना चाहिए। ये गाइडलाइंस न सिर्फ आपको एक बेहतर पत्रकार बनाती हैं बल्कि किसी विवाद की स्थिति में आपकी रक्षा भी करती हैं। अगर आप PCI की गाइडलाइंस के अनुसार काम करते हैं तो कोई भी अधिकारी आपकी रिपोर्टिंग पर उंगली नहीं उठा सकता।
डिजिटल पत्रकार कैसे बने इतने मजबूत कि कोई रोक न सके?
भारत में डिजिटल पत्रकारिता का क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बहुत से पत्रकार ऐसे हैं जिन्हें विज्ञापन के दबाव में टीवी चैनलों से निकाल दिया गया, या दम तोड़ रहे प्रिंट मीडिया से बेरोजगार हो गए, या फिर माफिया के खिलाफ उनकी रिपोर्ट को दबा दिया गया। ऐसे पत्रकारों ने अपना खुद का डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है और बेहद साहसी पत्रकारिता कर रहे हैं।
Digital Journalist Rights India के तहत इन सभी पत्रकारों को यह समझना जरूरी है कि उनके पास पांच मजबूत स्तंभ हैं। पहला है संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a)। दूसरा है आईटी एक्ट 2000 और आईटी रूल्स 2021। तीसरा है केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट 1995। चौथा है भारत सरकार का राजपत्र जो लिखित प्रमाण है। और पांचवां है MIB द्वारा डिजिटल मीडिया को दी गई मान्यता।
जब ये पांचों चीजें आपके पास हैं तो कोई भी DIO या कोई भी अधिकारी आपकी पत्रकारिता पर मनमाना बैन नहीं लगा सकता। हां, अगर आप किसी कानून का उल्लंघन करते हैं, गलत खबर चलाते हैं या PCI की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हैं, तो कानूनी कार्रवाई अलग बात है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि आपके पास सरकारी रजिस्ट्रेशन नहीं है, कोई आपकी रिपोर्टिंग नहीं रुकवा सकता।
क्या है थ्री टियर ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम?
आईटी रूल्स 2021 के अनुसार हर डिजिटल न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनल को एक थ्री टियर ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम बनाना होता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई व्यक्ति आपकी किसी खबर से असंतुष्ट है तो उसकी शिकायत के लिए तीन स्तर पर व्यवस्था होनी चाहिए। पहला स्तर संगठन स्तर पर होता है, दूसरा स्व-नियामक निकाय (Self-Regulatory Body) स्तर पर और तीसरा सरकारी स्तर पर। Digital Journalist Rights India को मजबूत बनाने के लिए यह सिस्टम बेहद जरूरी है क्योंकि यह आपकी पत्रकारिता को एक संस्थागत ढांचा देता है।
आम डिजिटल पत्रकारों पर इसका क्या असर पड़ता है?
अगर आप एक डिजिटल पत्रकार हैं और किसी जिले में रिपोर्टिंग करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है। कई बार ऐसा होता है कि स्थानीय अधिकारी डिजिटल पत्रकारों को कवरेज से रोकते हैं, उनसे बदतमीजी करते हैं या उन्हें धमकाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर आपको अपने अधिकारों की पूरी जानकारी है तो आप न सिर्फ आत्मविश्वास से काम कर सकते हैं बल्कि गैर-कानूनी रोक-टोक के खिलाफ कानूनी कदम भी उठा सकते हैं।
Digital Journalist Rights India के तहत कोई भी DIO या जिला स्तर का अधिकारी किसी डिजिटल न्यूज पोर्टल की रिपोर्टिंग पर बैन नहीं लगा सकता, बशर्ते वह पोर्टल कानूनी दायरे में रहकर काम कर रहा हो। किसी भी बैन या प्रतिबंध के लिए उचित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
मुख्य बातें (Key Points)
- संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) हर डिजिटल पत्रकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी भी माध्यम से पत्रकारिता करने का मौलिक अधिकार देता है।
- आईटी रूल्स 2021 और केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट 1995 डिजिटल पत्रकारों को कानूनी परिभाषा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समान दर्जा प्रदान करते हैं।
- डिजिटल पत्रकार सीधे तौर पर प्रेस आई कार्ड जारी नहीं कर सकते, लेकिन PRGI रजिस्टर्ड मीडिया संगठन के साथ मीडिया टाई-अप करके यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
- कोई भी DIO या सरकारी अधिकारी बिना उचित न्यायिक प्रक्रिया के किसी डिजिटल न्यूज पोर्टल की रिपोर्टिंग पर मनमाना बैन नहीं लगा सकता।








