Aadhaar Card DOB Change Rule को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है जो देश के करोड़ों आधार कार्ड धारकों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। आधार कार्ड में जन्मतिथि (डेट ऑफ बर्थ) को बार-बार बदलने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इस नए नियम के तहत अब आधार में जन्मतिथि में संशोधन केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकेगा। यह नया नियम 24 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है और अब सभी आधार सेवा केंद्रों पर इसका पालन किया जा रहा है।
क्यों लिया गया Aadhaar Card DOB Change Rule पर यह सख्त फैसला?
UIDAI ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पिछले कुछ समय में आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलवाने के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई। कई लोग सरकारी नौकरी, पेंशन, बीमा या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी जन्मतिथि में हेरफेर करवा रहे थे। इससे आधार डेटाबेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे थे।
UIDAI का साफ कहना है कि किसी भी व्यक्ति की जन्मतिथि एक ही होती है और सामान्य परिस्थितियों में इसे बदलने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य आधार डेटाबेस की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है ताकि नागरिकों की पहचान से जुड़ी जानकारी पूरी तरह सही और प्रमाणिक बनी रहे।
किन हालात में मिलेगी Aadhaar Card DOB Change की इजाजत?
Aadhaar Card DOB Change Rule के तहत UIDAI ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में ही जन्मतिथि में सुधार की अनुमति दी जाएगी। ये परिस्थितियां हैं जब आधार नामांकन के दौरान ऑपरेटर की गलती से जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई हो, जब अनुमानित जानकारी दर्ज कर दी गई हो या जब आवेदक ने गलत दस्तावेज दे दिए हों।
हालांकि इन मामलों में भी सुधार तभी किया जाएगा जब संबंधित व्यक्ति के पास प्रमाणित और सत्यापन योग्य दस्तावेज उपलब्ध हों। बिना सही दस्तावेजों के अब कोई भी व्यक्ति अपनी जन्मतिथि नहीं बदलवा सकेगा, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो।
बर्थ सर्टिफिकेट बना सबसे अहम दस्तावेज
Aadhaar Card DOB Change Rule के नए दिशानिर्देशों में UIDAI ने जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में सबसे अधिक मान्य और कानूनी दस्तावेज करार दिया है। यह सबसे बड़ा बदलाव है जो सीधे तौर पर करोड़ों लोगों को प्रभावित करेगा।
नए नियम के मुताबिक अगर किसी आधार धारक ने पहले ही जन्म प्रमाण पत्र को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जमा करा दिया है, तो सामान्य परिस्थितियों में दोबारा जन्मतिथि में बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी। यानी एक बार बर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर जन्मतिथि दर्ज हो गई तो उसे बदलना लगभग असंभव हो जाएगा।
यह नियम इसलिए बनाया गया है क्योंकि जन्म प्रमाण पत्र सरकार द्वारा जारी किया गया सबसे प्रमाणिक दस्तावेज है और इसमें दर्ज जन्मतिथि को सबसे विश्वसनीय माना जाता है। अगर इसके बाद भी कोई बदलाव चाहता है तो उसके पास ठोस और कानूनी रूप से मान्य कारण होना चाहिए।
बच्चों के लिए भी लागू हुई नई व्यवस्था
Aadhaar Card DOB Change Rule के तहत बच्चों के आधार नामांकन के लिए भी नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। UIDAI ने बच्चों की उम्र के हिसाब से अलग-अलग नियम बनाए हैं।
5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के आधार नामांकन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य दस्तावेज होगा। इसके बिना छोटे बच्चों का आधार नामांकन नहीं हो सकेगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि शुरू से ही सही जन्मतिथि दर्ज हो और बाद में बदलाव की जरूरत ही न पड़े।
वहीं 5 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए डिजिटल रूप से सत्यापित जन्म प्रमाण पत्र को स्वीकार किया जाएगा। डिजिटल सत्यापन से दस्तावेजों में हेरफेर की संभावना कम हो जाएगी और प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी।
विवाहित महिलाओं के लिए क्या है विशेष प्रावधान?
Aadhaar Card DOB Change Rule में विवाहित महिलाओं के लिए एक खास प्रावधान रखा गया है। अगर किसी महिला ने विवाह के बाद अपना नाम बदल लिया है और उसके साथ जन्मतिथि में भी सुधार की आवश्यकता है, तो उसके लिए कुछ विशिष्ट दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे।
ऐसे मामलों में विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) या पुराने और नए नाम वाले आधार दस्तावेज प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जा सकते हैं। यह प्रावधान इसलिए जरूरी था क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं विवाह के बाद अपना नाम बदलती हैं और कई बार इसके साथ अन्य जानकारियों में भी सुधार की जरूरत पड़ती है।
पासपोर्ट या मैट्रिक सर्टिफिकेट से बदली थी DOB? अब देने होंगे प्रमाणित दस्तावेज
UIDAI ने Aadhaar Card DOB Change Rule में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी व्यक्ति ने पहले जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र की जगह पासपोर्ट, मैट्रिक प्रमाण पत्र या कोई अन्य दस्तावेज जमा किया था और अब उसे सुधार करवाना है, तो उसे प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
यानी अब सिर्फ कोई भी दस्तावेज देकर जन्मतिथि नहीं बदलवाई जा सकती। UIDAI हर मामले में दस्तावेजों की गहराई से जांच करेगा और तभी बदलाव की अनुमति देगा।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
Aadhaar Card DOB Change Rule का सीधा असर देश के उन करोड़ों लोगों पर पड़ेगा जिनके आधार कार्ड में जन्मतिथि गलत दर्ज है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में, जिनकी जन्मतिथि आधार नामांकन के समय अनुमानित तौर पर दर्ज कर दी गई थी। ऐसे लोगों को अब सही दस्तावेज जुटाने होंगे।
जिन लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए यह नया नियम चुनौती बन सकता है। ग्रामीण भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोगों के पास बर्थ सर्टिफिकेट नहीं है क्योंकि उनका जन्म अस्पताल की जगह घर पर हुआ था और जन्म पंजीकरण नहीं करवाया गया। ऐसे लोगों को पहले अपना जन्म प्रमाण पत्र बनवाना होगा और उसके बाद ही आधार में सुधार करवा सकेंगे। UIDAI का यह कदम भले ही डेटाबेस की शुद्धता के लिए जरूरी है, लेकिन उन आम लोगों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन सकता है जो पहले से ही सरकारी कागजात की उलझनों में फंसे हुए हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- Aadhaar Card DOB Change Rule के तहत UIDAI ने नई SOP जारी की, अब सामान्य परिस्थितियों में आधार में जन्मतिथि नहीं बदली जा सकेगी।
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) को सबसे अधिक मान्य दस्तावेज माना गया, एक बार बर्थ सर्टिफिकेट जमा होने के बाद दोबारा DOB बदलने की अनुमति नहीं होगी।
- 5 साल से कम के बच्चों के लिए बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य, 5-18 साल के बच्चों के लिए डिजिटल सत्यापित बर्थ सर्टिफिकेट स्वीकार होगा।
- नया नियम 24 दिसंबर 2025 से प्रभावी है, विवाहित महिलाओं के लिए विवाह प्रमाण पत्र से DOB सुधार का विशेष प्रावधान रखा गया है।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








