ESMA LPG Supply India : अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट से तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह बाधित हो रही है और इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। इसी खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे देश में Essential Services Maintenance Act (ESMA) यानी आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम लागू कर दिया है। इसका मकसद साफ है: देश में घरेलू LPG (Liquefied Petroleum Gas) यानी कुकिंग गैस सिलेंडर की सप्लाई किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सरकार ने गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी अहम बदलाव किया है, जिसका सीधा असर करोड़ों घरों की रसोई पर पड़ेगा।
क्या है ESMA और इसे लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी
28 फरवरी 2026 से शुरू हुई इजराइल, अमेरिका और ईरान की जंग ने मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। जंग के चलते देश में कुकिंग गैस का संकट गहराता नजर आ रहा था और आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की आशंका भी बन रही थी। इसी स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने देश भर में ESMA लागू करने का फैसला लिया।
ESMA दरअसल 1968 में बनाया गया एक कानून है जिसका मकसद देश की उन सेवाओं को हर हाल में चालू रखना है जो आम लोगों के जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं। इनमें बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन और ईंधन सप्लाई जैसी अहम सेवाएं शामिल हैं। ESMA LPG Supply को लेकर लागू करने का मतलब है कि अब गैस सप्लाई से जुड़े कर्मचारी किसी भी बहाने से काम बंद नहीं कर सकते।
ESMA तोड़ा तो 6 महीने की जेल और जुर्माना
ESMA लागू होने के बाद इस कानून के तहत अगर कोई कर्मचारी हड़ताल पर जाता है या काम करने से मना करता है तो वह हड़ताल पूरी तरह अवैध (Illegal) मानी जाएगी। ऐसे कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है और उसे 6 महीने की जेल और जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है। बंद या कर्फ्यू के दौरान भी कर्मचारी काम पर न आने का बहाना नहीं बना सकते।
यह ESMA 6 महीने के लिए लागू किया जाता है और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार इसकी अवधि को आगे भी बढ़ा सकती है। हालांकि यह केंद्र सरकार का कानून है, लेकिन राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर अलग से इसे अपने राज्य में लागू कर सकती हैं। यानी ESMA LPG Supply चेन को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने कानूनी ढाल तैयार कर ली है।
रिफाइनरियों को मिला LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश
ESMA के साथ-साथ सरकार ने एक और अहम आदेश जारी किया है। देश की सभी रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को निर्देश दिया गया है कि वे LPG का उत्पादन अधिकतम स्तर पर करें। जरूरत पड़ने पर दूसरे ईंधनों (Fuels) की सप्लाई कम करके गैस सिलेंडर की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए अहम हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को भी LPG उत्पादन में डायवर्ट किया जाएगा। सरकार का साफ संदेश है कि घरेलू कुकिंग गैस की सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट या कमी स्वीकार नहीं की जाएगी।
इन सेक्टरों को मिलेगी 100% गैस सप्लाई
सरकार के नए आदेश के मुताबिक कुछ सेक्टरों को गैस सप्लाई में सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें शामिल हैं:
- घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG)
- वाहनों के लिए CNG
- LPG उत्पादन
- गैस पाइपलाइन ऑपरेशन
इन सभी प्राथमिकता वाले सेक्टरों को पिछले 6 महीनों की औसत खपत के करीब 100% तक गैस सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। यानी आम लोगों की रसोई और वाहनों का ईंधन किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होगा।
इन सेक्टरों की गैस सप्लाई में होगी कटौती
ESMA LPG Supply को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने कुछ सेक्टरों की गैस सप्लाई में कटौती का भी फैसला लिया है। इनमें शामिल हैं:
- उर्वरक (Fertilizer) प्लांट्स: इन्हें लगभग 70% गैस सप्लाई दी जाएगी।
- चाय उद्योग और अन्य इंडस्ट्री: इन्हें करीब 80% सप्लाई मिलेगी।
- रिफाइनरियां: इनका गैस आवंटन घटाकर लगभग 65% तक किया जा सकता है।
यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि घरेलू LPG की सप्लाई पर कोई भी असर न पड़े और आम लोगों को गैस सिलेंडर मिलने में कोई दिक्कत न हो।
सिलेंडर बुकिंग का नियम बदला: अब 25 दिन का इंतजार
ESMA LPG Supply के तहत उठाए गए कदमों में सबसे अहम बदलाव गैस सिलेंडर बुकिंग के नियम में किया गया है। पहले दो सिलेंडर बुकिंग के बीच 21 दिन का अंतर रखा जाता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। यानी अगर आपने एक सिलेंडर बुक कराया है तो अगली बुकिंग के लिए आपको कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए उठाया गया है। मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से लोगों में घबराहट फैली हुई है और इसी पैनिक के चलते सिलेंडर बुकिंग में 15 से 20% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। ब्लैक में सिलेंडर बेचने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए यह नया नियम लागू किया गया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ेंगी
आम लोगों के लिए एक बड़ी राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी। तेल कंपनियां अभी लागत का दबाव खुद वहन करेंगी। हालांकि यह स्थिति कब तक बनी रहेगी, यह मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात पर निर्भर करेगा।
74 दिनों का तेल भंडार मौजूद: सरकार ने दी तसल्ली
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश में फिलहाल LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। भारत के पास अभी करीब 74 दिनों का कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार उपलब्ध है। यानी किसी भी वैश्विक संकट के बीच देश की ऊर्जा सप्लाई को सुनिश्चित रखने की पूरी तैयारी है। ESMA LPG Supply चेन को सुरक्षित रखने, रिफाइनरियों को अधिकतम उत्पादन का आदेश और 74 दिनों के भंडार के साथ सरकार ने एक मजबूत रणनीति तैयार की है।
आम आदमी के लिए इस फैसले का क्या मतलब है
ESMA LPG Supply से जुड़े इस पूरे फैसले का सीधा मतलब है कि आम लोगों को अपनी रसोई के लिए कुकिंग गैस मिलने में दिक्कत नहीं होगी। सरकार ने हर स्तर पर तैयारी कर ली है कि चाहे मिडिल ईस्ट में जंग कितनी भी लंबी चले, भारत की ऊर्जा सप्लाई बाधित नहीं होगी। हालांकि सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर रखने से कुछ लोगों को असुविधा हो सकती है, लेकिन यह कदम जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है।
अब देखना होगा कि मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध वैश्विक ऊर्जा बाजार को कितना प्रभावित करता है और सरकार की यह रणनीति लंबे समय तक कितनी कारगर साबित होती है। फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में घरेलू गैस की सप्लाई हर हाल में जारी रखी जाएगी और देशवासियों को कोई भी परेशानी नहीं होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते केंद्र सरकार ने पूरे देश में ESMA लागू किया ताकि LPG सप्लाई बाधित न हो, हड़ताल करने पर 6 महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान।
- गैस सिलेंडर बुकिंग के बीच का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगे।
- रिफाइनरियों को आदेश दिया गया कि LPG उत्पादन अधिकतम करें, घरेलू गैस और CNG सेक्टरों को 100% सप्लाई दी जाएगी जबकि उर्वरक और अन्य इंडस्ट्री की सप्लाई में कटौती होगी।
- भारत के पास 74 दिनों का तेल भंडार मौजूद है और कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ाई जाएंगी।








