Iran US War : मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने 10 मार्च 2026 को एक और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने साफ कर दिया है कि इस युद्ध का अंत अब अमेरिका या इजराइल नहीं बल्कि ईरान तय करेगा। IRGC ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हाथ से बाजी पूरी तरह फिसल चुकी है और इलाके के समीकरण अब ईरानी सेना के हाथों में हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत हुई है जिसमें Iran War पर युद्ध विराम की चर्चा की गई।
ट्रंप ने किया दावा, IRGC ने दिया करारा जवाब
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि Iran US War में अमेरिका काफी आगे चल रहा है और ईरान की सैन्य ताकत को तकरीबन खत्म कर दिया गया है। ट्रंप ने कहा था कि “मुझे लगता है कि युद्ध लगभग खत्म हो चुका है क्योंकि अब ईरान के पास कोई सेना नहीं है।” लेकिन IRGC ने इस बयान का करारा जवाब देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना जंग खत्म करने की स्थिति में ही नहीं है। चीजें पूरी तरह ईरान के पक्ष में हैं और युद्ध खत्म करने का फैसला अब तेहरान की तरफ से लिया जाएगा। IRGC ने साफ कहा कि इलाके के भविष्य की स्थिति अब ईरानी सेना के हाथों में है।
ईरान ने किया युद्ध विराम से साफ इनकार
ईरान ने Iran US War में किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि भले ही अमेरिका और इजराइल युद्ध विराम की अपील करें, लेकिन यह तभी संभव होगा जब ईरान को पूरा भरोसा हो कि ये दोनों देश दोबारा हमला नहीं करेंगे और अपने कार्यों की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार कर लें।
IRGC ने कहा कि “वो यूं ही हमारे पास आकर युद्ध विराम की बात नहीं कर सकते और हम हां कह दें। हमारा पलड़ा भारी है। उनकी योजनाएं विफल हो गई हैं और वे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं।” इसके साथ ही तेहरान ने और भी शक्तिशाली मिसाइलों के इस्तेमाल की कसम खा ली है, जिससे यह साफ हो गया है कि जंग और भयंकर होने वाली है।
ट्रंप-पुतिन फोन कॉल: युद्ध विराम पर हुई चर्चा
ईरान के बढ़ते हमलों के बीच ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने Iran War और यूक्रेन के हालात पर चर्चा की। ट्रंप ने बातचीत के बाद बताया कि पुतिन ने कहा है कि रूस ईरान जंग को खत्म कराने में मदद करना चाहता है। हालांकि एक तरफ ट्रंप युद्ध विराम के संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह दावा भी किया कि पिछले तीन ठिकानों के नष्ट होने के बाद ईरान ग्रेनाइट की चट्टानों के नीचे गहराई में नया न्यूक्लियर सेंटर बना रहा है ताकि वह अपनी सैन्य ताकत को दोबारा खड़ा कर सके।
ट्रंप का यह भी दावा है कि पिछले 10 दिनों में अमेरिका ने 51 ईरानी जहाज डुबो दिए हैं और हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ट्रंप के इन बयानों ने Iran US War को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।
ईरान के स्लीपर सेल्स एक्टिव: अमेरिका के लिए खतरे की घंटी
Iran US War के बीच एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अपने स्लीपर सेल्स एक्टिव कर दिए हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरानी मूल का एक इनक्रिप्टेड मैसेज पकड़ा है। एबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार यह सिग्नल 28 फरवरी 2026 को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनई की मौत के तुरंत बाद आया था। हालांकि इस मैसेज में सटीक क्या लिखा था, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
खाड़ी देशों में ईरानी हमलों से तबाही का मंजर
Iran US War का असर अब सिर्फ ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहा है। ईरान के जारी हमलों ने खाड़ी देशों में हाहाकार मचा दिया है। IRGC ने हाईफा में इजराइली ऊर्जा ढांचे पर हमले का दावा किया है। क़तर में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क किया है, जबकि तुर्की और सऊदी अरब से अमेरिकी डिप्लोमेट्स को वापस बुला लिया गया है।
यूएई में ड्रोन और मिसाइलों की आवाजों से खौफ का माहौल बना हुआ है। बहरीन में एक आवासीय इमारत पर ईरानी हमले में एक महिला की मौत हुई और आठ अन्य लोग घायल हो गए। सऊदी अरब ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया ने यूएई को मिसाइलें भेजने और अपने निगरानी विमानों से खाड़ी देशों की रक्षा में मदद करने का फैसला लिया है।
ईरान में भी जनता पर पड़ रहा भारी असर
Iran US War में ईरान को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान के तेल डिपो पर हुए हमलों ने देश में लोगों का बाहर निकलना बेहद मुश्किल कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने सभी नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी है क्योंकि हवा में प्रदूषकों (पॉल्यूटेंट्स) की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ चुकी है, जो लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है।
इस जंग का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। एक तरफ खाड़ी देशों में करोड़ों लोग खौफ में जी रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के अंदर भी नागरिकों का जीना मुश्किल हो गया है। तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छू रही हैं जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
ट्रंप का मिशन ईरान कैसे हुआ बैकफायर
डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशें ईरान में तख्तापलट करने, उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद कराने और ईरान के तेल भंडार पर कब्जा जमाने की थीं। लेकिन यह सारी कोशिशें अब पूरी तरह नाकाम हो चुकी हैं। ट्रंप का “मिशन ईरान” उन पर ही बैकफायर कर गया है। ईरान ने न सिर्फ अपनी सैन्य ताकत बनाए रखी है बल्कि IRGC ने खुलकर कहा है कि वैश्विक ऊर्जा और वैश्विक अर्थव्यवस्था की जो हालत है, वह ईरान की ताकत का सबूत है।
जो जंग अमेरिका और इजराइल ने मिलकर शुरू की थी, उसमें अब गेंद पूरी तरह ईरान के पाले में नजर आ रही है। ट्रंप एक तरफ युद्ध विराम की बात करते हैं और दूसरी तरफ ईरान की सैन्य ताकत खत्म होने के दावे करते हैं। उनके इन विरोधाभासी बयानों ने स्थिति को और उलझा दिया है। मिडिल ईस्ट की इस जंग का कोई अंत फिलहाल नजर नहीं आ रहा और पूरी दुनिया की नजरें इस संकट पर टिकी हुई हैं।
जानें पूरा मामला
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी जिसका मकसद ईरान की न्यूक्लियर क्षमता को खत्म करना और मिडिल ईस्ट में अपना दबदबा कायम रखना था। लेकिन ईरान ने जवाबी हमलों से न सिर्फ इजराइल बल्कि खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। 28 फरवरी 2026 को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनई की मौत के बाद हालात और भड़क गए। IRGC ने पूरी कमान संभाल ली और अब ईरान ने खुद को Iran US War में मजबूत स्थिति में बताया है, जबकि अमेरिका और इजराइल के लिए यह जंग अनिश्चितता का दौर बन चुकी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- IRGC ने कहा कि Iran US War में बाजी पूरी तरह ईरान के हाथ में है और जंग का अंत ईरान तय करेगा, अमेरिका नहीं।
- ट्रंप-पुतिन फोन कॉल में युद्ध विराम पर चर्चा हुई, पुतिन ने ईरान जंग खत्म कराने में मदद की पेशकश की।
- ईरान ने युद्ध विराम से साफ इनकार किया और शक्तिशाली मिसाइलों के इस्तेमाल की कसम खाई।
- खाड़ी देशों में ईरानी हमलों से तबाही, अमेरिकी डिप्लोमेट्स की वापसी और ऑस्ट्रेलिया ने यूएई को मिसाइलें भेजने का फैसला किया।








