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PSPCL Privatization: Jakhar का खुलासा, कागजी हेरफेर से निगम दिवालिया

₹1715 करोड़ घाटे को ₹7852 करोड़ Surplus में दिखाया; ₹18,009 करोड़ सब्सिडी बकाया; श्री हरिमंदिर साहिब दर मात्र 31 पैसे घटी

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 9 मार्च 2026
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BJP Punjab President Sunil Jakhar
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PSPCL Privatization Punjab: भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 9 मार्च को चंडीगढ़ में एक विशेष प्रेस वार्ता में आम आदमी पार्टी सरकार पर पंजाब राज्य बिजली निगम (PSPCL) को जानबूझकर दिवालिया करके उसका निजीकरण करने की साजिश का गंभीर आरोप लगाया। जाखड़ ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ दावा किया कि कागज़ों में हेरफेर करके ₹1,715 करोड़ के घाटे में चल रहे निगम को ₹7,852 करोड़ के अधिशेष में दिखाया गया, जो पंजाब के लोगों के साथ खुला छल है।


‘नवंबर से फरवरी: घाटे का अधिशेष में जादुई परिवर्तन’

PSPCL Privatization Punjab मामले में जाखड़ ने सबसे पहले ARR याचिका का जिक्र किया। उनके अनुसार 28 नवंबर 2025 को PSPCL ने पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग (PSERC) के पास अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता याचिका दाखिल की थी, जिसमें निगम ने ₹1,715 करोड़ का घाटा दिखाया था।

लेकिन महज दो महीने बाद, 4 फरवरी 2026 को, पहली बार एक संशोधित याचिका दाखिल की गई, जिसे नियामक आयोग ने हैरानीजनक तरीके से स्वीकार भी कर लिया। इस संशोधित याचिका में PSPCL ने दावा किया कि वह अब ₹7,852 करोड़ के अधिशेष में है और उसे ₹19,600 करोड़ की जगह केवल ₹15,200 करोड़ की बिजली सब्सिडी चाहिए।

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‘Loss Funding को Income में दिखाया: नियमों का खुला उल्लंघन’

PSPCL Privatization Punjab मामले में जाखड़ ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी गई ₹3,581.95 करोड़ की लॉस फंडिंग को नियमों के विरुद्ध जाकर PSPCL ने अपनी वित्तीय पुस्तकों में आय के रूप में दर्ज कर लिया, जो पूरी तरह गलत है।

जाखड़ के अनुसार इसी वित्तीय हेरफेर के बल पर ₹1,715 करोड़ के घाटे को ₹7,852 करोड़ के अधिशेष में बदला गया। यह एक ऐसी लेखांकन तकनीक है जो असल तस्वीर को पूरी तरह छुपा देती है और आम लोगों के साथ-साथ नीति निर्माताओं को भी गुमराह करती है।


‘बिजली दरों में कमी का छलावा: जहां कटौती दिखी, वहां बिजली पहले से मुफ्त’

PSPCL Privatization Punjab मामले में जाखड़ ने दरों में कमी की घोषणा को भी बेनकाब किया। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा कमी 300 यूनिट तक की घरेलू खपत में दिखाई गई है, लेकिन इतनी बिजली तो पहले से ही मुफ्त मिलती थी, इसलिए इस कमी का कोई व्यावहारिक लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा।

असल फायदा किसे होगा? जाखड़ ने जवाब दिया कि सरकार को, जिसे PSPCL को देनी वाली सब्सिडी की राशि कम करनी पड़ेगी। यानी आम जनता को कुछ नहीं, सरकारी खजाने को राहत और PSPCL को नुकसान। उन्होंने यह भी सवाल किया कि इस तरह से बिजली निगम आखिर कैसे चल पाएगा।


‘₹18,009 करोड़ बकाया: सरकार खुद है PSPCL की सबसे बड़ी देनदार’

PSPCL Privatization Punjab के आर्थिक पहलू पर जाखड़ ने जो आंकड़े पेश किए, वे चौंकाने वाले हैं। सरकार पर 31 मार्च 2025 तक की ₹11,109.70 करोड़ की सब्सिडी बकाया है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में 31 दिसंबर 2025 तक के ₹4,300 करोड़ और सरकारी विभागों के बकाया ₹2,600 करोड़ अलग से हैं।

इस तरह कुल बकाया राशि लगभग ₹18,009 करोड़ से अधिक हो जाती है। जाखड़ ने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद इतनी बड़ी देनदार है और सब्सिडी नहीं चुका रही, तो निगम आर्थिक रूप से कैसे मजबूत रह सकता है।


‘कोई नियमित Chairman नहीं, दिल्ली से आए लोग चला रहे PSPCL’

PSPCL Privatization Punjab मामले में जाखड़ ने प्रशासनिक खामियों पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि PSPCL में कोई नियमित चेयरमैन नहीं है। नियमों के अनुसार अस्थायी प्रशासक भी प्रधान सचिव स्तर का होना चाहिए, लेकिन इस नियम का भी पालन नहीं किया गया। जिम्मेदारी जिस अधिकारी को दी गई है, उस पर पहले से कई विभागों का बोझ है।

जाखड़ ने आरोप लगाया कि असल में PSPCL को दिल्ली से आए लोग अपने तरीके से चला रहे हैं। उन्होंने प्रमाण के रूप में एक संवेदनशील उदाहरण दिया कि जब बिजली दरों में कमी की घोषणा हुई तो श्री हरिमंदिर साहिब और दुर्गियाना मंदिर की बिजली दरों में मात्र 31 पैसे प्रति यूनिट की ही कमी की गई। जाखड़ ने कहा कि पंजाब की संस्कृति और भावनाओं को समझने वाला कोई भी शख्स यह निर्णय कभी नहीं लेता।


‘बजट में दिखावा, अगले साल का बोझ जनता पर’

PSPCL Privatization Punjab की पूरी साजिश का अंतिम मकसद क्या है? जाखड़ ने साफ शब्दों में कहा कि कागज़ों में सब्सिडी कम दिखाकर बजट में बची राशि को मुफ्त योजनाओं पर खर्च करने का दावा किया जाएगा। इस तरह PSPCL को आर्थिक रूप से कमजोर करते-करते एक असफल संस्थान बनाकर अंततः उसे निजीकरण की राह पर धकेला जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस कागज़ी खेल से यह वित्तीय वर्ष निकल भी गया, तो अगले वित्त वर्ष में इसका सारा बोझ पंजाब के आम नागरिकों पर ही पड़ेगा।


‘आंकड़ों का जाल और PSPCL की कमर तोड़ने की रणनीति’

PSPCL Privatization Punjab के इस प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दो महीने में ₹1,715 करोड़ का घाटा ₹7,852 करोड़ के अधिशेष में कैसे बदल गया, जबकि जमीन पर ₹18,009 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी बकाया है। यह गणित किसी भी तटस्थ विशेषज्ञ को संदिग्ध लगेगा।

बिजली दर कटौती का वह हिस्सा जो पहले से मुफ्त श्रेणी में है, राजनीतिक घोषणा तो बनाता है लेकिन उपभोक्ता को राहत नहीं देता। श्री हरिमंदिर साहिब की दर में मात्र 31 पैसे की कटौती सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी का प्रतीक है, जिसे जाखड़ ने एक तीखे राजनीतिक बिंदु के रूप में उठाया। अगर PSPCL पर देनदारियां इसी गति से बढ़ती रहीं और वित्तीय हेरफेर जारी रहा, तो पंजाब की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दीर्घकालिक असर पड़ना तय है।


‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • PSPCL Privatization Punjab: BJP प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का आरोप; 28 नवंबर 2025 की ARR में ₹1,715 करोड़ घाटा; 4 फरवरी 2026 की Revised Petition में ₹7,852 करोड़ Surplus का दावा; ₹3,581.95 करोड़ Loss Funding को नियम-विरुद्ध Income में दिखाया।
  • बिजली दर कटौती छलावा: 300 यूनिट तक पहले से मुफ्त; दर घटाने का फायदा उपभोक्ता को नहीं, सरकार को जो कम सब्सिडी देगी; ₹9,300 करोड़ के बजट प्रावधान का हिसाब अस्पष्ट।
  • कुल बकाया सब्सिडी ₹18,009 करोड़ से अधिक: मार्च 2025 तक ₹11,109.70 करोड़; चालू वर्ष में ₹4,300 करोड़; सरकारी विभागों से ₹2,600 करोड़।
  • PSPCL में नियमित Chairman नहीं; नियम-विरुद्ध अस्थायी प्रशासक; दिल्ली से आए लोग चला रहे निगम; हरिमंदिर साहिब-दुर्गियाना मंदिर दर में सिर्फ 31 पैसे कमी; अगले वित्त वर्ष में आम जनता पर पड़ेगा पूरा बोझ।
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