US Iran Global War : अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रही। पिछले 24 घंटों में जो घटनाक्रम सामने आए हैं, उन्होंने इस संघर्ष की परिभाषा ही बदल दी है। रूस ईरान को रियल-टाइम इंटेलिजेंस दे रहा है, चीन सैटेलाइट खुफिया जानकारी और GPS सिस्टम मुहैया करा रहा है, यूक्रेन अमेरिका की मदद के लिए अपने ड्रोन वॉरफेयर एक्सपर्ट्स मिडिल ईस्ट भेज रहा है और ईरान ने गल्फ देशों में दरार डालने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक चला दिया है। अमेरिका के दुनियाभर में तैनात 8 THAAD एडवांस्ड रडार सिस्टम में से 4 मिडिल ईस्ट में तबाह हो चुके हैं और कतर में 1.1 बिलियन डॉलर का AN/FPS-132 रडार भी नष्ट कर दिया गया है। यह अब एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि एक शैडो ग्लोबल वॉर की शक्ल ले चुका है।
24 घंटे में बदल गई जंग की तस्वीर: 230 बम, 1300 से ज्यादा मौतें
US Iran Global War में पिछले 24 घंटों में हालात और भयावह हो गए हैं। 80 से ज्यादा इजराइली लड़ाकू विमानों ने तेहरान और मध्य ईरान पर 230 से ज्यादा बम गिराए हैं। अमेरिका B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स और बंकर बस्टिंग बम इस्तेमाल कर रहा है ताकि पहाड़ों की गुफाओं में छिपे बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट किया जा सके। पिछले 72 घंटों में अमेरिका ने 200 से ज्यादा ईरानी ठिकानों पर हमले की पुष्टि की है।
इन हमलों में अब तक 1,300 से ज्यादा ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं। तेहरान जैसे घनी आबादी वाले शहर पर भी बमबारी की जा रही है। दूसरी तरफ इजराइल में 10 से 20 लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, हालांकि कई रिपोर्ट्स बता रही हैं कि असल संख्या इससे ज्यादा हो सकती है। अमेरिकी सैनिकों की मौत के भी कई आंकड़े आ रहे हैं जिन्हें अमेरिका छिपाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने फोड़ दीं अमेरिका की आंखें: 8 में से 4 THAAD रडार तबाह
US Iran Global War में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने अमेरिका की सैन्य ताकत का सबसे बड़ा गर्व यानी THAAD रडार सिस्टम को तबाह कर दिया है। दुनियाभर में अमेरिका के पास कुल 8 THAAD एडवांस्ड रडार सिस्टम हैं और मिडिल ईस्ट में तैनात 4 नष्ट हो चुके हैं। इसका मतलब यह है कि अमेरिका की आधी रडार ताकत खत्म हो चुकी है। इसके अलावा कतर में तैनात 1.1 बिलियन डॉलर का AN/FPS-132 एडवांस्ड रडार भी ध्वस्त कर दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान को इतनी सटीक जानकारी कैसे मिली कि रडार कहां तैनात हैं, CIA के अधिकारी कहां ठहरे हैं और अमेरिकी सैन्य ठिकाने किस कोने में हैं। ईरान के पास इजराइल के मोसाद जैसी खुफिया एजेंसी नहीं है। तो यह सटीक खुफिया जानकारी आई कहां से? जवाब रूस और चीन में छिपा है।
रूस का मास्टरस्ट्रोक: बिना एक गोली चलाए सबसे बड़ा विजेता
US Iran Global War में रूस बिना एक गोली चलाए सबसे बड़ा विजेता बनकर उभर रहा है। व्लादिमीर पुतिन यहां एक मास्टरस्ट्रोक खेल रहे हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों के अनुसार रूस ईरान को “कम्प्रीहेंसिव इंटेलिजेंस इन्फॉर्मेशन” यानी व्यापक खुफिया जानकारी शेयर कर रहा है। रूसी सेना के पास दशकों से यह क्षमता रही है कि वह दुनिया के किसी भी कोने में अमेरिकी सैन्य संपत्तियां कहां हैं, यह पता लगा सके। यही जानकारी ईरान को दी जा रही है ताकि वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों से सटीक निशाना लगा सके।
याद रखिए, बैलिस्टिक मिसाइलें होना और उन्हें सटीक तरीके से इस्तेमाल करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। रियल-टाइम ग्राउंड इंटेलिजेंस बहुत कम देशों के पास है और रूस उनमें से एक है। इसीलिए ईरान रडार इंस्टॉलेशंस पर डायरेक्ट स्ट्राइक कर पा रहा है और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स को नष्ट कर पा रहा है। इन हमलों में रूसी सैन्य रणनीति की छाप साफ दिखती है।
रूस के लिए इस जंग में दो बड़े फायदे हैं। पहला, जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा, दुनिया में सबसे ज्यादा तेल कौन बेचेगा? रूस। अमेरिका खुद भारत को कह रहा है कि रूसी तेल खरीदो और प्रोसेस करो ताकि वैश्विक कीमतें स्थिर रहें। दूसरा फायदा, जब तक अमेरिका ईरान में फंसा रहेगा, यूक्रेन पर बातचीत कैसे होगी? अमेरिका की ताकत और ध्यान दोनों यहां खर्च हो रहे हैं, जो रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा है। कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस करें तो रूस ने बहुत अच्छा निवेश किया है और जीत भी रहा है।
चीन की खामोश चाल: सैटेलाइट, गैलियम और GPS
US Iran Global War में चीन नंबर दो पर आता है। चीन की पुरानी फिलॉसफी है: “अपनी ताकत छिपाओ, सही वक्त का इंतजार करो।” जरूरत पड़ने तक ताकत दिखाने की जरूरत नहीं। और ठीक यही चीन कर रहा है।
सबसे पहले, ईरान को रियल-टाइम सैटेलाइट इंटेलिजेंस दी जा रही है ताकि वह अमेरिकी सेना को प्रभावी ढंग से निशाना बना सके। अमेरिकी GPS सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय ईरान को चीनी GPS सिस्टम पर चलाया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी ऐसा ही हुआ था जब पाकिस्तान को रियल-टाइम सैटेलाइट जानकारी दी गई थी ताकि भारतीय फाइटर्स को निशाना बनाया जा सके। चीन वही खेल यहां भी खेल रहा है।
दूसरा और शायद सबसे खतरनाक पहलू है गैलियम। अमेरिका के 1.1 बिलियन डॉलर के एडवांस्ड रडार को दोबारा बनाने के लिए 77 किलोग्राम गैलियम चाहिए, लेकिन गैलियम की सप्लाई पर चीन का नियंत्रण है। आज अगर अमेरिका वह रडार दोबारा बनाना चाहे तो चीन उसे बनने नहीं देगा क्योंकि कीमती धातुओं और रेयर अर्थ्स पर चीन का कब्जा है। तीसरा, ईरान की मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड प्रोपेलेंट और रॉकेट टेक्नोलॉजी के कंपोनेंट्स चीन ही सप्लाई करता रहा है। चीन ईरान का 80% तेल खरीदता है और उसने ईरान में अरबों डॉलर का निवेश किया है। अगर कल अमेरिका आकर कहे कि ईरान का सारा तेल अब हमारा है, तो यह चीन के लिए भयंकर रणनीतिक नुकसान होगा।
एक और बड़ा फायदा चीन को ताइवान से मिल रहा है। अमेरिका के इंटरसेप्टर्स इतने कम हो गए हैं कि ताइवान के आसपास तैनात इंटरसेप्टर्स उठाकर मिडिल ईस्ट ले जाए जा रहे हैं। चीन इस बात से बेहद खुश है कि ताइवान की वायु रक्षा कमजोर हो रही है, जिससे भविष्य में ताइवान पर कब्जे की संभावना और आसान हो जाएगी।
यूक्रेन की एंट्री: कल तक अपमानित, आज मदद मांगी जा रही है
US Iran Global War में सबसे दिलचस्प मोड़ यूक्रेन की भूमिका है। रूस यूक्रेन के खिलाफ ईरानी शाहिद ड्रोन के वेरिएंट इस्तेमाल करता रहा है और यूक्रेन ने इन ड्रोन्स को गिराने और उनसे निपटने में काफी विशेषज्ञता हासिल कर ली है। अब अमेरिका की मांग पर यूक्रेन ने अपने ड्रोन वॉरफेयर एक्सपर्ट्स मिडिल ईस्ट भेज दिए हैं ताकि वे बता सकें कि 50 मिलियन डॉलर का इंटरसेप्टर लगाए बिना, सस्ते तरीके से इन ड्रोन्स से कैसे निपटा जाए।
विडंबना देखिए: डोनाल्ड ट्रंप ने वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को व्हाइट हाउस बुलाकर अपमानित किया था और अब उन्हीं ज़ेलेंस्की से मदद मांगी जा रही है। यूक्रेन भी चतुराई से खेल रहा है: आज हम आपकी मदद कर रहे हैं, कल आप भी रूस के खिलाफ हमारी मदद करेंगे।
ईरान की “विक्ट्री डिनायल” रणनीति: जीतने नहीं, हारने नहीं देंगे
US Iran Global War में ईरान की रणनीति को समझना बेहद जरूरी है। ईरान यह जंग जीतने के लिए नहीं लड़ रहा। इसे “विक्ट्री डिनायल” कहा जाता है। ईरान जानता है कि अमेरिका जैसे सुपरपावर को हराना संभव नहीं है, इजराइल को हराना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें जीतने भी नहीं देंगे। अमेरिका कह रहा है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की दर कम हो गई है। ईरान कहता है कि हमने जानबूझकर कम की है ताकि इस जंग को लंबा खींच सकें।
इसी रणनीति के तहत ईरान ने पहले फेज में अमेरिका के स्टॉकपाइल को धीरे-धीरे कम किया, रडार इंस्टॉलेशंस नष्ट किए। अब दूसरे फेज में खैबर शेकन और फतेह जैसी एडवांस्ड मिसाइलें इस्तेमाल की जा रही हैं। ईरान का गणित सीधा है: सस्ते ड्रोन भेजकर महंगे इंटरसेप्टर्स खर्च कराओ। अमेरिका साल में करीब 600 इंटरसेप्टर्स बना सकता है यानी महीने में 6-7, जबकि ईरान महीने में 100 मिसाइलें बना सकता है। यह गणित ही बताता है कि लंबी जंग में किसका पलड़ा भारी होगा।
ईरान का गल्फ देशों को प्रस्ताव: गठबंधन में दरार डालने की चाल
US Iran Global War में ईरान ने एक बड़ी राजनयिक चाल चली है। ईरान के राष्ट्रपति ने एक वीडियो संदेश जारी करके गल्फ देशों को प्रस्ताव दिया है कि अगर गल्फ देश अमेरिका को अपने देश से हमला करने की इजाजत नहीं देंगे, तो ईरान भी गल्फ देशों पर कोई हमला नहीं करेगा। अमेरिका इसे ईरान का सरेंडर बता रहा है, लेकिन असल में यह एक शानदार रणनीति है।
ईरान ने एक हफ्ते में दिखा दिया है कि वह दुबई जैसे सुरक्षित ठिकानों को कितना नुकसान पहुंचा सकता है, तेल सप्लाई कैसे रोक सकता है। अब वह कह रहा है कि अगर इस तबाही से बचना है तो बस एक काम करो: अमेरिका को कहो कि अपनी जंग खुद लड़े, अपने B-2 बॉम्बर्स से बम गिराए, अपने एयरक्राफ्ट कैरियर्स से लड़े, लेकिन आपका देश इस्तेमाल न करे। यह गठबंधन में दरार डालने का प्रयास है ताकि गल्फ देश अमेरिका से कहें कि यह तुम्हारी और इजराइल की लड़ाई है, हमें इसमें मत घसीटो।
सऊदी अरब कई बार बैक-चैनल कम्यूनिकेशन के जरिए ईरान की बची हुई लीडरशिप से बातचीत की कोशिश कर चुका है ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके। हालांकि यह डील कितनी सफल होगी यह देखना बाकी है क्योंकि दुबई एयरपोर्ट पर फिर से हमला हुआ है।
ट्रंप फंस गए: न आगे जा सकते हैं, न पीछे हट सकते हैं
US Iran Global War में डोनाल्ड ट्रंप एक एस्केलेशन मैट्रिक्स में फंस गए हैं। एक तरफ वे बोल रहे हैं कि “ईरान को घुटनों पर ला देंगे”, लेकिन दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री और राष्ट्रपति दोनों ने साफ कह दिया है कि बिना शर्त सरेंडर तो छोड़िए, वे बातचीत तक नहीं करना चाहते। ईरान ने खुली चुनौती दी है: अमेरिकी सैनिक आओ, हम इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिका ने तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन में तैनात कर दिया है। 50,000 सैनिक पहले से तैनात हैं और ट्रंप संकेत दे रहे हैं कि यह संख्या और बढ़ सकती है। 82वें एयरबोर्न डिवीजन को स्टैंडबाय पर रखा गया है, जो किसी भी देश में सबसे पहले घुसकर सबोटाज और फ्रंटलाइन डिफेंस खत्म करने का काम करती है। “बूट्स ऑन द ग्राउंड” यानी ग्राउंड इन्वेजन की तैयारी शुरू हो चुकी है।
लेकिन ट्रंप की मुश्किल यह है कि अमेरिकी जनता इस जंग के खिलाफ है। CNN पोल के मुताबिक सिर्फ 27% अमेरिकी इस जंग का समर्थन करते हैं, ग्राउंड इन्वेजन का समर्थन तो मात्र 12% करते हैं और 60% इसका पूरी तरह विरोध करते हैं। जब तक हवाई बमबारी हो रही है तब तक अमेरिकी सैनिक नहीं मर रहे, लेकिन जैसे ही ग्राउंड पर सैनिक उतरेंगे और 20 सैनिक भी मरे तो अमेरिका में हंगामा मच जाएगा।
ट्रंप ने कुर्दिश विद्रोहियों से भी बात की ताकि वे ईरान में क्रांति लाएं, लेकिन कुर्दिश विद्रोहियों ने भी ट्रंप का खेल समझ लिया है और कह दिया कि हम अमेरिका की ईरान वाली जंग नहीं लड़ेंगे। एपस्टीन फाइल्स से भी नए खुलासे आ रहे हैं। ट्रंप के लिए अब पीछे हटना भी संभव नहीं है क्योंकि हार से बड़ी कोई बेइज्जती नहीं होगी और आगे बढ़ने का मतलब है और ज्यादा जानें गंवाना। ठीक वही कहानी दोहराई जा रही है जो सीरिया और अफगानिस्तान में हुई, लेकिन ईरान उनसे कहीं ज्यादा जटिल है क्योंकि उसके पीछे रूस और चीन की ताकत है।
ताइवान और दक्षिण कोरिया में खतरा: अमेरिका के डिफेंस में बड़ी सेंध
US Iran Global War का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि अमेरिका अपने वैश्विक सुरक्षा ढांचे को कमजोर कर रहा है। इंटरसेप्टर्स की भारी कमी की वजह से ताइवान के आसपास तैनात इंटरसेप्टर्स उठाकर मिडिल ईस्ट लाए जा रहे हैं। दक्षिण कोरिया से भी यही हो रहा है। उत्तर कोरिया को इस स्थिति पर हंसी आ रही होगी कि अमेरिका की हालत कितनी खराब हो गई है।
पैट्रियट मिसाइल सिस्टम यूक्रेन से भी उठाया जा रहा है। जिन देशों को अमेरिका सुरक्षा दे रहा था, उन सबके डिफेंस कमजोर हो रहे हैं क्योंकि सारे संसाधन एक जगह केंद्रित हो गए हैं। ट्रंप ईरान को हराने के जुनून में इतने पागल हो गए हैं कि एयरक्राफ्ट कैरियर हों, पैट्रियट हों, इंटरसेप्टर्स हों, सब कुछ मिडिल ईस्ट में झोंक दिया जा रहा है। पूरा भू-राजनीतिक समीकरण गड़बड़ हो रहा है।
गल्फ देश नाराज: निवेश वापसी की धमकी
US Iran Global War का एक और खतरनाक पहलू सामने आ रहा है। अमेरिका अब गल्फ देशों को सुरक्षा देने में असमर्थ हो रहा है, जिससे गल्फ देश बेहद नाराज हैं। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो खुद मान रहे हैं कि अमेरिका अभी महीने में सिर्फ 6-7 इंटरसेप्टर्स बना पा रहा है और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। गल्फ देश कह रहे हैं कि उनकी पूरी सप्लाई कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी।
खबरें आ रही हैं कि अगर अमेरिका उन्हें सुरक्षा नहीं दे पाता तो गल्फ देश अमेरिका से अपने सारे निवेश वापस खींचने की धमकी दे रहे हैं। इसी वजह से बड़ी अमेरिकी कॉरपोरेशंस ने पैसे निकालने पर लिमिट लगा दी है। यह अमेरिका के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है।
आगे क्या: शैडो ग्लोबल वॉर की तरफ बढ़ रही दुनिया
US Iran Global War अब एक शैडो ग्लोबल वॉर की शक्ल ले चुका है। रूस खुफिया जानकारी दे रहा है, चीन सैटेलाइट और कच्चा माल मुहैया करा रहा है, यूक्रेन ड्रोन एक्सपर्ट्स भेज रहा है, ताइवान और दक्षिण कोरिया की सुरक्षा कमजोर हो रही है और गल्फ देशों में दरार पड़ रही है। भारत जैसे देश बाड़ पर बैठकर निंदा कर रहे हैं, लेकिन दूसरे देश पर्दे के पीछे से खेल खेल रहे हैं।
यह जंग आसानी से खत्म होने वाली नहीं है। अगर अमेरिका अगले कुछ दिनों में ईरान के सारे लॉन्च साइट्स नष्ट नहीं कर पाता तो ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों का अगला दौर और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकता है क्योंकि अमेरिका की रोकने की क्षमता अब पहले से कम हो चुकी है। हवाई बमबारी से कभी किसी देश में पूरा बदलाव नहीं आया है और इतिहास इसका गवाह है।
मुख्य बातें (Key Points)
- THAAD और रडार तबाह: अमेरिका के 8 में से 4 THAAD रडार सिस्टम मिडिल ईस्ट में नष्ट हो चुके हैं, कतर का 1.1 बिलियन डॉलर का AN/FPS-132 रडार भी तबाह किया गया, अमेरिका की आधी रडार ताकत खत्म।
- रूस और चीन की मदद: रूस ईरान को रियल-टाइम खुफिया जानकारी दे रहा है, चीन सैटेलाइट इंटेलिजेंस, GPS और गैलियम जैसे कच्चे माल से मदद कर रहा है, रडार दोबारा बनाने के लिए जरूरी 77 किलो गैलियम पर चीन का नियंत्रण है।
- ग्राउंड इन्वेजन की तैयारी: 82वें एयरबोर्न डिवीजन स्टैंडबाय पर, 50,000 सैनिक पहले से तैनात, तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात, लेकिन सिर्फ 12% अमेरिकी ग्राउंड इन्वेजन का समर्थन करते हैं।
- ईरान की रणनीति: “विक्ट्री डिनायल” फिलॉसफी पर काम: जीतना संभव नहीं, लेकिन हारने भी नहीं देंगे, गल्फ देशों को अमेरिकी गठबंधन से तोड़ने का प्रस्ताव दिया।








