Stem Cell Therapy for Type 2 Diabetes को लेकर चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया के मेडिकल जगत का ध्यान खींच लिया है। एक ऐसे मरीज को, जो पहले इंसुलिन पर पूरी तरह निर्भर था, स्टेम सेल थेरेपी देने के बाद अब न इंसुलिन की ज़रूरत है और न ही डायबिटीज की कोई अन्य दवा। यह खबर खासकर भारत के लिए बेहद अहम है, जहाँ 10 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
‘डायबिटीज की वह सच्चाई जो अब तक अटल थी’
अब तक डायबिटीज को लेकर एक ही बात मानी जाती रही है कि इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन जड़ से खत्म नहीं। मरीज़ को ज़िंदगी भर या तो डाइट और एक्सरसाइज पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर दवाइयों और इंसुलिन इंजेक्शन का सहारा लेना पड़ता है। यही दो रास्ते थे और इनके आगे कोई तीसरा दरवाज़ा नहीं दिखता था।
लेकिन अब चीन के वैज्ञानिकों के दावे ने उस बंद दरवाज़े पर दस्तक दी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, Stem Cell Therapy for Type 2 Diabetes के एक मामले में वैज्ञानिकों ने ऐसा कर दिखाया जो पहले संभव नहीं माना जाता था।
‘स्टेम सेल्स आखिर होते क्या हैं?’
स्टेम सेल्स शरीर के वे खास सेल्स होते हैं जो अपनी अद्भुत क्षमता की वजह से शरीर में अलग-अलग तरह के सेल्स में बदल सकते हैं। इन्हें शरीर का “मास्टर सेल” भी कहा जा सकता है। ये न सिर्फ खुद को बदल सकते हैं, बल्कि नए और स्वस्थ सेल्स भी बना सकते हैं। यही वजह है कि इनका इस्तेमाल खराब या नष्ट हो चुके टिश्यूज को ठीक करने या बदलने में किया जाता है।
इस मामले में वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल्स को पैंक्रियाज के सेल्स में बदला और फिर उन्हें मरीज़ के शरीर में ट्रांसप्लांट किया। मकसद था कि शरीर खुद से इंसुलिन बनाना शुरू कर दे और ब्लड शुगर को प्राकृतिक तरीके से रेगुलेट कर सके।
‘पैंक्रियाज के बीटा सेल्स ही असली चाबी हैं’
डॉ. सौरभ शिशर अग्रवाल, सीनियर कंसलटेंट, एंडोक्राइनोलॉजी एंड डायबिटीज, मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा, बताते हैं कि स्टेम सेल की मदद से इंसुलिन बनाना उन मरीज़ों के लिए खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकता है जिनके बीटा सेल्स की क्षमता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
बीटा सेल्स पैंक्रियाज में मौजूद वे ख़ास सेल्स होते हैं जो इंसुलिन हॉर्मोन बनाने और उसे खून में छोड़ने का काम करते हैं। टाइप 2 डायबिटीज में इन्हीं बीटा सेल्स की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ती जाती है। अगर स्टेम सेल्स इन बीटा सेल्स की जगह ले सकें, तो यह डायबिटीज के इलाज में एक क्रांतिकारी बदलाव हो सकता है।
‘डॉक्टर ने क्यों कहा: अभी जश्न मनाना जल्दबाजी होगी’
डॉ. अग्रवाल ने साफ किया कि यह स्टडी अभी शुरुआती स्टेज में है और इसे अभी डायबिटीज का पक्का इलाज मानना ठीक नहीं होगा। उनके मुताबिक, सबसे पहले यह ज़रूरी है कि बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल किए जाएं और ज़्यादा से ज़्यादा मरीज़ों पर इसकी जाँच हो।
इसके साथ ही यह भी पुष्टि होनी चाहिए कि Stem Cell Therapy for Type 2 Diabetes का असर सालों तक टिकेगा या नहीं। इसके संभावित साइड इफेक्ट्स और इस्तेमाल से जुड़ी सावधानियों को पूरी तरह समझना भी उतना ही ज़रूरी है। डॉक्टर का कहना है कि अगर आगे की रिसर्च में सब कुछ सुरक्षित और असरदार साबित हुआ, तभी इसकी लागत और आम लोगों तक इसकी पहुँच जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सकेगा।
‘भारत के लिए यह खबर क्यों है इतनी अहम?’
ICMR यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडी बताती है कि भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि यह बीमारी भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती है।
डायबिटीज कभी अकेले नहीं आती। अनकंट्रोल्ड डायबिटीज के साथ किडनी की बीमारी, दिल की समस्याएं, पैरों में दर्द और झनझनाहट, आँखों और नर्वस सिस्टम को नुकसान जैसी गंभीर जटिलताएं जुड़ी होती हैं। इसीलिए अगर Stem Cell Therapy for Type 2 Diabetes आगे चलकर कामयाब साबित होती है, तो भारत जैसे देश में इसकी ज़रूरत और असर दोनों ही बहुत बड़े होंगे।
‘उम्मीद की किरण, लेकिन रास्ता अभी लंबा है’
यह अब तक सिर्फ एक ही मरीज़ पर हुआ है, लेकिन इस एक मामले ने लाखों डायबिटीज मरीज़ों के दिल में उम्मीद की एक नई किरण जलाई है। विज्ञान की यही खूबी होती है कि एक कदम आगे बढ़ते ही नई संभावनाओं का दरवाज़ा खुल जाता है। चीन के वैज्ञानिकों ने वह दरवाज़ा खटखटाया है, लेकिन इसे पूरी तरह खोलने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- चीन के वैज्ञानिकों ने Stem Cell Therapy से एक मरीज़ की Type 2 Diabetes reverse करने का दावा किया, मरीज़ अब इंसुलिन-मुक्त है।
- स्टेम सेल्स को पैंक्रियाज के बीटा सेल्स में बदलकर ट्रांसप्लांट किया गया, ताकि शरीर खुद इंसुलिन बना सके।
- मेदांता के डॉ. सौरभ शिशर अग्रवाल ने कहा कि यह स्टडी शुरुआती स्टेज में है, बड़े क्लिनिकल ट्रायल और साइड इफेक्ट्स की जाँच अभी बाकी है।
- भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा डायबिटीज मरीज़ हैं, इसलिए यह शोध भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








