JNU Violence: दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) गुरुवार (26 फरवरी) को हिंसक झड़पों का मैदान बन गया। जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के आह्वान पर शिक्षा मंत्रालय तक प्रस्तावित मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच जमकर झड़प हुई। छात्र रोहित एक्ट लागू करने और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।
पुलिस ने छात्रों को कैंपस से बाहर निकलने से रोकने के लिए भारी बल (आरएएफ और सीआरपीएफ) तैनात कर दिया और कैंपस के बाहर कई परतों में बैरिकेड्स लगा दिए। स्थिति तब बिगड़ गई जब छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए और 50 से अधिक छात्रों को हिरासत में ले लिया गया। जेएनयू एसयू का दावा है कि 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया है।
छात्रों की मांग क्या है?
छात्र संगठन मुख्य रूप से दो मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। पहली मांग रोहित एक्ट (Rohit Act) को तत्काल प्रभाव से लागू करने की है। दूसरी मांग यूजीसी (University Grants Commission) के नए नियमों को वापस लेने और कुलपति (VC) के इस्तीफे की है। छात्रों का आरोप है कि नए नियम विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला हैं और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देते हैं।
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प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर हिंसा को आमंत्रित किया।
पुलिस ने क्यों किया बल प्रयोग?
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि छात्रों को मार्च की इजाजत नहीं दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वे जबरन बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और बैरिकेड्स तोड़ दिए। इस झड़प में 20 से 25 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने आत्मरक्षा में और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की।
इस मामले में वसंत कुंज नॉर्थ थाने में मुकदमा (संख्या 76/26) दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि एफआईआर में कई संगीन और गैर-जमानती धाराएं शामिल की गई हैं।
कैंपस बना छावनी, माहौल तनावपूर्ण
झड़प के बाद पूरा जेएनयू कैंपस छावनी में तब्दील हो गया। शाम को सभी गेट बंद कर दिए गए और कैंपस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। रात भर छात्र गेट पर ही डटे रहे और नारेबाजी करते रहे। पुलिस ने पानी के कैनन और बसों के जरिए छात्रों को खदेड़ने की कोशिश की।
हालांकि, शुक्रवार सुबह स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। कैंपस के गेट्स के बाहर लगे बैरिकेड्स को हटाया जा रहा है और गेट खोले जा रहे हैं। लेकिन पुलिसकर्मी अभी भी मौके पर मौजूद हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं। अब सबकी निगाहें हिरासत में लिए गए छात्रों पर हैं कि उन्हें कोर्ट से जमानत मिलती है या नहीं।
‘जानें पूरा मामला’
जेएनयू में पिछले कई दिनों से यूजीसी के नए नियमों और रोहित एक्ट की मांग को लेकर तनाव चल रहा था। रोहित एक्ट एक छात्र की मौत के बाद उठी मांग है, जिसमें परिसरों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। वहीं, यूजीसी के नए नियमों के तहत विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम करने और पाठ्यक्रमों में बदलाव का आरोप लगाया जा रहा है। 26 फरवरी को शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की घोषणा के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिसके चलते यह हिंसक झड़प हुई।
मुख्य बातें (Key Points)
JNU Violence के तहत शिक्षा मंत्रालय तक मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों में हिंसक झड़प।
50 से अधिक छात्र हिरासत में, 13 छात्रों के गिरफ्तार होने का दावा, 25 पुलिसकर्मी घायल।
छात्रों की मांग: रोहित एक्ट लागू करना और यूजीसी के नए नियम वापस लेना।
पुलिस ने मार्च की इजाजत नहीं दी, छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की।
वसंत कुंज नॉर्थ थाने में संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज, कैंपस के बाहर बैरिकेड्स हटाए जा रहे हैं।








