Hair Transplant Failure Reasons: लोग लाखों रुपए खर्च करके हेयर ट्रांसप्लांट करवाते हैं। इस उम्मीद में कि उनके बाल दोबारा उगेंगे, घने निकलेंगे। लेकिन ऐसा सबके साथ नहीं होता। कुछ लोगों में हेयर ट्रांसप्लांट करवाने के बाद भी या तो बाल घने नहीं निकलते और निकलते भी हैं तो कुछ टाइम बाद दोबारा हेयर फॉल हो जाता है। ऐसा क्यों होता है? क्या हेयर ट्रांसप्लांट ठीक नहीं हुआ या दिक्कत बालों में है? इन सवालों का जवाब हमें बताया डॉक्टर अभिषेक पिलानी ने, जो हेयर ट्रांसप्लांट एंड रेस्टोरेशन स्पेशलिस्ट और एश्योर क्लिनिक के फाउंडर हैं।
डॉक्टर पिलानी ने समझाया कि कुछ हेयर ट्रांसप्लांट असफल क्यों हो जाते हैं, FUE और FUT ट्रांसप्लांट में क्या फर्क होता है, हेयर ट्रांसप्लांट के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं, और क्या महिलाएं भी हेयर ट्रांसप्लांट करवा सकती हैं।
FUE vs FUT: क्या है अंतर?
डॉक्टर पिलानी ने बताया, “FUE स्टैंड्स फॉर फॉलिकुलर यूनिट एक्सट्रैक्शन एंड FUT इज फॉलिकुलर यूनिट ट्रांसप्लांट। FUT थोड़ा पुराना तरीका है जहां पर एक पूरी स्ट्रिप ऑफ स्किन फ्रॉम द डोनर एरिया – डोनर एरिया बैक साइड ऑफ द स्कैल्प – पीछे से निकालते हैं और उसको स्टिचेस से अप्रॉक्सिमेट करते हैं।”
इससे एक एस्थेटिकली नॉट एक्सेप्टेबल स्कार फॉर्म हो जाता है। दूसरा, वह एरिया परमानेंटली डैमेज हो जाता है और फिर लिमिटेड नंबर ऑफ फॉलिकल्स निकाल सकते हैं।
FUE ज्यादा एडवांस तकनीक
“FUE ऑन द अदर हैंड इज फॉलिकल यूनिट एक्सट्रैक्शन जिसमें एक-एक फॉलिकल पीछे से निकाले जाते हैं। फॉलिकल के सराउंडिंग में एक मोटराइज्ड मशीन रहती है पंच के साथ, जो कट्स अटैचमेंट और एक-एक फॉलिकल निकालते हैं।”
डॉक्टर ने बताया कि जितना फाइन पंच और जितनी प्रिसिशन से करेंगे, डोनर एरिया डैमेज नहीं होता है और ज्यादा नंबर ऑफ फॉलिकल्स निकाल सकते हैं। “सो एडवांस कैटेगरी अगर आप बोलेंगे, FUE इज मच एडवांस दैन FUT।”
कंसल्टेशन सबसे जरूरी
डॉक्टर पिलानी ने जोर देकर कहा कि एथिकली करना चाहिए। “सबसे पहले कंसल्टेशन – हू शुड बी डूइंग अ ट्रांसप्लांट। किसको यह ट्रांसप्लांट की जरूरत है? किसको करना चाहिए? उसका डोनर एरिया कैसा है? उसके एक्सपेक्टेशंस कैसे हैं? दैट इज वेरी इंपॉर्टेंट।”
एक बार यह तय हो जाए, तो प्रोसीजर करने के लिए – हू इज डूइंग द प्रोसीजर, कैसे उसको डिस्ट्रीब्यूट किया है, कैसे उसको प्लान किया है, विथ अ विजन कि वो 2 साल, 5 साल, 10 साल, 15 साल बाद क्या रहेगा – यह सब ध्यान में रखना जरूरी है।
कौन करे ट्रांसप्लांट?
“मोस्ट इंपॉर्टेंटली कौन कर रहा है वो प्रोसीजर। आइडियली एक प्लास्टिक सर्जन या डर्मेटोलॉजिस्ट हू इज ट्रेंड, एक्सपीरियंस्ड – उनको करना चाहिए। तो देयर इज वेरी वेरी लेस चांस कि ये प्रोसीजर सफल ना हो।”
ट्रांसप्लांट के बाद क्या करें?
डॉक्टर ने बताया कि जब प्रोसीजर हो रहा है – तीन से चार दिन में डिवाइड करके – उसके बाद 10-15 दिन के लिए कुछ सावधानियां रखनी होती हैं।
“हैवी वेट एक्सरसाइज नहीं करनी है। हेड शावर नहीं करना है। स्विमिंग नहीं करना है। एक्सेस स्वेटिंग नहीं करनी है। थोड़ा सा ध्यान रखना है। जब वह वॉश हो जाता है आफ्टर 10 डेज, उसके बाद देयर इज नो मेजर रिस्ट्रिक्शन। नॉर्मल रूटीन लाइफ आप कर सकते हैं।”
एक्जिस्टिंग बालों का ध्यान
“कोई पेशेंट होता है जिसमें थोड़ा ट्रांसप्लांट हुआ है और थोड़े एक्जिस्टिंग बाल हैं, तो एक्जिस्टिंग बाल के लिए क्या है, कैसे है – वंस द डॉक्टर इवैल्यूएट्स, उसके लिए क्या-क्या प्रोसीजर करने की जरूरत है, कोई मेडिसिन, सप्लीमेंट्स – कुछ भी है अकॉर्डिंगली एज द डॉक्टर गाइड्स करना चाहिए।”
महिलाएं भी करा सकती हैं ट्रांसप्लांट
डॉक्टर पिलानी ने बताया, “आजकल बहुत सारे फीमेल पेशेंट्स हैं। बिकॉज ऑफ मल्टीपल रीजंस – PCOD, स्ट्रेस इंड्यूस्ड, हॉर्मोनल चेंजेस, थायरॉइड इश्यूज, हीमोग्लोबिन, आयरन – बहुत सारे रीजंस के कारण उनका भी फीमेल पैटर्न हेयर लॉस, जो क्रिसमस ट्री पैटर्न बोलते हैं, होने लगा है।”
उन्होंने कहा कि बहुत सारी चीजें इवैल्यूएट करने के बाद – मेडिसिंस, PCOD – ये सारी कंडीशंस को कंट्रोल करना बहुत इंपॉर्टेंट है।
महिलाओं में सफल होता है ट्रांसप्लांट
“एट द सेम टाइम अगर स्कैल्प विजिबल हो गया है काफी हद तक, जहां पर रिवर्सल पॉसिबल नहीं है मेडिसिन या थेरेपी से, वहां पर ट्रांसप्लांट भी हो सकता है और बहुत ही अच्छे से सक्सेसफुली होता है। फीमेल गेट देयर हेयर बैक पूरे अच्छे से, स्कैल्प कवर हो जाता है, व्हिच बिकम्स ऑलमोस्ट अ नो मेंटेनेंस थिंग।”
मुख्य बातें (Key Points)
- FUE एडवांस तकनीक है, FUT में स्कार रह जाता है और डोनर एरिया डैमेज होता है
- कंसल्टेशन सबसे जरूरी, क्वालिफाइड प्लास्टिक सर्जन या डर्मेटोलॉजिस्ट से करवाएं
- 10-15 दिन तक हैवी एक्सरसाइज, स्विमिंग और हेड शावर से बचें
- महिलाएं भी हेयर ट्रांसप्लांट करवा सकती हैं, बहुत सफल होता है
- PCOD, थायरॉइड, हॉर्मोनल इश्यूज को पहले कंट्रोल करना जरूरी








