UP Panchayat Chunav 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया अध्याय खुलता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनावों को आधार बनाकर अपनी जमीन मजबूत करने के इरादे से All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen यानी AIMIM ने उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब उसकी राजनीति सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांव की राजनीति से होकर विधानसभा तक पहुंचने की रणनीति पर काम होगा।
पार्टी की तैयारी का पैमाना इस बात से समझा जा सकता है कि हर गांव में 121 सदस्यीय समिति बनाई जा रही है और गांव-गांव अभियान शुरू हो चुका है। इस सक्रियता ने न सिर्फ सत्ताधारी दल बल्कि विपक्षी पार्टियों की भी टेंशन बढ़ा दी है।
पंचायत चुनाव से विधानसभा की तैयारी
AIMIM ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं माना है, बल्कि इसे विधानसभा चुनाव की तैयारी का पहला चरण बना लिया है। पार्टी का मानना है कि अगर पंचायत स्तर पर संगठन मजबूत होगा, तो विधानसभा चुनाव में उसका सीधा फायदा मिलेगा।
इसी रणनीति के तहत सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम अध्यक्षों की नियुक्ति की जा रही है। इनके साथ 121 सदस्यीय समिति बनाई जा रही है, जिसमें 100 सक्रिय सदस्य और 21 मुख्य सदस्य शामिल हैं। इन 21 सदस्यों की जिम्मेदारी बूथ को मजबूत करना और गांव स्तर पर संगठन को खड़ा करना है।
गांव-गांव अभियान, संगठन विस्तार पर जोर
AIMIM का अभियान इस समय गांव-केंद्रित है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अगर गांव तक सीधी पहुंच नहीं बनी, तो चुनावी सफलता मुश्किल है। इसलिए नुक्कड़ सभाएं, छोटे कार्यक्रम और स्थानीय मुद्दों पर संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।
पार्टी के यूपी अध्यक्ष Shaukat Ali के मुताबिक, संगठन को ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला और विधानसभा स्तर तक मजबूत करने का काम तेज़ी से चल रहा है। पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव को एक साथ ध्यान में रखकर पूरी रणनीति बनाई गई है।
विपक्षी दलों की बढ़ी चिंता
AIMIM की इस सक्रियता से उत्तर प्रदेश की विपक्षी पार्टियों में बेचैनी साफ देखी जा रही है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दल पहले भी AIMIM को लेकर असहज रहे हैं। कई मौकों पर AIMIM को भाजपा की “बी टीम” कहकर आरोप लगाए जाते रहे हैं।
जब-जब भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की बात हुई है, AIMIM को उससे बाहर रखने की चर्चा भी साथ-साथ चलती रही है। अब पंचायत चुनाव में AIMIM की सीधी एंट्री से विपक्षी दलों को डर है कि उनका पारंपरिक वोट बैंक बंट सकता है।
मुस्लिम बहुल जिलों पर AIMIM की नजर
AIMIM की रणनीति साफ है। पार्टी ने उन जिलों पर खास फोकस किया है, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है। आजमगढ़, बागपत, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली और संभल जैसे जिलों में पार्टी ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।
इन इलाकों में संगठन को मजबूत करने के लिए स्थानीय नेताओं को आगे किया जा रहा है और जमीनी मुद्दों को उठाया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है, लेकिन साथ ही वह महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भी अपने एजेंडे में शामिल कर रही है।
अमरोहा से अभियान की शुरुआत
फिलहाल AIMIM का फोकस पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर ज्यादा नजर आ रहा है। अमरोहा में नुक्कड़ सभाओं के जरिए पार्टी लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। स्थानीय स्तर पर युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ा जा रहा है।
पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव में अगर वह अपनी मौजूदगी दर्ज करा लेती है, तो विधानसभा चुनाव में उसका दावा मजबूत होगा।
ओवैसी की सीधी निगरानी और सख्त संदेश
AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi खुद उत्तर प्रदेश संगठन की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। पार्टी के भीतर यह संदेश साफ है कि यूपी को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
रमजान के बाद प्रदेशभर में अभियान और तेज करने की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि हर जिले में संगठन सक्रिय दिखे और पंचायत चुनाव में AIMIM की मौजूदगी महसूस हो।
अकबरुद्दीन ओवैसी का चुनौती भरा बयान
AIMIM के फायरब्रांड नेता और असदुद्दीन ओवैसी के भाई Akbaruddin Owaisi ने भी हाल ही में तेलंगाना के निजामाबाद में एक जनसभा के दौरान उत्तर प्रदेश को लेकर बड़ा बयान दिया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को चुनौती देते हुए कहा कि “मिस्टर योगी, यूपी आ रहा हूं, तैयार हो जाओ। अब यूपी में भी AIMIM का झंडा गाड़ेंगे।”
इस बयान को AIMIM की आक्रामक राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
2022 विधानसभा चुनाव का अनुभव और सबक
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी को बड़ी सफलता नहीं मिली। आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट से AIMIM उम्मीदवार शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने 36,419 वोट हासिल कर अपनी जमानत जरूर बचाई थी।
बाद में समाजवादी पार्टी ने गुड्डू जमाली को अपने साथ जोड़ लिया और उन्हें विधान परिषद सदस्य बना दिया। उस चुनाव में AIMIM को कुल 4,50,929 वोट मिले थे, जो कुल मतों का लगभग 0.49 प्रतिशत था।
इस बार AIMIM के सामने क्या चुनौती
अब AIMIM के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपना वोट प्रतिशत बढ़ाए और राजनीतिक रूप से खुद को प्रासंगिक साबित करे। पंचायत चुनाव को पार्टी इस दिशा में पहला बड़ा मौका मान रही है।
अगर AIMIM पंचायत स्तर पर प्रभाव छोड़ने में सफल होती है, तो यह सपा और कांग्रेस जैसे दलों के लिए सीधी चुनौती बन सकती है। वहीं भाजपा के लिए भी नए समीकरण बन सकते हैं।
बिहार की सफलता से मिला आत्मविश्वास
AIMIM को बिहार में मिली सफलता ने पार्टी का मनोबल बढ़ाया है। वहां पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी सफलता को आधार बनाकर अब AIMIM उत्तर प्रदेश में भी अपनी किस्मत आजमाने जा रही है।
तेलंगाना से निकलकर यूपी तक पार्टी की यह सक्रियता साफ संकेत देती है कि AIMIM खुद को सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना चाहती है।
किसकी टेंशन बढ़ाएगी AIMIM
सबसे बड़ा सवाल यही है कि AIMIM की एंट्री से किसकी टेंशन बढ़ेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका सीधा असर विपक्षी वोट बैंक पर पड़ सकता है। मुस्लिम वोटों के बंटवारे की आशंका ने सपा और कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है।
पंचायत चुनाव के नतीजे ही यह तय करेंगे कि AIMIM उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितना बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- यूपी पंचायत चुनाव 2026 से पहले AIMIM की बड़ी तैयारी
- हर गांव में 121 सदस्यीय समिति, बूथ मजबूत करने पर जोर
- मुस्लिम बहुल जिलों पर खास फोकस
- विपक्षी दलों की बढ़ी चिंता, वोट बैंक बंटने का डर








