Bathinda Farmers Protest: बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर गुरुवार शाम को किसानों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। यह पूरा विवाद नौ महीने पहले गिरफ्तार दो किसान कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर है।
गांव ज्योंद के पास हाईवे पर रोके गए किसानों ने दिन भर शांतिपूर्ण धरना दिया। बातचीत के लिए पहुंचे DSP गुरप्रीत सिंह और डिप्टी तहसीलदार को किसान नेताओं ने धरने में बैठा लिया और करीब ढाई घंटे तक घेरे रखा। किसानों का साफ कहना था कि जब तक उनके गिरफ्तार साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे अधिकारियों को नहीं छोड़ेंगे।
शाम को जब किसान फिर से आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन एकजुट होकर किसानों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दी और आगे बढ़ने लगे। इससे वहां बवाल बढ़ गया और पुलिस ने किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे इलाके में अफरातफरी मच गई। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और तनाव की स्थिति अभी भी बनी हुई है।
नौ महीने पुराना मामला, दो किसान जेल में बंद
यह पूरा विवाद नौ महीने पुराने एक मामले से जुड़ा है। गांव चाउके के बलदेव सिंह और गांव जिजंद के शगनदीप सिंह बठिंडा सेंट्रल जेल में बंद हैं। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) इन दोनों साथियों की तुरंत रिहाई की मांग कर रही है।
किसान संगठनों ने साथियों की गिरफ्तारी के विरोध में बठिंडा में राज्यस्तरीय प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुबह से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था।
हाईवे पर रोके गए, वहीं शुरू किया धरना
जिला मुख्यालय पर राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन के लिए जा रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर गांव ज्योंद के पास रोक लिया। किसानों ने इसपर वहीं हाईवे पर धरना शुरू कर दिया।
बातचीत करने पहुंचे DSP गुरप्रीत सिंह और डिप्टी तहसीलदार को किसान नेताओं ने धरने में बैठा लिया। अधिकारियों को करीब ढाई घंटे तक किसानों के बीच बैठना पड़ा। किसानों का साफ कहना था कि जब तक उनके गिरफ्तार साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे अधिकारियों को नहीं छोड़ेंगे और हर हाल में अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे।
शाम को बढ़ा तनाव, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
दिन भर शांतिपूर्ण धरना देने के बाद शाम को किसान फिर से आगे बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन एकजुट होकर किसानों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दी और आगे बढ़ने लगे। इसको लेकर विवाद शुरू हो गया।
पहले पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन जब किसान एकजुट होकर आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे किसान तितर-बितर हुए। हालांकि, तनाव की स्थिति अभी भी बनी हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं।
पुलिस का पक्ष: कानूनी प्रक्रिया में समय लगता है
DSP गुरप्रीत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने कल और आज भी किसान नेताओं झंडा सिंह जेठूके और शिंगारा सिंह मान के साथ बैठक की थी।
पुलिस का तर्क है कि रिहाई की कुछ कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं जिनमें समय लगता है। लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और बठिंडा स्थित कार्यालय की ओर कूच करने का प्रयास किया, जिसके बाद उन्हें हाईवे पर ही रोकना पड़ा।
DSP ने कहा है कि उन्होंने पूरी घटना की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी है और अब प्राप्त निर्देशों के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की चेतावनी: आंदोलन और तेज होगा
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनके साथियों को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
फिलहाल, जिला प्रशासन लगातार बातचीत के माध्यम से गतिरोध खत्म करने का प्रयास कर रहा है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर कई किसान कार्यकर्ताओं को घरों से भी राउंड अप किया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर किसानों और पुलिस में हिंसक टकराव
- पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, किसानों में अफरातफरी
- किसानों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की
- नौ महीने पहले गिरफ्तार बलदेव सिंह और शगनदीप सिंह की रिहाई की मांग
- DSP गुरप्रीत सिंह और डिप्टी तहसीलदार को ढाई घंटे धरने पर बैठाया
- गांव ज्योंद के पास हाईवे पर धरना
- भारी पुलिस बल तैनात, स्थिति तनावपूर्ण
- किसान नेताओं ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी








