India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई ताजा व्यापारिक डील को लेकर एक अजीब स्थिति बन गई है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक-एक शर्त का खुलासा कर रहे हैं, वहीं भारत सरकार की तरफ से घंटों तक सन्नाटा रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह भारत के लिए “ऐतिहासिक” डील है, तो इसकी घोषणा अमेरिका क्यों कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल “धन्यवाद” क्यों दे रहे हैं?
भारतीय समय के अनुसार 2 फरवरी की रात 10:30 बजे ट्रंप ने Truth Social पर डील का ऐलान किया। लेकिन भारत सरकार की तरफ से कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। ना प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, ना कोई आधिकारिक बयान आया। प्रधानमंत्री मोदी ने केवल एक ट्वीट किया जिसमें 1.4 अरब भारतीयों की ओर से ट्रंप को “बहुत-बहुत धन्यवाद” कहा गया।
12 घंटे की चुप्पी, फिर भी कोई स्पष्टीकरण नहीं
2 फरवरी की शाम 7:30 बजे से संकेत मिलने शुरू हो गए थे कि कुछ बड़ा होने वाला है। ट्रंप ने India Today के कवर की तस्वीर ट्वीट की जिस पर उनकी और मोदी की फोटो थी। रात 8 बजे उन्होंने इंडिया गेट की तारीफ करते हुए फोटो पोस्ट की। रात 10:15 बजे अमेरिका के दिल्ली स्थित राजदूत सर्जियो गोर ने ट्वीट किया – “स्टे ट्यून्ड”।
फिर रात 10:30 बजे ट्रंप ने पूरी डील का ऐलान कर दिया। व्हाइट हाउस से भी आधिकारिक घोषणा हो गई। लेकिन भारत की ओर से 15 मिनट तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। रात 11:02 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया – वो भी केवल “धन्यवाद” कहने के लिए।
3 घंटे तक अमेरिका फोटो के जरिए बता रहा था कि डील होने जा रही है, लेकिन भारत की तरफ से पूरी चुप्पी थी। यह कैसी डील है जिसकी घोषणा भारत नहीं, अमेरिका कर रहा है?
500 बिलियन डॉलर का सवाल
ट्रंप ने अपने Truth Social पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया है कि भारत अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर (करीब 45 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा के उत्पाद खरीदेगा। इसमें ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, कोयला और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
अब इस आंकड़े को समझिए। 500 बिलियन डॉलर यानी 45 लाख करोड़ रुपये। इस बार के बजट में सरकार का कुल खर्च 49 लाख करोड़ है। यानी भारत अपने कुल बजट के लगभग बराबर राशि का सामान केवल अमेरिका से खरीदेगा?
यह और भी हैरान करने वाला तब हो जाता है जब आप जानते हैं कि 2024 में भारत ने अमेरिका से केवल 41.75 बिलियन डॉलर (करीब 3.77 लाख करोड़) का सामान खरीदा था। अब अचानक यह रकम 12 गुना कैसे बढ़ जाएगी?
भारत पूरी दुनिया से मिलाकर करीब 700 बिलियन डॉलर का आयात करता है। अब अकेले अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का आयात करेगा तो बाकी देशों से क्या व्यापार बंद कर दिया जाएगा?
18% बनाम 0%: किसकी जीत?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत पर लगने वाला टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर देगा। भारत अमेरिकी सामानों पर अपना टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को घटाकर शून्य कर देगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट में लिखा, “यह जानकर हम खुश हैं कि मेड इन इंडिया उत्पादों पर अब 18% टैरिफ लगेगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का बहुत-बहुत धन्यवाद।”
लेकिन यह “शानदार घोषणा” कैसे है? इससे पहले भारतीय सामानों पर औसतन 2 से 4% टैरिफ लगता था। अब 18% लगेगा। यह बढ़ोतरी है, कमी नहीं।
दूसरी तरफ, भारत अमेरिकी सामानों पर 20 से 70% तक टैरिफ लगाता था। अब वो 0% हो जाएगा। जब अमेरिकी सामान भारत में बिना किसी टैक्स के आएंगे और भारतीय सामानों पर 18% टैक्स लगेगा, तो किसका फायदा होगा?
कोई भी पांचवीं-छठी का छात्र बता सकता है कि जब आपको ज्यादा टैक्स देना पड़े और दूसरे का सामान बिना टैक्स के आपके बाजार में आए, तो नुकसान किसका होगा।
कृषि मंत्री चुप, अमेरिकी कृषि सचिव जश्न में
रात 1:30 बजे भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डील का स्वागत करते हुए एक सामान्य ट्वीट किया। लेकिन किसानों को लेकर कोई विशेष बात नहीं कही। स्वागत के अलावा कृषि मंत्री के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं था।
लेकिन 4 घंटे बाद, सुबह 5:30 बजे अमेरिका की कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस ने एक धमाकेदार ट्वीट किया। उन्होंने लिखा:
“राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया! उन्होंने एक बार फिर अमेरिकी किसानों के लिए डिलीवर किया है। भारत-अमेरिका की यह डील अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजारों तक निर्यात करेगी। दाम बढ़ेंगे और ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का 1.3 अरब डॉलर का कृषि व्यापार घाटा था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिका के कृषि उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है और आज की यह डील इस घाटे को कम करने में अहम साबित होगी। #FarmersWin #USIndiaTrade #RuralAmerica”
अमेरिकी कृषि सचिव इस डील को “अमेरिकी किसानों की जीत” बता रही हैं। कह रही हैं “ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा”। तो प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कब बताएंगे कि इस डील से भारत के गांवों में पैसा आएगा या तबाही?
इस ट्वीट के कई घंटे बाद तक शिवराज सिंह चौहान का कोई ट्वीट नहीं आया। जबकि वे ट्विटर पर सक्रिय थे और उसी दौरान लोगों को जन्मदिन की बधाई दे रहे थे। क्या यह उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण काम था?
मोदी का वादा: “किसानों से समझौता नहीं करूंगा”
पिछले साल अगस्त में जब ट्रंप ने पहली बार भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाया, तो एक हफ्ते बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था:
“हमारे लिए अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों के, पशुपालकों के और मछुआरे भाई-बहनों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा। और मैं जानता हूं, व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।”
अब बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत कीमत चुकाई है या इस डील के लिए भारत के किसान और पशुपालक कीमत चुकाएंगे?
अब तक जिक्र केवल बादाम, काजू, अखरोट और पिस्ता का होता था। लेकिन अमेरिकी कृषि सचिव साफ कह रही हैं कि अब अमेरिका के कृषि उत्पाद भारत के बाजार में आएंगे। यह एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का मामला है, सिर्फ ड्राई फ्रूट्स का नहीं।
रूस से तेल बंद, यह फैसला किसने लिया?
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “हमने रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई मुद्दों पर चर्चा की और मोदी ने रूस से तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई। भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा। इसके अलावा वेनेजुएला से तेल खरीदने की संभावना पर भी बात हुई।”
यह बहुत गंभीर बात है। 2 साल से सरकार देश को समझा रही थी कि रूस से तेल खरीद रहे हैं क्योंकि यह राष्ट्रहित में है, सस्ता है, भारत का पैसा बच रहा है। हालांकि जनता को उसका लाभ नहीं मिला।
अब अचानक रूस से तेल नहीं खरीदेंगे। अमेरिका से और वेनेजुएला से खरीदेंगे। लेकिन यह फैसला भारत की सरकार ने घोषित नहीं किया। ट्रंप ने बताया।
कुछ दिन पहले व्लादिमीर पुतिन का दिल्ली में जिस तरह से भव्य स्वागत किया गया, उसका क्या हुआ? तब कहा जा रहा था कि यह ट्रंप को संदेश भेजने के लिए किया जा रहा है, कि भारत किसी के दबाव में नहीं आता। लेकिन अब ट्रंप कह रहे हैं, “मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई।” यानी यह फैसला ट्रंप के दबाव में लिया गया।
रूस भारत का “परमानेंट और ग्रेटेस्ट फ्रेंड” है – यह बात कल तक कही जा रही थी। लेकिन अब ट्रंप के एक फोन कॉल पर सब कुछ बदल गया?
2019 की याद: वेनेजुएला की वापसी
2019 में अमेरिका की धमकी पर भारत ने ईरान और वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद कर दिया था। तब कहा गया था कि यह अमेरिका के प्रतिबंधों का सम्मान करने के लिए किया जा रहा है।
लेकिन अब भारत फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा – क्योंकि इसमें अमेरिका का हित है। जब अमेरिका कहता है “खरीदो” तो खरीदना पड़ता है, जब कहता है “मत खरीदो” तो बंद करना पड़ता है। यह स्वायत्तता है या दबाव?
EU के साथ 0%, अमेरिका के साथ 18%
कुछ महीने पहले यूरोपीय संघ (EU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था। उसमें यूरोपीय देश भारत के टेक्सटाइल पर 0% टैरिफ लगाएंगे। पहले 10-11% लगता था। सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।
अब अमेरिका के साथ 18% टैरिफ पर भी “शानदार घोषणा” और “ऐतिहासिक डील” कहा जा रहा है। एक तरफ आप EU के साथ 0% टैरिफ को उपलब्धि बताते हैं और दूसरी तरफ अमेरिका के साथ 18% को भी उपलब्धि बताते हैं। यह कैसा गणित है?
पड़ोसी देशों से तुलना
अमेरिका ने बांग्लादेश, वियतनाम और श्रीलंका पर 20% टैरिफ लगाया है। भारत पर 18% है – थोड़ा कम। लेकिन जापान पर 15% और यूरोपीय संघ पर भी 15% है। तो भारत पर टैरिफ अभी भी ज्यादा है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश ने अमेरिकी सामानों पर 28% टैरिफ लगाया है – जवाब में। लेकिन भारत ने 0% कर दिया। बांग्लादेश ने हिम्मत दिखाई, भारत ने झुकना पसंद किया।
2019 तक भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस (GSP) का लाभ मिलता था। इससे 5% तक की अतिरिक्त छूट मिलती थी। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भारत को इस सिस्टम से बाहर कर दिया था। भारतीय निर्यातक उम्मीद कर रहे थे कि टैरिफ 15% रहे और GSP वापस मिले। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। टैरिफ 18% है और GSP का कोई जिक्र नहीं।
स्टील, कॉपर, ऑटो पर 25% अभी भी
अखबारों से व्यापार के जानकारों ने कहा कि स्टील, कॉपर, एल्युमिनियम पर 50% टैरिफ जारी रहेगा। कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% टैरिफ रहेगा।
Money Control ने लिखा है कि अभी भी भारत से जाने वाले 8 अरब डॉलर के निर्यात पर 25% टैरिफ की तलवार लटक रही है। ऑटोमोबाइल सेक्टर 3.9 बिलियन डॉलर का निर्यात अमेरिका को करता है। अभी भी यह सेक्टर “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लेंस में है, जिसके आधार पर ट्रंप ने टैरिफ लगाया था।
दुनिया के बाजारों में भारत लकड़ी के उत्पादों का जितना निर्यात करता है, उसका 39% अमेरिका जाता है। इस सेक्टर पर टैरिफ का गहरा असर पड़ सकता है।
यह सारी जानकारी अखबारों और विश्लेषकों से मिल रही है। सरकार की तरफ से कोई विस्तृत जानकारी नहीं।
संसद में स्थगन प्रस्ताव की मांग
कांग्रेस के सांसद के वेणुगोपाल ने मांग की है कि डील की शर्तों पर संसद में स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा होनी चाहिए।
उनका कहना है, “इस डील के आर्थिक, कृषि और रणनीतिक रूप से गंभीर प्रभावों के बावजूद सरकार ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, ना ही संसद को जानकारी दी। देश को जानने का अधिकार है कि इस डील की शर्तें क्या हैं। यह बेहद जरूरी है कि सरकार सारी जानकारी संसद और देश के सामने रखे।”
लेकिन संसद में तो विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जा रहा। डील की चर्चा कैसे होगी?
विपक्ष का आरोप: अडानी केस से लिंक
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने ट्वीट किया, “ट्रंप ने मोदी की कनपट्टी पर कट्टा लगाकर भारत के करोड़ों किसानों को मौत के कुएं में धकेल दिया। मोदी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील करके किसानों के पेट और पीठ में छुरा मारने का काम किया है। अब अमेरिका का कृषि उत्पाद भारत में सस्ता बिकेगा क्योंकि मोदी ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैक्स जीरो कर दिया। देश का किसान बर्बाद हो जाएगा।”
समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “भारत के बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों व खाद्यान्नों के लिए खोल देना हमारे देश की खेती-किसानी पर रोजी-बसर करने वाली 70% आबादी के साथ धोखा है। आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की बात करने वाले बताएं कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था के साथ धोखा करने के लिए कितना कमीशन खाया है।”
संजय सिंह ने इसे अडानी मामले से भी जोड़ा है। उन्होंने कहा कि एक साल से गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर अमेरिका की अदालत में चल रहा भ्रष्टाचार का मामला अटका हुआ था।
डील की घोषणा से मात्र 2 दिन पहले इस मामले ने गति पकड़ी। अडानी की ओर से पेश वकीलों ने अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) से इस बारे में समझौता कर लिया कि इस मामले में उन्हें अमेरिका में ही समन दिया जा सकता है।
एक साल तक भारत सरकार की तरफ से अडानी को इस मामले में जारी किया गया समन नहीं दिया जा रहा था। कानून मंत्रालय ने दो बार समन भेजने से मना कर दिया – बोगस कारणों के आधार पर। अब अचानक अडानी के वकीलों ने समझौता कर लिया और भारत-अमेरिका के बीच डील हो गई। क्या यह महज संयोग है?
बाजार उछला, लेकिन सवाल बरकरार
डील की घोषणा के बाद शेयर बाजार में भयंकर उत्साह आ गया। सेंसेक्स एक वक्त 3,600 अंक तक ऊपर चला गया। कई महीनों से लड़खड़ा रहे बाजार में तेजी आई। बजट के बाद तेजी से गिर रहे बाजार में उछाल आया।
इसका मतलब है कि बाजार भी समझ रहा था कि अमेरिका से डील बहुत जरूरी है। 7 महीने से सरकार और उसके समर्थक यह जताने की कोशिश करते रहे कि अमेरिका से डील नहीं हो रही तो कोई बात नहीं, भारत को फर्क नहीं पड़ता। लेकिन बाजार को पता था कि अमेरिका अभी भी सबसे महत्वपूर्ण है।
लेकिन बाजार में तेजी का मतलब यह नहीं कि डील भारत के हित में है। बाजार को उम्मीद है कि संवाद कायम हुआ है, रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। लेकिन डील की शर्तें क्या हैं, इसका इंतजार किसी ने नहीं किया।
NDA सांसदों की बधाई, देश को डिटेल नहीं
एनडीए के सांसद प्रधानमंत्री मोदी को डील की बधाई देने लगे हैं। देश को अभी डिटेल पता नहीं, लेकिन “मोदी-मोदी” होने लगा। सरकार की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं हुई, लेकिन बधाई का वीडियो आ गया।
स्वागत और बधाई के वीडियो को ही जानकारी के रूप में पेश किया जा रहा है। किसी सेक्टर के बारे में कोई डिटेल बाहर नहीं, लेकिन जश्न शुरू हो चुका है।
अगर प्रधानमंत्री मोदी माला पहन सकते हैं तो देश को बता क्यों नहीं सकते? डील की शर्तें क्या हैं? ताकि किसी को शंका ना रहे कि भारत ने अपने हितों से समझौता किया है।
गोदी मीडिया में दिवाली, असली जानकारी गायब
गोदी मीडिया में इस डील का कवरेज दिवाली के बंपर बोनांजा की तरह हो रहा है। बड़ी-बड़ी हेडलाइन हैं, लेकिन डिटेल नहीं है कि किस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा।
वैसे भी 7 महीने से कितनी रिपोर्ट आई हैं कि भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की क्या हालत हो गई या उन सेक्टरों की क्या हालत हुई जिन पर अमेरिका ने 50% टैरिफ लगाया?
दिक्कत यही है कि इस सरकार में सूचना से पहले फोटो-वीडियो आ जाता है। और सूचनाएं या तो कभी नहीं आतीं या आधी-अधूरी आती हैं।
राज्यसभा में JP Nadda का वादा
जब राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “सरकार की तरफ से आपको यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार पूरी ट्रेड के बारे में, ऑल माइन्यूट डिटेल्स के बारे में आएगी और बताएगी। कंसर्न मंत्री उसके बारे में चर्चा करेंगे। बहुत जल्द सरकार सुओ मोटो स्टेटमेंट देने वाली है और इस ट्रेड डील के बारे में भी विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे।”
लेकिन अब तक कोई सुओ मोटो स्टेटमेंट नहीं आया। कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई। केवल बधाई और स्वागत के वीडियो आ रहे हैं।
सवाल अनुत्तरित
भारत के लोगों को ट्रंप से कहना चाहिए कि हम अपने प्रधानमंत्री से “मन की बात” सुन लेंगे। आप हर दिन 2 मिनट का समय निकालकर भारत के बारे में न्यूज दे दीजिए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री “मन की बात” में इस डील की बात करेंगे? क्या वो बताएंगे कि:
- 500 बिलियन डॉलर का आयात अकेले अमेरिका से कैसे होगा?
- अमेरिकी सामानों पर 0% टैरिफ से भारतीय उद्योगों का क्या होगा?
- कृषि सेक्टर अमेरिकी उत्पादों के लिए कितना खुल गया है?
- रूस से तेल खरीदना बंद करने का फैसला क्यों लिया गया?
- वेनेजुएला से तेल खरीदने का फैसला कैसे हुआ?
ये सवाल जवाब मांगते हैं। लेकिन जवाब अभी तक नहीं मिला है।
जानें पूरा मामला
पिछले 7 महीने से अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ वॉर चल रहा था। ट्रंप ने पहले 50%, फिर 25% टैरिफ लगाया। भारत के निर्यातकों पर भारी दबाव था। टेक्सटाइल और डायमंड सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए।
दूसरी तरफ, भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया। इससे अमेरिका पर दबाव था। ब्रिक्स में चीन और रूस के करीब जाने से भी दबाव था।
लेकिन अंत में भारत ने झुकना ही बेहतर समझा। 18% टैरिफ स्वीकार कर लिया। अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 0% कर दिया। 500 बिलियन डॉलर के आयात का वादा कर दिया। कृषि सेक्टर खोल दिया। रूस से तेल बंद कर दिया।
और सबसे बड़ी बात – इस सबकी घोषणा अमेरिका कर रहा है, भारत नहीं। यह कैसी डील है?
मुख्य बातें (Key Points)
• अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने India-US Trade Deal की घोषणा की, लेकिन भारत सरकार की तरफ से 12 घंटे तक चुप्पी रही और कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई
• ट्रंप के अनुसार भारत अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर (45 लाख करोड़ रुपये) का सामान खरीदेगा, जो भारत के कुल बजट (49 लाख करोड़) के लगभग बराबर है
• भारतीय सामानों पर टैरिफ 2-4% से बढ़कर 18% हो गया, जबकि अमेरिकी सामानों पर भारत ने टैरिफ 0% कर दिया – यह असमान डील है
• अमेरिकी कृषि सचिव ने खुलकर कहा कि यह “अमेरिकी किसानों की जीत” है और “ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा”, लेकिन भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केवल सामान्य स्वागत किया
• प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई – यह फैसला ट्रंप ने घोषित किया, भारत सरकार ने नहीं, जो संप्रभुता पर सवाल खड़ा करता है
• सरकार की तरफ से कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई, संसद को जानकारी नहीं दी गई, लेकिन बधाई के वीडियो आने लगे – सूचना से पहले प्रचार
• विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह डील अडानी केस के दबाव में की गई है, क्योंकि डील से दो दिन पहले अडानी के वकीलों ने अमेरिका में समझौता कर लिया








