Trump India Tariff Deal: क्या भारत ने अमेरिका के लिए अपना कृषि बाजार खोल दिया है? यह सवाल उस वक्त से उठ रहा है जब से यह ऐलान हुआ कि अमेरिका भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने वाला है। एक तरफ जहां इसे भारत सरकार अपनी बड़ी जीत बता रही है और शेयर बाजार में भी अच्छा रिस्पांस देखने को मिला है, वहीं दूसरी तरफ इसको लेकर संग्राम भी है।
संसद का सत्र भी चल रहा है और कांग्रेस की तरफ से मुद्दा उठाया गया है। कांग्रेस बकायदा सवाल उठा रही है कि क्या मोदी सरकार ने भारतीय किसानों के हितों का सौदा किया है।
कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल
कांग्रेस की तरफ से एक ट्वीट किया गया जिसमें पार्टी ने कहा, “अमेरिका के कृषि मंत्री ब्रुक रोलेंस ने कहा है कि अब अमेरिका के किसानों के प्रोडक्ट भारत के बाजार में बिकेंगे। इससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में पैसा आएगा। अमेरिका के किसानों के लिए भारत का मार्केट बेहद जरूरी है। ट्रंप ने इस डील से अमेरिका के किसानों का फायदा कराया है।”
कांग्रेस ने आगे लिखा, “यह भारत के लिए बेहद चिंताजनक है। अमेरिका की कृषि मंत्री के बयान से साफ है कि मोदी सरकार ने भारत के किसानों के हितों को नजरअंदाज करके यह डील की है। इससे भारत में किसानों को नुकसान होगा। अब उन्हें अपने ही देश में अमेरिका के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। यह पूरी तरह से भारत के किसानों पर वार है।”
ट्रंप का पोस्ट: क्या-क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। वो मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के एक शक्तिशाली और सम्मानित नेता हैं।”
ट्रंप ने आगे लिखा, “हमने कई विषयों पर बात की जिनमें व्यापार और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करना भी शामिल है। उन्होंने रूसी तेल खरीदना बंद करने और संयुक्त राज्य अमेरिका से तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से कहीं अधिक खरीदने पर सहमति जताई है।”
रूस से तेल खरीद बंद करेगा भारत?
यह सबसे बड़ा सवाल है जो ट्रंप के पोस्ट से उठा है। क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने वाला है? ट्रंप का कहना है कि भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। हालांकि भारत ने रूस से तेल खरीद कम तो की है, लेकिन पूरी तरह बंद करने पर अभी स्पष्टीकरण नहीं आया है।
ट्रंप ने कहा, “इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी जिसमें इस समय हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं।”
25% से घटकर 18% हुआ टैरिफ
ट्रंप ने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मित्रता और सम्मान के चलते और उनके अनुरोध के अनुसार, तत्काल प्रभाव से हमने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। इसके तहत जो 25% टैरिफ था उसको घटाकर 18% किया जाएगा।”
सबसे इंपॉर्टेंट बात यह है कि ट्रंप ने कहा, “वह भी संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को घटाकर जीरो करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।”
क्या भारत अमेरिकी प्रोडक्ट पर जीरो टैरिफ करेगा?
यह सबसे बड़ा सवाल है। ट्रंप के बयान से यह साफ नहीं है कि क्या भारत अमेरिकी उत्पादों पर जीरो टैरिफ लगाएगा। ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री ने “बाय अमेरिका” यानी अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता ऊंचे स्तर पर जताई है।
इसके अलावा 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और कई अन्य उत्पादों की खरीद भी शामिल है।
अमेरिकी कृषि मंत्री का विवादास्पद बयान
अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलेंस ने एक पोस्ट में लिखा, “हमारे अमेरिकी किसानों के लिए एक बार फिर से परिणाम देने के लिए डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद। नया अमेरिका-भारत समझौता भारत के विशाल बाजार में और अधिक अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात करेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी का प्रवाह होगा।”
उन्होंने आगे कहा, “2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर का था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आज के समझौते इस घाटे को कम करने में काफी मदद करेंगे।”
मांसाहारी दूध का विवाद
सबसे बड़ा विवाद अमेरिकी दूध को लेकर है। अमेरिका में जो गायें हैं उनको मांसाहारी खाना दिया जाता है। तो क्या उस दूध का कंजम्पशन इंडिया में होगा? यह सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है।
भारत में डेयरी सेक्टर बेहद संवेदनशील है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर भारत का डेयरी सेक्टर अमेरिकी आयात के लिए खुलता है तो भारतीय डेयरी किसानों को सालाना ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है और दूध की कीमतों में 15% की गिरावट आ सकती है।
किसानों का गुस्सा फिर भड़केगा?
आपको याद होगा कुछ समय पहले तीन कृषि कानूनों को लेकर बड़े स्तर पर प्रोटेस्ट हुए थे और सरकार को वो कानून वापस लेने पड़े थे। अब सवाल यह है कि कहीं दोबारा से ऐसी स्थिति तो नहीं बनेगी कि किसानों का गुस्सा झेलना पड़े।
इंडियन कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ फार्मर्स मूवमेंट्स (ICCFM) जैसे किसान संगठनों ने पहले ही भारत सरकार से आग्रह किया था कि व्यापार समझौते से कृषि को बाहर रखा जाए।
सरकार से स्पष्टीकरण की मांग
अभी तक भारत सरकार ने इस पर स्पष्टीकरण नहीं दिया है। खासकर दो सवालों पर – क्या वाकई रूस से हम तेल खरीद बंद कर रहे हैं और क्या भारतीय कृषि बाजार अमेरिका के लिए खुल गया है।
अभी इस डील को लेकर बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो सामने नहीं आई हैं। केवल बयान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसको लेकर बयान दिया और धन्यवाद दिया। भारतीय बाजार में भी कहीं ना कहीं एक खुशी की लहर है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ट्रंप ने भारत पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% किया, भारत 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा
- अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलेंस ने कहा भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पाद बिकेंगे
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारतीय किसानों के हितों का सौदा किया
- मांसाहारी दूध का विवाद – अमेरिकी गायों को मांसाहारी खाना दिया जाता है
- SBI रिपोर्ट के अनुसार भारतीय डेयरी किसानों को ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है
- ट्रंप ने कहा भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका-वेनेजुएला से खरीदेगा








