Sadhvi Prem Baisa Death: जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने प्रेक्षा अस्पताल में पहुंचकर अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों से पूछताछ की है। SIT ने 28 जनवरी की शाम को जब साध्वी को अस्पताल लाया गया था, उस वक्त की स्थिति का रिक्रिएशन भी करवाया है। SIT प्रभारी ACP छवि शर्मा और SHO शकील अहमद ने यह पूछताछ की है।
जांच में कई अहम बातें सामने आ सकती हैं क्योंकि SIT को डिटेल्स की तलाश है। अभी भी साध्वी के पिता वीरमनाथ शक के दायरे में हैं और वह अभी तक फोन के पासवर्ड नहीं बता रहे हैं।
केस से जुड़े चार किरदार सामने आए
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की वजह क्या है, यह जानने के लिए SIT पड़ताल में जुटी है। इस बीच केस से जुड़े चार किरदार सामने आए हैं – वो कंपाउंडर देवी सिंह जिसने इंजेक्शन लगाया, वो रसोईदार जिसने साध्वी का भोजन बनाया, साध्वी के खुद पिता वीरमनाथ और साध्वी के मामा।
इन सब से पूछताछ हुई है लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सबसे ज्यादा फोकस उस कंपाउंडर पर है जिसने साध्वी को इंजेक्शन लगाए थे।
कंपाउंडर ने बताया पूरा घटनाक्रम
कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित ने आज तक को पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा, “मैं गया वहां पे, उनकी तबीयत सुस्त थी। मैंने नॉर्मली जो उनके पहले एक बार प्रिस्क्रिप्शन था, इंजेक्शन लगाया था और वही उन्होंने कहा कि एक बार मेरे को इंजेक्शन लगा दो।”
देवी सिंह ने बताया कि उन्हें कॉलोनी से बुलाया गया था क्योंकि साध्वी की तबीयत खराब थी, थोड़ा बुखार और जुकाम था। “कॉलोनी में जो भी मेरे को बुलाते हैं सेवा के लिए, मैं चला जाता हूं। तो मैं वहां गया और उनके कहे अनुसार प्रिस्क्रिप्शन में इंजेक्शन लगाया।”
कौन से इंजेक्शन लगाए गए?
कंपाउंडर देवी सिंह ने साफ किया कि जो इंजेक्शन पर्चे में लिखा था वही लगाया, ना उससे कम ना ज्यादा। उन्होंने कहा, “इंजेक्शन उनके वो पर्ची में था। वही मैंने उनके लगाया था जो पहले लगाया था। एक बार पहले भी मैं उनके पास आया हूं। एक-दो बार और भी उनके आश्रम में जाता था।”
कंपाउंडर ने साध्वी को दो इंजेक्शन लगाए – डेक्सोना (डेक्सामेथासोन) और डायनापार। डेक्सोना एक स्टेरॉइड है जो सूजन और एलर्जी को कम करता है, जबकि डायनापार एक शक्तिशाली दर्द निवारक इंजेक्शन है जो तेज दर्द, सूजन और जोड़ों की जकड़न को कम करता है।
17-18 साल का अनुभव, कभी ऐसा नहीं हुआ
देवी सिंह ने जोर देकर कहा कि उन्होंने अपने मन से कुछ नहीं किया। “मैंने मन से नहीं लगाया। मेरे को इस नर्सिंग पेशे में मैं 2007 से हूं। मेरे को 17-18 साल हो गए। इस इंजेक्शन, मैंने ऐसे इंजेक्शन और लगाए हैं और ऐसा क्या हुआ इसमें जो मेरी जिंदगी उछलपुचल हो गई।”
ये दोनों दवाएं अक्सर दर्द और सूजन के तेज इलाज के लिए उपयोग की जाती हैं, लेकिन इन्हें केवल डॉक्टर की देखरेख में ही दिया जाना चाहिए।
इंजेक्शन के 20-25 मिनट बाद बिगड़ी हालत
देवी सिंह ने बताया कि इंजेक्शन लगाने के बाद वह करीब 4 से 5 मिनट वहां रुके थे। “उसके दौरान उनको मतलब तबीयत ठीक थी। ऐसा कुछ था नहीं। और मेरे को 20 से 25 मिनट बाद, मतलब मेरे घर पहुंचने पर फोन आया कि उनकी तबीयत ज्यादा गड़बड़ हो गई है। हम हॉस्पिटल ले जा रहे हैं।”
इसके बाद कंपाउंडर को कोई फोन नहीं आया। अगली खबर उन्हें साध्वी की मौत की मिली।
वीरमनाथ का भरोसेमंद है कंपाउंडर
कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित प्रेम बाईसा के आश्रम से भी जुड़ा हुआ है। जोधपुर के सरकारी अस्पताल में उसकी तैनाती है। प्रेम बाईसा के साथ-साथ उसके पिता वीरमनाथ को भी कई बार इंजेक्शन और दवाएं दे चुका है। देवी सिंह वीरमनाथ का भरोसेमंद है।
देवी सिंह का दावा है कि जो इंजेक्शन लगाए गए उससे मौत नहीं होती। उन्होंने कहा, “इंजेक्शन वही है भाई, सांस की दिक्कत है थोड़ा, उसमें लगाया जाता है। एनेस्थेटिक है, बुखार है, फ्लू में तो उस इंजेक्शन में भाई, मेरा आज 18-19-20 साल का अनुभव है, उससे डेथ इतनी सडनली डेथ नहीं होती है। बाकी एक्सपर्ट ने भी यही कहा कि इतना नहीं होती है।”
SIT ने दी सवालों की फहरिस्त
फिलहाल यह कंपाउंडर सवालों के घेरे में है। SIT एक बार पूछताछ कर चुकी है और सवालों की एक फहरिस्त भी देवी सिंह को दी है, जिसका जवाब उन्हें देना है।
SIT इन सवालों की तलाश में है – क्या साध्वी प्रेम बाईसा की मौत इंजेक्शन की वजह से हुई? कंपाउंडर ने उस दिन साध्वी बाईसा को कौन सा इंजेक्शन दिया था? क्या कंपाउंडर ने प्रिस्क्रिप्शन से अलग इंजेक्शन लगाया?
जानें पूरा मामला
साध्वी प्रेम बाईसा राजस्थान की एक प्रसिद्ध धार्मिक कथावाचक और भजन गायिका थीं। 28 जनवरी 2026 को जोधपुर स्थित उनके आश्रम ‘साधना कुटीर’ में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। उनके पिता ने बताया कि वह अस्वस्थ थीं और कंपाउंडर को बुलाया गया, जिसने इंजेक्शन दिया। इसके बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ी और प्राइवेट अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
मौत के कुछ घंटों बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट आई जिसे ‘सुसाइड नोट’ बताया गया। SIT तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज की जांच कर रही है। आश्रम के आंतरिक विवाद और वित्तीय मामलों की भी जांच हो रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का सटीक कारण नहीं मिला, इसलिए विसेरा रिपोर्ट के लिए सैंपल भेजे गए हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- SIT ने प्रेक्षा अस्पताल में पूछताछ की और 28 जनवरी की घटना का रिक्रिएशन करवाया
- कंपाउंडर देवी सिंह ने साध्वी को डेक्सोना (स्टेरॉइड) और डायनापार (दर्द निवारक) इंजेक्शन लगाए थे
- इंजेक्शन के 20-25 मिनट बाद साध्वी की हालत बिगड़ी और अस्पताल में मौत हो गई
- कंपाउंडर का दावा है कि प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही इंजेक्शन लगाए, 17-18 साल के अनुभव में ऐसा कभी नहीं हुआ
- केस में चार किरदार – कंपाउंडर देवी सिंह, रसोईदार, पिता वीरमनाथ और मामा
- SIT ने कंपाउंडर को सवालों की फहरिस्त दी है, विसेरा रिपोर्ट का इंतजार








