Nuclear Energy India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में परमाणु ऊर्जा पर विशेष फोकस करते हुए ऐसे बड़े फैसले किए हैं जिनका असर आने वाले समय में भारत की ऊर्जा क्षमता पर गहरा दिखेगा। परमाणु परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को 2035 तक टैक्स फ्री कर दिया गया है। लेकिन जैसे ही भारत न्यूक्लियर पावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, एक बड़ा सवाल उठ रहा है – क्या अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump इस पर ऐतराज जताएंगे?
बजट में की गई घोषणाओं के बाद भारत अब न्यूक्लियर सेक्टर में एक नई ताकत के रूप में उभरने की तरफ अग्रसर है। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना है, न कि दुनिया पर राज करना।
बजट में परमाणु क्षेत्र को मिली बड़ी राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कुछ बेहद अहम फैसले लिए हैं। सबसे बड़ा ऐलान यह है कि परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में यूज होने वाले उपकरणों को पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया गया है। यह छूट 2035 तक लागू रहेगी।
इस कदम से परमाणु ऊर्जा में निवेश की संभावना कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। देश में बिजली की बढ़ती मांग और डीकार्बनाइजेशन के लक्ष्यों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा का विस्तार अब अनिवार्य हो गया है।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2032 तक भारत 22,380 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता हासिल कर सकता है। वित्त मंत्री ने क्षमता की कोई सीमा तय किए बिना इसे सभी परमाणु संयंत्रों के लिए विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया है।
2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
भारत सरकार का मानना है कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करना संभव है। बजट में की गई घोषणाओं से इस महत्वाकांक्षी योजना को समर्थन मिलेगा।
यह लक्ष्य तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम यह समझें कि भारत में अभी बिजली उत्पादन काफी हद तक कोयले पर निर्भर है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन से प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प है।
FDI और निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खुला
सरकार की अब एक बड़ी कोशिश है कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एफडीआई यानी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) के जरिए और अधिक निवेश आए। विदेशों से भी निवेश लाने के लिए सरकार बड़े स्तर पर काम कर रही है।
पिछले दिनों सरकार ने एक परमाणु शांति बिल भी संसद में पेश किया था, जिसमें निजी क्षेत्र (Private Sector) को भी परमाणु ऊर्जा में भागीदारी की अनुमति दी गई है। हालांकि, तब कई विपक्षी दलों ने इसका जोरदार विरोध किया था और कहा था कि इतने संवेदनशील सेक्टर में प्राइवेटाइजेशन नहीं होना चाहिए।
लेकिन सरकार का तर्क है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के बिना इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा।
क्या Donald Trump करेंगे विरोध?
अब यहां सबसे बड़ा और अहम सवाल यह उठता है कि जब भारत परमाणु क्षेत्र में लगातार मजबूत बनेगा और इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा, तो क्या अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को इस पर ऐतराज होगा?
इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में भी कई मुद्दों पर लगातार ऐतराज जताते रहे हैं। अमेरिका परमाणु शक्ति के मामले में दुनिया के टॉप देशों में आता है। अमेरिका कभी नहीं चाहेगा कि कोई अन्य देश उसे टक्कर दे और न्यूक्लियर सेक्टर में बेहद पावरफुल बने।
इतिहास गवाह है कि किस तरह से परमाणु शक्ति का दुरुपयोग अमेरिका द्वारा जापान पर किया जा चुका है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए थे।
भारत का उद्देश्य केवल शांतिपूर्ण है
भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और बिजली उत्पादन के उद्देश्य से है। भारत को ताकत दिखानी नहीं है और न ही बम गिराने हैं।
भारत का न्यूक्लियर प्रोग्राम बस इतना है कि वह अपनी बिजली क्षमता को पूरा करे और स्वच्छ ऊर्जा के जरिए देश को आत्मनिर्भर बनाए। कोयला उत्पादन के आधार पर भारत में बिजली उत्पादन अभी भी ज्यादा होता है और उसमें कोयले का उपयोग काफी ज्यादा है।
ऐसे में भारत की कोशिश है कि बिजली उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा को प्राथमिकता दी जाए। इसीलिए भारत ने बजट में इस सेक्टर को विशेष तौर पर वरीयता दी है।
Trump के ऐतराज से भारत पर नहीं पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप ऐतराज भी करते हैं, तो भी भारत पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। भारत अपनी ऊर्जा नीति में स्वतंत्र और आत्मनिर्भर है।
ट्रंप आने वाले समय में इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी कर सकते हैं, जैसा कि वे व्यापार, टैरिफ और अन्य मुद्दों पर करते रहते हैं। लेकिन उनकी बयानबाजी का भारत की परमाणु नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी तरह से पालन करता है। भारत का ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ है।
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
परमाणु ऊर्जा में सरकार के इस निवेश और फोकस का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। जब भारत की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, तो बिजली की किल्लत कम होगी।
साथ ही, क्योंकि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा है, इससे प्रदूषण भी कम होगा। कोयले पर निर्भरता घटेगी तो हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। लंबे समय में यह देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के उपकरणों को 2035 तक टैक्स फ्री कर दिया है।
• 2032 तक 22,380 मेगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
• सरकार FDI और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए परमाणु क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है।
• भारत ने स्पष्ट किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और बिजली उत्पादन के लिए है, न कि सैन्य उद्देश्यों के लिए।
• अगर Donald Trump इस पर ऐतराज भी जताते हैं तो भारत की परमाणु नीति पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।








