Holashtak 2026 : हिंदू धर्म में होली का त्योहार हर्ष और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। परंतु होली के ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक का समय शुरू हो जाता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है। इसलिए इन दिनों शुभ कार्यों से बचना चाहिए। यदि आप साल 2026 में शादी, मुंडन, जनेऊ संस्कार या गृह प्रवेश जैसी मांगलिक क्रियाओं की योजना बना रहे हैं, तो होलाष्टक की तिथियों और सावधानियों को जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कब से कब तक रहेगा होलाष्टक?
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि से होलाष्टक प्रारंभ होता है और पूर्णिमा यानी कि होलिका दहन तक चलता है।
इस वर्ष होलाष्टक 14 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। रंगों वाली होली यानी धुलेंडी इस बार 4 मार्च को मनाई जाएगी।
इस तरह पूरे 18 दिनों तक होलाष्टक का प्रभाव रहेगा, जिसमें किसी भी तरह के मांगलिक कार्य और नई शुरुआत से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
क्या है होलाष्टक का अर्थ?
होलाष्टक शब्द दो शब्दों – होली और अष्टक से मिलकर बना है, जिसका मतलब है आठ दिन। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभुत्व अधिक माना जाता है।
शास्त्रों में लिखा है कि इन आठ दिनों में प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप द्वारा अत्यधिक यातनाएं दी गईं। इसलिए इस समय वातावरण में शुभता की कमी रहती है और नए कार्य करने से अशुभ प्रभाव पड़ सकते हैं।
किन कामों से बचना चाहिए?
इस दौरान किसी भी मांगलिक कार्य को करना वर्जित माना गया है। शादी, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार या अन्य शुभ कर्मों से बचना चाहिए।
साथ ही नए व्यवसाय या दुकान शुरू करना भी उचित नहीं है। नए घर की नींव रखना या गृह प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है।
इसके अलावा नई गाड़ी, सोना, चांदी या जमीन-जायदाद की खरीदारी और रजिस्ट्री कराने से भी बचना चाहिए। इन सावधानियों का पालन करने से होलाष्टक के दौरान होने वाले नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है।
भक्ति और दान का समय
हालांकि मांगलिक कार्य वर्जित हैं, यह समय भक्ति, साधना और दान के लिए उत्तम माना जाता है।
जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े या धन का दान करना इस समय बहुत फलदाई होता है। इसी तरह मंत्रों का जाप, विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंत्र इस अवधि में अधिक लाभकारी माने गए हैं।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करने से मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है। साथ ही घर की आध्यात्मिक शुद्धि के लिए गंगाजल का छिड़काव और शाम को कपूर जलाना शुभ माना जाता है।
घर की सफाई और शुद्धिकरण जरूरी
ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर का वातावरण शुद्ध रहता है।
यात्रा या लंबी दूरी की गतिविधि में भी सावधानी बरतें और बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
होलाष्टक के दौरान की गई यह सावधानियां न केवल अशुभ परिणामों से बचाती हैं, बल्कि यह समय आध्यात्मिक रूप से अपने आप को शुद्ध करने का अवसर भी प्रदान करता है।
होलिका दहन के साथ समाप्ति
होलिका दहन के साथ होलाष्टक समाप्त होता है और अगले दिन रंगों वाली होली मनाई जाती है। इसलिए इस अवधि में सतर्कता और भक्ति का मिश्रण ही सबसे उत्तम माना जाता है।
इस वर्ष 3 मार्च को होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक का समापन होगा और 4 मार्च को पूरे देश में रंगों का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- होलाष्टक 2026 में 14 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा।
- इन आठ दिनों में शादी, गृह प्रवेश और नई खरीदारी जैसे शुभ कार्य वर्जित हैं।
- यह समय भक्ति, साधना, दान और मंत्र जाप के लिए उत्तम माना जाता है।
- 4 मार्च को रंगों वाली होली (धुलेंडी) मनाई जाएगी।








