Budget 2026 STT Hike Stock Market Crash: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होते ही शेयर बाजार में भूचाल आ गया। जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का ऐलान किया, बाजार एक झटके में 1600 पॉइंट नीचे गिर गया। यह बजट एक बड़ा संदेश लेकर आया है – सरकार अब छोटे निवेशकों को शेयर बाजार से हतोत्साहित करना चाहती है और बड़े कॉर्पोरेट प्लेयर्स के हाथों में देश की अर्थव्यवस्था की कमान सौंपना चाहती है।
यह बजट कई मायनों में अलग है। इस बार बजट भाषण में किसान, मजदूर, आम आदमी या मिडिल क्लास का सीधा जिक्र नहीं था। सरकार का पूरा फोकस कॉर्पोरेट सेक्टर, MSME और सर्विस सेक्टर पर रहा। यह एक साफ संकेत है कि सरकार की आर्थिक नीति की दिशा बदल रही है।
STT बढ़ोतरी से बाजार में हड़कंप
बजट पेश होने के दौरान दोपहर 12:07 बजे जैसे ही STT बढ़ाने की घोषणा हुई, बाजार तुरंत 1600 पॉइंट नीचे आ गया। बाद में कुछ संभला जरूर, लेकिन झटका गहरा था। यह दर्शाता है कि बाजार इस घोषणा का इंतजार कर रहा था।
STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करना मतलब 150% की बढ़ोतरी है। यह कदम रिटेल निवेशकों को फ्यूचर्स और ऑप्शंस में सट्टेबाजी से रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार चाहती है कि छोटे निवेशक कैश में डील करें, भविष्य की सट्टेबाजी छोड़ें।
बायबैक टैक्स में बड़ा बदलाव
पिछले साल सरकार ने बायबैक को कैपिटल गेन से जोड़ दिया था। तब प्रमोटर्स को 30% टैक्स देना पड़ता था। इस बार इसे घटाकर 20% कर दिया गया है। यह बड़े शेयरहोल्डर्स के लिए राहत है।
वित्त मंत्री ने साफ कहा – “इन द इंटरेस्ट ऑफ माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स, आई प्रपोज टू टैक्स बायबैक फॉर ऑल टाइप्स ऑफ शेयरहोल्डर्स एज कैपिटल गेन्स।” लेकिन साथ ही यह भी कहा कि टैक्स आर्बिट्राज के मिसयूज को रोकने के लिए प्रमोटर्स को एडिशनल बायबैक टैक्स देना होगा।
सरकार का असली मकसद क्या है?
यह बजट एक साफ संदेश देता है – सरकार चाहती है कि शेयर बाजार में लिमिटेड प्लेयर्स रहें। बड़े कॉर्पोरेट हाउसेस कैश डील करें। उन पर सरकार की निगाह और निगरानी रहे। वे पॉलिटिकल फंडिंग करते रहें। राजनीति भी चले, धंधा भी चले।
देश में 17 करोड़ डीमैट अकाउंट हैं। इनमें से बड़ी संख्या छोटे शहरों और गांवों के निवेशकों की है जो छोटी-छोटी सट्टेबाजी से कमाई करते थे। अब इनको डिस्करेज किया जा रहा है।
बजट बनाम खर्च: चौंकाने वाले आंकड़े
सरकार की असली मुश्किल यह है कि बजट में जो पैसा एलोकेट किया जाता है, विभाग उसे खर्च ही नहीं कर पाते। पिछले साल के आंकड़े देखें:
खेती के लिए ₹1,58,838 करोड़ का बजट था, लेकिन सिर्फ ₹1,51,853 करोड़ ही खर्च हुआ। यानी ₹7,000 करोड़ खर्च ही नहीं हो पाए। इस बार ₹1,62,671 करोड़ का बजट बना दिया गया।
एजुकेशन में ₹1,28,650 करोड़ का बजट था, सिर्फ ₹1,21,000 करोड़ खर्च हुआ। इस बार ₹1,39,000 करोड़ का बजट है।
हेल्थ सेक्टर में ₹98,031 करोड़ का बजट था, ₹94,625 करोड़ खर्च हुआ। इस बार ₹1,44,599 करोड़ का बजट बना दिया गया।
सोशल वेलफेयर के लिए ₹60,000 करोड़ था, सिर्फ ₹50,000 करोड़ खर्च हुआ। इस बार ₹62,000 करोड़ का बजट है।
अर्बन डेवलपमेंट में ₹96,000 करोड़ का बजट था, सिर्फ ₹57,000 करोड़ खर्च हुए। इस बार ₹85,000 करोड़ का बजट है।
कॉर्पोरेट के लिए राहत ही राहत
इस बजट में MSME के लिए ₹10,000 करोड़ की विकास निधि बनाई गई है। आत्मनिर्भर भारत निधि ₹2,000 करोड़ की है। छोटी इंडस्ट्रीज के लिए भी ₹2,000 करोड़ हैं। इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट के लिए ₹4,000 करोड़ और कार्बन कैप्चर के लिए ₹20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जो ₹11.2 लाख करोड़ था, उसे बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया। MSME को ट्रेड्स से ₹7 लाख करोड़ की फंडिंग होगी।
सर्विस सेक्टर को 10% ग्लोबल हिस्सेदारी का टारगेट
भारत का सर्विस सेक्टर दुनिया में मशहूर है। इस बजट में टारगेट रखा गया है कि भारत का सर्विस सेक्टर दुनिया के बाजार में 10% योगदान दे। इसके लिए विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रावधान किया गया है जो भारत से क्लाउड सर्विसेज और डेटा सेंटर सर्विसेज देती हैं।
IT सेक्टर जो बेंगलुरु और हैदराबाद में डगमगा रहा था, उसको संभालने की कोशिश है। इसके लिए 15% का सेफ हार्बर भी दिया गया है।
बैंक रिफॉर्म और फॉरेक्स कमेटी
बैंकों की शिकायत है कि उनके पास लिक्विडिटी नहीं है। जो लोन बड़े कॉर्पोरेट हाउसेस को दिया जाता है, उससे बैंक परेशान हैं। इसलिए अब बैंक रिफॉर्म की तरफ बढ़ने की बात है। फॉरेन करेंसी के लिए भी एक कमेटी बनेगी।
SBI के चेयरमैन ने भी कमेंट किया था कि बैंक और शेयर बाजार के बीच एक प्लेइंग फील्ड होनी चाहिए।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
जब शेयर बाजार 2000 पॉइंट नीचे था, तब राहुल गांधी से पूछा गया तो उन्होंने कहा – “मैं क्या कहूं? अगर वो लोग डिसअपॉइंटेड हैं तो हम क्या खुश हो सकते हैं क्या?”
ममता बनर्जी ने कहा – “What they said about three corridors, that is absolutely a garbage of lie, blatant lies. It is already on process.”
Reliance और तेल का मुद्दा
भारत की बड़ी मजबूरी एनर्जी और तेल है। Reliance एक वक्त वेनेजुएला और रूस से तेल खरीदती थी। अमेरिका ने रोक लगा दी। ईरान से भी तेल मंगाना बंद करना पड़ा। चाबहार का रास्ता भी अटक गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ऐलान कर दिया कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। यह वो स्थिति है जिसमें भारत के बड़े कॉर्पोरेट को भी भरोसा नहीं है कि सरकार अमेरिका के सामने खड़ी हो पाएगी।
Rare Earth के लिए स्पेशल कॉरिडोर
भारत की ऑटो इंडस्ट्री चीन के रेयर अर्थ पर निर्भर है। भारत की कंपनियों के डायरेक्टर्स चीन सरकार से मिलने गए थे। पहली बार भारत को समझ आया कि ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में रेयर अर्थ के लिए स्पेशल कॉरिडोर बनाना होगा। लेकिन इसके लिए अभी कोई ठोस बजट नहीं है।
टेक्सटाइल सेक्टर और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज
भारत टेक्सटाइल में पिछड़ रहा है। चीन का धागा और बांग्लादेश का बाजार हावी है। इसलिए नेशनल फाइबर स्कीम बनाई जाएगी। नेशनल हैंडलूम पॉलिसी से कारीगरों को मदद मिलेगी। मेगा टेक्सटाइल पार्क बनेंगे।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज के तहत खादी को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रोडक्शन, ट्रेनिंग और मार्केटिंग की दिशा में काम होगा।
आम आदमी पर असर
इस बजट का सीधा संदेश है – अगर आप छोटे निवेशक हैं तो शेयर बाजार में सट्टेबाजी छोड़िए। FD में पैसा रखेंगे तो 5-6% ब्याज मिलेगा। सेविंग में 2.5% मिलेगा। लेकिन महंगाई का डाटा सरकार अपने हाथ में रखती है। बाजार में बढ़ती कीमतें और बैंकों का ब्याज दर मेल नहीं खाते।
रुपये की वैल्यू लगातार गिर रही है। एशियाई देशों में भी कई करेंसी के मुकाबले भारतीय रुपया नीचे है।
क्या है पृष्ठभूमि
यह बजट एक बड़े बदलाव का संकेत है। सरकार के कंधे अर्थव्यवस्था संभालते-संभालते थक गए हैं। जियोपॉलिटिक्स के दबाव में भारत को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। एक तरफ अमेरिका का टैरिफ दबाव है, दूसरी तरफ चीन से प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में सरकार ने फैसला किया है कि बड़े कॉर्पोरेट और MSME को आगे किया जाए और वे देश की अर्थव्यवस्था का बोझ उठाएं।
देश में 7 करोड़ लोग टैक्स देते हैं। उन्हीं का बाजार है। उसी के लिए यह पूरा खेल है। बाकी 100 करोड़ से ज्यादा लोगों का इस बजट में कोई खास जिक्र नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
- STT में 150% बढ़ोतरी: सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% हुआ, जिससे शेयर बाजार एक झटके में 1600 पॉइंट गिर गया। यह छोटे निवेशकों को सट्टेबाजी से रोकने का कदम है।
- बजट vs खर्च का फर्क: पिछले साल कई सेक्टर में बजट का पैसा खर्च ही नहीं हो पाया – खेती में ₹7,000 करोड़, अर्बन डेवलपमेंट में ₹39,000 करोड़ बचे रह गए।
- कॉर्पोरेट फोकस: MSME के लिए ₹10,000 करोड़ की विकास निधि, सर्विस सेक्टर को 10% ग्लोबल हिस्सेदारी का टारगेट, और विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे।
- किसान-मजदूर गायब: इस बार के बजट भाषण में किसान, मजदूर, आम आदमी और मिडिल क्लास का सीधा जिक्र नहीं था।








