Gold Silver Rate Today: सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। जो चांदी कल तक ₹4 लाख का स्तर छूकर शोर मचा रही थी, उसमें 24 घंटे के अंदर भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोने की कीमतों में भी तीखी गिरावट देखने को मिली है। रातोंरात ऐसा क्या हुआ कि आसमान छू रहे भाव अचानक जमीन पर आ गिरे? इस अचानक गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है और निवेशक हैरान हैं।
चांदी में ₹85,000 की तगड़ी गिरावट
सबसे पहले बात करते हैं चांदी की। गुरुवार शाम को चांदी ने MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर ₹4,20,048 का अपना ऑल-टाइम हाई लेवल छुआ था। यह एक रिकॉर्ड था जिसने पूरे बाजार को चौंका दिया था। लेकिन शुक्रवार को यह भाव एक दिन में करीब ₹85,000 तक टूट गए।
एक समय तो चांदी गिरकर ₹3,35,000 के स्तर तक पहुंच गई थी। यानी महज 24 घंटे में चांदी के दामों में लगभग 20% से अधिक की गिरावट आई। MCX पर मार्च एक्सपायरी वाली चांदी फ्यूचर्स एक ही दिन में 27% यानी ₹1,07,968 तक गिर गईं और ₹4 लाख के रिकॉर्ड स्तर से नीचे ₹3 लाख से भी नीचे चली गईं।
30 जनवरी को MCX पर चांदी की कीमतें 6.47% यानी ₹24,914 प्रति किलो गिरकर ₹3,60,452 प्रति किलो हो गईं। 31 जनवरी तक, फिजिकल चांदी लगभग ₹3,35,000 प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी।
सोने में भी ₹25,000 की गिरावट
अब बात अगर सोने की करें तो 29 जनवरी को सोना लगभग ₹1,93,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था। लेकिन शुक्रवार को इसमें करीब ₹25,000 की बड़ी गिरावट आई और यह ₹1,67,000 के स्तर पर आ गया।
31 जनवरी को 24 कैरेट सोने में ₹965 प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोने में ₹885 प्रति ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना 31 जनवरी को लगभग ₹1,69,190 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। जनवरी 2026 की शुरुआत में सोना ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम से अधिक पर कारोबार कर रहा था।
आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
विशेषज्ञों के अनुसार इस तगड़ी गिरावट के पीछे कई कारण हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण है मुनाफावसूली (Profit Booking)। पिछले कुछ हफ्तों में सोना और चांदी दोनों हर दिन एक नया रिकॉर्ड बना रहे थे। चांदी ने तो महज कुछ हफ्तों में ₹3 लाख से ₹4 लाख का सफर तय किया था। जनवरी 2026 की शुरुआत में चांदी में 35% से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई थी, जो लगभग ₹85,000 प्रति किलो की वृद्धि के बराबर थी।
ऐसे में निवेशकों ने अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए भारी बिकवाली शुरू कर दी। जैसे ही कीमतों में गिरावट शुरू हुई, बाजार में शॉर्ट सेलर्स सक्रिय हो गए। उन्होंने चांदी को बड़े पैमाने पर शॉर्ट किया, जिससे गिरावट और भी गहरी हो गई।
डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ
दूसरा बड़ा कारण है अमेरिका से आई एक खबर जिसने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि वह फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह अपने पसंदीदा व्यक्ति को ला सकते हैं।
इस खबर से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर में खरीदी जाने वाली कमोडिटीज जैसे सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग कम हो जाती है और कीमतें गिरती हैं।
वैश्विक तनाव में कमी
तीसरा कारण यह है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी आती दिख रही है। जब आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कम होती हैं, तो सोने और चांदी जैसी सेफ-हेवन संपत्तियों की अपील घट जाती है, जिससे मांग में कमी आती है।
इंटरनेशनल मार्केट में भी चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर भारत में MCX पर पड़ा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की कीमतों में नरमी देखी जा रही है, जिसका तत्काल असर भारतीय MCX पर भी हुआ है।
टेक्निकल ओवरबॉट कंडीशन
चौथा कारण है तकनीकी कारक। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं, तो बाजार “ओवरबॉट” (अत्यधिक खरीदा हुआ) हो जाता है, जिससे करेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक स्वस्थ सुधार (करेक्शन) है।
बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) द्वारा अपनी होल्डिंग्स बेचने से भी काफी गिरावट हुई। पूंजी का रोटेशन भी एक कारण है – निवेशकों ने बड़े मुनाफे के बाद कीमती धातुओं से अन्य बाजारों में पूंजी स्थानांतरित की।
औद्योगिक उपयोग पर असर
चांदी जब बहुत महंगी हो जाती है, तो इसकी औद्योगिक मांग कम हो सकती है क्योंकि यह लागत-निषेधात्मक हो जाती है। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और कई अन्य औद्योगिक अनुप्रयोगों में होता है। जब कीमतें ₹4 लाख को छू रही थीं, तो कई उद्योगों के लिए यह अत्यधिक महंगी हो गई थी।
निवेशकों के लिए सुनहरा मौका?
हालांकि, लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए इस गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में भी देखा जा रहा है। कई वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और लंबी अवधि में सोने और चांदी की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।
J.P. Morgan Global Research का पूर्वानुमान है कि सोना 2026 की चौथी तिमाही तक औसतन $5,055 प्रति औंस हो सकता है, और संभावित रूप से 2027 के अंत तक $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है। कुछ AI-आधारित मॉडल तो यह भी अनुमान लगाते हैं कि सोना अप्रैल 2026 तक $10,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
चांदी के लिए, बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 के लिए औसतन $56 का अनुमान लगाया है, जो संभावित रूप से $65 तक पहुंच सकता है। अन्य विश्लेषकों का सुझाव है कि संभावित उच्चतम स्तर $75 या यहां तक कि $100 हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
चांदी गुरुवार को ₹4,20,048 के ऑल-टाइम हाई से शुक्रवार को ₹3,35,000 तक गिरी; एक दिन में ₹85,000 की गिरावट।
सोना ₹1,93,000 के रिकॉर्ड स्तर से ₹1,67,000 तक लुढ़का; लगभग ₹25,000 की गिरावट दर्ज।
मुख्य कारण: मुनाफावसूली, डॉलर इंडेक्स मजबूती, ट्रंप की फेड चेयरमैन बदलने की खबर और वैश्विक तनाव में कमी।
विशेषज्ञ इसे स्वस्थ करेक्शन मानते हैं; लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका।








