Liver Health Tips Doctor Advice : लिवर शरीर का एक बहुत महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा अंग है। हमारे शरीर का 2% बॉडी वेट लिवर का है और लिवर शरीर के 500 फंक्शन करता है। BLK-Max Hospital, Delhi के वाइस चेयरमैन एंड HOD- HPB Surgery & Liver Transplantation डॉक्टर अभिदीप चौधरी ने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कौन से खाद्य पदार्थ लिवर के लिए फायदेमंद हैं और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
लिवर खराब होने के मुख्य कारण
डॉक्टर चौधरी के अनुसार, लिवर खराब होने के कई कारण हैं। सबसे कॉमन कारण अल्कोहल की अत्यधिक मात्रा है। दूसरा वायरल हेपेटाइटिस या कोई इंफेक्शन की वजह से लिवर खराब होता है। तीसरा जो बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है वह फैटी लिवर की वजह से लिवर डैमेज होना है जो आगे चलकर फाइब्रोसिस और सिरोसिस में कन्वर्ट हो जाता है। इसके अलावा कुछ जेनेटिक डिजीज, ऑटोइम्यून लिवर डिजीज, विल्सन्स डिजीज भी लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं। कई बार हमारी बॉडी की इम्यूनिटी अपने लिवर के अगेंस्ट काम करने लगती है जिससे बाइल डक्ट्स या लिवर को डैमेज होने लगता है।
लिवर खराब होने के शुरुआती लक्षण नहीं दिखते
डॉक्टर चौधरी ने बताया कि लिवर एक साइलेंट ऑर्गन है जो अपने आप रीजनरेट करने की कोशिश करता है। इसलिए अर्ली स्टेज ऑफ डैमेज पर कोई मेजर सिम्टम नहीं होता। अगर रेट्रोस्पेक्टिवली देखें तो कुछ लोग बोलते हैं कि कुछ टाइम से थकान ज्यादा हो रही थी या भूख कम लग रही थी। लेकिन जब तक मेन सिम्टम्स आते हैं तब तक दो-तिहाई या तीन-चौथाई से ज्यादा लिवर डैमेज हो चुका होता है। उसके बाद जो सिम्टम्स होते हैं वो होता है पीलिया होना, पेट में पानी होना, टांगों में सूजन होना, नींद खराब होने लगना, भूख ना लगना। क्योंकि लिवर के फंक्शन इतने सारे हैं, तो बाकी सारे ऑर्गन सिस्टम्स भी धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं।
फैटी लिवर रिवर्स हो सकता है, लेकिन सिरोसिस नहीं
डॉक्टर चौधरी ने स्पष्ट किया कि फैटी लिवर बिल्कुल रिवर्स हो सकता है। उन्होंने बताया कि जब वे ट्रांसप्लांट के लिए डोनर्स इवैलुएट करते हैं और अगर उनको फैटी लिवर मिलता है तो वे उनको प्रीहबिलिटेशन मोड पर डालते हैं। अगर प्रॉपर्ली डाइट एक्सरसाइज रिजीम किया जाए तो डॉक्यूमेंट किया हुआ है कि लिवर का फैट कम होता चला जाता है। कोलेस्ट्रॉल लेवल्स बेटर होते चले जाते हैं और लिवर की बायोप्सी करो तो लिवर बिल्कुल नॉर्मल मिलता है। लेकिन लिवर सिरोसिस एक बार होने के बाद रिवर्स नहीं हो सकता। फैटी लिवर में लिवर के सेल्स में फैट इकट्ठा होना शुरू हो जाता है। जब यह सूजन में कन्वर्ट होता है तो लिवर हार्ड होना शुरू हो जाता है, स्कार बनना शुरू हो जाता है और इसको अल्टीमेटली लिवर सिरोसिस बोलते हैं।
रंगीन सब्जियां और फल खाएं – लिवर रहेगा स्वस्थ
डॉक्टर चौधरी ने बताया कि जितनी रंगीन प्लेट होगी यानी अलग-अलग सब्जियां अलग-अलग रंग की जितनी आप खाएंगे उतना आपको हेल्थ में बेनिफिट होगा क्योंकि हर एक की अपनी क्वालिटी है। तो अगर हम सैलेड और फ्रूट की एक प्लेट बना रहे हैं तो जितने ज्यादा कलर्स होंगे उतना हमारे लिए अच्छा रहेगा। फलों में सेब, पपीता, अमरूद बहुत अच्छे हैं। सब्जियों में टमाटर, पत्ता गोभी, लेटिस, खीरा बहुत अच्छा रहता है न्यूट्रिशन प्रोवाइड करने के लिए। सिंपल चीजें हैं लेकिन रेगुलर बेसिस पर अगर हम यूज़ करें तो बहुत बेनिफिशियल हैं।
मोटा अनाज – ज्वार, बाजरा, रागी लिवर के लिए बेहतरीन
डॉक्टर चौधरी ने मिलेट्स यानी मोटे अनाज को बहुत फायदेमंद बताया। जो मिलेट्स हैं जैसे ज्वार, बाजरा, रागी ये आपके शुगर के लेवल को ऊपर नहीं लेके जाते कंपेयर टू जो वीट और राइस है। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है यानी ये शुगर के लेवल को ऊपर नहीं लेके जाते। अगर बैलेंस करके इसका कॉम्पोनेंट हम बढ़ाएंगे तो हमारा मेंटेनेंस बेटर हो पाएगा। मखाने भी बहुत बेनिफिट देते हैं। कुछ लोगों को वीट एलर्जी हो जाती है जिसको सीलियक डिजीज कहते हैं। अगर उनको मिलेट्स पर डाल दें तो उनकी ओवरऑल एनर्जी लेवल्स, उनके लिवर फिटनेस, उनकी शुगर सब बेटर हो जाते हैं।
ब्लैक कॉफी और अखरोट लिवर के लिए फायदेमंद
डॉक्टर के अनुसार कॉफी हमारे लिवर के लिए अच्छी है जिसके सेवन से हमें बेनिफिट मिल सकता है। प्रोवाइडेड हम उसमें चीनी वगैरह मिला के अगर बनाएंगे तो वो फायदा नहीं होगा। तो असली फायदा यह है कि अगर हम ब्लैक कॉफी लें तो उससे कुछ फायदा मिलता है। अब तो बहुत डाटा है उसके बारे में कि इसका बेनिफिट है और यह मदद करता है कि लिवर का फैट कम कर सके। नट्स पर्टिकुलरली वालनट्स यानी अखरोट हमारे लिवर के लिए अच्छा होता है। लेकिन जो लोग कॉफी नहीं पी सकते उनके लिए यह जरूरी नहीं है कि कॉफी पीनी ही है। डाइट और एक्सरसाइज मेंटेन कर लें तो उससे भी वही पर्पस अचीव हो जाएगा।
शराब से बचें – लिवर डैमेज का सबसे बड़ा कारण
डॉक्टर चौधरी का कहना है कि अल्कोहल को अवॉयड ही करना चाहिए। अगर किसी ने लेनी भी है तो एक सोशल ड्रिंक जिसमें अपने आपको कंट्रोल करके एक काउंट लेना चाहिए। लिवर को अल्कोहल को मेटाबोलाइज करना होता है और लिवर में पचाने के लिए कुछ एंजाइम्स हैं जो अल्कोहल को ब्रेकडाउन करते हैं। पर उसकी एक लिमिट है। उससे ज्यादा हम अगर लिवर पर अल्कोहल बम्बार्ड करेंगे या उसके ऊपर उतना जोर डालेंगे तो वो लिवर पर नुकसान ही करेगा। जो अल्कोहल एक पर्सन जितना पचा सकता है, हो सकता है दूसरा उतना ना पचा सकता हो। तो यह सोच के करना कि इसने तो अल्कोहल ली, इससे तो कुछ नहीं हुआ तो मेरे को भी कुछ नहीं होगा, इस कारण से बहुत सारे लोगों के लिवर खराब हो जाते हैं।
पैरासिटामॉल की ओवरडोज से लिवर फेलियर
डॉक्टर चौधरी ने चेतावनी दी कि जैसे बुखार उतारने के लिए पैरासिटामॉल की गोली दी जाती है, अगर यह भी जरूरत से ज्यादा ले ली जाए तो इससे लिवर फेलियर होता है। वेस्टर्न वर्ल्ड में जैसे अमेरिका में बुखार उतारने वाली इस दवाई से पैरासिटामॉल से सबसे ज्यादा एक्यूट लिवर फेलियर होता है। कोई भी दवाई अगर यूज़ करनी है प्रॉपर प्रिस्क्रिप्शन से करनी चाहिए और किसी भी दवाई का अननेसेसरी ओवरयूज़ नहीं करना चाहिए। कुछ हर्बल सप्लीमेंट्स भी हैं जो अगर अनकंट्रोल तरीके से लिए जाएं बिना प्रिस्क्रिप्शन के तो वो भी ऑर्गन डैमेज कर सकते हैं।
ALT और AST – लिवर के महत्वपूर्ण एंजाइम्स
डॉक्टर ने बताया कि AST और ALT लिवर के एंजाइम्स होते हैं जो यह बताते हैं कि आपके लिवर में सूजन है या नहीं है। अगर किसी को फैटी लिवर है और साथ में अगर यह एंजाइम भी बढ़ा हुआ है तो इसका मतलब अब लिवर डिजीज की तरफ चला गया, बीमारी की तरफ चला गया। यह टेस्ट बहुत ही सेंसिटिव टेस्ट हैं और बहुत ही ईजीली अवेलेबल टेस्ट हैं। ये हमें मदद करते हैं अर्ली डायग्नोसिस के लिए। लैब टू लैब नॉर्मल रेंज वैरी करती है बट यूजली 45 से नीचे रहना ठीक रहता है।
हेपेटाइटिस A और B की वैक्सीन जरूर लगवाएं
डॉक्टर चौधरी ने बताया कि इंफेक्शन से बचाने के लिए हमारे पास वैक्सीन हैं हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस B की। काफी सारे लोगों ने आज भी ये वैक्सीन नहीं ली हुई। ये दो इनफेक्शन हम वैक्सीन लेके प्रिवेंट कर सकते हैं। तो ये सबको लेना चाहिए। हेपेटाइटिस A और E खराब खाना पानी सेवन से हमारे शरीर में आते हैं। हेपेटाइटिस B और C ब्लड से या नीडल शेयरिंग से या ब्लेड शेयरिंग से ट्रांसमिट होते हैं। वैक्सीन किसी भी ऐज का पर्सन हो सबको लगवानी चाहिए।
नियमित जांच जरूरी – जोखिम वाले लोग विशेष ध्यान दें
डॉक्टर के अनुसार अगर कोई ओवरवेट है या ओबीज है या उसे डायबिटीज है या उसकी फैमिली में हिस्ट्री है डायबिटीज की, लिवर डिजीज की, हार्ट डिजीज की तो ऐसे लोगों को थोड़ा रेगुलरली कराना चाहिए। एक रूटीन चेक करने के लिए खून की एक जांच बोलते हैं लिवर फंक्शन टेस्ट और एक अल्ट्रासाउंड। इससे हमें एक बेसिक डीसेंट आइडिया मिल जाता है। अगर किसी को सिरोसिस हो गया है तो ये टेस्ट और रेगुलरली करने होते हैं क्योंकि सिरोसिस होने के बाद इन लोगों को कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है। इनके टेस्ट हर तीन से छह महीने में रेगुलरली कराएं।
लिवर ट्रांसप्लांट से हजारों जिंदगियां बच सकती हैं
डॉक्टर चौधरी ने बताया कि हमारे देश में लगभग 3 से 5 लाख लोग हर साल लिवर की बीमारी से मर जाते हैं और ट्रांसप्लांट से हम काफी सारी जिंदगियां बचा सकते हैं। आज की डेट में हिंदुस्तान में 4500 ट्रांसप्लांट करते हैं, लेकिन अगर एक्चुअल नीड की बात करें तो 30 से 35,000 ट्रांसप्लांट होने चाहिए। लिवर दो तरीके से डोनेट होता है – ब्रेन डेड व्यक्ति पूरा लिवर दान कर सकता है या लिविंग डोनर अपने रिश्तेदार को लिवर का अंग दान कर सकता है। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन में आप अपने ऑर्गन्स को प्लेज कर सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- लिवर शरीर के 500 फंक्शन करता है, 2% बॉडी वेट
- फैटी लिवर रिवर्स हो सकता है, लेकिन सिरोसिस नहीं
- रंगीन सब्जियां और फल खाएं – सेब, पपीता, अमरूद, टमाटर, खीरा
- मोटा अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी) गेहूं-चावल से बेहतर
- ब्लैक कॉफी और अखरोट लिवर के लिए फायदेमंद
- शराब से बचें – सबसे बड़ा लिवर डैमेज का कारण
- पैरासिटामॉल की ओवरडोज से लिवर फेलियर
- ALT और AST 45 से नीचे होने चाहिए
- हेपेटाइटिस A और B की वैक्सीन जरूर लगवाएं
- हाई रिस्क लोग साल में एक बार जांच कराएं








