Chandigarh Mayor Election Analysis: चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में BJP ने मेयर के साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर तीनों पद जीत लिए। सौरभ जोशी चंडीगढ़ के 29वें मेयर बने हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) साथ आ जाते तो चुनाव का नतीजा क्या होता? गणित बताता है कि तब मुकाबला 18-18 पर टाई हो जाता।
गणित समझिए: 18-18 की बराबरी हो सकती थी
मेयर चुनाव में BJP को 18 वोट मिले। कांग्रेस को 7 और AAP को 11 वोट मिले। अगर कांग्रेस और AAP साथ आते तो उनके पास भी 18 (7+11) वोट हो जाते। मुकाबला बराबरी का होने पर पर्ची के जरिए मेयर चुना जाता। यानी तब BJP की जीत इतनी आसान नहीं होती।
कारण 1: पंजाब विधानसभा चुनाव की छाया
दोनों पार्टियों के इस कदम के पीछे साल के अंत में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव और अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव हैं। पंजाब में AAP सत्ता में है जबकि कांग्रेस विपक्षी दल है। BJP हर बार इस मुद्दे पर दोनों दलों को घेरती रही है कि वे मिले हुए हैं। 2024 के मेयर चुनाव और लोकसभा चुनाव में दोनों साथ थे। इस बार दोनों ने अलग-अलग लड़कर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे एकजुट नहीं हैं।
कारण 2: ओपन वोटिंग से क्रॉस वोटिंग मुश्किल
चंडीगढ़ नगर निगम की स्थापना 1996 में हुई थी। तब से हर बार पार्षद सीक्रेट वोटिंग से मेयर चुनते थे। लेकिन 2024 में मेयर चुनाव सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद इस बार सीक्रेट वोटिंग की जगह हाथ उठाकर मतदान हुआ। इससे साफ था कि अगर कोई पार्षद क्रॉस वोटिंग करता तो तुरंत पता चल जाता। BJP ने इसी का फायदा उठाते हुए पहले ही AAP के पार्षद तोड़ लिए थे।
कारण 3: लाइव प्रसारण ने रोकी क्रॉस वोटिंग
पहले नगर निगम चुनाव की वीडियोग्राफी होती थी और सिर्फ निगम में लगी स्क्रीनों पर दिखाई जाती थी। लेकिन इस बार पूरी प्रक्रिया यूट्यूब पर लाइव दिखाई गई। राजनीतिक विश्लेषक सुमित चौधरी के मुताबिक यह पार्षदों को अपनी पार्टी के साथ बनाए रखने की अहम वजह रही। अगर कोई दूसरी पार्टी के पक्ष में मतदान करता तो जनता को तुरंत पता चल जाता।
AAP में थी आंतरिक बगावत
AAP में भी आंतरिक फूट थी। नामांकन के आखिरी दिन डिप्टी मेयर उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने आजाद नामांकन भर दिया था। एक और पार्षद के भी अलग सुर थे। कांग्रेस की दलील थी कि AAP में आपसी फूट है। वहीं AAP नेता जरनैल सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने BJP का साथ दिया।
BJP ने कैसे जीती बाजी?
BJP को आखिरी समय तक आशंका थी कि कांग्रेस-AAP पार्षद एक साथ आ सकते हैं। लेकिन जब कांग्रेस के सभी पार्षद और सांसद मनीष तिवारी अपने उम्मीदवार के पक्ष में वोट देकर सदन से चले गए तो BJP को साफ हो गया कि उनका विजयी रथ अब रुकने वाला नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अगर Congress-AAP साथ आते तो 18-18 वोट की बराबरी होती और पर्ची से मेयर चुना जाता।
- पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों पार्टियों ने दूरी बनाई।
- ओपन वोटिंग और लाइव प्रसारण से क्रॉस वोटिंग का डर था।
- AAP में आंतरिक बगावत ने भी BJP को फायदा पहुंचाया।








