Silent Diabetes In Indians: भारत को ‘डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है और इसकी सबसे बड़ी वजह है ‘साइलेंट शुगर’। हाई शुगर के शुरुआती लक्षण पकड़ में नहीं आते, लोग इन पर ध्यान नहीं देते, समय पर इलाज शुरू नहीं होता और नतीजा होता है – डायबिटीज।
आज हम तीन विशेषज्ञ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से जानेंगे कि साइलेंट शुगर क्या है, भारतीयों में यह इतना आम क्यों है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
एक्सपर्ट पैनल:
- डॉ. कशिश गुप्ता – कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, PSRI Hospital, दिल्ली
- डॉ. पराग अग्रवाल – कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई
- डॉ. पार्थ जेठवानी – कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, कोटा हार्ट एंड श्रीजी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कोटा
फास्टिंग शुगर नॉर्मल = नो डायबिटीज? यह गलतफहमी है!
डॉ. कशिश गुप्ता के अनुसार:
“ऐसा नहीं है कि फास्टिंग शुगर बिल्कुल नॉर्मल है तो आपको डायबिटीज नहीं है। हमारे लिए ज्यादा जरूरी है कि आपके लक्षण क्या हैं।”
डायबिटीज के कॉमन लक्षण:
- बार-बार यूरिनेशन आना
- बार-बार प्यास लगना
- वजन घटना
अगर ये लक्षण हैं तो डॉक्टर HbA1c टेस्ट (तीन महीने की एवरेज शुगर) या ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट कराते हैं। काफी लोगों की फास्टिंग शुगर नॉर्मल आती है पर खाने के बाद की शुगर बढ़ी होती है।
प्री-डायबिटीज में शरीर में क्या होता है?
डॉ. पराग अग्रवाल बताते हैं:
“प्री-डायबिटीज भी उसी कंडीशन का पार्ट है जिसके अंत में डायबिटीज होती है। बॉडी में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है – यानी इंसुलिन हॉर्मोन शुगर कंट्रोल नहीं कर पाता।”
प्री-डायबिटीज के लक्षण:
- गर्दन, बगल या पैरों में कालापन
- पेशाब बार-बार होना, जलन होना
- हाथ-पैर में चींटी चलने जैसा लगना
- पैरों में जलन
- वेट लॉस
शुगर के शुरुआती लक्षण महसूस क्यों नहीं होते?
डॉ. पार्थ जेठवानी का कहना है:
“सबसे खतरनाक बीमारियां वो होती हैं जो महसूस नहीं होतीं और डायबिटीज उन्हीं में से एक है।”
क्या होता है:
- जब डायबिटीज होता है, पैंक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाने लगता है
- इंसुलिन के कारण बढ़े हुए शुगर भी नॉर्मल लगने लगते हैं
- जब शुगर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तभी लक्षण आते हैं
- लेकिन तब तक नसें, आंखें, हार्ट, किडनी पर डैमेज शुरू हो चुका होता है
“डायबिटीज लक्षणों को पकड़ने की बीमारी नहीं है। सही समय पर पहले से पकड़कर ही हम डायबिटीज को बीट कर सकते हैं।”
भारतीयों में साइलेंट शुगर इतनी आम क्यों?
डॉ. कशिश गुप्ता समझाती हैं:
“हम भारतीयों में जेनेटिकली डायबिटीज डेवलप होने के ज्यादा चांसेस हैं।”
मुख्य कारण:
- हमारी बॉडी में पेट के हिस्से में फैट ज्यादा जमा होता है
- पेट के अंदर ऑर्गन्स के पास फैट जमा होता है (विसिरल फैट)
- इस फैट में ऐसे हॉर्मोन्स बनते हैं जो इंसुलिन रेजिस्टेंस लाते हैं
- इंसुलिन के काम करने की क्षमता कम हो जाती है
- धीरे-धीरे शुगर बढ़ती है → प्री-डायबिटीज → डायबिटीज
“स्टार्टिंग में लक्षण इतने कम होते हैं – सिर्फ कमजोरी, थकान – कि पकड़ा नहीं जाता। कॉम्प्लिकेशंस होने पर ही प्रॉपर लक्षण सामने आते हैं।”
हाई शुगर के वार्निंग सिग्नल्स
डॉ. पराग अग्रवाल बताते हैं कि इन लक्षणों पर नजर रखें:
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| वजन घटना | बिना कोशिश के वजन कम होना |
| थकान | लगातार थकान महसूस होना |
| इंफेक्शन | पेशाब की जगह खुजली, जलन |
| पैरों में समस्या | जलन, चींटी सा आभास |
| गर्दन में कालापन | वजन ज्यादा होने पर |
| आंखों की समस्या | बादल जैसे लगना, काले दाग |
क्या घर का खाना खाने से शुगर नहीं होती?
डॉ. पार्थ जेठवानी का जवाब:
“बिल्कुल घर का खाना खाना चाहिए। बट तीन चीजों का ध्यान रखना है – क्या, कब और कितना?“
क्या खाएं:
- कार्ब्स कम करें (रोटी, चावल, आलू, ब्रेड)
- प्रोटीन बढ़ाएं (पनीर, दही, दालें, सोयाबीन, अंडे)
- फैट सीमित रखें (मक्खन, मलाई, तेल)
कितना खाएं:
- पेट 70-80% ही भरें
- एक साथ बहुत ज्यादा न खाएं
कब खाएं:
- डिनर लेट न करें
- खाने के बीच 8-10 घंटे का गैप न रखें
- लगातार स्नैकिंग न करें
ज्यादा फास्टिंग से हाई शुगर का रिस्क?
डॉ. कशिश गुप्ता चेतावनी देती हैं:
“जो लोग रेगुलरली ब्रेकफास्ट स्किप करते हैं, एक्सट्रीम डाइटिंग करते हैं, लंबे-लंबे समय तक फास्ट रखते हैं – उनमें समस्या हो सकती है।”
क्या होता है:
- जब खाना खाएंगे तो ओवर ईट करेंगे
- मीठा खाने की क्रेविंग होगी
- फास्टिंग में बॉडी में क्रॉनिक स्ट्रेस डेवलप होता है
- स्ट्रेस हॉर्मोन (कॉर्टिसोल) ज्यादा बनता है
- लिवर से ग्लूकोज रिलीज होता है → शुगर स्पाइक्स
डायबिटीज का टेस्ट किस उम्र से करवाएं?
डॉ. पराग अग्रवाल के अनुसार:
35 साल की उम्र में स्क्रीनिंग शुरू करें अगर:
- फैमिली में डायबिटीज की हिस्ट्री है
- वजन ज्यादा है
- थायराइड, BP, कोलेस्ट्रॉल की समस्या है
रिपोर्ट नॉर्मल आए तो: हर 3 साल में रिपीट करें कोई तकलीफ आए तो: हर साल चेक करें
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए:
- सेकंड ट्राइमेस्टर (16-24 हफ्ते) में शुगर चेक करें
- जेस्टेशनल डायबिटीज का पता चलता है
कौन सा टेस्ट सबसे सटीक?
डॉ. पार्थ जेठवानी बताते हैं:
तीन तरह के टेस्ट:
- फास्टिंग ब्लड शुगर: खाली पेट
- पोस्टप्रैंडियल: खाने के 2 घंटे बाद
- HbA1c: सबसे सटीक – 3 महीने का रिपोर्ट कार्ड
HbA1c के फायदे:
- उपवास की जरूरत नहीं
- 2-3 दिन पहले मीठा खाने या टेंशन का असर नहीं पड़ता
- 3 महीने का एवरेज बताता है
डायबिटीज की लिमिट:
| टेस्ट | डायबिटीज की शुरुआत |
|---|---|
| HbA1c | 6.5 से ऊपर |
| फास्टिंग शुगर | 126 से ऊपर |
| खाने के बाद शुगर | 200 से ऊपर |
लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?
डॉ. कशिश गुप्ता की सलाह:
शुरुआती स्टेज में लाइफस्टाइल चेंजेस से कंट्रोल संभव:
एक्सरसाइज: रोज 30 मिनट या हफ्ते में 150 मिनट
डाइट में सुधार:
- मीठा बहुत कम
- कार्बोहाइड्रेट कम
- प्रोटीन बढ़ाएं
वेट लॉस: अगर वजन ज्यादा है
स्ट्रेस मैनेजमेंट
“अगर लेट स्टेज में आते हैं, जब शुगर बहुत हाई हो गई है, कॉम्प्लिकेशंस डेवलप हो गए हैं – तब दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है।”
रोज की कौन सी गलतियां अवॉइड करें?
डॉ. पराग अग्रवाल की सलाह:
बीमारी को एक्सेप्ट करें – तभी इलाज पर ध्यान देंगे
खानपान पर नियंत्रण:
- मीठा, तला हुआ कम खाएं
- सैलेड, फ्रूट्स (मीठे फल नहीं), ड्राई फ्रूट्स खाएं
- हरी सब्जियां, प्रोटीन बढ़ाएं
डेली व्यायाम: हफ्ते में ढाई घंटे जरूरी
योगा-प्राणायाम करें
नींद ठीक से लें, स्ट्रेस मैनेज करें
दवाई सही समय से लें – डॉक्टर की सलाह से
रेगुलर जांच करवाएं:
- आंखों की जांच
- किडनी की जांच
- नसों की जांच
- पैरों की डेली जांच
फैमिली हिस्ट्री है तो क्या करें? – ABCD फॉर्मूला
डॉ. पार्थ जेठवानी का सबसे प्रैक्टिकल फॉर्मूला:
| अक्षर | मतलब | क्या करें |
|---|---|---|
| A | Active Lifestyle | रोज आधे-पौन घंटे व्यायाम करें |
| B | Balanced Diet | कार्ब्स कम, प्रोटीन पर्याप्त, फैट सीमित |
| C | Control Risk Factors | मोटापा, BP, कोलेस्ट्रॉल, स्ट्रेस, नींद |
| D | Doctor | एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से परामर्श, जरूरत पर दवाई |
“ABCD ऑफ डायबिटीज को याद रखें और डायबिटीज पर जीत पाएं!”
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- साइलेंट शुगर: भारतीयों में जेनेटिकली पेट के आसपास विसिरल फैट जमा होता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस करता है
- फास्टिंग शुगर नॉर्मल ≠ नो डायबिटीज: HbA1c टेस्ट सबसे सटीक है जो 3 महीने का एवरेज बताता है
- 35 साल में शुरू करें स्क्रीनिंग: खासकर अगर फैमिली हिस्ट्री है
- ABCD फॉर्मूला याद रखें: Active, Balanced Diet, Control Risk Factors, Doctor








