India EU Free Trade Agreement : जिस दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ के नारे के साथ दुनिया पर टैरिफ की तलवार लटका रहे हैं, उसी दौर में भारत और यूरोपीय यूनियन ने मिलकर ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का ऐलान कर दिया। करीब 20 साल की बातचीत और सैकड़ों दौर की नाकामी के बाद दोनों पक्षों ने दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन कर लिया है।
27 जनवरी: जब दुनिया भर में गूंजी एक लाइन
मंगलवार, 27 जनवरी का दिन था। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मौजूद थीं।
कैमरे ऑन हुए और एक लाइन दुनिया भर में गूंज गई:
“We have done it — The Mother of All Deals!”
यानी ‘सभी सौदों की मां’ — करीब दो दशकों की अटकी बातचीत आखिरकार पूरी हुई और भारत-EU के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन हो गया।
गणतंत्र दिवस पर बनी सहमति
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
इसी दौरान इस ऐतिहासिक समझौते को लेकर अंतिम सहमति बनी और अगले ही दिन इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
क्या है इस डील में खास?
यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि वैश्विक ताकतों के संतुलन की कहानी है:
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल आबादी | 2 अरब लोग |
| ग्लोबल GDP में हिस्सा | करीब 25% |
| यूरोपीय सामान पर टैरिफ कटौती | 97% सामान पर |
| यूरोपीय कंपनियों को सालाना बचत | 4 अरब यूरो (करीब 4.75 अरब डॉलर) |
| कारों पर टैरिफ | 110% से घटाकर 10% |
दुनिया के मीडिया ने क्या कहा?
इस डील ने अमेरिका से लेकर चीन तक सबको चौंका दिया है। दुनिया भर का मीडिया इसे ट्रंप के लिए ‘साइलेंट जवाब’ और नई ग्लोबल इकोनॉमिक धुरी बता रहा है:
Bloomberg (अमेरिका):
“ट्रंप को करारा जवाब देते हुए यूरोपियन यूनियन और भारत ने सबसे बड़ा समझौता किया। लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है, जिसे ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीतियों के कारण गति मिली है।”
New York Times (अमेरिका):
“भारत-EU ने ट्रंप के साए में व्यापार रिश्ते मजबूत किए हैं। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों के कारण वैश्विक व्यवस्था और पुराने गठबंधनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।”
BBC (ब्रिटेन):
“भारत और यूरोपीय यूनियन ने लगभग दो दशकों तक रुक-रुक कर चली बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा की है। दोनों पक्षों ने अमेरिका के साथ तनाव के बीच संबंधों को गहरा करने का लक्ष्य रखा है।”
Der Spiegel (जर्मनी):
जर्मन मीडिया स्पीगल ने इस डील को तीन शब्दों में समेट दिया:
“भारत की उम्मीद, यूरोप का मौका, अमेरिका पीछे।”
स्पीगेल के मुताबिक भारत कई सेक्टरों में ऊंचे टैरिफ घटाएगा — खासतौर पर यूरोपीय कारों, मशीनरी और केमिकल उत्पादों पर। बदले में भारत को कपड़ा, ज्वेलरी और सेवाओं के निर्यात में बढ़त मिलेगी।
Al Jazeera:
“भारत और यूरोपीय यूनियन एक बड़े व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने X पर पोस्ट में कहा कि दोनों पक्ष आज इतिहास रच रहे हैं। हमने 2 अरब लोगों का एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया।”
Le Monde (फ्रांस):
“इस समझौते के तहत यूरोप से भारत आने वाले करीब 97% सामान पर टैरिफ घटेगा या खत्म होगा। इससे यूरोपीय कंपनियों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की बचत होगी।”
अमेरिका के लिए क्यों है झटका?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की अनिश्चित व्यापार नीतियों के चलते भारत और यूरोप दोनों नए विकल्प तलाश रहे हैं। जहां चीन सस्ते सामान से दुनिया के बाजार भर रहा है, वहीं अमेरिका को अब पहले जितना भरोसेमंद आर्थिक साझेदार नहीं माना जा रहा।
यही वजह है कि यह समझौता चीन और अमेरिका से अलग एक स्वतंत्र आर्थिक धुरी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कहां रखी गई सीमाएं?
हालांकि व्यापार पूरी तरह मुक्त नहीं होगा। कृषि और स्टील जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में दोनों पक्षों ने सीमाएं बरकरार रखी हैं। यही वजह है कि इसे ‘जरूरत से बनी साझेदारी’ भी माना जा रहा है।
PM मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा:
“यह समझौता भारत की 1.4 अरब आबादी और यूरोपियन यूनियन के लाखों लोगों के लिए कई अवसर लेकर आएगा।”
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में कहा:
“हमने कर दिखाया। हमने अब तक का सबसे बड़ा समझौता कर दिखाया।”
आम आदमी पर क्या असर?
इस डील का सीधा असर आम भारतीयों पर भी पड़ेगा:
- यूरोपीय कारें सस्ती होंगी — BMW, Mercedes, Audi जैसी कारों की कीमतें काफी कम हो सकती हैं
- भारतीय कपड़ा और ज्वेलरी उद्योग को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा
- नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे क्योंकि निर्यात में वृद्धि होगी
- सेवा क्षेत्र (IT, Healthcare) में भारतीय कंपनियों को यूरोप में आसान पहुंच मिलेगी
नई वैश्विक सियासत की शुरुआत
कुल मिलाकर भारत-EU की यह डील सिर्फ व्यापार का समझौता नहीं, बल्कि बदलती दुनिया की तस्वीर है। जहां अमेरिका दीवारें खड़ी कर रहा है, वहीं भारत और यूरोप पुल बना रहे हैं।
यही वजह है कि यह डील आज सिर्फ नई दिल्ली या ब्रसेल्स की नहीं, पूरी दुनिया की सुर्खी बन गई है। जिस समझौते को यूरोप ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा, वह दरअसल ट्रंप के दौर में एक नई वैश्विक सियासत की शुरुआत भी है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- भारत और EU ने 20 साल की बातचीत के बाद दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया
- 2 अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र बना, जो ग्लोबल GDP का 25% है
- यूरोप से आने वाले 97% सामान पर टैरिफ घटेगा या खत्म होगा
- कारों पर टैरिफ 110% से घटाकर 10% किया जाएगा
- दुनिया का मीडिया इसे ट्रंप की टैरिफ नीति का ‘साइलेंट जवाब’ बता रहा है








