China Silver Export Ban : जनवरी 2026 में चांदी ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। एक साल पहले जो चांदी 95,000 रुपये प्रति किलो थी, वह आज 3.5 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। सिर्फ 12 महीनों में 250 प्रतिशत की यह उछाल दुनियाभर के निवेशकों, उद्योगपतियों और आम लोगों को हैरान कर रही है। इस भूचाल की सबसे बड़ी वजह चीन का वह फैसला है जिसमें उसने 2027 तक चांदी के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
चीन के प्रतिबंध से क्यों मची है दुनिया में खलबली
दुनिया की 65 प्रतिशत चांदी अकेले चीन से आती है और जब इतने बड़े सप्लायर ने अपने दरवाजे बंद कर दिए तो पूरी दुनिया में चांदी की किल्लत होना स्वाभाविक था। चीन के अलावा ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको, बोलीविया और अमेरिका में भी चांदी का उत्पादन होता है, लेकिन ये सभी देश मिलकर भी चीन की भरपाई नहीं कर पा रहे हैं। 2024 में कुछ देशों की खदानों में उत्पादन बढ़ा तो चिले में घट गया जिससे हिसाब बराबर हो गया। 2025 में मेक्सिको और रूस में सप्लाई ठीक हुई तो पेरू और इंडोनेशिया में कमी आ गई।
चांदी की एक खासियत यह है कि यह सीसा और तांबे की खदानों से निकलती है और सोने की खदानों से भी इसका उत्पादन होता है। हाल के वर्षों में सोने की खदानों से चांदी का आउटपुट बढ़ा है, लेकिन फिर भी मांग के मुकाबले आपूर्ति बहुत कम पड़ रही है।
Elon Musk क्यों हैं परेशान
दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति इलॉन मस्क ने चीन के इस प्रतिबंध पर चिंता जताते हुए कहा है कि कई तरह के इंडस्ट्रियल प्रोसेस में चांदी का इस्तेमाल होता है और चीन ने प्रतिबंध लगाकर अच्छा नहीं किया है। मस्क की कंपनी टेस्ला इलेक्ट्रिक वाहन बनाती है और इन गाड़ियों में चांदी का इस्तेमाल अनिवार्य है।
एक आम इलेक्ट्रिक गाड़ी में लगभग 25 ग्राम चांदी लगती है जबकि बड़ी गाड़ियों में यह मात्रा 50 ग्राम तक पहुंच जाती है। लेकिन असली चिंता आने वाले समय की है क्योंकि अगर सॉलिड स्टेट सिल्वर बैटरीज की ओर टेक्नोलॉजी मुड़ती है तो हर गाड़ी को 1 किलोग्राम या उससे भी ज्यादा चांदी की जरूरत पड़ सकती है। जब एक किलो चांदी ही साढ़े तीन लाख रुपये की हो गई तो सोचिए कि बैटरी कार से भी महंगी हो जाएगी।
AI और सोलर पैनल ने बढ़ाई चांदी की मांग
चांदी का इस्तेमाल सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का डाटा हार्डवेयर, चिप्स, सर्किट बोर्ड और दूसरे हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स में भी चांदी अनिवार्य हो गई है। इसके अलावा सोलर पैनल में भी अब चांदी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा है। चांदी की खासियत यह है कि यह दूसरे मेटल के मुकाबले करंट और गर्मी को बहुत तेजी से ट्रांसफर कर देती है जिसके चलते इसका कोई विकल्प फिलहाल नजर नहीं आता।
आंकड़े बताते हैं कि 2016 में चांदी की वैश्विक मांग 31,000 मेट्रिक टन थी जो 2024 में बढ़कर 36,000 मेट्रिक टन हो गई। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिफिकेशन और एआई की डिमांड तेजी से बढ़ेगी, चांदी की मांग को रोकना और भी मुश्किल हो जाएगा।
भारत में क्यों बढ़ी चांदी की मांग
भारत दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है और अपनी 80 प्रतिशत चांदी बाहर से मंगाता है। पिछले साल फसलों की कटाई के बाद और दिवाली से पहले भारत में चांदी की मांग अपने चरम पर पहुंच गई। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि सोना बहुत महंगा हो चुका था तो लोग चांदी की तरफ भागे।
भारत की इस बढ़ी हुई मांग का असर ब्रिटेन पर भी पड़ा क्योंकि भारत की लगभग 50 प्रतिशत चांदी वहीं से आती है। हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात और चीन भी सप्लाई करने लगे हैं, लेकिन ब्रिटेन का हिस्सा अभी भी सबसे बड़ा है। पिछले साल भारत में चांदी की मांग इतनी बढ़ी कि लंदन के बुलियन मार्केट में चांदी की कमी हो गई और कई बार समुद्री जहाज की जगह हवाई जहाज से चांदी भेजी गई।
लंदन से लेकर भारत तक, पुरानी चांदी बेचने की होड़
जून 2022 में लंदन के बुलियन मार्केट संघ के पास 31,000 मेट्रिक टन चांदी थी जो मार्च 2025 आते-आते 9,000 मेट्रिक टन कम हो गई। ब्रिटेन में जब यह खबर फैली कि चांदी के दाम बढ़ रहे हैं और आगे भी बढ़ते रहेंगे तो लोगों ने अपने घरों में रखे पुराने चांदी के बर्तन, गहने वगैरह झाड़-पोंछकर बाहर निकाल लिए और बेचने लग गए।
कुछ दिन पहले ब्रिटेन में नीलामी करने वाली एक बड़ी कंपनी के मालिक ने लिखा कि उन्होंने अपने 30 साल के अनुभव में ऐसे दाम नहीं देखे। चांदी के जो टी सेट 6 महीने पहले 200 पाउंड में बिक रहे थे, वे आज 1000 पाउंड में बिक रहे हैं। जिन चांदी के चम्मचों को कुछ महीने पहले व्यापारी पलटकर देखते तक नहीं थे, वे आज कई सौ पाउंड में बिक रही हैं।
भारत में भी पलटी बाजी
भारत में भी अब स्थिति बदल गई है। जब लोगों को चांदी के बढ़ते दामों की खबर मिली तो जिनके पास चांदी के बर्तन, चम्मच, कटोरी, पायल, छल्ले वगैरह तमाम चीजें थीं, जिन्हें वे बेकार समझा करते थे, उन्होंने उन्हें बाजार में बेचना शुरू कर दिया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक पिछले साल दिसंबर में एक सप्ताह के भीतर लोगों ने उतनी चांदी मार्केट में बेच दी जितनी कई महीनों में नहीं बिका करती थी।
धनतेरस और दिवाली के समय चांदी 1,78,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंची थी। फिर भयंकर गिरावट आई और भाव सीधे 1,49,000 रुपये पर आ गया यानी 29,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट। लेकिन दिसंबर आते-आते चांदी फिर से दिवाली के रेट पर जा पहुंची और 3 दिसंबर को भाव 1,78,684 रुपये प्रति किलो हो गया। आज यही चांदी 3.5 लाख रुपये प्रति किलो से अधिक है।
अमेरिका में भी बिक रही है पुरानी चांदी
पुरानी चांदी बेचने की यह दौड़ सिर्फ ब्रिटेन और भारत तक सीमित नहीं है बल्कि अमेरिका में भी शुरू हो गई है। फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में टेक्सास में स्थित डिलन गेज नाम की एक रिफाइनरी का हाल बताया। वहां के कर्मचारियों ने कहा कि वे हफ्ते में सातों दिन काम कर रहे हैं लेकिन चांदी पिघला नहीं पा रहे। तीन-तीन शिफ्ट में काम हो रहा है फिर भी काम पूरा नहीं हो पा रहा। लोग गहने, बर्तन और यहां तक कि दांतों की पुरानी फीलिंग तक बेच रहे हैं। इतने सोर्स से चांदी आ रही है कि उसकी शुद्धता सुनिश्चित करने में ही समय लग रहा है।
लंदन के एक बुलियन व्यापारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि सुबह जो सामान दुकान में आता है, दोपहर तक बिक चुका होता है और ग्राहक कुछ भी लेकर खुश हैं।
नकली चांदी के धंधे ने भी पकड़ी रफ्तार
जहां एक तरफ चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी तरफ नकली चांदी बेचने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं। 7 जनवरी को एक हैरान करने वाली खबर आई कि भोपाल रेल मंडल में रिटायर्ड कर्मचारियों को विदाई में चांदी के सिक्के दिए गए, लेकिन बाद में पता चला कि वे सिक्के नकली निकले और उनमें 99 प्रतिशत तांबा था। रेलवे ने 2023 में इंदौर की एक कंपनी से 3631 सिक्के खरीदे थे और अब इस मामले में एफआईआर दर्ज होने की संभावना है।
धनतेरस पर अक्सर खबरें आती हैं कि बाजार में नकली चांदी के सिक्कों की भरमार हो गई है। जॉर्ज विक्टोरिया के नाम से सबसे ज्यादा नकली सिक्के बिक रहे हैं। इसके अलावा ऐसे गिरोह भी पकड़े गए हैं जो नकली चांदी बेचकर असली सोना खरीद रहे थे। 14 जनवरी को ऐसे ही दो आरोपी गिरफ्तार हुए। दो महीने पहले हाथरस में एक गिरोह पकड़ा गया जो नकली चांदी गिरवी रखकर पैसा लेता था और फिर फरार हो जाता था।
सोने का भाव भी छू रहा आसमान
चांदी की बात हो रही है तो सोने का जिक्र भी जरूरी है। 22 जनवरी को जब सोने का भाव गिरा था तब 10 ग्राम सोना 1.5 लाख रुपये से कम हो गया था। लेकिन 27 जनवरी तक यह 1,62,000 रुपये से ऊपर चला गया। ठीक एक साल पहले यानी जनवरी 2025 में 10 ग्राम सोना 75,000 रुपये का था और आज यह 70,000 रुपये से अधिक बढ़ चुका है।
आगे क्या होगा
सवाल यह है कि चांदी इसी तरह चढ़ती रहेगी या टूटेगी? इसका सही जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। अगर चीन का प्रतिबंध एक साल तक जारी रहता है तो चांदी की कीमतों पर और असर पड़ सकता है और दाम बढ़ने की भविष्यवाणी करने वाले सही साबित हो सकते हैं। लेकिन अगर चीन अचानक प्रतिबंध वापस ले लेता है तो दाम घटने की भविष्यवाणी करने वाले सही साबित हो सकते हैं।
दुनिया भर के देश अब चांदी को स्ट्रेटेजिक मेटल कहने लगे हैं। जिस चांदी के ग्लास, कटोरी, पायल और बिछिया को कोई पूछता नहीं था, उसी चांदी के नाम पर अब देशों में होड़ मची हुई है। पिछले एक साल का रिकॉर्ड बताता है कि दाम बढ़ने की भविष्यवाणी ही सही साबित हुई है और बीच-बीच में दाम गिरने पर हाय-हाय करने वालों को एकाध दिन ही सही साबित होने का मौका मिला है।
आम आदमी पर असर
आम आदमी के लिए यह खबर दोधारी तलवार जैसी है। जिनके पास पुरानी चांदी है, उनके लिए यह मुनाफा कमाने का सुनहरा मौका है। लेकिन जो लोग शादी-ब्याह या त्योहारों पर चांदी खरीदना चाहते हैं, उनकी जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है। इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें भी बढ़ सकती हैं क्योंकि इनमें चांदी का इस्तेमाल होता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- चांदी का भाव एक साल में 95,000 रुपये से बढ़कर 3.5 लाख रुपये प्रति किलो हो गया, यानी 250 प्रतिशत की उछाल
- चीन ने 2027 तक चांदी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया, जबकि दुनिया की 65 प्रतिशत चांदी चीन से आती है
- इलेक्ट्रिक वाहनों, AI हार्डवेयर, चिप्स और सोलर पैनल में चांदी की बढ़ती मांग के चलते कीमतें और बढ़ सकती हैं
- भारत, ब्रिटेन और अमेरिका में लोग पुराने चांदी के बर्तन और गहने बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं
- नकली चांदी बेचने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं, सावधान रहने की जरूरत है








