Metabolic Surgery for Type-2 Diabetes : भारत को “डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है और यह कोई गर्व की बात नहीं है। ICMR (Indian Council of Medical Research) इंडिया बी 2023 की एक स्टडी के मुताबिक भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को डायबिटीज है। वहीं 14 करोड़ से ज्यादा लोग प्री-डायबिटिक हैं यानी डायबिटीज के रिस्क पर हैं। ऐसे में जब दवाइयां और लाइफस्टाइल बदलाव भी काम नहीं करते, तब मेटाबॉलिक सर्जरी एक विकल्प बनकर सामने आती है।
युवाओं में भी बढ़ रही डायबिटीज
पहले लोगों को लगता था कि डायबिटीज बुढ़ापे की बीमारी है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। युवाओं को भी डायबिटीज हो रही है और बहुत सारे लोगों की डायबिटीज कंट्रोल से बाहर है।
AIIMS नई दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारुति पोल बताते हैं कि हमारे देश में अनकंट्रोल्ड टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़े हैं।
अनकंट्रोल्ड डायबिटीज के खतरे
जब डायबिटीज लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रहती तो कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है:
- किडनी फेलियर
- हार्ट अटैक
- स्ट्रोक
- न्यूरोपैथी (नसों की बीमारी)
- रेटिनोपैथी (आंखों की बीमारी)
अगर लाइफस्टाइल सुधारने, अच्छी डाइट लेने और दवाइयां खाने के बाद भी किसी मरीज की डायबिटीज कंट्रोल में नहीं आती, तब उनमें मेटाबॉलिक सर्जरी की जा सकती है।
मेटाबॉलिक सर्जरी क्या है?
मणिपाल हॉस्पिटल गाजियाबाद में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉ. अमन कुमार बताते हैं कि मेटाबॉलिक सर्जरी से मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
इस सर्जरी का मकसद सिर्फ वजन घटाना नहीं है। बल्कि यह शरीर के हॉर्मोन सिस्टम को सुधारती है ताकि ब्लड शुगर बेहतर तरीके से कंट्रोल हो सके।
कैसे की जाती है यह सर्जरी?
मेटाबॉलिक सर्जरी में पेट और छोटी आंत की बनावट में बदलाव किया जाता है। यह प्रक्रिया दो चरणों में होती है:
पहला चरण – पेट का साइज छोटा करना:
सबसे पहले पेट का साइज छोटा कर दिया जाता है। इससे तीन फायदे होते हैं – कम खाकर भी पेट भरा हुआ लगता है, शरीर में कम कैलोरी पहुंचती है और भूख बढ़ाने वाला हॉर्मोन ग्रेलिन कम बनता है।
दूसरा चरण – छोटी आंत का रास्ता बदलना:
पेट का साइज घटाने के बाद छोटी आंत के रास्ते को बदला जाता है। इससे खाना जल्दी आगे बढ़ता है।
GLP-1 हॉर्मोन का रोल
इन बदलावों से शरीर में ऐसे हॉर्मोन ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं जो ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करते हैं। जैसे GLP-1।
GLP-1 यानी ग्लूकागन लाइक पेप्टाइड वन। यह एक इंक्रेटिन हॉर्मोन है जो खाने के बाद खून में शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद करता है। यह इंसुलिन हॉर्मोन के असर को भी बेहतर बनाता है।
सर्जरी के बाद क्या होता है?
इस सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीजों का ब्लड शुगर नॉर्मल होने लगता है। कभी-कभी डायबिटीज की दवाइयां भी या तो कम हो जाती हैं या पूरी तरह बंद हो जाती हैं।
यह एक बड़ी राहत है उन मरीजों के लिए जो सालों से दवाइयां खा रहे हैं और फिर भी शुगर कंट्रोल में नहीं आ रही।
किसके लिए है यह सर्जरी?
हालांकि यह सर्जरी हर डायबिटिक पेशेंट के लिए नहीं है। यह सिर्फ उन्हीं के लिए है:
- जिनकी डायबिटीज गंभीर रूप से अनकंट्रोल्ड है
- दवाइयों, डाइट और लाइफस्टाइल बदलने से भी जिनकी शुगर कंट्रोल में नहीं आ रही
- जिनका वजन ज्यादा है
- जिनका HbA1c लगातार हाई बना हुआ है
- जिनमें डायबिटीज की वजह से दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है
HbA1c टेस्ट क्या है?
HbA1c एक ब्लड टेस्ट है जो पिछले तीन महीनों का औसत ब्लड शुगर लेवल बताता है। अगर यह लगातार हाई बना रहे तो डॉक्टर मेटाबॉलिक सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं।
आम लोगों पर असर
यह खबर उन लाखों भारतीयों के लिए उम्मीद की किरण है जो टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं और जिनकी दवाइयां भी काम नहीं कर रही हैं। मेटाबॉलिक सर्जरी एक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसके लिए डॉक्टर से सलाह जरूरी है। हर मरीज के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत में 10 करोड़+ लोगों को डायबिटीज और14 करोड़+ प्री-डायबिटिक हैं
- मेटाबॉलिक सर्जरी सिर्फ वजन नहीं घटाती, बल्कि हॉर्मोन सिस्टम को भी सुधारती है
- सर्जरी में पेट का साइज छोटा और छोटी आंत का रास्ता बदला जाता है
- GLP-1 हॉर्मोन एक्टिव होता है जो ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करता है
- यह सर्जरी सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनकी गंभीर अनकंट्रोल्ड डायबिटीज है








