Rafale Fighter Jet India : भारत की सुरक्षा ताकत को नई ऊंचाई देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह करने वाला राफेल लड़ाकू विमान अब भारत में ही बनाया जाएगा। भारत और फ्रांस के बीच इसको लेकर एक मेगा डील की तैयारी चल रही है, जिससे Indian Air Force को 114 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
कौन, कब, कहाँ और क्या
ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभाने वाला राफेल फाइटर जेट अब भारत में निर्माण की दिशा में बढ़ चुका है। जून 2025 में इस प्रोजेक्ट से जुड़ा अहम समझौता हुआ और हैदराबाद में विशेष निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है।

भारत-फ्रांस के बीच मेगा डील की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल विमानों को लेकर बड़ी डील की योजना है। अब तक भारत राफेल को फ्रांस से खरीदता था, लेकिन इस फैसले के बाद विमान का ढांचा ही नहीं, बल्कि इंजन और रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं भी भारत में ट्रांसफर की जा रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली तस्वीर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल ने जिस तरह पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। उसी के बाद से राफेल को “दुश्मन का काल” माना जाने लगा और अब उसका निर्माण भारत में होना रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
हैदराबाद बनेगा राफेल निर्माण का केंद्र
जून 2025 में Tata Advanced Systems Limited और Dassault Aviation के बीच राफेल के फ्यूजलेज यानी विमान के ढांचे को भारत में बनाने का समझौता हुआ। इसके तहत हैदराबाद में विशेष निर्माण इकाई बनाई जा रही है, जहां 2028 तक पहली यूनिट निकलने की उम्मीद है। सालाना 24 विमानों के ढांचे बनाने की क्षमता तय की गई है।
इंजन से लेकर मेंटेनेंस तक भारत में
सूत्रों की मानें तो केवल विमान का ढांचा ही नहीं, बल्कि इंजन निर्माण और रखरखाव की सुविधाएं भी भारत में स्थापित की जा रही हैं। हैदराबाद में इंजन उत्पादन संयंत्र और उत्तर प्रदेश के जेवर में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल हब बनाए जाने की योजना है।

भारतीय वायुसेना को क्या फायदा
इस फैसले से भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी काफी हद तक दूर होगी। साथ ही राफेल जैसे अत्याधुनिक विमान के भारत में बनने से युद्धकालीन जरूरतों में तेजी और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ेंगी।
विश्लेषण (Analysis)
राफेल का भारत में निर्माण केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक ऑर्डर के लिए भी निर्माण केंद्र बन सकता है। अनुमान है कि इस परियोजना की करीब 60 प्रतिशत लागत भारत में ही रहेगी, जो रक्षा विनिर्माण के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकती है।
आम जनता पर असर
रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूती मिलेगी। साथ ही देश की सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों का भरोसा और मजबूत होगा।
क्या है पृष्ठभूमि
पिछले साल भारतीय नौसेना के लिए 24 राफेल विमानों की डील के बाद अब वायुसेना के लिए यह और भी बड़ी योजना सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद राफेल की भूमिका और अहम हो गई, जिसने इस फैसले की जमीन तैयार की।

मुख्य बातें (Key Points)
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राफेल फाइटर जेट अब भारत में बनेगा
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भारत-फ्रांस के बीच 114 विमानों की मेगा डील की तैयारी
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हैदराबाद में फ्यूजलेज और इंजन निर्माण इकाई
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जेवर में मेंटेनेंस और ओवरहॉल हब
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भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा








