Indore Water Contamination : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी में सीवर का मल मिलने से 17 लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग गंभीर रूप से बीमार पड़े हैं। यह वही इंदौर है जिसे लगातार आठ बार पूरे देश में सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिला है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जो शहर सफाई में नंबर वन है, वहां के लोग महीनों से गंदा पानी क्यों पी रहे थे।
17 की मौत, हजारों प्रभावित
भागीरथपुरा में 25 और 27 दिसंबर से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हुआ जो 6-7 जनवरी तक जारी रहा। अखबारों में 1400 से लेकर 3000 तक लोगों के प्रभावित होने की खबरें छपी हैं। 450 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हुए और 17 लोगों ने दम तोड़ दिया।
इस इलाके की आबादी करीब 5000 बताई जाती है। 400 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हुई जिसमें 245 में संक्रमण के लक्षण पाए गए। 13 लोग आईसीयू में भर्ती हैं और 95 लोग अभी भी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
8 साल से गंदा पानी पी रहे थे लोग
भागीरथपुरा के रहने वाले सूर्य प्रकाश की आंखों में आंसू आ जाते हैं। उनकी बहू पूजा बाई चार-पांच दिन आईसीयू में रहने के बाद बाहर तो आ गई लेकिन अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई। पूजा 5 महीने की गर्भवती हैं और इस बीमारी का उनके बच्चे पर क्या असर पड़ा, इसकी कोई जानकारी नहीं।
पूजा के पति जितेंद्र यादव बताते हैं कि जब वे पत्नी को अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर ने कहा था कि 75% चांस है कि यह केस हाथ से निकल गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां 8 साल से गंदा पानी आ रहा था और कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
पुलिस चौकी के टॉयलेट से रिसा गंदा पानी
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। भागीरथपुरा पुलिस चौकी के टॉयलेट के नीचे एक पाइप लीक हो गई थी। इस चौकी में सेप्टिक टैंक ही नहीं था जिसके कारण सीवेज सीधे नर्मदा से आने वाली पानी की सप्लाई में मिल गया।
इंदौर के अखबार प्रजातंत्र की रिपोर्ट के मुताबिक भागीरथपुरा के लोग 15 दिन से पुलिस चौकी के टॉयलेट का गंदा पानी पी रहे थे। 30 दिसंबर को जब यह कारण सामने आया तो शौचालय को ढहा दिया गया लेकिन किसी को निलंबित नहीं किया गया।
अक्टूबर से हो रही थी शिकायत
यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। लोग महीनों से शिकायत कर रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक:
- 15 अक्टूबर को शिकायत हुई कि एक मंदिर के पास के बोरवेल में नाले का पानी मिक्स हो रहा है
- नवंबर में एक और शिकायत हुई कि पानी गंदा है और उसमें एसिड मिला हुआ है
- 18 दिसंबर को शिकायत हुई कि नर्मदा से आने वाली सप्लाई में बदबू आ रही है
- 28 दिसंबर तक वार्ड के 90% लोग बीमार पड़ चुके थे
मुख्यमंत्री के बार-बार दौरे, फिर भी कुछ नहीं हुआ
मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं। उनके ट्विटर हैंडल से पता चलता है कि दिसंबर महीने में वे 10 दिन इंदौर में रहे और करीब 16 कार्यक्रमों में शामिल हुए। कहीं भूमि पूजन, कहीं लोकार्पण तो कभी कथा सुनने भी गए।
नवंबर में 4 दिन, अक्टूबर में 5 दिन और सितंबर में 7 दिन मुख्यमंत्री इंदौर के दौरे पर रहे। फिर भी भागीरथपुरा की समस्या उन तक नहीं पहुंची। सवाल उठता है कि इतनी हाई लेवल बैठकों में मोहल्ले के लेवल की समस्या क्यों नहीं आई?
3 साल से लटका था पाइपलाइन का काम
2022 से ढाई करोड़ की नई पाइपलाइन बिछाने का टेंडर जारी हुआ था जो 10 महीने में पूरा होना था। लेकिन आज तक वह काम पूरा नहीं हुआ। 30 दिसंबर को जब लोग मरने लगे तब जाकर एक अफसर ने दूसरे चरण के काम को शुरू करने के आदेश दिए और 24 घंटे में काम शुरू भी हो गया।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक जो काम 3 साल से टल रहा था वो 24 घंटे में शुरू हो गया। सवाल है कि अगर पहले ही यह काम हो जाता तो 17 लोगों की जान नहीं जाती।
पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया
इंदौर के जिलाधिकारी ने भागीरथपुरा के 500 बोरवेल में से 69 के पानी के सैंपल की जांच कराई। आधे से ज्यादा सैंपल में भयंकर प्रदूषण पाया गया। पानी में ई कोलाई, सेल्मनेला, विब्रियो और कोलरा जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले।
ये बैक्टीरिया शरीर में जाने पर जानलेवा डायरिया, यूटीआई, फूड पॉइजनिंग, तरह-तरह के इंफेक्शन और हैजा कर सकते हैं। गंभीर मामलों में शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं। कई मरीजों के साथ यही हुआ।
छह महीने के बच्चे की भी गई जान
मरने वालों में छह महीने का बच्चा अभ्यान साहू भी है। उसकी मां ने दूध में पानी मिलाकर दिया और बच्चे की मौत हो गई। 10 साल की मन्नतों के बाद अभ्यान का जन्म हुआ था। उसकी मौत से पूरा इलाका सदमे में है।
अभ्यान के परिजन बताते हैं कि साईं मंदिर के पास से गाय का दूध लेते थे और उसमें पानी मिलाकर बच्चे को पिलाया। बच्चे को उल्टी-दस्त शुरू हो गए और रात 4 बजे इमरजेंसी में भर्ती कराया। 25,000 रुपए काउंटर पर जमा कराने के बाद बच्चा भर्ती हुआ।
69 साल के बुजुर्ग धार से आए, पानी पिया और मर गए
मध्य प्रदेश के धार से 69 साल के ओम प्रकाश शर्मा अपने बेटे से मिलने भागीरथपुरा आए थे। यहां पानी पिया, बीमार हुए और किडनी फेल होने से उनकी मौत हो गई। वे 17वें शख्स थे जिनकी इस कांड में जान गई।
एक महिला पार्वती कुंडला के शरीर में गयन बरे सिंड्रोम (जीबीएस) पाया गया है। यह बैक्टीरिया से होता है जिसके कारण शरीर का रक्षा तंत्र शरीर पर ही हमला कर देता है। मांसपेशियां शून्य पड़ जाती हैं और कुछ मामलों में लकवा हो जाता है।
10 दिन बाद महामारी घोषित हुई
5 जनवरी 2026 को इंदौर के स्वास्थ्य विभाग ने इस संकट को एपिडेमिक (महामारी) का दर्जा दिया। 25 दिसंबर को मामले सामने आए थे और 4 दिन के भीतर ही 10 लोगों की मौत हो चुकी थी। लेकिन यह समझने में 10 दिन लग गए कि बीमारी का स्तर बड़ा हो गया है।
जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कितनों की मौत हुई तो सरकार ने कहा सिर्फ 4 लोगों की मौत गंदे पानी से हुई है। जबकि उसी समय बीजेपी के मेयर पुष्यमित्र भार्गव पीटीआई से कह रहे थे कि 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने टाला जवाबदारी
नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग हुई लेकिन उन्होंने नहीं दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अधिकारियों की 200% जिम्मेदारी है। लेकिन सवाल है कि मंत्री जी की जिम्मेदारी क्या 1% भी नहीं?
इंदौर के नगर निगम आयुक्त और उपायुक्त को सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन राजनीतिक जवाबदेही किसी की तय नहीं हुई। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले में सरकार का रवैया संवेदनशील नहीं है।
2019 में CAG ने दी थी चेतावनी
2019 में CAG (कैग) की रिपोर्ट में बताया गया था कि 2013 से 2018 के बीच इंदौर और भोपाल के इलाकों में साढ़े आठ लाख लोग सीवेज मिला पानी पी रहे हैं। बड़े पैमाने पर पानी की सप्लाई में सीवेज घुस आया था।
यह 7 से 12 साल पुरानी रिपोर्ट है। फिर भी सुधार नहीं हुआ। और अब भागीरथपुरा में हजारों लोग संक्रमित हुए और 17 लोग मर गए।
सिर्फ इंदौर नहीं, पूरे देश का यही हाल
- बड़वानी (मध्य प्रदेश): अक्टूबर में 50 से ज्यादा लोग गंदा पानी पीने से बीमार पड़े
- गांधीनगर (गुजरात): 100 लोग दूषित पानी से टाइफाइड के साथ भर्ती हुए। केंद्रीय जल मंत्रालय की रिपोर्ट में लिखा है गुजरात में मात्र 47% घरों में साफ पानी मिलता है
- बेंगलुरु: लिंगराजपुरम इलाके में 40 साल पुरानी जंग लगी पाइपों में सीवर का पानी मिल रहा है
- ग्रेटर नोएडा: टीडीएस 1500 के पार है, एक साल में 1800 से ज्यादा लोग बीमार हुए
- गाजियाबाद: नल खोलते ही बदबूदार पानी आता है
हर साल 2 लाख लोग मरते हैं गंदे पानी से
2018 में नीति आयोग की रिपोर्ट में बताया गया था कि साफ पानी नहीं मिलने के कारण हर साल 2 लाख लोग मर जाते हैं। देश का 70% पेयजल दूषित है और 60 करोड़ लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
67,000 करोड़ की नल जल योजना चल रही है। “जल है तो कल है”, “स्वच्छ भारत मिशन” जैसे नारे हर दीवार पर दिखते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
विश्लेषण: स्वच्छता का खोखला दावा
इंदौर को 8 बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिला। लेकिन इसी शहर में 5000 लोग महीनों से गंदा पानी पी रहे थे। सवाल उठता है कि स्वच्छता का मापदंड क्या है? सिर्फ सड़कों पर झाड़ू लगाना या लोगों को साफ पानी मुहैया कराना भी?
मुख्यमंत्री बार-बार इंदौर जाते रहे, भूमि पूजन करते रहे, ट्वीट करते रहे। लेकिन उनके दौरों का नतीजा क्या निकला? सरकारी अस्पताल एम्स जैसे नहीं बने, कॉलेज की धूम नहीं मची और 5000 की आबादी वाला मोहल्ला नाले का पानी पीता रहा।
भागीरथपुरा की गलियों में पानी रिसता बहता रहता है। यहां की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह देश का सबसे साफ शहर है। ऊपर-ऊपर से कचरा उठा देने और लीपापोती कर देने से कहीं भी सफाई का दावा नहीं किया जा सकता।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- इंदौर के भागीरथपुरा में सीवेज मिला पानी पीने से 17 लोगों की मौत, 3000 से ज्यादा प्रभावित
- पुलिस चौकी के टॉयलेट से गंदा पानी नर्मदा की सप्लाई में मिला, सेप्टिक टैंक ही नहीं था
- अक्टूबर से शिकायतें हो रही थीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, 3 साल से पाइपलाइन का काम अटका था
- 8 बार स्वच्छ शहर का खिताब जीतने वाले इंदौर में CAG की 2019 की रिपोर्ट के बाद भी सुधार नहीं हुआ
- देश में हर साल गंदा पानी पीने से 2 लाख लोग मरते हैं, 70% पेयजल दूषित है
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








