Vaping Health Risks India : आजकल के युवाओं में ‘कूल’ दिखने का एक नया नशा सवार हुआ है—वेपिंग (Vaping)। चाहे कॉलेज की पार्टी हो या ऑफिस की डेस्क, टेंशन हो या खुशी, हाथ में एक छोटा सा डिवाइस और मुंह से निकलता धुआं ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप ‘सुरक्षित’ और ‘पानी की भाप’ समझ रहे हैं, वह असल में एक ‘स्लो पॉइजन’ (Slow Poison) है? संसद के विंटर सेशन में भी इस मुद्दे पर तब बवाल मच गया जब 11 दिसंबर 2025 को बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने सदन के भीतर ही एक टीएमसी सांसद को वेप करते हुए पकड़ लिया। यह घटना बताती है कि बैन होने के बावजूद यह नशा कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है।
संसद में गूंजा वेपिंग का मुद्दा
देश में ई-सिगरेट पूरी तरह से प्रतिबंधित है, लेकिन जब कानून बनाने वाले ही इसका उल्लंघन करते दिखें, तो सवाल उठना लाजमी है। अनुराग ठाकुर ने स्पीकर ओम बिरला से शिकायत करते हुए पूछा, “सर, देशभर में ई-सिगरेट बैन है, क्या आपने सदन में इसे अलाउ कर दिया है?” यह घटना केवल एक नियम टूटने की नहीं, बल्कि उस खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करती है जो अब संसद के गलियारों तक पहुंच गया है।
क्या है वेप और कैसे करता है काम?
आसान भाषा में समझें तो ई-सिगरेट या वेप एक बैटरी से चलने वाला डिवाइस है। इसके चार मुख्य हिस्से होते हैं—कार्ट्रिज (जिसमें लिक्विड भरा होता है), हीटिंग एलिमेंट (एटमाइजर), बैटरी और माउथ पीस। जब आप कश खींचते हैं, तो सेंसर बैटरी को ऑन कर देता है, जिससे लिक्विड गर्म होकर भाप (Vapor) बन जाता है। इस लिक्विड में निकोटीन, फ्लेवर और अन्य केमिकल्स होते हैं। लोग इसे ‘स्मोकिंग’ नहीं बल्कि ‘वेपिंग’ कहते हैं क्योंकि इसमें धुआं नहीं भाप निकलती है, लेकिन यह भाप भी फेफड़ों के लिए उतनी ही जानलेवा है।
कानून क्या कहता है?
भारत में The Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 लागू है। इस कानून के तहत ई-सिगरेट का उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पूरी तरह से बैन है। कानून का उल्लंघन करने पर पहली बार में 1 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, दूसरी बार पकड़े जाने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यहां तक कि ई-सिगरेट को स्टोर करने पर भी 6 महीने की सजा हो सकती है।
सेहत पर ‘केमिकल कॉकटेल’ का हमला
WHO और अन्य मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, वेपिंग शरीर को अंदर से खोखला कर रही है।
हार्ट अटैक का खतरा: इसमें मौजूद निकोटीन खून की नसों को सख्त कर देता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना हो जाता है।
पॉपकॉर्न लंग्स (Popcorn Lungs): कई फ्लेवर्स में ‘डायटाइल’ (Diacetyl) नामक केमिकल होता है, जो सांस की नलियों को सिकोड़ देता है, जिससे सांस लेने में हमेशा के लिए दिक्कत हो सकती है।
दिमाग पर असर: 25 साल तक की उम्र तक दिमाग विकसित होता है। निकोटीन सीधे दिमाग के उस हिस्से पर हमला करता है जो सीखने और मूड कंट्रोल करने के लिए जिम्मेदार है, जिससे चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन बढ़ता है।
मार्केटिंग का काला सच
शुरुआत में 2003 में चीन के फार्मासिस्ट ने इसे सिगरेट छुड़ाने के यंत्र के तौर पर बनाया था, लेकिन कंपनियों ने मुनाफा देखकर इसे ‘लाइफस्टाइल गैजेट’ बना दिया। फलों, कैंडी और पान जैसे फ्लेवर्स डालकर इसे बच्चों और युवाओं के लिए आकर्षक बनाया गया। तंबाकू कंपनियां अब पुराने निकोटीन को नई पैकिंग में बेच रही हैं। WHO का कहना है कि यह इतिहास खुद को दोहरा रहा है—पहले सिगरेट को सेफ बताया गया था, अब वेप को।
संपादकीय विश्लेषण: बैन के बाद भी क्यों धुआं-धुआं है देश?
एक संपादक के तौर पर यह देखना चिंताजनक है कि कानून होने के बावजूद ‘ब्लैक मार्केट’ फल-फूल रहा है। पान की दुकानों से लेकर ऑनलाइन साइट्स तक, ई-सिगरेट आसानी से मिल रही है। यह केवल प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक जागरूकता की कमी भी है। जब तक हम इसे ‘कूल’ मानेंगे, तब तक यह हमारे फेफड़ों को जलाता रहेगा। हमें यह समझना होगा कि धुआं चाहे दिल्ली के प्रदूषण का हो या स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाला वेप का—फेफड़ों के लिए वह जहर ही है।
‘जानें पूरा मामला’
हाल ही में संसद सत्र के दौरान एक सांसद द्वारा वेपिंग करने की घटना ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। भारत सरकार ने 2019 में ही स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। आईसीएमआर (ICMR) ने अपने व्हाइट पेपर में इसे पूरी तरह बैन करने की सिफारिश की थी, जिसके बाद यह सख्त कानून अस्तित्व में आया।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
भारत में The Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 के तहत वेपिंग और ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है।
नियम तोड़ने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना हो सकता है।
वेपिंग से हार्ट अटैक, पॉपकॉर्न लंग्स और दिमाग के विकास में बाधा जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं।
संसद में भी वेपिंग का मुद्दा उठा, जिससे सरकार और प्रशासन की सख्ती और बढ़ने की उम्मीद है।








