Operation Sindoor Global Delegation : भारत सरकार ने आतंकवाद (Terrorism) के मुद्दे पर पाकिस्तान (Pakistan) की सच्चाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत केंद्र सरकार ने पक्ष-विपक्ष के करीब 40 सांसदों को सात टीमों में विभाजित कर विदेशों में भारत का पक्ष रखने के लिए भेजने का फैसला किया है। इस पहल का खास पहलू यह है कि कांग्रेस (Congress) द्वारा नाम नहीं दिए जाने के बावजूद शशि थरूर (Shashi Tharoor) को एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौंपा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और केंद्र सरकार को उन पर विश्वास है।
Yesterday morning, the Minister of Parliamentary Affairs Kiren Rijiju spoke with the Congress President and the Leader of the Opposition in the Lok Sabha. The INC was asked to submit names of 4 MPs for the delegations to be sent abroad to explain India's stance on terrorism from…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 17, 2025
थरूर को चुना लेकिन कांग्रेस ने नाम नहीं भेजा
सरकार ने जब सभी दलों से सांसदों के नाम मांगे थे, तब कांग्रेस की तरफ से भेजी गई सूची में शशि थरूर का नाम शामिल नहीं था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) द्वारा जारी की गई सूची में आनंद शर्मा (Anand Sharma), गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi), सैयद नसीर हुसैन (Syed Naseer Hussain) और राजा बरार (Raja Barar) के नाम थे। लेकिन केंद्र सरकार ने थरूर पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक समूह की कमान सौंप दी। थरूर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि सरकार ने उन पर विश्वास जताया, और जब भी राष्ट्रीय हित की बात आएगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
थरूर समेत 7 नेताओं को मिली जिम्मेदारी
थरूर के अलावा जिन अन्य नेताओं को सात अलग-अलग टीमों की जिम्मेदारी दी गई है उनमें भाजपा (BJP) के रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad), जेडीयू (JDU) के संजय कुमार झा (Sanjay Kumar Jha), बीजेपी (BJP) के बैजयंत पांडा (Baijayant Panda), डीएमके (DMK) की कनिमोझी करुणानिधि (Kanimozhi Karunanidhi), एनसीपी शरद गुट (NCP – Sharad Pawar faction) की सुप्रिया सुले (Supriya Sule) और शिवसेना शिंदे गुट (Shiv Sena – Shinde faction) के श्रीकांत एकनाथ शिंदे (Shrikant Eknath Shinde) शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताई एकजुटता की मिसाल
केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह भारत की एकजुटता का प्रतीक है कि सभी राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एक साझा मंच पर राष्ट्र का पक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ये प्रतिनिधिमंडल भारत की “जीरो टॉलरेंस फॉर टेररिज्म” नीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से पेश करेंगे।
पहले भी थरूर ने किया था समर्थन
पहलगाम (Pahalgam) में हुए आतंकी हमले के बाद शशि थरूर की तरफ से केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन देखने को मिला था। उन्होंने न सिर्फ सीजफायर (Ceasefire) के फैसले का समर्थन किया बल्कि कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी के कदमों को सही ठहराया। इससे यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक कूटनीतिक रणनीति है जिसमें विपक्ष की भागीदारी को भी अहमियत दी गई है। कांग्रेस की तरफ से नाम नहीं भेजे जाने के बावजूद शशि थरूर को भेजना दर्शाता है कि राष्ट्रीय हित में सरकार राजनीतिक सीमाओं से परे सोच रही है। इस अभियान के ज़रिए भारत विश्व मंच पर पाकिस्तान के झूठ और आतंकवाद को बेनकाब करने के लिए पूरी तरह तैयार है।









