Caste Census India को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अगली राष्ट्रीय जनगणना के साथ-साथ देश में जातीय जनगणना (Caste Census) भी कराई जाएगी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस घोषणा के साथ ही देश में जाति आधारित आंकड़े पहली बार आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर एकत्र किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि आगामी जनगणना में जातियों की गिनती भी शामिल होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनगणना (National Census) अब केवल जनसंख्या आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें जातिगत वर्गीकरण का भी समावेश होगा।
इस फैसले के साथ ही केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष जातिगत सर्वेक्षणों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (Cabinet Committee on Political Affairs) की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया है कि अब से जातीय आंकड़े एक वैज्ञानिक और संगठित प्रक्रिया के तहत दर्ज किए जाएंगे।
वैष्णव ने स्पष्ट किया कि अब तक कई राज्यों में कराए गए जाति सर्वेक्षण (Caste Surveys) अवैज्ञानिक और अपूर्ण रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर बिहार (Bihar) का जिक्र किया, जहां एनडीए सरकार के कार्यकाल में 2022 में जातीय जनगणना कराई गई थी और इसे प्रकाशित भी किया गया। बिहार भारत का पहला राज्य बना जिसने स्वतंत्र भारत में सभी जातियों की सफल गणना की।
इस नए फैसले से उम्मीद की जा रही है कि भारत में सामाजिक संरचना, संसाधनों का वितरण और कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में ठोस नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, केंद्र सरकार का यह प्रयास विपक्ष द्वारा जातिगत जनगणना की मांग के जवाब में एक रणनीतिक और ठोस कदम माना जा रहा है।








