गुरूवार, 14 मई 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थित, आज पीएम मोदी ने किया नए कैंपस का उद्घाटन, जानें इतिहास

प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थित, आज पीएम मोदी ने किया नए कैंपस का उद्घाटन, जानें इतिहास

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 19 जून 2024
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
A A
0
cliQ India Hindi
104
SHARES
690
VIEWS
ShareShareShareShareShare

नई दिल्‍ली, 19 जून (The News Air) पांचवीं सदी में बने प्राचीन विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे। यह विश्वविद्यालय भारत देश का गर्व है, ऐसी धरोहर है, जो हमें ज्ञान के महत्व की याद दिलाती है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार यानी के आज बिहार के राजगीर में ऐतिहासिक नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस का उद्घाटन दिया है। ऐसे में भारत देश और दुनिया के लिए धरोहर नालंदा यूनिवर्सिटी का आज पुर्नजन्म हुआ है।

साल 2016 में नालंदा के खंडहरों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विरासत स्थल घोषित किया गया था। 2017 में विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य शुरू किया। पुरानी विरासत को संमभालते हुए विश्वविद्यालय का नया कैंपस नालंदा के प्राचीन खंडहरों के पास बनाया गया है। इस नए कैंपस की स्थापना नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के माध्यम से की गई है।

नालंदा यूनिवर्सिटी का इतिहास काफी पुराना

इस अधिनियम में स्थापना के लिए 2007 में फिलीपींस में आयोजित दूसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय को लागू करने का प्रावधान किया गया था। 12वीं शताब्दी का इतिहास जब भी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी की बात होती है तो दिमाग में ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज के नाम आते हैं। लेकिन, नालंदा यूनिवर्सिटी का इतिहास काफी पुराना है। पटना से 90 किलोमीटर और बिहार शरीफ से करीब 12 किलोमीटर दूर दक्षिण में आज भी इस विश्व प्रसिद्ध प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय के खंडहर स्थित हैं।

यह भी पढे़ं 👇

Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

गुरूवार, 14 मई 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates 14 May 2026: Top Updates, हर खबर सबसे तेज

गुरूवार, 14 मई 2026
Southwest Monsoon

बड़ा अपडेट: Southwest Monsoon जल्द दस्तक देगा, Heat Wave की चेतावनी भी जारी

गुरूवार, 14 मई 2026
Shani Amavasya 2026

Shani Amavasya 2026 आ रही है, सभी राशियों का 14 मई 2026 का विस्तृत राशिफल

गुरूवार, 14 मई 2026

लगभग 1600 साल पहले नालंदा यूनिवर्सिटी की स्थापना 5वीं सदी में हुई थी। इसकी स्थापना 450 ई. में गुप्त सम्राट कुमार गुप्त प्रथम ने की थी। बाद में इसे हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला।

जब देश में नालंदा यूनिवर्सिटी बनाई गई तो दुनियाभर के छात्रों के लिए यह आर्कषण का केंद्र था। विशेषज्ञों के मुताबिक 12वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों ने इस विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया था। इससे पहले तकरीबन 800 सालों तक इन प्राचीन विद्यालय ने ना जाने कितने छात्रों को शिक्षा दी है। दुनियाभर के छात्र यहां शिक्षा लेने आया करते थे।

इसलिए इसमें 300 से ज्यादा कमरे थे, सात बड़े-बड़े हॉल थे और इसकी लाइब्रेरी नौ मंजिला हुआ करती थी, जिसका नाम धर्मगूंज था। हालांकि तुर्की के मुस्लिम शासक बख्तियार खिलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी को आग लगवा दी थी। लाइब्रेरी की बात करें तो वह इती बड़ी थी की उसमें लगभग 90 लाख से अधिक किताबें मौजूद थीं, जिस कारण आग पूरे 3 महीने तक धधकती रही थी। 19वीं सदी में मिला था इसका क्लू वहीं मॉडर्न वर्ल्ड को इसके बारे में 19वीं शताब्दी के दौरान पता चला था।

कई सदी तक ये विश्वविद्यालय जमीन में दबा रहा

कई सदी तक ये विश्वविद्यालय जमीन में दबा हुआ था। 1812 में बिहार में लोकल लोगों को बौद्धिक मूर्तियां मिली थीं, जिसके बाद कई विदेशी इतिहासकारों ने इस पर अध्ययन किया। इसके बाद इसके बारे में पता चला। नए कैंपस में 40 क्लासरूम, दो ऑडिटोरयम नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस के बारे में जाने तो इसमें दो अकेडमिक ब्लॉक हैं। इस कैंपस में 40 क्लासरूम हैं और साथ ही 1900 बच्चों के बैठने की व्यवस्था भी है।

इसके अलावा 300 सीटों वाले दो 2000 लोगों के बैठने की क्षमता वाले ऑडिटोरियम, इंटरनेशनल सेंटर और एम्फीथिएटर है और फैकल्टी क्लब और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी शामिल है। इस यूनिवर्सिटी का कैंपस ‘NET ZERO’ कैंपस हैं, इसका मतलब है कि यहां पर्यावरण अनुकूल के एक्टिविटी और शिक्षा होती है। इतना ही नहीं पानी को बचाने के लिए रि-साइकल प्लांट भी लगाया गया है। क्या कुछ पढ़ाया जाता था? ज्ञान के भंडार माने जाने वाले इस विश्वविद्यालय में धार्मिक ग्रंथों के अलावा लिट्रेचर, थियोलॉजी,लॉजिक, मेडिसिन, फिलोसॉफी, एस्ट्रोनॉमी जैसे कई सब्जेक्ट पढ़ाया जाता था।

700 साल तक ये यूनिवर्सिटी लोगों को ज्ञान के मार्ग ले जाती रही। कैसे होती थी एडमिशन पहले की बात करें तो इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए कठिन प्रेवश परीक्षा हुआ करती थी, जिससे पास करने के बाद ही छात्र यहां पढ़ सकते थे। उस समय का जिक्र करें तो इस विश्वविद्यालय ने उस समय 10 हजार से 20 हजार छात्रों को शिक्षित किया है। इस विश्वविद्यालय में छात्रों को निशुल्क शिक्षा दी जाती थी।

वहां महान शिक्षकों ने पढ़ाई करवाई

इतना ही नहीं इस विश्वविद्यालय को अपने समय में हिंदू और बौद्ध धर्म की पढ़ाई के लिए जाना जाता था। पुराने समय में साहित्य, ज्योतिष, मनोविज्ञान, कानून, खगोलशास्त्र, विज्ञान, युद्धनीति, इतिहास, गणित, वास्तुकला, भाषाविज्ञान, अर्थशास्त्र, चिकित्सा आदि विषय पढ़ाए जाते थे। नए कैंपस में विश्वविद्यालय में बौद्ध अध्ययन, फिलॉसफी, तुलनात्मक धर्म की पढ़ाई, इतिहास, पारिस्थितिकी और पर्यावरण स्टडीज और मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए अलग-अलग स्कूल बनाए गए हैं। ह्वेनसांग और नालंदा का क्या है रिशता नालंदा विश्वविद्यालय की खासियत की बात करें तो उस समय पर वहां महान शिक्षकों ने पढ़ाई करवाई थी।

इन महान शिक्षकों में नागार्जुन, बुद्धपालिता, शांतरक्षिता और आर्यदेव का नाम शामिल हैं। वहीं अगर यहां पढ़ने वालों की बात करें तो यहां कई देशों से लोग पढ़ने आते थे। चीन के प्रसिद्ध यात्री और विद्वान ह्वेनसांग, फाह्यान और इत्सिंग भी यहां से पढ़े हैं। ह्वेनसांग, नालंदा के आचार्य शीलभद्र के शिष्य थे।

ह्वेन सांग ने 6 साल तक नालंदा विश्व विद्यालय में रहकर पढ़ाई की

ह्वेन सांग ने 6 साल तक नालंदा विश्व विद्यालय में रहकर कानून की पढ़ाई की थी। छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों चीन, कोरिया और जापान से आने वाले बौद्ध भिक्षु होते थे। इतिहासकारों के मुताबिक, चीनी भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है। यह बौद्धों के दो सबसे अहम केंद्रों में से एक था।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

चेन्नई में पुणे पोर्शे कार जैसा हादसा, राज्यसभा सांसद की बेटी ने BMW से कुचला,

Next Post

दिल्ली में जानलेवा हुई गर्मी, हीट स्ट्रोक से दो दिन में 7 की मौत

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

गुरूवार, 14 मई 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates 14 May 2026: Top Updates, हर खबर सबसे तेज

गुरूवार, 14 मई 2026
Southwest Monsoon

बड़ा अपडेट: Southwest Monsoon जल्द दस्तक देगा, Heat Wave की चेतावनी भी जारी

गुरूवार, 14 मई 2026
Shani Amavasya 2026

Shani Amavasya 2026 आ रही है, सभी राशियों का 14 मई 2026 का विस्तृत राशिफल

गुरूवार, 14 मई 2026
Mohan Bhagwat Inter-Caste Marriage

Mohan Bhagwat Inter-Caste Marriage पर बोले, क्या बदल रहा RSS का नजरिया?

बुधवार, 13 मई 2026
Iran Nuclear Threat

Iran Nuclear Threat से America में हड़कंप, World War की आशंका

बुधवार, 13 मई 2026
Next Post
दिल्ली में जानलेवा हुई गर्मी, हीट स्ट्रोक से दो दिन में 7 की मौत

दिल्ली में जानलेवा हुई गर्मी, हीट स्ट्रोक से दो दिन में 7 की मौत

chagan

क्या महाराष्ट्र में अजित पवार का साथ छोड़ेंगे छगन भुजबल?

प्रचंड गर्मी

1951 के बाद अब तक की सबसे प्रचंड गर्मी, दिन ही नहीं रातें भी तप रहीं...

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।