8th Pay Commission Latest News: आठवें वेतन आयोग के तहत सैलरी-पेंशन बढ़ोतरी की चर्चाओं के बीच बुधवार, 25 फरवरी 2026 को नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM Staff Side) की ड्राफ्टिंग कमेटी की एक अहम बैठक हुई। मीटिंग की अध्यक्षता रेलवे कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन AIRF (All India Railwaymen’s Federation) के जनरल सेक्रेटरी और स्टाफ साइड के नेता शिव गोपाल मिश्रा ने की। इस दौरान फिटमेंट फैक्टर, सैलरी-पेंशन बढ़ोतरी, फैमिली यूनिट और भत्तों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। हालांकि, इस बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा आठवें वेतन आयोग द्वारा जारी 18 सवालों ने, जिन पर कर्मचारी संगठनों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
JCM की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक: क्या हुआ खास
25 फरवरी 2026 को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को लेकर एक unified memorandum तैयार करने पर चर्चा की गई।
बैठक के मुख्य एजेंडा:
- फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): कर्मचारी संगठनों ने 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है
- सैलरी बढ़ोतरी: सालाना 7% की वेतन वृद्धि की मांग
- पेंशन में सुधार: पेंशनर्स के लिए बेहतर योजना
- फैमिली यूनिट: परिवार में कितने सदस्यों को यूनिट माना जाए
- भत्तों में बढ़ोतरी: HRA, DA और अन्य allowances में संशोधन
बैठक में शामिल संगठन:
- All India Railwaymen’s Federation (AIRF)
- National Federation of Indian Railwaymen (NFIR)
- Confederation of Central Government Employees
- All India NPS Employees Federation
- अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठन
8वें वेतन आयोग के 18 सवाल: क्यों हैं विवादास्पद
8वें वेतन आयोग ने कर्मचारी संगठनों से 18 सवाल पूछे हैं, जिन पर संगठनों ने आपत्ति जताई है। ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि आयोग के सवाल जमीनी मुद्दों से जुड़े नहीं हैं।
डॉ. पटेल की मुख्य आपत्तियां:
“कर्मचारियों से फिलॉसफी या विदेशी मॉडल पर राय लेने के बजाय सीधे उनकी जरूरतों पर सवाल पूछे जाने चाहिए। आयोग के सवाल theoretical हैं, practical नहीं।”
संगठनों की मुख्य शिकायतें:
- सवाल बहुत सैद्धांतिक (theoretical) हैं
- जमीनी हकीकत से दूर हैं
- विदेशी मॉडल पर आधारित हैं
- कर्मचारियों की असली जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं
- व्यावहारिक मुद्दों पर फोकस नहीं है
फैमिली यूनिट: सबसे अहम सवाल
डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण सवाल जो आयोग को पूछना चाहिए वह है: “वेतन तय करते समय परिवार को कितने सदस्यों की यूनिट माना जाए?”
वर्तमान स्थिति:
- 7वें वेतन आयोग में 3 सदस्यों की फैमिली यूनिट मानी गई थी
- अब महंगाई और जीवनयापन की लागत बढ़ चुकी है
- औसत परिवार का आकार बदल गया है
कर्मचारियों की मांग:
- फैमिली यूनिट को 4-5 सदस्य माना जाए
- बच्चों की शिक्षा का खर्च बढ़ा है
- स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बहुत अधिक हो गई है
- बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल भी जरूरी है
महत्व:
फैमिली यूनिट का आकार तय करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी के आधार पर:
- न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) तय होता है
- DA (Dearness Allowance) की गणना होती है
- HRA (House Rent Allowance) निर्धारित होता है
- अन्य भत्ते तय होते हैं
रिटायरमेंट एज: 60 से 65 साल करने की मांग
दूसरा बड़ा मुद्दा रिटायरमेंट की उम्र को लेकर है। डॉ. पटेल ने इस पर गंभीर सवाल उठाया है।
वर्तमान स्थिति:
- अधिकांश सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र: 60 साल
- डॉक्टर्स की रिटायरमेंट उम्र: 65 साल
- प्रोफेसर्स की रिटायरमेंट उम्र: 65 साल
- टेक्निकल कैडर की रिटायरमेंट उम्र: 65 साल
डॉ. पटेल का तर्क: “भारत में लाइफ एक्सपेक्टेंसी (Life Expectancy) अब 70 साल से ज्यादा हो चुकी है। जब डॉक्टर, प्रोफेसर और टेक्निकल कैडर 65 साल तक काम कर सकते हैं, तो बाकी कर्मचारियों के लिए 60 साल क्यों?”
रिटायरमेंट एज बढ़ाने के फायदे:
- अनुभव का लाभ: अनुभवी कर्मचारी ज्यादा समय तक सेवा दे सकते हैं
- पेंशन में बढ़ोतरी: ज्यादा सर्विस = ज्यादा पेंशन
- आर्थिक सुरक्षा: 5 साल की अतिरिक्त कमाई
- सरकारी खजाने पर कम बोझ: कम समय तक पेंशन देनी होगी
- युवाओं को ज्यादा समय: नई भर्तियों में देरी नहीं होगी
विपक्ष के तर्क:
- युवाओं के लिए नौकरियां कम होंगी
- पदोन्नति में देरी होगी
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं
NPS की समस्या: अधूरा फायदा
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर भी कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।
मुख्य समस्या:
पेंशन सर्विस लेंथ (Service Length) पर निर्भर है, लेकिन आउटसोर्सिंग और कम भर्तियों की वजह से कई कर्मचारी 25 साल की सर्विस पूरी ही नहीं कर पाते।
NPS की चुनौतियां:
- देर से भर्ती: कई कर्मचारी 30-35 साल की उम्र में भर्ती होते हैं
- 60 साल में रिटायरमेंट: केवल 25-30 साल की सर्विस मिलती है
- UPS का अधूरा फायदा: Unified Pension Scheme (UPS) के लिए 25 साल की सर्विस जरूरी
- आउटसोर्सिंग का प्रभाव: नियमित भर्ती कम हो रही है
- पेंशन में कमी: कम सर्विस = कम पेंशन
कर्मचारियों की मांग:
- UPS के लिए सर्विस की शर्त घटाई जाए
- NPS से बाहर निकलने का विकल्प दिया जाए
- Old Pension Scheme (OPS) बहाल की जाए
- या कम से कम UPS को और उदार बनाया जाए
फिटमेंट फैक्टर: 3.25 की मांग
फिटमेंट फैक्टर वेतन बढ़ोतरी का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है।
क्या है फिटमेंट फैक्टर:
यह वह गुणक (multiplier) है जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है।
पिछले वेतन आयोगों में फिटमेंट फैक्टर:
- 6वें वेतन आयोग: 1.86
- 7वें वेतन आयोग: 2.57
- 8वें वेतन आयोग में मांग: 3.25
उदाहरण:
अगर किसी कर्मचारी की वर्तमान बेसिक सैलरी ₹50,000 है:
- 2.57 फिटमेंट फैक्टर से: ₹50,000 × 2.57 = ₹1,28,500
- 3.25 फिटमेंट फैक्टर से: ₹50,000 × 3.25 = ₹1,62,500
- अंतर: ₹34,000 प्रति माह
3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों:
- महंगाई दर बहुत बढ़ चुकी है
- जीवनयापन की लागत दोगुनी हो गई है
- निजी क्षेत्र में सैलरी बहुत ज्यादा है
- सरकारी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए जरूरी
DA (Dearness Allowance) में बढ़ोतरी की मांग
महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी चर्चा हुई।
वर्तमान DA दर (मार्च 2026):
केंद्रीय कर्मचारियों को लगभग 53% DA मिल रहा है।
कर्मचारियों की मांग:
- DA की गणना का फॉर्मूला बदला जाए
- हर 6 महीने में बढ़ोतरी जारी रहे
- महंगाई के हिसाब से DA तुरंत बढ़ाया जाए
DA का महत्व:
- DA बेसिक सैलरी का हिस्सा है
- पेंशन की गणना में DA शामिल होता है
- DA से ही HRA, TA और अन्य भत्ते तय होते हैं
HRA (House Rent Allowance) में संशोधन की मांग
वर्तमान HRA दरें (7वें वेतन आयोग):
- X श्रेणी शहर (दिल्ली, मुंबई आदि): बेसिक का 24%
- Y श्रेणी शहर: बेसिक का 16%
- Z श्रेणी शहर: बेसिक का 8%
कर्मचारियों की मांग:
- X श्रेणी में HRA 30% किया जाए
- Y श्रेणी में 20%
- Z श्रेणी में 12%
क्यों जरूरी:
- किराए बहुत बढ़ चुके हैं
- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में किराया आसमान छू रहा है
- 24% HRA अब पर्याप्त नहीं है
8वें वेतन आयोग की टाइमलाइन
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग की टाइमलाइन:
प्रमुख तारीखें:
- आयोग का गठन: जनवरी 2024
- रिपोर्ट सबमिशन: मई 2027 तक
- प्रस्तावित लागू तिथि: 1 जनवरी 2026
- एरियर्स (Arrears): 1 जनवरी 2026 से मिलेंगे
वर्तमान स्थिति (मार्च 2026):
- JCM की बैठकें जारी हैं
- कर्मचारी संगठन अपनी मांगें रख रहे हैं
- आयोग विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रहा है
- अंतिम रिपोर्ट 2027 में आएगी
केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या
भारत में केंद्रीय सरकारी कर्मचारी:
- लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी
- लगभग 65 लाख पेंशनर्स
- कुल मिलाकर 1.15 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित होंगे
विभागवार वितरण:
- रेलवे: सबसे बड़ा नियोक्ता (लगभग 13 लाख)
- रक्षा: लगभग 11 लाख
- डाक विभाग: लगभग 4 लाख
- अन्य मंत्रालय: बाकी
राज्य सरकारों पर प्रभाव
केंद्र सरकार के वेतन आयोग का असर राज्य सरकारों पर भी पड़ता है।
राज्य सरकारी कर्मचारी:
- लगभग 1 करोड़ राज्य सरकारी कर्मचारी
- केंद्र के फैसले के बाद राज्य भी अपनाते हैं
- कुल मिलाकर 2.5 करोड़ से अधिक परिवार प्रभावित
सरकारी खजाने पर बोझ
8वें वेतन आयोग के लागू होने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
अनुमानित अतिरिक्त खर्च:
- केंद्र सरकार: लगभग ₹1.5-2 लाख करोड़ प्रति वर्ष
- राज्य सरकारें: लगभग ₹2-3 लाख करोड़ प्रति वर्ष
- कुल: ₹3.5-5 लाख करोड़ प्रति वर्ष का अतिरिक्त खर्च
सरकार के सामने चुनौतियां:
- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ सकता है
- अन्य योजनाओं के लिए बजट कम हो सकता है
- आर्थिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल
निजी क्षेत्र बनाम सरकारी नौकरी
वेतन की तुलना:
- निजी क्षेत्र में शुरुआती वेतन अक्सर ज्यादा होता है
- लेकिन सरकारी नौकरी में job security और पेंशन का फायदा
- निजी क्षेत्र में growth तेज, पर नौकरी की गारंटी नहीं
सरकारी नौकरी के फायदे:
- Job Security
- पेंशन की गारंटी
- Medical Benefits
- Leave Travel Concession (LTC)
- अन्य भत्ते और सुविधाएं
निष्कर्ष: कर्मचारियों की उम्मीदें बरकरार
25 फरवरी की JCM बैठक ने 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व किया। कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं:
मुख्य मांगें:
✓ 3.25 फिटमेंट फैक्टर
✓ रिटायरमेंट एज 65 साल
✓ फैमिली यूनिट 4-5 सदस्य
✓ NPS/UPS में सुधार
✓ HRA और DA में बढ़ोतरी
हालांकि, आयोग के 18 सवालों पर संगठनों ने जो आपत्तियां उठाई हैं, वे महत्वपूर्ण हैं। डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना सही है कि सवाल जमीनी हकीकत से जुड़े होने चाहिए, न कि सिर्फ सैद्धांतिक।
अब देखना यह है कि सरकार और आयोग इन मांगों पर क्या फैसला लेते हैं। 2027 में जब अंतिम रिपोर्ट आएगी, तब ही स्पष्ट होगा कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या मिलने वाला है।
फिलहाल, 1.15 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं।








