Trump Tariff India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला पर हमले और भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी गहरे सवाल खड़े कर रही है। दुनिया के छोटे-बड़े देशों ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है लेकिन भारत के आधिकारिक बयान में अमेरिका का नाम तक नहीं लिया गया। इतना ही नहीं, ट्रंप ने खुलेआम कहा है कि मोदी उन्हें खुश करने के लिए रूस से कम तेल खरीद रहे हैं और अमेरिकी सेनेटर ने तो यहां तक कह दिया कि भारत के राजदूत “गिड़गिड़ा” रहे हैं। 1 अप्रैल 2025 से भारत टैरिफ झेल रहा है और 8 महीने से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी यह मसला सुलझा नहीं है जबकि निर्यात में भारी गिरावट आ चुकी है।
ट्रंप का खुलेआम अपमान और भारत की खामोशी
डोनल्ड ट्रंप अपने अधिकारियों और सेनेटरों के साथ खड़े होकर दिन-दहाड़े भारत का अपमान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में अपमानजनक बातें कहते हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि नरेंद्र मोदी को पता है कि वे आजकल खुश नहीं हैं तो उन्हें खुश करने के लिए मोदी हर काम कर रहे हैं जैसे रूस से तेल कम खरीदा जा रहा है। रिपब्लिकन सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने तो यहां तक कह दिया कि भारत के राजदूत गिड़गिड़ा रहे हैं और कह रहे हैं कि साहब को समझाइए हम लोग रूस से तेल कम खरीद रहे हैं ताकि वे खुश हो जाएं।
इस सब के बावजूद भारत सरकार की ओर से या प्रधानमंत्री मोदी के मुंह से इस अपमान पर एक शब्द भी नहीं निकला है। यह स्थिति सवाल खड़े करती है कि आखिर देश की अस्मिता और आत्मसम्मान से ज्यादा जरूरी क्या है जो इस तरह की चुप्पी साधी जा रही है।
वेनेजुएला पर हमले की निंदा में भी पीछे रहा भारत
जब अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया और इंटरनेशनल लॉ, इंटरनेशनल ट्रीटीज और यूएन चार्टर्स को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की तो दुनिया के छोटे-छोटे देशों ने इसकी निंदा की। लेकिन भारत का स्टेटमेंट देखें तो उसमें अमेरिका का नाम तक नहीं है। ब्रिटेन की संसद में सांसद जारा सुल्ताना ने खड़े होकर सवाल पूछा कि क्या कोई विदेशी शक्ति ब्रिटेन पर बम गिरा सकती है यह कहकर कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कानून तोड़ा? लेकिन भारत की ओर से ऐसा कोई सवाल नहीं उठा।
अमेरिकी सेनेटर मार्क केली ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की तो उनके रिटायरमेंट बेनिफिट में कटौती की जा रही है। उन्होंने ट्वीट किया कि 25 साल अमेरिकी नौसेना में काम किया और 39 बार मिशन पर गए फिर भी उन्हें बोलने की आजादी नहीं। लेकिन भारत में तो सरकार की ओर से ही चुप्पी है।
टैरिफ का असर: निर्यात में भारी गिरावट
1 अप्रैल 2025 से भारत अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है और 8 महीने से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी यह मसला सुलझा नहीं है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों में 20 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि आभूषणों के निर्यात में 70 प्रतिशत की गिरावट हुई है। कुल मिलाकर निर्यात में 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
निर्यातक परेशान हैं और अपना मार्जिन घटा रहे हैं ताकि बिजनेस चलता रहे। खरीदार भी अपना मार्जिन कम कर रहा है। इसका सीधा असर कारोबार और नौकरियों पर पड़ रहा है। अब तो मेक्सिको जैसे देश भी भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कर रहे हैं। राहुल गांधी ने पहले ही कहा था कि ट्रंप की शर्तों पर ही डील होगी लेकिन अभी तक वो भी नहीं हुई।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव
अमेरिका ने दबाव डाला कि भारत रूस से तेल न खरीदे और भारत ने तेल खरीदना काफी कम कर दिया। सबसे हैरानी की बात यह है कि इसकी जानकारी भारत के पेट्रोलियम मंत्री ने अपनी जनता को नहीं दी बल्कि भारत के राजदूत ने चुपके से ट्रंप की पार्टी के प्रतिनिधि को दी। अमेरिकी सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने एयरफोर्स वन में खड़े होकर इस बात को सार्वजनिक कर दिया कि भारत ने रूस से तेल खरीद घटा दी है।
यह प्रश्न उठता है कि क्या यह रणनीतिक स्वायत्तता है या ताकत के आगे समर्पण? पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव का कहना है कि भारत जंगलों वाली दुनिया में रहता है जहां ताकत का कानून चलता है लेकिन क्या इसका मतलब हर बात पर चुप रहना है?
ऑपरेशन सिंदूर में अमेरिका ने नहीं की मदद
शिवनादर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैप्पीमॉन जेकब का तर्क है कि अमेरिका ने ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत की मदद नहीं की इसलिए भारत समझ गया कि वाशिंगटन के साथ उसका रिश्ता लेनदेन का है। अगर भारत ने वेनेजुएला पर हमले की निंदा की तो अमेरिका अगले किसी संकट में पाकिस्तान के साथ चला जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या अभी अमेरिका पाकिस्तान के साथ भारत से ज्यादा नहीं दिख रहा?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने 30 से अधिक देशों में सांसदों के दल भेजे थे लेकिन उसका क्या हासिल निकला यह किसी को पता नहीं। उस चैप्टर को भी तुरंत भुला दिया गया।
मेगाफोन डिप्लोमेसी का दोहरा मानदंड
प्रोफेसर हैप्पीमॉन जेकब का कहना है कि भारत मेगाफोन डिप्लोमेसी में यकीन नहीं करता और प्राइवेट में बात करता है। लेकिन यह तर्क हास्यास्पद लगता है जब याद करें कि दिल्ली में G20 के समय क्या तमाशा हुआ था। पूरे भारत में खासकर हिंदी प्रदेशों में G20 का लोगो छपवाया गया और पानी की टंकियों पर तक पुतवाया गया। क्या वह मेगाफोन डिप्लोमेसी नहीं थी?
प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं तो भारतीयों से स्वागत करवाना, रैलियां करना, भाषण देना, विदेशी नेताओं के साथ गले मिलकर फोटो खिंचवाना और फिर प्रचार करना कि भारत ग्लोबल मंच पर आ गया है यह सब क्या है? हिंदी प्रदेश में प्रचार के लिए मेगाफोन डिप्लोमेसी ठीक है लेकिन वेनेजुएला की बात उठी तो चुप्पी साध ली।
विश्वगुरु का दावा और जमीनी हकीकत
सवाल उठता है कि अगर भारत की चुप्पी को रणनीतिक समझदारी बताया जा रहा है तो इससे भारत को क्या मिल रहा है? वीजा को लेकर भारतीयों को जब-तब परेशान किया जा रहा है और नियम कभी भी बदल दिए जाते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स में विस्तार से खबर छपी है कि अमेरिका में अब भारतीयों के साथ बर्ताव बदल गया है और उन्हें नारेबाजी से लेकर तानेबाजी का शिकार होना पड़ रहा है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हर भाषण में विश्वगुरु-विश्वगुरु करते रहते हैं और पूरे देश को इस नाम से पकाया जा रहा है। लेकिन जब असली परीक्षा की घड़ी आती है तो विश्वगुरु छोड़कर पड़ोस के गुरु बनने की बात होने लगती है। प्रोफेसर जेकब का तर्क है कि यूक्रेन और वेनेजुएला भारत की प्राथमिकता में ऊपर नहीं है तो फिर प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन क्यों गए थे और क्यों प्रचार करवाया गया कि उनके फोन करने से रूस-यूक्रेन युद्ध रुक गया?
विदेश नीति की नाकामी पर पर्दा
आज किसी भी ग्लोबल संकट में भारत की निर्णायक भूमिका नजर नहीं आती बल्कि उल्टा भारत ही संकट में दिखने लगता है। रूल बेस्ड ऑर्डर की बात करने वाले प्रधानमंत्री अब चुप हो गए हैं। अगर भारत ने रूस के यूक्रेन पर हमले की निंदा नहीं की तो वेनेजुएला पर भी नहीं करेगा यह तर्क दिया जा रहा है। लेकिन तब भी सवाल उठा था कि रूस की निंदा क्यों नहीं की। अगर तब रूस से दोस्ती निभा रहे थे तो अब अमेरिका के दबाव में रूस से सस्ता तेल खरीदना क्यों कम किया?
यह स्थिति जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास 1984 की याद दिलाती है जहां पार्टी का फरमान जारी होता है और अखबारों में तुरंत सब कुछ बदल दिया जाता है। दिल्ली में G20 के वक्त भारत ग्लोबल लीडर बन जाता है और वेनेजुएला पर कब्जे के वक्त लोकल लीडर। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुबई में पाकिस्तान से मैच खेल लेता है लेकिन बांग्लादेश के खिलाड़ी को आईपीएल से निकलवा देता है।
क्या है पृष्ठभूमि
डोनल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से दुनिया भर में हंगामा मचा रखा है। उन्होंने 2025 में भारी टैरिफ लगाकर पूरी दुनिया को झकझोर दिया और 2026 में वेनेजुएला पर हमला करके ईरान, क्यूबा, मेक्सिको और कोलंबिया को धमकाया। संयुक्त राष्ट्र और WHO जैसी संस्थाओं की फंडिंग घटा दी। ब्राजील में जलवायु सम्मेलन में अमेरिका को जाने से रोक दिया और दक्षिण अफ्रीका में G20 की बैठक में खुद नहीं गए। इस बीच भारत की विदेश नीति घर में घुस गई है और प्रधानमंत्री मोदी मौन रहने के लंबे दौर में चले गए हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- ट्रंप का अपमान: अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुलेआम कहा मोदी उन्हें खुश करने के लिए रूस से कम तेल खरीद रहे हैं और सेनेटर ने भारतीय राजदूत को “गिड़गिड़ाने” वाला बताया
- निर्यात में भारी गिरावट: 1 अप्रैल 2025 से टैरिफ झेल रहे भारत के निर्यात में 37% गिरावट, आभूषणों में 70% और कुल अमेरिकी निर्यात में 20% की कमी
- वेनेजुएला पर चुप्पी: भारत के आधिकारिक बयान में अमेरिका का नाम तक नहीं जबकि छोटे देशों ने भी निंदा की
- विदेश नीति पर सवाल: G20 में मेगाफोन डिप्लोमेसी लेकिन ग्लोबल संकट में चुप्पी, रूल बेस्ड ऑर्डर की बात करने वाले अब खामोश








