Weight Loss Tips: क्या आपने भी मेहनत करके वजन घटाया और कुछ समय बाद वो वापस बढ़ गया? क्या आप भी सोचते हैं कि मोबाइल टावर से कैंसर हो सकता है? और घी खाना सेहत के लिए अच्छा है या बुरा? ये तीन सवाल हैं जो आज हर दूसरे इंसान के मन में घूमते हैं। आरजी हॉस्पिटल्स लुधियाना की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रेरणा गोयल, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दीपक झा और सी.के. बिड़ला हॉस्पिटल दिल्ली की क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट दीपाली शर्मा ने इन सवालों का विस्तार से जवाब दिया है।
डाइटिंग के बाद वजन दोबारा क्यों बढ़ जाता है?
इतनी मेहनत करके वजन घटाया, इतनी डाइटिंग की, वजन घटा भी, अच्छा-खासा वेट लॉस हुआ, सबने तारीफ भी की। लेकिन कुछ वक्त बाद वजन दोबारा बढ़ गया। यह कहानी सिर्फ आपकी नहीं बल्कि लाखों लोगों की है।
डॉ. प्रेरणा गोयल बताती हैं कि मोटापा या अधिक वजन को कम करना जहां अपने आप में एक बहुत बड़ी समस्या है, वहीं कम हुए वजन को बनाए रखना भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। अक्सर देखा गया है कि एक बार वजन कम होने के बाद वही वजन एक से दो साल के अंतराल में दोबारा आ जाता है।
क्या है मेटाबॉलिक मेमोरी?
डॉ. प्रेरणा के अनुसार जब हम मोटे होते हैं तो हमारे फैट सेल्स में एक मेमोरी यानी याददाश्त स्टोर हो जाती है जिसे “मेटाबॉलिक मेमोरी” कहा जाता है। सरल भाषा में कहें तो इसका मतलब यह है कि हमारे फैट सेल्स को मोटा रहने की आदत पड़ जाती है।
यही कारण है कि जब हम वजन कम करते हैं तो कम हुए वजन को शरीर एक गिरावट के रूप में महसूस करता है और हमारी बॉडी में ऐसी प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है जिससे वजन दोबारा बढ़ना शुरू हो जाता है।
हार्मोंस का रोल
डॉ. प्रेरणा बताती हैं कि इस प्रक्रिया में दो महत्वपूर्ण हार्मोंस – लेप्टिन और ग्रेलिन – के उतार-चढ़ाव के कारण हमारे शरीर में अधिक भूख लगने लगती है और ज्यादा खाना खाने की क्षमता बढ़ जाती है। यही कारण होता है कि एक बार वजन कम होने के बाद वो दोबारा बढ़ना शुरू हो जाता है।
गलत डाइटिंग से मेटाबॉलिज्म धीमा होता है
दूसरा प्रमुख कारण है मेटाबॉलिज्म। जब हम बहुत गलत तरीके से डाइट करते हैं तो हमारा मेटाबॉलिज्म बहुत स्लो हो जाता है। मेटाबॉलिज्म यानी किस दर से हमारा शरीर कैलोरीज को खर्च कर रहा है।
बहुत गलत डाइट करने से या भोजन को एकदम छोड़ देने से न सिर्फ फैट का बल्कि मांसपेशियों का भी नुकसान होता है। और मांसपेशियां एक प्रमुख कारण होती हैं कैलोरीज खर्च करने के लिए। यही कारण है कि जब हम डाइट छोड़ते हैं तो कम मांसपेशियों के कारण हमारी बॉडी उतनी कैलोरीज खर्च नहीं कर पाती और वही कैलोरीज मोटापे में तब्दील हो जाती हैं।
डाइटिंग में ये गलतियां न करें
डॉ. प्रेरणा ने उन गलतियों के बारे में बताया जो लोग अक्सर करते हैं:
- बिल्कुल भोजन नहीं करना
- बिना सोचे-समझे क्रैश डाइट्स की तरफ जाना
- भोजन के बीच में गैप्स को बहुत बढ़ा देना
वजन बनाए रखने के लिए क्या करें?
डॉ. प्रेरणा गोयल ने वजन को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी टिप्स दिए हैं:
संतुलित भोजन: एक संतुलित भोजन को शामिल करना बहुत जरूरी है जिसमें प्रोटीन, फाइबर्स और अच्छे फैट्स शामिल हों।
धीरे-धीरे कैलोरीज कम करें: एकदम कैलोरीज कम करने की बजाय क्रमिक रूप से यानी धीरे-धीरे कैलोरीज कम करें और उसे लंबे समय तक लेकर जाएं।
पोर्शन कंट्रोल: प्रत्येक बार कितनी मात्रा में भोजन करना है, उसकी मात्रा को नियंत्रित करना जरूरी है।
पर्याप्त पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
पर्याप्त नींद लें: अगर नींद की कमी होती है तो भी भूख बढ़ाने वाले हार्मोंस शरीर में बढ़ने लग जाते हैं।
नियमित व्यायाम: प्रति हफ्ते कम से कम चार से पांच दिन व्यायाम करें। व्यायाम से मांसपेशियां बनी रहेंगी जिससे मेटाबॉलिज्म भी बना रहेगा।
तनाव मुक्त जीवनशैली: स्ट्रेस फ्री जीवनशैली की तरफ प्रयास करें।
डॉ. प्रेरणा का कहना है कि अगर आप चाहते हैं कि एक बार वजन कम होने के बाद लंबे समय तक उसे मेंटेन करके रखें तो आपको अपनी मेटाबॉलिक मेमोरी को रिसेट करना पड़ेगा। यह तभी होगा जब आप अपनी डाइट, जीवनचर्या, जीवनशैली और एक्सरसाइज में लंबे समय के लिए बदलाव लाएं, न कि छोटे समय के लिए।
क्या मोबाइल टावर से कैंसर होता है?
“घर के आसपास मोबाइल टावर नहीं होना चाहिए। इससे खतरनाक रेज निकलती हैं। इन रेज से कैंसर हो सकता है।” यह बात आपने किसी न किसी से जरूर सुनी होगी। लेकिन क्या यह सच है?
डॉ. दीपक झा बताते हैं कि मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर नहीं होता क्योंकि इससे निकलने वाली किरणें “नॉन-आयोनाइजिंग” होती हैं। यानी ये किरणें DNA को नुकसान नहीं पहुंचातीं और न ही शरीर के सेल्स को तोड़ती हैं। कैंसर तब होता है जब DNA को नुकसान पहुंचता है या उसमें किसी तरह का बदलाव आता है।
WHO क्या कहता है?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एक एजेंसी है इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC)। इसका कहना है कि रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स कैंसर कर सकती हैं। लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत अभी तक उपलब्ध ही नहीं है।
रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स वो किरणें हैं जो मोबाइल फोन, मोबाइल टावर, वाई-फाई और रेडियो-टीवी सिग्नल से निकलती हैं। इन्हीं के जरिए फोन कॉल्स होती हैं, इंटरनेट चलता है और डाटा एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होता है।
IARC ने रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स को “ग्रुप 2B कार्सिनोजन” माना है लेकिन इससे कैंसर होने का कोई पक्का सबूत उपलब्ध नहीं है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
भारत में मोबाइल टावर के नियम
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) के मुताबिक भारत में EMF (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड) की सीमा इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से कई गुना सख्त है। आपके घर, स्कूल या ऑफिस के बाहर लगा हर मोबाइल टावर इन्हीं सख्त नियमों का पालन करता है।
भारत सरकार का दूरसंचार विभाग हर मोबाइल टावर की निगरानी करता है। टावर की लोकेशन, पावर आउटपुट और रेडिएशन लेवल की समय-समय पर मॉनिटरिंग होती है। हर कुछ वक्त में EMF कंप्लायंस टेस्ट किए जाते हैं।
अगर रेडिएशन सेफ लिमिट के अंदर नहीं है तो टावर लगाने वाली कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।
आप “तरंग संचार पोर्टल” पर देख सकते हैं कि आपके एरिया में कितने टावर हैं, किस ऑपरेटर के हैं, उनका रेडिएशन सर्टिफिकेट क्या है और EMF कंप्लायंस स्टेटस क्या है।
जेनीलिया डिसूजा के बयान से छिड़ी बहस: घी हेल्दी है या नहीं?
एक्ट्रेस जेनीलिया डिसूजा के घी पर दिए एक बयान को लेकर बहस छिड़ गई है। जेनीलिया ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट में बताया कि घी कभी उनकी डाइट का बहुत बड़ा हिस्सा नहीं रहा।
जेनीलिया ने कहा कि उनके परिवार में कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी दिक्कतें रही हैं इसलिए वह बहुत सावधानी से और बहुत कम घी का इस्तेमाल करती हैं। जब उन्होंने घी खाना एकदम बंद कर दिया तब उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वो अपने बच्चों को भी घी खिलाने से बचती हैं। वजह – कोलेस्ट्रॉल और ओबेसिटी। वो नहीं चाहतीं कि उनके बच्चों की आर्टरीज यानी धमनियां ब्लॉक हो जाएं।
जेनीलिया का कहना है – “पहले तो आप बच्चों को ऐसी चीजें खिलाते हैं फिर उम्मीद करते हैं कि उनमें मोटापा न हो। जिन्हें घी सूट करता है उनके लिए अच्छा है। लेकिन घी कम मात्रा में ही देना चाहिए।”
2 जनवरी 2026 को यह पॉडकास्ट आया और बस फिर क्या था – एक बहस छिड़ गई। एक धड़ा कह रहा था घी अच्छा है, जरूर खाना चाहिए। वहीं दूसरा धड़ा कह रहा था कि घी खाओ पर बहुत ज्यादा नहीं।
घी खाने के क्या फायदे हैं?
न्यूट्रिशनिस्ट दीपाली शर्मा कहती हैं कि घी सेहत के लिए अच्छा है लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।
घी के फायदे:
- घी में हेल्दी फैट्स होते हैं, खासकर शॉर्ट चेन और मीडियम चेन फैटी एसिड्स जो पाचन बेहतर बनाते हैं
- घी में ब्यूटेरिक एसिड होता है जो आंतों के लिए अच्छा माना जाता है
- यह शरीर की अंदरूनी सूजन कम करने में मदद करता है
- घी में विटामिन A, D, E और K जैसे फैट में घुलने वाले विटामिंस होते हैं जो अच्छी इम्यूनिटी, मजबूत हड्डियों और आंखों के लिए जरूरी हैं
ज्यादा घी खाने के नुकसान
दीपाली शर्मा बताती हैं कि घी पूरी तरह फैट होता है इसलिए इसे जरूरत से ज्यादा खाना नुकसानदेह है।
नुकसान:
- ज्यादा घी खाने से शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरीज जमा होती हैं जिससे वजन बढ़ता है
- बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL भी बढ़ सकता है
- जिन्हें पहले से डायबिटीज, हाई BP या दिल की कोई समस्या है उनमें रिस्क ज्यादा है
एक दिन में कितना घी खाना चाहिए?
दीपाली शर्मा के अनुसार एक दिन में एक से दो चम्मच घी खाना काफी है। लेकिन साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि बाकी खाने में कितना घी या फैट लिया जा रहा है।
घी के हेल्दी होने का मतलब यह नहीं कि इसे अनलिमिटेड मात्रा में खाया जाए। खासकर बच्चों को घी उनकी उम्र, फिजिकल एक्टिविटी और ओवरऑल डाइट को ध्यान में रखकर ही देना चाहिए।
घी की जगह क्या खा सकते हैं?
अगर आप घी नहीं खाना चाहते तो उसकी जगह ये ऑप्शन ले सकते हैं:
- सरसों का तेल
- मूंगफली का तेल
- ऑलिव ऑयल
हालांकि ऑलिव ऑयल खरीदते वक्त यह जरूर देखें कि क्या वो सिर्फ सलाद में डालने के लिए बना है (एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल) या फिर आंच पर खाना पकाने के लिए बना है।
आम आदमी पर क्या असर?
ये तीनों जानकारियां सीधे आम आदमी की सेहत से जुड़ी हैं। वजन घटाने के बाद उसे बनाए रखने की सही तकनीक जानना जरूरी है वरना सारी मेहनत बेकार हो जाती है। मोबाइल टावर के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करना जरूरी था ताकि लोग बेवजह डरें नहीं। और घी जैसे परंपरागत खाद्य पदार्थ की सही मात्रा जानना हर परिवार के लिए जरूरी है।
क्या है पृष्ठभूमि
वजन घटाने के बाद उसका वापस बढ़ना एक आम समस्या है जिसे “वेट रीगेन” या “यो-यो इफेक्ट” कहा जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि 80% से ज्यादा लोग डाइटिंग के बाद 1-2 साल में अपना घटाया हुआ वजन वापस पा लेते हैं। इसकी वजह शरीर की मेटाबॉलिक मेमोरी और हार्मोनल बदलाव हैं। मोबाइल टावर और कैंसर के बीच संबंध को लेकर कई दशकों से बहस जारी है लेकिन अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। घी भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है और इसके फायदे-नुकसान पर समय-समय पर बहस होती रहती है। जेनीलिया डिसूजा के बयान ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- वजन दोबारा बढ़ने की वजह: मेटाबॉलिक मेमोरी के कारण फैट सेल्स को मोटा रहने की आदत पड़ जाती है, लेप्टिन और ग्रेलिन हार्मोंस भूख बढ़ाते हैं
- मोबाइल टावर से कैंसर नहीं: नॉन-आयोनाइजिंग किरणें DNA को नुकसान नहीं पहुंचातीं, भारत में EMF लिमिट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से सख्त है
- घी सीमित मात्रा में हेल्दी: एक दिन में 1-2 चम्मच घी पर्याप्त है, ज्यादा खाने से वजन और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है
- वजन बनाए रखने के लिए: संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली जरूरी है
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








